Ratlam News: रतलाम में कपास और मक्का की आड़ में उगा रहे थे गांजा, पुलिस पहुंची तो भागने लगे दो युवक; खेत से मिले 127 पौधे 

Ratlam News: रतलाम के शिवगढ़ क्षेत्र में पुलिस ने कपास और मक्का की फसल के बीच उगाए गए गांजे के 127 पौधे जब्त किए। डेढ़ लाख की कीमत के पौधों के साथ दो आरोपी गिरफ्तार हुए। रतलाम- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र में अवैध गांजे की खेती का मामला सामने आया है। यहां ग्राम जाम्बुकुड़ी में कपास और मक्का की फसल के बीच गांजे के पौधे उगाए जा रहे थे। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने खेत में दबिश दी तो वहां काम कर रहे दो युवक भागने का प्रयास करने लगे। पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। खेत की तलाशी लेने पर पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर गांजे के 127 हरे पौधे मिले। इनका कुल वजन 17 किलो 25 ग्राम निकला, जबकि अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 50 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस ने सभी पौधे जब्त कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई 9 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में की गई। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मुखबिर ने दी थी खेत में गांजा उगाने की सूचना शिवगढ़ थाना पुलिस को 9 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि ग्राम जाम्बुकुड़ी निवासी प्रभुलाल पारगी ने अपने खेत में अवैध रूप से गांजे के पौधे लगा रखे हैं। सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी निरीक्षक लिलियन मालवीय के नेतृत्व में पुलिस टीम तैयार की गई। टीम ने गांव पहुंचकर संबंधित खेत की घेराबंदी की और दबिश दी। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान खेत में दो व्यक्ति काम करते दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने पंचों और पुलिस बल की सहायता से उन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में दोनों की पहचान प्रभुलाल पिता रखमा पारगी (35), निवासी जाम्बुकुड़ी और प्रकाश पिता विश्राम देवधा (29), निवासी मनासा, हाल मुकाम जाम्बुकुड़ी के रूप में हुई। कपास और मक्का की फसल के बीच अलग-अलग जगह लगाए थे पौधे पुलिस ने जब खेत की तलाशी ली तो कपास और मक्का की फसल के बीच अलग-अलग स्थानों पर गांजे जैसे हरे पौधे दिखाई दिए। इसके बाद पंचों की मौजूदगी में पौधों की पहचान और गिनती की गई। खेत से कुल 127 पौधे बरामद हुए। इनका वजन 17.025 किलोग्राम पाया गया। पुलिस ने जब्त पौधों की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए आंकी है। प्रारंभिक कार्रवाई में सामने आया कि गांजे के पौधे सामान्य फसलों के बीच उगाए गए थे। दो आरोपी गिरफ्तार, एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज शिवगढ़ पुलिस ने मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों में प्रभुलाल पिता रखमा पारगी, उम्र 35 वर्ष, ग्राम जाम्बुकुड़ी का निवासी है। दूसरा आरोपी प्रकाश पिता विश्राम देवधा, उम्र 29 वर्ष, मूल रूप से ग्राम मनासा का रहने वाला है और वर्तमान में जाम्बुकुड़ी में रह रहा था। पुलिस अब अवैध खेती से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पौधे कब लगाए गए थे और इनके संबंध में अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं, इन पहलुओं को लेकर जांच की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई रतलाम जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती, बिक्री और तस्करी रोकने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जाम्बुकुड़ी में हुई कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विवेक कुमार लाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर राकेश पन्द्रो और एसडीओपी रतलाम ग्रामीण किशोर पाटनवाला के मार्गदर्शन में की गई। एसडीओपी सैलाना लेखराज मीणा (आईपीएस) के नेतृत्व में शिवगढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक लिलियन मालवीय और उनकी टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई में उपनिरीक्षक प्रतापसिंह भदोरिया, उपनिरीक्षक अजमेरसिंह भुरिया, प्रधान आरक्षक जितेन्द्रपालसिंह राठौर, विक्रमसिंह घोसरे, रघुवीर सिंह, आरक्षक अनिल सूर्यवंशी, मनीष खराड़ी, महिला आरक्षक सावित्री मकवाने और रेणु डावर की भूमिका रही। अवैध खेती से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी शिवगढ़ क्षेत्र में सामने आए इस मामले के बाद पुलिस ने जब्त पौधों को प्रकरण में शामिल कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है। फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध खेती से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं। कपास और मक्का की फसल के बीच गांजे के पौधे मिलने की इस कार्रवाई ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में मादक पदार्थों की अवैध खेती का मामला सामने ला दिया है।

Ratlam News: रतलाम में फर्जी नारकोटिक्स टीआई बनकर कारोबारी से 3.45 करोड़ की ठगी का आरोप, मकान-प्लॉट भी अपने नाम 

