Ratlam News: महालक्ष्मी मंदिर में पुजारी को लेकर विवाद, आरोप; सूतक के दौरान मंदिर में पहुंचा, शुध्दिकरण कर खोला मंदिर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: रतलाम के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पंडित संजय पुजारी द्वारा सूतक के दौरान पूजा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने इस कृत्य का विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद रविवार रात को प्रशासन ने मंदिर का ताला लगा दिया और सोमवार सुबह 11 घंटे बाद मंदिर का ताला खोला गया। प्रशासन ने संजय पुजारी को हटाकर सत्यनारायण व्यास को अस्थायी पुजारी नियुक्त कर दिया। शहर के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर को हर साल दिवाली पर करोड़ों रुपए के नोटों और जेवरों से सजाया जाता है। इस वर्ष भी सजावट का काम शुरू हो चुका है, लेकिन पंडित संजय पुजारी के बड़े भाई के निधन से सूतक के चलते उन्हें पूजा से दूर रहने का कहा गया था। फिर भी उन्होंने पूजा की, जिससे श्रीमाली समाज में नाराजगी फैल गई। गौरतलब है की श्रीमाली ब्राह्मण समाज लक्ष्मी जी को कुलदेवी के रूप में पूजता है। पुजारी को समझाईश देने आए बाद भी उसने मंदिर में प्रवेश करना नहीं बंद किया। जिसके बाद समाज के लोग आक्रोशित होकर मंदिर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन की मौजूदगी में ताला लगवा दिया। समाज का विरोध और शुद्धिकरणश्री माली ब्राह्मण समाज ने मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और गंगाजल व गोमूत्र से शुद्धिकरण किया। समाज के अनुसार, सूतक के दौरान पूजा नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन पुजारी संजय ने नियमों का पालन नहीं किया। नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय की मौजूदगी में विवाद के समाधान के लिए पुजारी को बदला गया और सजावट का काम जारी रखने का निर्णय लिया गया। सजावट की जिम्मेदारी और सुरक्षामंदिर में दिवाली के दौरान सजावट के लिए भक्त बड़ी मात्रा में रुपए और आभूषण दान कर रहे हैं। विवाद के बाद लोगों ने चिंता जताई कि अब सजावट की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सजावट का कार्य रुकेगा नहीं और पुराने पुजारी के सहयोगी इसे पूरा करेंगे। साथ ही, मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के लिए पुलिस और पटवारियों की तैनाती की गई है, ताकि दान की गई धनराशि और आभूषणों का सही रिकॉर्ड रखा जा सके। अस्थायी रूप से नया पुजारी नियुक्ततहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि फिलहाल मंदिर में पटवारियों को तैनात किया गया है, जो अलग-अलग समय पर मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर के पुजारी परिवार में सूतक समाप्त होने के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार संजय पुजारी के मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर में दीपावली पर होने वाली सजावट को लेकर प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों को शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

MP News: दीपावली से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा फैसला, शासकीय कर्मचारियों को दिया ये तोहफा

भोपाल – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीपावली के मद्देनजर प्रदेश के सभी शासकीय सेवकों के लिए एक बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि अक्टूबर माह का वेतन 28 अक्टूबर तक आहरित कर लिया जाए, ताकि सभी शासकीय कर्मचारियों को दीपावली से पहले वेतन मिल सके। यह कदम शासकीय सेवकों के त्यौहार को और भी आनंददायक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर सभी शासकीय कर्मचारियों को दीपावली की अग्रिम शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा, “त्यौहार से पूर्व वेतन प्राप्त होने से सभी कर्मचारियों का दीपोत्सव और भी विशेष हो जाएगा। दीपावली परिवार और प्रियजनों के साथ मिलकर मनाने का पर्व है, और वेतन समय पर मिलना इसे और खुशहाल बनाएगा।” सरकार के इस फैसले से प्रदेश के हजारों कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि दीपावली के खर्चों के लिए समय पर वेतन मिलना उनके लिए बेहद सहूलियत भरा रहेगा।

When to celebrate Diwali?: देशभर में इस दिन मनेगी 2024 की दिवाली, जयपुर की धर्मसभा में हुआ निर्णय

