Ratlam News: रतलाम में युवक की संदिग्ध हत्या से सनसनी, नाले में मिला शव; पत्नी की तलाश तेज

Ratlam News: रतलाम के बोरदा गांव में 32 वर्षीय युवक का शव नाले में मिला। पैर रस्सी से बंधे थे और शरीर पर चोट के निशान मिले। पुलिस जांच में जुटी है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: जिले के बोरदा गांव में एक 32 वर्षीय युवक का शव नाले में मिलने के बाद सनसनी फैल गई। युवक के दोनों पैर रस्सी से बंधे हुए थे और सिर, गाल व गर्दन पर गहरी चोट के निशान मिले हैं। पुलिस ने मामले को संदिग्ध हत्या मानकर जांच शुरू कर दी है। मृतक की पहचान भीमा पुत्र मनोहर चरपोटा के रूप में हुई है। मंगलवार दोपहर घर से लापता होने के बाद बुधवार सुबह उसका शव गांव के पास नाले में मिला। घटना के बाद मृतक की पत्नी ललिता भी घर से गायब है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। नाले में मिला रस्सी से बंधा शव परिजनों के अनुसार मंगलवार दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच भीमा घर से लापता हो गया था। शाम को उसके काका ने पत्नी ललिता से भीमा के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह दानपुर गया है। रात करीब 9 बजे दोबारा पूछताछ करने पर ललिता ने बताया कि भीमा अभी वापस नहीं आया है। अगले दिन सुबह गांव के सवजी मईडा ने भीमा के काका को उसके घर के पास से निकलने वाले नाले में शव पड़े होने की जानकारी दी। मौके पर पहुंचने पर भीमा चित अवस्था में पड़ा मिला। उसके सिर, गाल और गर्दन पर चोट के निशान थे। दोनों पैर रस्सी से बंधे हुए थे। शव के बाएं हाथ का कुछ हिस्सा भी अज्ञात जानवर द्वारा खाए जाने की बात सामने आई है। घर में मिले खून के निशान, कुल्हाड़ी भी बरामद घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी अर्जुन सेमलिया और बेड़दा चौकी प्रभारी एसआई जगदीश सिंह तोमर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान घर के अंदर कई जगह खून के धब्बे मिले। इन निशानों को गोबर से लीपकर मिटाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है। पलंग पर भी खून के निशान मिले हैं। घर के पास रखे ढालिये में पुलिस को एक कुल्हाड़ी मिली, जिस पर खून लगा हुआ था। इसके अलावा घर के आसपास शव को घसीटे जाने के निशान भी मिले हैं। पुलिस इन सभी साक्ष्यों को जांच का हिस्सा मानकर आगे की कार्रवाई कर रही है। पत्नी के लापता होने से बढ़ा संदेह भीमा का शव मिलने के बाद उसकी पत्नी ललिता के घर से चले जाने की जानकारी सामने आई है। परिवार के मुताबिक, मंगलवार को ललिता कुछ समय तक स्वजनों के साथ भीमा को आसपास तलाशती रही थी। इसके बाद वह घर लौट गई। बाद में जब परिजन नाले में भीमा का शव देखकर रोते हुए घर पहुंचे, तो ललिता उनके रोने की आवाज सुनकर घर से चली गई। इसके बाद से उसका पता नहीं चला है। पुलिस ने परिस्थितियों के आधार पर पत्नी की भूमिका की भी जांच शुरू की है। हालांकि, अभी हत्या के कारण और वारदात में किसकी भूमिका थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी राकेश पंद्रो और एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल भी घटनास्थल पर पहुंचे। टीम ने मौके का निरीक्षण किया और मृतक के परिजनों से जानकारी ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर मौत के कारण और घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का क्या कहना है? थाना प्रभारी अर्जुन सेमलिया के अनुसार भीमा की पत्नी पर हत्या में संलिप्तता की आशंका के आधार पर उसकी तलाश की जा रही है। पत्नी के मिलने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। दो बच्चों के पिता थे भीमा मृतक भीमा के दो बच्चे हैं। घटना के समय एक बच्चा स्कूल गया हुआ था, जबकि बड़ी बेटी को ललिता ने खेत में बंदरों को भगाने के लिए भेजा था। इस वजह से घटना के दौरान घर में कौन-कौन मौजूद था और वारदात किस परिस्थिति में हुई, यह पुलिस जांच का अहम बिंदु माना जा रहा है।

Ratlam News: रतलाम ई-स्कूटर हादसे में 16 वर्षीय अंतिमकुंवर की मौत, 13 दिन तक चली जिंदगी की जंग