Ratlam News: रतलाम में खुद को नारकोटिक्स टीआई बताकर महिला पर प्रॉपर्टी कारोबारी से 3.45 करोड़ रुपये ठगने, मकान और प्लॉट अपने नाम कराने का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया केस। रतलाम- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क| Ratlam News: रतलाम में खुद को नारकोटिक्स विभाग की टीआई बताकर एक प्रॉपर्टी कारोबारी से करोड़ों रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। माणकचौक थाना पुलिस ने तेजानगर निवासी कारोबारी रुपेश चपरोत की शिकायत पर सपना ठाकुर नाम की महिला के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत में 3 करोड़ 45 लाख 75 हजार 900 रुपये की धोखाधड़ी के साथ प्लॉट और मकान अपने नाम कराने का आरोप लगाया गया है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, महिला ने कारोबारी को दूसरे व्यक्ति के खिलाफ चल रहे हुंडी की दलाली से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। उसने कथित तौर पर मकान और फ्लैट कुर्क करवाकर रकम वापस दिलाने का आश्वासन दिया। इसी भरोसे में कारोबारी ने महिला को लाखों रुपये दिए और बाद में अपनी संपत्ति भी उसके नाम करवा दी। शिकायत में यह भी आरोप है कि महिला ने कारोबारी और उसकी बेटी को झूठे एनडीपीएस केस में फंसाने तथा जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल ये सभी आरोप शिकायत पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कैसे शुरू हुआ ठगी का मामला? रुपेश चपरोत के अनुसार, दिसंबर 2025 में विजय लोढ़ा के खिलाफ हुंडी की दलाली के नाम पर लाखों रुपये हड़पने का मामला न्यायालय में चल रहा था। इसी दौरान 10 से 15 दिसंबर के बीच उनके मोबाइल पर दो अलग-अलग नंबरों से फोन आए। फोन करने वाली महिला ने अपना नाम सपना ठाकुर बताया और खुद को मंदसौर की नारकोटिक्स टीआई बताया। उसने विजय लोढ़ा के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी मांगी। कारोबारी ने उसके कहने पर एफआईआर की प्रति वाट्सएप से भेज दी। इसके बाद महिला लगातार संपर्क में रही। उसने विजय लोढ़ा के मकान और फ्लैट की कुर्की सहित कानूनी कार्रवाई करवाकर कारोबारी की रकम वापस दिलाने का भरोसा दिया। शिकायत के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के नाम पर महिला ने कारोबारी से अलग-अलग समय पर रुपये लेना शुरू कर दिया। नकदी, बैंक ट्रांसफर और उधारीनामा के नाम पर रुपये लेने का आरोप शिकायत में बताया गया है कि मकान और फ्लैट से संबंधित कार्रवाई के नाम पर महिला ने करीब 70 लाख रुपये नकद लिए। इसके अलावा कारोबारी के जीजा कमल मल्लारा को मुंबई के एक मामले में मदद दिलाने का भरोसा देकर 15 लाख रुपये लेने का आरोप भी लगाया गया है। फरवरी 2026 में 42 लाख रुपये का उधारीनामा लिखवाया गया। इसके बाद 22 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से महिला के खाते में ट्रांसफर करवाए गए। स्टाम्प ड्यूटी और अन्य खर्चों के नाम पर 15 लाख रुपये और लेने की बात भी शिकायत में कही गई है। प्लॉट अपने नाम करवाने का भी आरोप रुपेश चपरोत ने शिकायत में आरोप लगाया कि विजय लोढ़ा के खिलाफ चल रहे मामले में उन्हें न्यायालय के सामने उधारीदार दिखाने के लिए प्रमाण की जरूरत बताई गई थी। इसी बहाने सपना ठाकुर ने तुलसी विहार कॉलोनी में स्थित उनका 13 बाय 55 फीट का एलआईजी-06 प्लॉट अपने नाम करवा लिया। महिला ने जल्द ही प्लॉट वापस करने का भरोसा दिया था। इसके बाद नामली रोड क्षेत्र में पेट्रोल पंप शुरू करने और उसमें निवेश करने का प्रस्ताव रखा गया। शिकायत के अनुसार, केसीसी लोन भरने के नाम पर भी करीब 20 लाख रुपये लिए गए। बेटी की शादी के लिए रखे सोने के जेवर भी लेने की शिकायत कारोबारी ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी मुस्कान की शादी के लिए करीब 105 ग्राम सोने के जेवर जमा किए गए थे। आरोप है कि महिला ने ये जेवर भी अपने पास रख लिए। इसके बाद विजय लोढ़ा के मामले में कारोबारी को दिवालिया दिखाने और हाईकोर्ट में केस मजबूत करने की बात कहकर तेजानगर स्थित उनका मकान भी अपने नाम करवा लिया गया। मकान की रजिस्ट्री के बाद 20 लाख रुपये वापस लेने का आरोप शिकायत के मुताबिक, तेजानगर स्थित मकान के बेचाननामा में उसकी कीमत 32 लाख 93 हजार रुपये दर्शाई गई थी। बैंक के माध्यम से 20 लाख रुपये दिए गए। कारोबारी का आरोप है कि रजिस्ट्री के अगले दिन महिला के कहने पर उन्होंने अपने बैंक खातों से 20 लाख रुपये नकद निकालकर उसे वापस दे दिए। महिला ने दस दिन में मकान की रजिस्ट्री फिर से उनके नाम कराने का भरोसा दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिकायत में आरोप है कि महिला ने मकान बेचने के संबंध में एक वीडियो भी बनवाया। उसमें कारोबारी से कहलवाया गया कि उन्होंने अपना मकान 1 करोड़ 30 लाख रुपये में बेच दिया है और उस पर कोई कर्ज या उधारी नहीं है। साथ ही भाई-बहनों को भी बिक्री पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कहलवाई गई। कारोबारी के अनुसार, वीडियो महिला ने खुद बनाया था। बाद में मकान का नामांतरण भी उसके नाम करवा लिया गया। मकान पर ताला लगवाकर खाली करवाने का आरोप रुपेश चपरोत ने शिकायत में बताया कि महिला ने बाद में उनके मकान पर ताले लगवा दिए। उसने कथित तौर पर कहा कि हाईकोर्ट की टीम सर्वे के लिए आने वाली है और उन्हें 15 दिन बाद वापस मकान में आने को कहा। इसके बाद कारोबारी अपनी पत्नी और बेटी के साथ भाई के काटजू नगर स्थित मकान में रहने चले गए। शिकायत के अनुसार, इसके बावजूद महिला लगातार उनसे रुपये मांगती रही। एनडीपीएस केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत कारोबारी ने आरोप लगाया कि अतिरिक्त रुपये देने से इनकार करने पर महिला ने उन्हें और उनकी बेटी को धमकियां दीं। शिकायत के मुताबिक, महिला ने एमडी पाउडर रखकर झूठे एनडीपीएस केस में फंसाने की धमकी दी। इसके अलावा खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बताकर एनकाउंटर करने की बात कहने, बेटी मुस्कान का रिश्ता तुड़वाने और रुपये नहीं देने पर जान से खत्म करने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। मोबाइल फॉर्मेट करवाने और सिम अपने पास रखने का आरोप … Read more

