रतलाम- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: जादू-टोना और तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर तीन वर्षीय मासूम बालक और उसके पिता की नृशंस हत्या के बहुचर्चित मामले में रतलाम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम राजेश नामदेव की अदालत ने तीन आरोपियों को दोहरे आजीवन कारावाससहित कठोर सजा सुनाई है।

क्या है पूरा मामला
यह सनसनीखेज घटना 20 फरवरी 2021 को शिवगढ़ थाना क्षेत्र के गांव ठिकरिया में सामने आई थी। जादू-टोना और तांत्रिक क्रिया के दौरान परिवार के ही सदस्यों पर जानलेवा हमला किया गया, जिसमें राजाराम खराड़ी और उसके तीन वर्षीय पुत्र आदर्श की मौत हो गई थी।

इन आरोपियों को मिली सजा
न्यायालय ने
- तुलसीबाई पति राधेश्याम पलासिया (45 वर्ष)
- माया पिता राधेश्याम पलासिया (24 वर्ष)
- राहुल पिता ईश्वरलाल पलासिया (27 वर्ष)
को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 342, 450, 323 और 302 के तहत दोषी मानते हुए
- 10-10 वर्ष का कठोर कारावास,
- दोहरा आजीवन कारावास,
- और 1 लाख 11 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया।
घटना स्थल का भयावह मंजर
तत्कालीन थाना प्रभारी आर.एस. भाबोर के अनुसार, पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कमरे के अंदर से चीख-पुकार की आवाजें आ रही थीं। दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश करने पर तांत्रिक सामग्री, खून से सना सामान, तलवार, मुसली, नींबू, सिंदूर और अगरबत्ती बिखरी मिली। मासूम आदर्श अर्धमूर्छित अवस्था में था, जिसे बाद में मृत घोषित किया गया।
वैज्ञानिक साक्ष्य बने मजबूत आधार
शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने न्यायालय में
- 25 गवाहों के बयान,
- 85 दस्तावेज,
- और एफएसएल भोपाल की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
एफएसएल रिपोर्ट में आरोपी माया से जब्त तलवार और आरोपी राहुल के कपड़ों पर मृतक आदर्श का खून पाया गया, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत हुआ।
पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
न्यायालय ने जुर्माने की राशि में से
- 50 हजार रुपए मृतक आदर्श के दादा कन्हैयालाल को,
- और 10-10 हजार रुपए घायल थावरीबाई, निकिता और माला को देने के आदेश दिए।
दो आरोपी दोषमुक्त
प्रकरण में साक्ष्य के अभाव में
- विक्रम खराड़ी और
- सागर खराड़ी
को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया।
न्यायालय का सख्त संदेश
यह फैसला अंधविश्वास, जादू-टोना और तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर की जाने वाली हिंसा के खिलाफ एक कड़ा संदेश है कि ऐसे जघन्य अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।