Ratlam News: रतलाम में ई-स्कूटर में आग लगने से झुलसी 16 वर्षीय अंतिमकुंवर की 13 दिन बाद मौत हो गई। पुलिस ने कंपनी के जिम्मेदारों पर केस की बात कही है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: विंध्यवासिनी ड्रीम सिटी में ई-स्कूटर में लगी आग से झुलसी 16 वर्षीय अंतिमकुंवर की आखिरकार मौत हो गई। हादसे के 13 दिन बाद मंगलवार सुबह इंदौर के एमवाय अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। अंतिमकुंवर का करीब 40 फीसदी शरीर झुलस गया था और उपचार के दौरान संक्रमण फैलने से उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। परिजनों के मुताबिक सोमवार देर शाम अंतिम को सांस लेने में परेशानी शुरू हुई थी। रात करीब 1 बजे उसे अरबिंदो हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर सुबह उसे वेंटिलेटर पर लेने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही सुबह 8:05 बजे उसकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार शव लेकर रतलाम जिले के रावटी के पास तंबोलिया पहुंचा, जहां अंतिमकुंवर का अंतिम संस्कार किया गया। 18 अगस्त की रात ई-स्कूटर में लगी थी आग घटना 18 अगस्त की रात विंध्यवासिनी ड्रीम सिटी स्थित एक मकान में हुई थी। यहां हॉल में रखा वॉरिवो कंपनी का ई-स्कूटर अचानक आग की लपटों में घिर गया। परिजनों का कहना है कि हादसे के समय ई-स्कूटर चार्जिंग पर नहीं लगा था। रात करीब 8:30 बजे चार्जिंग पिन निकालकर वाहन की डिक्की में रख दिया गया था। घर के हॉल में सो रहीं 36 वर्षीय बिंदुकुंवर भाटी और उनकी छोटी बेटी अंतिमकुंवर आग की चपेट में आ गईं। दोनों को उपचार के लिए इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान बढ़ता गया संक्रमण अंतिम के चाचा सूरजसिंह के अनुसार आग में उसके दोनों हाथ, गर्दन, कंधे और चेहरा बुरी तरह झुलस गए थे। घटना वाली रात ही उसे इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि ड्रेसिंग के दौरान अंतिम को काफी दर्द होता था। उसकी हालत देखकर परिवार के लोग भी भावुक हो जाते थे। डॉक्टरों के अनुसार उपचार के दौरान संक्रमण फैलने लगा था। परिवार का कहना है कि संक्रमण के बाद उसके फेफड़ों में पानी भर गया और उसकी हालत गंभीर होती चली गई। 31 जुलाई को खरीदा था ई-स्कूटर परिवार के मुताबिक हादसे में शामिल ई-स्कूटर 31 जुलाई को खरीदा गया था। इसे अंतिमकुंवर के फूफा वीरेंद्रसिंह के नाम पर माणकचौक स्थित बालाजी कम्युनिकेशन से करीब 83 हजार रुपये में फाइनेंस कराया गया था। हादसे के समय वाहन को खरीदे हुए एक महीने का समय भी पूरा नहीं हुआ था। अंतिमकुंवर सांदीपनि स्कूल में कक्षा 12वीं की छात्रा थी। परिवार के अनुसार उसकी मां बिंदुकुंवर भाटी झाबुआ जिले के गुणावद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और हादसे के बाद उनका भी इंदौर में इलाज चल रहा है। परिवार ने कंपनी पर उठाए सवाल अंतिम के चाचा सूरजसिंह ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद वॉरिवो कंपनी की ओर से कोई जिम्मेदार व्यक्ति परिवार से मिलने नहीं आया और न ही मदद की गई। परिवार का कहना है कि जब ई-स्कूटर चार्जिंग पर नहीं था, तब उसमें आग लगने की वजह की जांच जरूरी है। परिजनों ने वाहन में तकनीकी खराबी की आशंका जताते हुए मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, ई-स्कूटर में आग लगने की वास्तविक वजह तकनीकी जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस कराएगी तकनीकी जांच, कंपनी के जिम्मेदारों पर केस दीनदयाल नगर थाना टीआई अनुराग यादव के अनुसार अंतिमकुंवर की मौत की सूचना के बाद मर्ग कायम किया गया है। पुलिस जले हुए ई-स्कूटर की तकनीकी जांच करा चुकी है। पुलिस के मुताबिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और वॉरिवो कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाएगा। मां अभी भी अस्पताल में भर्ती इस हादसे में अंतिमकुंवर की मां बिंदुकुंवर भाटी भी गंभीर रूप से झुलसी थीं। उनका उपचार इंदौर के एमवाय अस्पताल में जारी है। एक तरफ परिवार ने अंतिमकुंवर को खो दिया है, वहीं उसकी मां का इलाज अभी चल रहा है। परिवार अब पुलिस जांच और तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