Ratlam News: रतलाम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवीबाई हत्याकांड का खुलासा, जमीन का हिस्सा नहीं देना पड़ा भारी, पिता-बेटे ने की हत्या

Ratlam News: रतलाम के शिवगढ़ क्षेत्र के नयाखेड़ा गांव में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवीबाई डामोर की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। जमीन विवाद में पिता-बेटे गिरफ्तार। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र के नयाखेड़ा गांव में 11 सितंबर को घर के आंगन में मिले आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवीबाई डामोर के शव की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने मामले में महिला के काका ससुर बद्दा डामोर और उसके बेटे बसंतीलाल उर्फ गुड्डा को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि जमीन में हिस्से को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण दोनों आरोपियों ने देवीबाई की हत्या की योजना बनाई थी। आरोप है कि रात के समय दोनों ने महिला पर धारदार हथियार से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी, वारदात के समय पहने गए कपड़े और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। सुबह घर के आंगन में मिला था महिला का शव 11 सितंबर की सुबह नयाखेड़ा गांव निवासी अन्नुसिंह डामोर खेत पर काम करने जा रहा था। रोजाना की तरह देवीबाई अपने घर के बरामदे में खाट पर सोती थी, लेकिन उस दिन वह जमीन पर पड़ी हुई मिली। अन्नुसिंह ने पास जाकर देखा तो महिला खून से लथपथ थी। उसने तुरंत शिवगढ़ थाना पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान महिला के सिर पर धारदार हथियार से गंभीर चोट के निशान मिले। प्रारंभिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। हत्या की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमित कुमार सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मामले के खुलासे के लिए विशेष पुलिस टीम गठित की गई। रिश्ते के देवर पर पुलिस को हुआ संदेह जांच के दौरान पुलिस को महिला के पति के काका के बेटे बसंतीलाल उर्फ गुड्डा पर संदेह हुआ। रिश्ते में वह देवीबाई का देवर लगता था। पुलिस ने पहले बसंतीलाल से पूछताछ की। इसके बाद उसके पिता बद्दा डामोर से भी पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने देवीबाई की हत्या में शामिल होना स्वीकार किया। जमीन के हिस्से को लेकर चल रहा था विवाद शिवगढ़ थाना प्रभारी रणजीतसिंह मकवाना के अनुसार, देवीबाई और बसंतीलाल के बीच वर्ष 2017 से संबंध थे। इस मामले की जानकारी परिवार और समाज के लोगों को भी थी। पुलिस के मुताबिक, उस समय देवीबाई के रहने, भरण-पोषण और संपत्ति में हिस्से को लेकर परिवार तथा समाज के स्तर पर सहमति बनी थी। बसंतीलाल के पिता बद्दा ने कथित रूप से देवीबाई को अपने बेटे के साथ रखने, परिवार की जमीन में आधा हिस्सा देने, बच्चों के भरण-पोषण और रहने के लिए मकान उपलब्ध कराने की बात कही थी। बाद में देवीबाई के रहने के लिए मकान बना दिया गया, लेकिन जमीन में आधा हिस्सा देने की बात पूरी नहीं हुई। इसी मुद्दे को लेकर महिला और दोनों आरोपियों के बीच लंबे समय से विवाद और कहासुनी होती रहती थी। रात करीब 3 बजे घर पहुंचकर किया हमला पुलिस पूछताछ के अनुसार, जमीन विवाद और लगातार हो रही कहासुनी के बाद दोनों आरोपियों ने देवीबाई की हत्या की योजना बनाई। 11 सितंबर की रात करीब 3 बजे बसंतीलाल और उसका पिता बद्दा देवीबाई के घर पहुंचे। पुलिस का कहना है कि महिला के सोते समय दोनों ने धारदार हथियार से उस पर हमला किया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण देवीबाई की मौत हो गई। वारदात के बाद दोनों आरोपी वहां से चले गए। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कुल्हाड़ी, वारदात के समय पहने गए कपड़े और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। कई थाना पुलिस और साइबर सेल ने की जांच हत्याकांड के खुलासे में शिवगढ़ थाना पुलिस के साथ रावटी और सरवन थाना पुलिस की टीम की भी भूमिका रही। इसके अलावा साइबर सेल और अन्य पुलिस अधिकारियों ने जांच में सहयोग किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