धर्मसभा में 100 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य उपस्थित हुए, गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दीपावली (Diwali 2024) का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को मनाने का निर्णय जयपुर – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। कब मनाएं दिवाली?: दीपावली पर्व की तिथि को लेकर देशभर में जारी असमंजस के बीच, 15 अक्टूबर 2024 को जयपुर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नवीन सभागार में अखिल भारतीय विद्वत परिषद द्वारा एक महत्वपूर्ण धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में 100 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य उपस्थित हुए। प्रमुख ज्योतिषाचार्य प्रो. रामपाल शास्त्री की अध्यक्षता में हुई इस धर्मसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष दीपावली (When to celebrate Diwali?) का महापर्व 31 अक्टूबर 2024, गुरुवार को ही मनाया जाएगा। धर्मसभा के अनुसार, यह तिथि शास्त्रसम्मत है और इसी दिन लक्ष्मी पूजन (Lakshmi Pujan) का सही समय है। धर्मसभा का निर्णय: 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी दीपावलीधर्मसभा में विद्वानों ने विभिन्न पंचांगों, ज्योतिषीय गणनाओं और शास्त्रीय प्रमाणों का सूक्ष्म अध्ययन किया। गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को ही मनाना शास्त्रों के अनुसार उचित और शुभ है। इस दिन प्रदोषकाल में व्यापिनी कार्तिकी अमावस्या का समय रहेगा, जो लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। धर्मसभा के संयोजक प्रो. मोहनलाल शर्मा ने बताया कि विद्वानों ने पंचांगों की गणनाओं और सूर्य सिद्धांत के आधार पर इस निर्णय को अंतिम रूप दिया। उन्होंने कहा, “31 अक्टूबर की रात को पूरी अमावस्या व्यापिनी रहेगी, और शास्त्रों के अनुसार कर्मकाल में तिथि की प्राप्ति आवश्यक होती है। इस कारण 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जानी चाहिए।” शास्त्रों का समर्थन: प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का महत्वधर्मशास्त्रों के अनुसार, प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन को अत्यधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। धर्मसभा में इस बात पर जोर दिया गया कि 31 अक्टूबर को प्रदोषकाल के समय व्यापिनी अमावस्या रहेगी, और उसी समय लक्ष्मी पूजन करना शास्त्रों के अनुसार सबसे उचित होगा। धर्मसभा के अध्यक्ष प्रो. रामपाल शास्त्री ने कहा, “दीपावली का पर्व तब तक सही नहीं माना जा सकता जब तक कि वह प्रदोषकाल में व्यापिनी अमावस्या के समय न हो।” विरोध के स्वर: 1 नवंबर को भी दिवाली के पक्ष में विद्वानों की रायहालांकि धर्मसभा में 31 अक्टूबर की तिथि को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, कुछ विद्वानों ने इसका विरोध भी जताया। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रवक्ता शास्त्री कोसलेंद्रदास सहित अन्य विद्वानों ने तर्क दिया कि 1 नवंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त के बाद अमावस्या रहेगी, जो लक्ष्मी पूजन के लिए अधिक शुभ मानी जाती है। शास्त्री कोसलेंद्रदास ने कहा, “शास्त्रों में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जब दो दिन अमावस्या का योग हो, तो दूसरे दिन अमावस्या को पर्व मनाना चाहिए। इस वर्ष 1 नवंबर को भी अमावस्या सूर्योदय के बाद तक बनी रहेगी, इसलिए 1 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाना शास्त्रसम्मत होगा।” ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शर्मा ने भी इसी प्रकार का तर्क देते हुए कहा, “दो दिन अमावस्या होने पर शास्त्रों के अनुसार उत्तर वाली अमावस्या (दूसरे दिन) को लक्ष्मी पूजन करना सही होता है। 1 नवंबर को स्वाति नक्षत्र का भी संयोग रहेगा, जिससे लक्ष्मी पूजन का महत्व और बढ़ जाएगा।” देशभर में विविधता: अलग-अलग राज्यों में अलग तिथियों पर दीपावलीदीपावली पर्व को लेकर देशभर में अलग-अलग पंचांगों के आधार पर विभिन्न तिथियों का निर्धारण किया गया है। अयोध्या के राममंदिर में 1 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी, जबकि काशी में सौर पंचांग सिद्धांत के अनुसार 31 अक्टूबर को ही पर्व मनाने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली के कुछ पंचांगकर्ता 1 नवंबर को दीपावली मानने के पक्ष में हैं, वहीं राजस्थान के जयविनोदी पंचांग और सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी। जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में भी 31 अक्टूबर को ही लक्ष्मी पूजन होगा। धर्मसभा का उद्देश्य: एकरूपता और धार्मिक अनुशासन की स्थापनाधर्मसभा के निर्णय का उद्देश्य पूरे देश में दीपावली की तिथि को लेकर चल रहे भ्रम को समाप्त करना और सनातन धर्म के अनुयायियों के बीच धार्मिक अनुशासन और एकरूपता को बढ़ावा देना है। धर्मसभा के विद्वानों ने कहा कि शास्त्रों के आधार पर 31 अक्टूबर को दीपावली मनाना सर्वश्रेष्ठ और शुभ है। धर्मसभा का निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि सनातन धर्म के अनुयायी सही समय पर दीपावली का महापर्व मना सकें।