रतलाम में धूमधाम से मनाया गया कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव, नन्हे बच्चों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। गुरु रामदास पब्लिक स्कूल, इंदिरा नगर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी के बच्चों ने भगवान कृष्ण और राधा रानी के बाल स्वरूप में मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का दिल जीत लिया कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में बच्चों की आकर्षक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्सव का माहौल बना दिया। नन्हे बच्चे बाल गोपाल और राधा रानी के रूप में बेहद आकर्षक नजर आए। बच्चों ने भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया। बाल गोपाल और राधा रानी के स्वरूप ने मोहा मन कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की शुरुआत भगवान कृष्ण और राधा रानी के स्वरूपों के दर्शन के साथ हुई। इसके बाद छोटे बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की मासूमियत, उत्साह और शानदार प्रस्तुति को देखकर विद्यालय में मौजूद अभिभावक और शिक्षक भी आनंदित नजर आए। नन्हे-मुन्नों की प्रस्तुतियों ने पूरे विद्यालय परिसर को भक्तिमय बना दिया। बच्चों ने अपनी कला और आत्मविश्वास से भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को प्रस्तुत किया। मटकी फोड़ कार्यक्रम रहा आकर्षण का केंद्र जन्माष्टमी समारोह का मुख्य आकर्षण बच्चों के लिए आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम रहा। नन्हे बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। मटकी फोड़ते बच्चों को देखकर उपस्थित दर्शकों ने जमकर उत्साह बढ़ाया। मटकी फोड़ कार्यक्रम के दौरान बच्चों की ऊर्जा और उत्साह ने पूरे वातावरण को आनंद और उल्लास से भर दिया। कार्यक्रम में बच्चों ने जन्माष्टमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी उत्साहपूर्वक महसूस किया। विद्यालय परिवार ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम में विद्यालय समिति के सदस्य, प्राचार्य तथा सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। विद्यालय परिवार की ओर से बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की गई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से बच्चों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। साथ ही बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास भी होता है। कार्यक्रम के अंत में बच्चों और उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। खुशी और उत्साह के माहौल के साथ गुरु रामदास पब्लिक स्कूल रतलाम में कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का समापन हुआ।

Ratlam News: सांवरिया जी के दर्शन को निकले चार दोस्त, रतलाम में भीषण हादसे ने दो की जान ली

Ratlam News: रतलाम के रत्तागिरी में महू-नीमच फोरलेन पर कार और ट्रॉले की भिड़ंत में दो दोस्तों की मौत हो गई, जबकि दो घायल हुए हैं। रतलाम- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: बिलपांक थाना क्षेत्र में महू-नीमच फोरलेन पर मंगलवार तड़के हुए सड़क हादसे में दो दोस्तों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। हादसा रत्तागिरी के पास रात करीब 2 बजे हुआ, जब इंदौर की ओर से आ रही कार सामने से आ रहे ट्रॉले से टकरा गई। बताया गया कि कार में चार दोस्त सवार थे और सभी इंदौर के राऊ से राजस्थान स्थित सांवरिया जी के दर्शन के लिए निकले थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और घूमकर इंदौर की दिशा में हो गया। हादसे में कार चला रहे 45 वर्षीय मुकेश पुत्र मानसिंह गहलोत और उनके बगल में बैठे 56 वर्षीय सोहनसिंह पुत्र बापूसिंह डाबी की मौत हो गई। पीछे बैठे 43 वर्षीय देवकरण पुत्र कन्हैयालाल मालवीय और 28 वर्षीय सावन पुत्र आसाराम मालवीय घायल हुए हैं। रत्तागिरी में आधी रात हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, चारों रात करीब 12:30 बजे सोहनसिंह की कार से राऊ से राजस्थान के सांवरिया जी के लिए रवाना हुए थे। रत्तागिरी के पास महू-नीमच फोरलेन पर उनकी कार सामने से आ रहे ट्रॉले से जा भिड़ी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कार गलत साइड से आ रही थी। टक्कर के बाद कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की। दो दोस्तों की मौके के बाद मौत, दो घायल हादसे में मुकेश और सोहनसिंह की जान चली गई। मुकेश कार चला रहे थे, जबकि सोहनसिंह आगे वाली सीट पर उनके पास बैठे थे। पीछे बैठे देवकरण और सावन घायल हुए। हादसे के बाद टोल की एंबुलेंस से दोनों घायलों को शासकीय मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बाद में उनके परिजन दोनों को उपचार के लिए इंदौर ले गए। चारों अलग-अलग काम करते थे हादसे में जान गंवाने वाले सोहनसिंह राऊ स्थित यूको बैंक में कैशियर थे। मुकेश लोडिंग वाहन चलाते थे। घायल देवकरण कबाड़ी का काम करते हैं, जबकि सावन ढोल वादक हैं। चारों दोस्त दर्शन के लिए राजस्थान जा रहे थे, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने सफर को मातम में बदल दिया। पुलिस ने शुरू की हादसे की जांच एएसआई सतीश ठाकुर के अनुसार, दोनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल ट्रॉले को जब्त कर थाने पर खड़ा करवा दिया है। हादसे की परिस्थितियों और टक्कर के कारणों को लेकर जांच जारी है। एंबुलेंस में देरी का आरोप हादसे के बाद रत्तागिरी निवासी प्रहलाद गणावा भी मौके पर पहुंचे और घायलों की मदद की। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक का शव ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची और करीब ढाई घंटे की देरी हुई। एंबुलेंस को लेकर लगाए गए इस आरोप से स्थानीय रहवासियों में नाराजगी की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध नहीं है।