संत कमल किशोर नागर को धमकी से आक्रोश, रतलाम नागर समाज ने एसपी को सौंपा ज्ञापन

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। रतलाम में पूज्य संत श्री कमल किशोर जी नागर को कथा के दौरान प्राप्त हुए धमकी भरे पत्र के मामले ने नागर ब्राह्मण समाज में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना के विरोध में समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य के गृह मंत्री के नाम पुलिस अधीक्षक रतलाम को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। नागर ब्राह्मण समाज रतलाम का कहना है कि संत कमल किशोर नागर मालवा क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक पहचान से जुड़े प्रतिष्ठित संत हैं। ऐसे में उन्हें धमकी मिलना गंभीर विषय है और प्रशासन को इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए। बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद ज्ञापन नागर ब्राह्मण समाज रतलाम के अध्यक्ष जितेंद्र नागर, रतलाम नागर ब्राह्मण न्यास के अध्यक्ष संजय दवे और नागर महिला मंडल की अध्यक्षा मीनाक्षी रावल के नेतृत्व में सौंपा गया। इस दौरान समाज के पदाधिकारी, प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने संत को प्राप्त धमकी भरे पत्र की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की। ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें ज्ञापन के माध्यम से समाज ने पुलिस और प्रशासन के सामने निम्न मांगें रखीं— गौसेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित हैं संत समाज के सदस्यों ने कहा कि संत श्री कमल किशोर नागर लंबे समय से गौसेवा, धर्म, संस्कार और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके धार्मिक और सामाजिक योगदान को देखते हुए समाज उन्हें मालवा क्षेत्र का गौरव मानता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी संत या सामाजिक-धार्मिक व्यक्तित्व को धमकी मिलना चिंताजनक स्थिति है। इसलिए पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

Ratlam News: आधी रात शहर सराय की सड़क से फूटा पानी, पाइपलाइन लीकेज से सड़क का हिस्सा उठा

Ratlam News: रतलाम के शहर सराय में आधी रात सड़क से तेज बहाव के साथ पानी निकलने लगा। ढोलावाड़ की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज से सड़क का हिस्सा ऊपर उठा। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम के शहर सराय इलाके में गुरुवार रात करीब 12 बजे अचानक सड़क से पानी निकलने लगा। कुछ ही देर में पानी का बहाव तेज हो गया और आसपास के लोगों में हलचल मच गई। जमीन के भीतर से पानी निकलता देख रहवासियों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची हाट चौकी पुलिस ने स्थिति को देखते हुए सड़क पर बेरिकेडिंग कराई और नगर निगम को भी जानकारी दी। शुरुआती जांच के बाद सामने आया कि ढोलावाड़ से शहर में पेयजल आपूर्ति करने वाली मुख्य पाइपलाइन में लीकेज हुआ था। घटना का वीडियो देखे पानी का दबाव इतना अधिक था कि सड़क का एक हिस्सा करीब आधा फीट ऊपर उठ गया। कुछ समय तक सड़क से पानी निकलने के कारण क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सड़क से अचानक निकलने लगा पानी रात करीब 12 बजे शहर सराय क्षेत्र में लोगों ने सड़क से पानी बाहर निकलते देखा। शुरुआत में पानी का बहाव सामान्य नजर आया, लेकिन कुछ ही देर में इसकी रफ्तार बढ़ गई। पास में मौजूद एक अन्य नाली से भी जमीन के अंदर का पानी रास्ता बनाकर बाहर आने लगा। सड़क से इस तरह पानी निकलने की घटना को देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर की बेरिकेडिंग सूचना मिलने के बाद हाट चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सड़क के प्रभावित हिस्से के आसपास बेरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही को सुरक्षित किया। स्थिति को देखते हुए नगर निगम को भी सूचना दी गई, ताकि पानी के स्रोत का पता लगाकर समस्या को नियंत्रित किया जा सके। ढोलावाड़ की मुख्य पाइपलाइन में मिला लीकेज जांच के बाद पता चला कि ढोलावाड़ से पेयजल आपूर्ति करने वाली मुख्य पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण पानी तेज दबाव के साथ बाहर निकल रहा था। पानी के दबाव का असर सड़क पर भी दिखाई दिया। सड़क का एक हिस्सा करीब आधा फीट तक ऊपर उठ गया, जिससे सड़क की सतह पर भी इसका असर नजर आया। मोटर बंद होने के बाद रुका पानी रात करीब एक बजे कर्मचारियों ने मोटर बंद की। इसके बाद पाइपलाइन से निकल रहा पानी धीरे-धीरे रुक गया और क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई। घटना के दौरान किसी बड़े नुकसान या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है। अचानक सड़क से पानी निकलने के कारण कुछ समय के लिए लोगों के बीच जरूर अफरा-तफरी रही। शहर सराय में कुछ देर बनी रही स्थिति शहर सराय में हुई इस घटना ने कुछ समय के लिए लोगों का ध्यान खींच लिया। सड़क के नीचे से तेज दबाव के साथ पानी निकलने और सड़क का हिस्सा ऊपर उठने से लोग कारण जानने के लिए मौके पर पहुंचते रहे। मोटर बंद होने के बाद पानी का बहाव रुक गया, जिसके बाद हालात सामान्य हो गए।