Ratlam News: रतलाम में क्रेटा कार से 73.72 लाख रुपये बरामद, बोरे में मिली नकदी

Ratlam News: रतलाम के नामली में पुलिस ने बिना नंबर की क्रेटा कार से 73 लाख 72 हजार 500 रुपये बरामद किए। नकदी के स्रोत और दस्तावेजों की जांच जारी है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: नामली थाना क्षेत्र में शनिवार शाम पुलिस की चेकिंग के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से मामला चर्चा में आ गया। पंचेड़ फंटे पर पुलिस ने बिना नंबर की सफेद क्रेटा कार को रोककर तलाशी ली। कार में रखे यूरिया के बोरे से नोटों की कई गड्डियां बरामद हुईं। पुलिस के अनुसार, नकदी की गिनती पूरी होने पर कुल 73 लाख 72 हजार 500 रुपये सामने आए। रकम में 100, 200 और 500 रुपये के नोट शामिल थे। नोटों की गिनती के लिए नामली के सराफा व्यापारियों से दो मशीनें मंगवाई गई थीं। मामले की सूचना मिलने के बाद एएसपी राकेश पंद्रो भी नामली थाने पहुंचे। पुलिस ने कार और नकदी को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब मुख्य सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या है और इसे कहां ले जाया जा रहा था। पंचेड़ फंटे पर पुलिस ने रोकी बिना नंबर की कार शनिवार शाम नामली पुलिस पंचेड़ फंटे पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान बिना नंबर की सफेद रंग की क्रेटा कार को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कार में रखे यूरिया के बोरे से नोटों की गड्डियां मिलीं। पुलिस ने नकदी को कब्जे में लेकर थाने पहुंचाया और पूरी रकम की गिनती कराई। मशीनों से हुई नोटों की गिनती रकम काफी अधिक होने के कारण सामान्य तरीके से गिनती में समय लग सकता था। इसके लिए नामली के सराफा कारोबारियों से दो नोट गिनने वाली मशीनें मंगवाई गईं। थाना प्रभारी के चैंबर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में नकदी की गिनती की गई। गिनती पूरी होने के बाद रकम ₹73,72,500 निकली। एक नजर में पूरा मामला युवक ने जमीन बेचकर रकम लाने की बात कही पुलिस पूछताछ में युवक ने खुद को कृषक बताया है। उसके अनुसार, वह जमीन बेचकर मिली रकम लेकर आया था। वह किसी काम से रतलाम गया था, लेकिन काम नहीं होने पर रकम लेकर उमठ पालिया स्थित अपने घर लौट रहा था। हालांकि, इतनी बड़ी नकदी मिलने के बाद पुलिस अब उसके दावे से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। वकील का दावा—सोना खरीदने गया था युवक मामले में युवक की पहचान मीजान पुत्र रईस खां के रूप में सामने आई है। उसकी ओर से जावरा के अधिवक्ता महेंद्र सिंह सिसोदिया भी थाने पहुंचे। अधिवक्ता के मुताबिक, मीजान अपनी कार से रतलाम सोना खरीदने गया था। खरीदारी नहीं होने पर वह वापस उमठ पालिया लौट रहा था। वकील ने यह भी बताया कि मीजान और उसके पिता कृषक हैं तथा जमीन की खरीद-बिक्री का काम भी करते हैं। अधिवक्ता के अनुसार, कार से मिली रकम से संबंधित हिसाब-किताब मौजूद है और परिवार आयकर भी भरता है। इन दावों की पुष्टि के लिए पुलिस जमीन की बिक्री, नकदी के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस कर रही नकदी के स्रोत की जांच पुलिस का पूरा फोकस फिलहाल बरामद रकम के स्रोत और उसके दस्तावेजी आधार पर है। जमीन बिक्री से जुड़ी जानकारी, नकदी के लेन-देन और युवक द्वारा बताए गए कारणों का सत्यापन किया जा रहा है। एएसपी राकेश पंद्रो के अनुसार, नकदी की गिनती पूरी हो चुकी है और कुल 73 लाख 72 हजार 500 रुपये मिले हैं। युवक ने जमीन बेचकर रकम लाने की बात कही है। अब संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

Ratlam News: इंदौर गई थी 74 वर्षीय महिला, पीछे से घर में घुसे चोर; 6 लाख से ज्यादा का माल साफ

Ratlam News: रतलाम की अमृत सागर कॉलोनी में सूने मकान का ताला तोड़कर चोर 6 लाख से अधिक के सोने-चांदी के जेवर और नकदी ले गए। पुलिस जांच में जुटी। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम के दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र में चोरी की वारदात सामने आई है। अमृत सागर कॉलोनी स्थित एक सूने मकान का ताला तोड़कर चोर नकदी और सोने-चांदी के जेवर समेत 6 लाख रुपए से अधिक का सामान लेकर फरार हो गए। घटना के समय मकान मालकिन अपनी बड़ी बहन से मिलने इंदौर गई हुई थीं। मामले की जानकारी गुरुवार सुबह उस समय हुई, जब पड़ोसी ने फोन कर घर के दरवाजे खुले होने की सूचना दी। रतलाम पहुंचने पर महिला ने मकान के मुख्य गेट और बरामदे के गेट के ताले टूटे देखे। अंदर जांच करने पर अलमारी में रखी नकदी और जेवर गायब मिले। इंदौर गई थीं मकान मालकिन, पड़ोसी ने दी सूचना अमृत सागर कॉलोनी निवासी 74 वर्षीय राजाबाई राठी, पति स्वर्गीय बालकृष्ण राठी ने दीनदयाल नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह 16 अगस्त को अपनी बड़ी बहन के यहां इंदौर गई थीं। गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे पड़ोसी भेरूलाल टांक का फोन आया। उन्होंने बताया कि राजाबाई के घर के दरवाजे खुले हुए हैं। सूचना मिलने के बाद वह रतलाम पहुंचीं और मकान की स्थिति देखकर चोरी की जानकारी हुई। ताले तोड़कर घर में घुसे चोर घर की जांच करने पर सामने आया कि चोरों ने मेन गेट और बरामदे वाले गेट का ताला तोड़ा था। इसके साथ ही दरवाजे के नकूचे के आसपास का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त किया गया था। अंदर रखी अलमारी की जांच करने पर अलग-अलग लिफाफों में रखे 1.41 लाख रुपए नकद गायब मिले। इसके अलावा सोने और चांदी के जेवर भी चोरी हुए हैं। सोने के जेवर भी ले गए शिकायत के मुताबिक चोर करीब 15 ग्राम वजन की सोने की एक जोड़ी लटकन और एक जोड़ी टॉप्स ले गए। इनकी कीमत करीब 2.44 लाख रुपए बताई गई है। इसके साथ ही करीब 1 ग्राम वजन का सोने का सिक्का भी चोरी हुआ है। 900 ग्राम चांदी के आभूषण चोरी चोरी हुए सामान में चांदी के जेवर और बर्तन भी शामिल हैं। इनमें एक गिलास, दो कटोरी, एक चम्मच, छह जोड़ी पायल और 12 जोड़ी बिछिया शामिल हैं। इसके अलावा 100 ग्राम और 50 ग्राम के चांदी के सिक्के भी चोरी हुए। कुल मिलाकर करीब 900 ग्राम चांदी के सामान की चोरी हुई, जिसकी कीमत लगभग 2.34 लाख रुपए बताई गई है। एक लेडीज रिस्ट वॉच भी चोर अपने साथ ले गए। नकदी और जेवर समेत चोरी गए सामान की कुल कीमत 6 लाख रुपए से अधिक बताई गई है। अलमारी में रखे थे मंडल के रुपए भी राजाबाई राठी ने पुलिस को बताया कि वह माहेश्वरी मंडल की संरक्षक भी हैं। 15 अगस्त को तीज का सामूहिक आयोजन किया गया था, जिसमें भोजन की व्यवस्था की गई थी। आयोजन से जुड़े खर्च की राशि भी अलमारी में रखी हुई थी। चोरी के दौरान यह रकम भी चोरों के हाथ लग गई। पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाल रही घटना की सूचना मिलने के बाद दीनदयाल नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस कॉलोनी तथा आसपास आने-जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। फिलहाल पुलिस चोरी करने वालों की पहचान और उनकी तलाश में जुटी है। मामले में आगे की जांच के आधार पर चोरी के घटनाक्रम और आरोपियों के संबंध में जानकारी सामने आ सकती है।

Ratlam News: रतलाम में 1950 से ज्यादा नामांतरण मामलों का रास्ता साफ, 1958-59 के रिकॉर्ड से होगी कार्रवाई