Ratlam News: रतलाम में रेलवे भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, रेटिना टेस्ट ने खोली डमी अभ्यर्थियों की पोल

Ratlam News: रतलाम में रेलवे भर्ती PET के दौरान रेटिना टेस्ट से डमी अभ्यर्थियों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। पंकज और गौरव दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े गए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रेलवे भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा देने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बुधवार को रतलाम के रेलवे फुटबॉल मैदान में रेटिना टेस्ट और पहचान जांच के दौरान दो युवकों की पहचान वास्तविक अभ्यर्थियों से अलग मिली। इसके बाद दोनों को मौके पर पकड़ लिया गया। जांच में सामने आया कि फिरोजाबाद निवासी पंकज यादव वास्तविक अभ्यर्थी मनीष सिंह की जगह और गौरव यादव वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। दोनों मामलों में डमी अभ्यर्थियों के जरिए रेलवे भर्ती की प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश की गई थी। वीडियो देखे इससे पहले 6 सितंबर को बिहार के दो युवकों के वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह PET देने का मामला भी सामने आया था। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद रेलवे भर्ती परीक्षा की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रेटिना टेस्ट में अलग निकली पहचान रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पश्चिम रेलवे की ओर से रतलाम के रेलवे फुटबॉल मैदान में ग्रुप डी लेवल-1 पदों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही है। बुधवार सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच टाइमिंग टेक्नोलॉजी के नामित कर्मचारियों ने अभ्यर्थियों की पहचान प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान रेटिना टेस्ट के साथ फोटो और रिकॉर्ड का मिलान किया गया। जांच के दौरान परीक्षा देने पहुंचे युवकों की पहचान रिकॉर्ड में दर्ज वास्तविक अभ्यर्थियों से अलग पाई गई। संदेह होने पर आरपीएफ कर्मचारियों की मदद से दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। मनीष की जगह पंकज पहुंचा था जांच में पता चला कि 33 वर्षीय पंकज यादव, निवासी अलीनगर, फिरोजाबाद, वास्तविक अभ्यर्थी 26 वर्षीय मनीष सिंह के स्थान पर PET देने पहुंचा था। मनीष सिंह, निवासी फिरोजाबाद, परीक्षा में शामिल होने के लिए रतलाम आया ही नहीं था। मामले के सामने आने के बाद वह फरार बताया गया है। अनुज की जगह गौरव ने दी परीक्षा दूसरे मामले में 21 वर्षीय गौरव यादव, निवासी ग्राम जफराबाद, फिरोजाबाद, वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। पहचान प्रक्रिया के दौरान गौरव की जानकारी वास्तविक अभ्यर्थी के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाई। इसके बाद रेलवे अधिकारियों और आरपीएफ की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। पकड़े गए युवकों में गौरव यादव, पंकज यादव और वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर के नाम सामने आए हैं। वहीं मनीष सिंह की तलाश की जा रही है। रेलवे भर्ती में लगातार सामने आ रहे डमी अभ्यर्थी रतलाम में रेलवे भर्ती PET के दौरान यह पहला मामला नहीं है। 6 सितंबर को भी बिहार के दो युवकों के वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने का मामला सामने आया था। इसके महज तीन दिन बाद एक बार फिर डमी अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से परीक्षा की निगरानी व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि दोनों मामलों में पहचान की जांच के दौरान फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। रेटिना टेस्ट बना अहम जांच का जरिया इस मामले में रेटिना टेस्ट और फोटो रिकॉर्ड का मिलान निर्णायक साबित हुआ। शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की पहचान की पुष्टि के दौरान रिकॉर्ड से अंतर सामने आया, जिसके बाद संदिग्ध अभ्यर्थियों को रोककर जांच की गई। रेलवे भर्ती PET से जुड़ी अहम जानकारी मुख्य तथ्य: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल रेलवे भर्ती जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। रतलाम में लगातार डमी अभ्यर्थियों के मामले सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि फर्जीवाड़े की कोशिशें परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंच रही हैं। हालांकि, पहचान जांच के दौरान मामलों का पकड़ा जाना यह भी दिखाता है कि अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने के लिए तकनीकी जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Ratlam News: चद्दर पर लिटाकर जनसुनवाई में लाई गई 68 वर्षीय वृद्धा, SP कार्यालय में मचा हड़कंप

Ratlam News: रतलाम में जनसुनवाई के दौरान 68 वर्षीय बीमार वृद्धा को चद्दर पर लिटाकर लाया गया। SP अमित कुमार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए शिकायत सुनी। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। 68 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार वृद्धा को उनके परिजन चद्दर पर लिटाकर शिकायत लेकर पहुंचे। वृद्धा की हालत ऐसी थी कि वह न तो ठीक से खड़ी हो पा रही थीं और न ही बैठ सकती थीं। घटना का वीडियो देखे वृद्धा को इस तरह जनसुनवाई कक्ष तक लाया गया देखकर SP अमित कुमार ने नाराजगी जताई। उन्होंने परिजनों से कहा कि ऐसी स्थिति में वृद्धा को तकलीफ देकर ऊपर लाने की जरूरत नहीं थी। अगर उन्हें पहले सूचना दी जाती तो वे खुद नीचे आकर उनकी शिकायत सुन लेते। परिजनों ने बताया कि वृद्धा स्वयं पुलिस अधीक्षक के सामने अपनी आपबीती सुनाना चाहती थीं। इसी जिद के चलते उन्हें इस हालत में जनसुनवाई में लाना पड़ा। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पंद्रो ने वृद्धा और उनके परिजनों की शिकायत सुनी तथा संबंधित थाने को मामले में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। SP अमित कुमार ने जताई नाराजगी जनसुनवाई के दौरान जब पुलिस अधीक्षक अमित कुमार की नजर चद्दर पर लेटी वृद्धा पर पड़ी तो उन्होंने स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने परिजनों से कहा कि आवेदन लेकर वे अकेले भी आ सकते थे और वृद्धा को इस तरह लाने की जरूरत नहीं थी। SP ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि यदि उन्हें जानकारी दी जाती तो वह स्वयं नीचे आकर शिकायत सुन लेते। साथ ही उन्होंने वृद्धा को तत्काल अस्पताल ले जाने की सलाह दी, ताकि उनकी तबीयत को और परेशानी न हो। वृद्धा ने संपत्ति में धोखाधड़ी का लगाया आरोप शिकायती आवेदन के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत अलकापुरी निवासी 68 वर्षीय पुष्पा देवी ने अन्नूबाई चावड़ा, कालूराम, सुमित चावड़ा और यश शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और छल-कपट के आरोप लगाए हैं। वृद्धा के अनुसार उनकी कोई संतान नहीं है। उन्होंने घरेलू काम के लिए अन्नूबाई को रखा था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वृद्धा की अस्वस्थता का फायदा उठाते हुए उन्हें कथित तौर पर अंधेरे में रखकर मकान से संबंधित वसीयत और विक्रय-पत्र अपने नाम करवा लिया गया। शिकायत में आरोप है कि 22 अप्रैल 2026 को जालसाजी के जरिए 8.90 लाख रुपये का कथित फर्जी प्रतिफल दिखाकर रजिस्ट्रार कार्यालय में संपत्ति की रजिस्ट्री करा ली गई। बैंक खातों से 17.64 लाख रुपये की राशि का आरोप पुष्पा देवी ने अपने आवेदन में बैंक खातों में जमा राशि और एफडी से जुड़ी भी गंभीर शिकायत की है। आरोप है कि उनकी एफडी और जमा रकम में से करीब 17.64 लाख रुपये तुड़वाकर या ट्रांसफर करवाकर धोखाधड़ी की गई। इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। भतीजों से मारपीट और धमकी का भी आरोप शिकायत में संपत्ति विवाद के अलावा वृद्धा के भतीजों के साथ कथित मारपीट और धमकी का भी उल्लेख किया गया है। आवेदन के अनुसार, अगस्त में जब वृद्धा के भतीजे मकान की देखभाल के लिए पहुंचे थे, तब आरोपियों और करीब 15 से 20 लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने और घर से बाहर निकालने का भी आरोप लगाया गया है। FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग पुष्पा देवी ने मामले में आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में BNS 2023 की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत कार्रवाई की मांग का उल्लेख किया गया है। मामले की शिकायत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पंद्रो ने सुनी। संबंधित थाना पुलिस को मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति के दस्तावेजों और बैंक राशि से जुड़े आरोपों में वास्तविकता क्या है। जनसुनवाई में सामने आया संवेदनशील पहलू इस पूरे घटनाक्रम में एक तरफ जहां संपत्ति और कथित आर्थिक धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर बीमार वृद्धा का चद्दर पर लेटकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचना भी चर्चा का विषय बन गया। SP अमित कुमार की प्रतिक्रिया से यह भी सामने आया कि गंभीर रूप से बीमार या चलने में असमर्थ शिकायतकर्ता को अपनी समस्या बताने के लिए शारीरिक परेशानी उठाकर कार्यालय तक पहुंचने की आवश्यकता नहीं है। सूचना मिलने पर अधिकारी स्वयं नीचे आकर शिकायत सुन सकते हैं।

Ratlam News: रतलाम में 1950 से ज्यादा नामांतरण मामलों का रास्ता साफ, 1958-59 के रिकॉर्ड से होगी कार्रवाई