Ratlam News: रतलाम में चार साल से अटके 1950 से अधिक नामांतरण मामलों का रास्ता साफ हुआ। अब 1958-59 या बाद के राजस्व रिकॉर्ड से जमीन का नामांतरण हो सकेगा। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News; जिले में जमीन के नामांतरण को लेकर पिछले करीब चार साल से अटके 1950 से अधिक मामलों में अब समाधान की उम्मीद जगी है। 1956-57 के पुराने बंदोबस्त रिकॉर्ड को आधार बनाकर रोके गए नामांतरण मामलों में अब 1958-59 या उसके बाद उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। इस फैसले से उन जमीन मालिकों और खरीदारों को राहत मिलने की संभावना है, जो नामांतरण के लिए लंबे समय से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। पुराने रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने और बाद के दस्तावेजों में निजी स्वामित्व सामने आने के कारण बड़ी संख्या में प्रकरण उलझे हुए थे। मामले की पड़ताल के बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया ने राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व में मिले शासन के मार्गदर्शन को देखा। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि 1958-59 के रिकॉर्ड को भी नामांतरण की कार्रवाई में आधार बनाया जा सकता है। क्यों अटके थे नामांतरण के मामले? नामांतरण की समस्या की जड़ 1956-57 के बंदोबस्त रिकॉर्ड से जुड़ी हुई है। उस समय के कई अभिलेखों में बड़ी संख्या में जमीनें सरकारी खाते में दर्ज थीं। बाद के 1961-62 के खसरों में इन्हीं में से कई जमीनें निजी स्वामित्व में दर्ज दिखाई दीं। इससे रिकॉर्ड में पुरानी और नई प्रविष्टियों के बीच अंतर पैदा हो गया। सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि 1958 से 1962 के बीच के खसरा रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं बताया गया है। यह रिकॉर्ड कब और किस परिस्थिति में गायब हुआ, इससे संबंधित नस्ती भी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। जब जमीनों की खरीद-बिक्री के बाद नए नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन तहसील कार्यालय पहुंचे, तो 1956-57 के रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने के कारण कई प्रकरणों पर आपत्ति खड़ी हो गई। इसके चलते कुछ आवेदन लंबित रहे तो कुछ को निरस्त कर दिया गया। 1958-59 के रिकॉर्ड से क्या बदलेगा? अब 1956-57 के बंदोबस्त रिकॉर्ड को ही अंतिम आधार मानने के बजाय 1958-59 या उसके बाद उपलब्ध राजस्व अभिलेखों को भी देखा जा सकेगा। इससे उन मामलों में रास्ता खुल सकता है, जहां बाद के खसरों में जमीन का स्वामित्व बदल चुका है और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। कलेक्टर ने क्या कहा? कलेक्टर अजय कटेसरिया के अनुसार मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता में 1958-59 के रिकॉर्ड को देखने का प्रावधान है और इसे अधिकार अभिलेख के रूप में माना जाता है। शासन से पूर्व में मिले मार्गदर्शन के आधार पर अब संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 16 महीने पहले ही मिल चुका था शासन का मार्गदर्शन नामांतरण की इस समस्या को लेकर तत्कालीन कलेक्टर राजेश बाथम ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव से मार्गदर्शन मांगा था। इसके जवाब में 3 अप्रैल 2025 को राजस्व मंत्रालय ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, जिले में इस दिशा-निर्देश को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया। बाद में पटवारी और राजस्व निरीक्षकों से मिली जानकारी के आधार पर वर्तमान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने मामले की पड़ताल की, जिसके बाद पुराने शासन निर्देश सामने आए। जमीन मालिकों की परेशानी भी सामने आई नामांतरण अटकने से आम लोगों को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, इसके उदाहरण भी सामने आए हैं। रामलाल वाघेला ने बताया कि वह करीब छह महीने से नामांतरण के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। करमदी के पास रिंग रोड क्षेत्र में स्थित उनकी जमीन के खसरा-खतौनी रिकॉर्ड में मालिकाना हक का नाम बदलवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। दूसरे मामले में मुकेश कुमार, निवासी धामनोद, ने बताया कि जमीन का सौदा होने के बाद नामांतरण नहीं होने से आगे की प्रक्रिया अटक गई। उनका कहना है कि उन्होंने 1961-62 से आगे के उपलब्ध रिकॉर्ड भी कार्यालय में प्रस्तुत किए, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रॉपर्टी कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद जिला प्रॉपर्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पिपाड़ा का कहना है कि यदि पुराने सरकारी रिकॉर्ड की विसंगति दूर हो जाती है तो जमीन की खरीद-बिक्री और नामांतरण से जुड़ी कई समस्याएं अपने आप कम हो सकती हैं। जमीन की खरीद-बिक्री में राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में रिकॉर्ड स्पष्ट होने से खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। 1950 से अधिक लंबित मामलों पर अब नजर रतलाम जिले में करीब 1950 से अधिक नामांतरण प्रकरण लंबे समय से लंबित बताए गए हैं। अब 1958-59 या उसके बाद के उपलब्ध रिकॉर्ड को आधार बनाकर नियमानुसार कार्रवाई की संभावना बनने से इन मामलों के निराकरण का रास्ता खुल गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए नामांतरण स्वतः नहीं होगा, बल्कि संबंधित प्रकरण में रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर सक्षम राजस्व अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

Ratlam News: रतलाम में जमीन विवाद के बीच युवक की मौत, शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन; जांच की मांग