Ratlam News: रतलाम में चार साल से अटके 1950 से अधिक नामांतरण मामलों का रास्ता साफ हुआ। अब 1958-59 या बाद के राजस्व रिकॉर्ड से जमीन का नामांतरण हो सकेगा। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News; जिले में जमीन के नामांतरण को लेकर पिछले करीब चार साल से अटके 1950 से अधिक मामलों में अब समाधान की उम्मीद जगी है। 1956-57 के पुराने बंदोबस्त रिकॉर्ड को आधार बनाकर रोके गए नामांतरण मामलों में अब 1958-59 या उसके बाद उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। इस फैसले से उन जमीन मालिकों और खरीदारों को राहत मिलने की संभावना है, जो नामांतरण के लिए लंबे समय से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। पुराने रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने और बाद के दस्तावेजों में निजी स्वामित्व सामने आने के कारण बड़ी संख्या में प्रकरण उलझे हुए थे। मामले की पड़ताल के बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया ने राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व में मिले शासन के मार्गदर्शन को देखा। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि 1958-59 के रिकॉर्ड को भी नामांतरण की कार्रवाई में आधार बनाया जा सकता है। क्यों अटके थे नामांतरण के मामले? नामांतरण की समस्या की जड़ 1956-57 के बंदोबस्त रिकॉर्ड से जुड़ी हुई है। उस समय के कई अभिलेखों में बड़ी संख्या में जमीनें सरकारी खाते में दर्ज थीं। बाद के 1961-62 के खसरों में इन्हीं में से कई जमीनें निजी स्वामित्व में दर्ज दिखाई दीं। इससे रिकॉर्ड में पुरानी और नई प्रविष्टियों के बीच अंतर पैदा हो गया। सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि 1958 से 1962 के बीच के खसरा रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं बताया गया है। यह रिकॉर्ड कब और किस परिस्थिति में गायब हुआ, इससे संबंधित नस्ती भी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। जब जमीनों की खरीद-बिक्री के बाद नए नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन तहसील कार्यालय पहुंचे, तो 1956-57 के रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने के कारण कई प्रकरणों पर आपत्ति खड़ी हो गई। इसके चलते कुछ आवेदन लंबित रहे तो कुछ को निरस्त कर दिया गया। 1958-59 के रिकॉर्ड से क्या बदलेगा? अब 1956-57 के बंदोबस्त रिकॉर्ड को ही अंतिम आधार मानने के बजाय 1958-59 या उसके बाद उपलब्ध राजस्व अभिलेखों को भी देखा जा सकेगा। इससे उन मामलों में रास्ता खुल सकता है, जहां बाद के खसरों में जमीन का स्वामित्व बदल चुका है और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। कलेक्टर ने क्या कहा? कलेक्टर अजय कटेसरिया के अनुसार मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता में 1958-59 के रिकॉर्ड को देखने का प्रावधान है और इसे अधिकार अभिलेख के रूप में माना जाता है। शासन से पूर्व में मिले मार्गदर्शन के आधार पर अब संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 16 महीने पहले ही मिल चुका था शासन का मार्गदर्शन नामांतरण की इस समस्या को लेकर तत्कालीन कलेक्टर राजेश बाथम ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव से मार्गदर्शन मांगा था। इसके जवाब में 3 अप्रैल 2025 को राजस्व मंत्रालय ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, जिले में इस दिशा-निर्देश को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया। बाद में पटवारी और राजस्व निरीक्षकों से मिली जानकारी के आधार पर वर्तमान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने मामले की पड़ताल की, जिसके बाद पुराने शासन निर्देश सामने आए। जमीन मालिकों की परेशानी भी सामने आई नामांतरण अटकने से आम लोगों को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, इसके उदाहरण भी सामने आए हैं। रामलाल वाघेला ने बताया कि वह करीब छह महीने से नामांतरण के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। करमदी के पास रिंग रोड क्षेत्र में स्थित उनकी जमीन के खसरा-खतौनी रिकॉर्ड में मालिकाना हक का नाम बदलवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। दूसरे मामले में मुकेश कुमार, निवासी धामनोद, ने बताया कि जमीन का सौदा होने के बाद नामांतरण नहीं होने से आगे की प्रक्रिया अटक गई। उनका कहना है कि उन्होंने 1961-62 से आगे के उपलब्ध रिकॉर्ड भी कार्यालय में प्रस्तुत किए, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रॉपर्टी कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद जिला प्रॉपर्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पिपाड़ा का कहना है कि यदि पुराने सरकारी रिकॉर्ड की विसंगति दूर हो जाती है तो जमीन की खरीद-बिक्री और नामांतरण से जुड़ी कई समस्याएं अपने आप कम हो सकती हैं। जमीन की खरीद-बिक्री में राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में रिकॉर्ड स्पष्ट होने से खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। 1950 से अधिक लंबित मामलों पर अब नजर रतलाम जिले में करीब 1950 से अधिक नामांतरण प्रकरण लंबे समय से लंबित बताए गए हैं। अब 1958-59 या उसके बाद के उपलब्ध रिकॉर्ड को आधार बनाकर नियमानुसार कार्रवाई की संभावना बनने से इन मामलों के निराकरण का रास्ता खुल गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए नामांतरण स्वतः नहीं होगा, बल्कि संबंधित प्रकरण में रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर सक्षम राजस्व अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