Ratlam News: रतलाम के सरवनीखुर्द में जमीन विवाद के बीच शंकर गरवाल की कीटनाशक पीने से मौत हो गई। परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन कर जांच की मांग की। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: जिले के सरवनीखुर्द गांव में जमीन विवाद से जुड़ा मामला सामने आया है। 45 वर्षीय शंकर गरवाल की कीटनाशक पीने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों और जय आदिवासी युवाशक्ति संगठन से जुड़े लोगों ने बाजना रोड पर शव रखकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। करीब एक घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच, जमीन से जुड़े विवाद की पड़ताल और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, शंकर ने 23 अगस्त को अपने खेत की जमीन के पास कीटनाशक पी लिया था। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 25 अगस्त की दोपहर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जमीन पर कब्जे और खदान को लेकर लगाए आरोप परिजनों का आरोप है कि शंकर की खेती की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। उनका कहना है कि परिवार लंबे समय से इस जमीन पर खेती करता आ रहा था। परिजनों के मुताबिक, जमीन पर खदान का पट्टा मिलने के बाद शंकर वहां खेती नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने खदान संचालक पर परेशान करने और डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए हैं। परिवार का दावा है कि शंकर ने जमीन से जुड़े मामले को लेकर कई बार शिकायतें की थीं। उनका आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इन्हीं परिस्थितियों को लेकर परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद सड़क पर रखा शव बुधवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शंकर का शव लेकर गांव की ओर जा रहे थे। इसी दौरान बाजना रोड पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर डीएसपी गायत्री सोनी, डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने परिजनों तथा संगठन के लोगों से बातचीत कर उनकी मांगें सुनीं। करीब एक घंटे चले प्रदर्शन के कारण सड़क पर यातायात प्रभावित रहा और दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई। खनिज और राजस्व विभाग की भूमिका की जांच की मांग प्रदर्शन कर रहे परिजनों और आदिवासी संगठनों ने जमीन से जुड़े मामले में खनिज विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनकी प्रमुख मांग है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है, वहां खदान का पट्टा किस आधार पर दिया गया और संबंधित प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जाए। परिजनों ने यह भी मांग की कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या खदान संचालक की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। परिवार को मुआवजा और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो थाने का घेराव किया जाएगा। पुलिस ने जांच का भरोसा दिया पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को मामले की जांच कर वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों और संगठन के लोगों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जांच में जमीन विवाद, शिकायतों, खदान पट्टे से जुड़े दस्तावेजों और लगाए गए अन्य आरोपों की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा। परिवार में पत्नी और चार बच्चे शंकर गरवाल के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और तीन बेटियां हैं। मौत के बाद परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

Ratlam News: रतलाम में ईद मिलाद जुलूस के दौरान तेज साउंड पर कार्रवाई, 10 संचालकों पर केस

Ratlam News: रतलाम में ईद मिलादुन्नबी जुलूस के दौरान तेज साउंड और यातायात व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आईं। पुलिस ने 10 साउंड संचालकों पर केस दर्ज किए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को शहर में निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस के दौरान तेज आवाज में साउंड सिस्टम और बैंड बजने को लेकर कई जगह से शिकायतें सामने आईं। दूसरी ओर, शहर के कई हिस्सों में घंटों यातायात प्रभावित रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज ध्वनि को लेकर स्थिति उस समय और चर्चा में आ गई, जब कुछ लोगों ने स्मार्टवॉच के जरिए शोर का स्तर मापने और 117 डेसिबल तक रीडिंग मिलने के वीडियो पुलिस को भेजे। कुछ रहवासियों ने घरों में कांच के बर्तन गिरने तक की शिकायत की। शिकायतों और वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने देर शाम कार्रवाई करते हुए 10 साउंड संचालकों के खिलाफ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य संचालकों की भी पहचान की जा रही है। जुलूस में कई साउंड सिस्टम, तेज आवाज को लेकर शिकायतें जुलूस मार्ग पर करीब 15 से अधिक साउंड सिस्टम और बैंड शामिल होने की जानकारी सामने आई। कुछ साउंड सिस्टम की आवाज काफी दूर तक सुनाई देने की बात कही गई। जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के साथ इंदौर, उज्जैन और धार से भी साउंड सिस्टम बुक कराए गए थे। जुलूस के दौरान कई जगह तेज आवाज को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। जुलूस में शामिल कुछ लोग भी तेज आवाज से बचने के लिए कान बंद करते नजर आए। मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मियों के भी कान बंद करते हुए दिखाई देने की बात सामने आई। जुलूस से एक दिन पहले मंगलवार को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने एसपी अमित कुमार के साथ जुलूस मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। शांति समिति की बैठक में भी साउंड सिस्टम और ध्वनि नियंत्रण को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बावजूद जुलूस के दौरान तेज आवाज को लेकर शिकायतें सामने आईं। कुछ लोगों ने अपनी स्मार्टवॉच से शोर का स्तर मापकर वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्मार्टवॉच से प्राप्त डेसिबल रीडिंग को आधिकारिक ध्वनि मापन मानने से पहले मानक उपकरण और अधिकृत माप की पुष्टि जरूरी होती है। ध्वनि प्रदूषण के लिए निर्धारित मानक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम की आवाज संबंधित क्षेत्र के एंबिएंट नॉइज स्टैंडर्ड से अधिकतम 10 डेसिबल या 75 डेसिबल, इनमें जो कम हो, उससे अधिक नहीं होनी चाहिए। आवासीय क्षेत्रों के लिए एंबिएंट नॉइज स्टैंडर्ड दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल बताया गया है। सामान्य तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहता है, हालांकि संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुसार परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। सुबह से शाम तक कई इलाकों में यातायात प्रभावित ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के चलते शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक कई प्रमुख हिस्सों में वाहनों की आवाजाही धीमी रही और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। रूट डायवर्जन की व्यवस्था के बावजूद कुछ स्थानों पर यातायात दबाव कम नहीं हो सका। जुलूस की भीड़, साउंड सिस्टम और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए गए। पार्षद कुरैशी की मौत के बाद भी साउंड बजने की शिकायत खबर के अनुसार पार्षद कुरैशी की मौत की सूचना मिलने के बाद भी जुलूस समाप्त होने तक कई स्थानों पर साउंड सिस्टम तेज आवाज में बजते रहे। इस घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मौत और तेज ध्वनि के बीच किसी प्रत्यक्ष चिकित्सकीय संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए दोनों घटनाओं को सीधे तौर पर जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। देर शाम पुलिस की कार्रवाई, 10 पर प्रकरण तेज आवाज को लेकर मिली शिकायतों के बाद पुलिस ने देर शाम कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार कुल 10 साउंड संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। मामले में थाना स्तर पर कार्रवाई की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक माणकचौक थाना क्षेत्र में पांच, दीनदयाल नगर में एक और स्टेशन रोड थाना क्षेत्र में दो प्रकरण दर्ज किए गए। शेष मामलों से संबंधित कार्रवाई का विवरण पुलिस की ओर से अलग-अलग स्तर पर सामने आना है। पुलिस ने तीन साउंड सिस्टम जब्त किए हैं। वहीं, एक संचालक पर 20 हजार रुपये और दूसरे पर 10 हजार रुपये का जुर्माना किए जाने की जानकारी है। एएसपी विवेक कुमार ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर साउंड संचालकों की पहचान कर रही है। आगे भी हो सकती है कार्रवाई पुलिस की कार्रवाई अभी केवल दर्ज प्रकरणों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। फुटेज में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित साउंड संचालकों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

Ratlam News: रतलाम के आदिवासी पीजी छात्रावास में आधी रात हड़कंप, 15-20 लोगों के हथियार लेकर घुसने का आरोप

Ratlam News: रतलाम के विरियाखेड़ी आदिवासी पीजी छात्रावास में 23 अगस्त की रात 15-20 लोगों के हथियार लेकर घुसने का आरोप, CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: विरियाखेड़ी स्थित आदिवासी पीजी छात्रावास में 23 अगस्त 2026 की देर रात कथित तौर पर बड़ी संख्या में बाहरी लोगों के घुसने का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, रात करीब 1:08 बजे 15 से 20 लोग छात्रावास परिसर में दाखिल हुए, जिनमें कुछ के हाथों में चाकू, लकड़ी, लोहे की रॉड और पत्थर जैसी वस्तुएं दिखाई देने का दावा किया गया है। घटना का वीडियो देखे छात्रावास में उस समय करीब 50 से 60 छात्र मौजूद थे और अधिकांश अपने कमरों में सो रहे थे। आरोप है कि परिसर में घुसे लोगों ने करीब 30 से 35 मिनट तक गलियारों और अन्य हिस्सों में घूमकर हंगामा किया तथा कुछ कमरों के दरवाजों पर लात और हथियारों से वार किए। घटना के बाद छात्रावास में रहने वाले छात्रों के बीच डर का माहौल बनने की बात शिकायत में कही गई है। रात 1:08 बजे मुख्य द्वार से प्रवेश का दावा शिकायत में उल्लेख है कि 23 अगस्त की रात करीब 1:08 बजे संदिग्ध लोग छात्रावास के मुख्य द्वार से अंदर आए। उनके हाथों में कथित तौर पर अलग-अलग तरह की वस्तुएं थीं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने हथियार बताया है। बताया गया है कि ये लोग छात्रावास के गलियारों और परिसर में काफी देर तक घूमते रहे। इस दौरान छात्रों के कमरों के दरवाजों पर भी कथित तौर पर लात मारने और हथियारों से वार करने जैसी हरकतें की गईं। CCTV फुटेज में कैद होने का दावा घटना को लेकर सबसे अहम साक्ष्य छात्रावास परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को बताया गया है। शिकायत में कहा गया है कि संदिग्ध लोगों की आवाजाही और उनकी कथित हरकतें कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि CCTV फुटेज को पुलिस की सुरक्षा में सुरक्षित लिया जाए, ताकि घटना की जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट या गायब न हों। छात्रों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल आदिवासी पीजी छात्रावास में बड़ी संख्या में छात्र निवास करते हैं। रात के समय परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश की शिकायत ने छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में यह भी पूछा गया है कि इतनी संख्या में लोग छात्रावास परिसर में किस उद्देश्य से पहुंचे थे और उनके पास कथित तौर पर धारदार हथियार या अन्य वस्तुएं क्यों थीं। हालांकि, इन लोगों की पहचान और उनके छात्रावास में पहुंचने के वास्तविक उद्देश्य की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस जांच से सामने आएगा पूरा मामला फिलहाल उपलब्ध शिकायत में घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मौके पर हुए नुकसान की जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

0%