Ratlam News: रतलाम में ईद मिलाद जुलूस के दौरान तेज साउंड पर कार्रवाई, 10 संचालकों पर केस

Ratlam News: रतलाम में ईद मिलादुन्नबी जुलूस के दौरान तेज साउंड और यातायात व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आईं। पुलिस ने 10 साउंड संचालकों पर केस दर्ज किए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को शहर में निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस के दौरान तेज आवाज में साउंड सिस्टम और बैंड बजने को लेकर कई जगह से शिकायतें सामने आईं। दूसरी ओर, शहर के कई हिस्सों में घंटों यातायात प्रभावित रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज ध्वनि को लेकर स्थिति उस समय और चर्चा में आ गई, जब कुछ लोगों ने स्मार्टवॉच के जरिए शोर का स्तर मापने और 117 डेसिबल तक रीडिंग मिलने के वीडियो पुलिस को भेजे। कुछ रहवासियों ने घरों में कांच के बर्तन गिरने तक की शिकायत की। शिकायतों और वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने देर शाम कार्रवाई करते हुए 10 साउंड संचालकों के खिलाफ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य संचालकों की भी पहचान की जा रही है। जुलूस में कई साउंड सिस्टम, तेज आवाज को लेकर शिकायतें जुलूस मार्ग पर करीब 15 से अधिक साउंड सिस्टम और बैंड शामिल होने की जानकारी सामने आई। कुछ साउंड सिस्टम की आवाज काफी दूर तक सुनाई देने की बात कही गई। जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के साथ इंदौर, उज्जैन और धार से भी साउंड सिस्टम बुक कराए गए थे। जुलूस के दौरान कई जगह तेज आवाज को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। जुलूस में शामिल कुछ लोग भी तेज आवाज से बचने के लिए कान बंद करते नजर आए। मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मियों के भी कान बंद करते हुए दिखाई देने की बात सामने आई। जुलूस से एक दिन पहले मंगलवार को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने एसपी अमित कुमार के साथ जुलूस मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। शांति समिति की बैठक में भी साउंड सिस्टम और ध्वनि नियंत्रण को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बावजूद जुलूस के दौरान तेज आवाज को लेकर शिकायतें सामने आईं। कुछ लोगों ने अपनी स्मार्टवॉच से शोर का स्तर मापकर वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्मार्टवॉच से प्राप्त डेसिबल रीडिंग को आधिकारिक ध्वनि मापन मानने से पहले मानक उपकरण और अधिकृत माप की पुष्टि जरूरी होती है। ध्वनि प्रदूषण के लिए निर्धारित मानक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम की आवाज संबंधित क्षेत्र के एंबिएंट नॉइज स्टैंडर्ड से अधिकतम 10 डेसिबल या 75 डेसिबल, इनमें जो कम हो, उससे अधिक नहीं होनी चाहिए। आवासीय क्षेत्रों के लिए एंबिएंट नॉइज स्टैंडर्ड दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल बताया गया है। सामान्य तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहता है, हालांकि संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुसार परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। सुबह से शाम तक कई इलाकों में यातायात प्रभावित ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के चलते शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक कई प्रमुख हिस्सों में वाहनों की आवाजाही धीमी रही और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। रूट डायवर्जन की व्यवस्था के बावजूद कुछ स्थानों पर यातायात दबाव कम नहीं हो सका। जुलूस की भीड़, साउंड सिस्टम और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए गए। पार्षद कुरैशी की मौत के बाद भी साउंड बजने की शिकायत खबर के अनुसार पार्षद कुरैशी की मौत की सूचना मिलने के बाद भी जुलूस समाप्त होने तक कई स्थानों पर साउंड सिस्टम तेज आवाज में बजते रहे। इस घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मौत और तेज ध्वनि के बीच किसी प्रत्यक्ष चिकित्सकीय संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए दोनों घटनाओं को सीधे तौर पर जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। देर शाम पुलिस की कार्रवाई, 10 पर प्रकरण तेज आवाज को लेकर मिली शिकायतों के बाद पुलिस ने देर शाम कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार कुल 10 साउंड संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। मामले में थाना स्तर पर कार्रवाई की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक माणकचौक थाना क्षेत्र में पांच, दीनदयाल नगर में एक और स्टेशन रोड थाना क्षेत्र में दो प्रकरण दर्ज किए गए। शेष मामलों से संबंधित कार्रवाई का विवरण पुलिस की ओर से अलग-अलग स्तर पर सामने आना है। पुलिस ने तीन साउंड सिस्टम जब्त किए हैं। वहीं, एक संचालक पर 20 हजार रुपये और दूसरे पर 10 हजार रुपये का जुर्माना किए जाने की जानकारी है। एएसपी विवेक कुमार ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर साउंड संचालकों की पहचान कर रही है। आगे भी हो सकती है कार्रवाई पुलिस की कार्रवाई अभी केवल दर्ज प्रकरणों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। फुटेज में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित साउंड संचालकों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

Ratlam News: रतलाम में किन्नरों को जबरन कार में बैठाने का आरोप, मारपीट के बाद FIR

Ratlam News: रतलाम में किन्नरों के दो समूहों के विवाद में जबरन कार में बैठाने और मारपीट के आरोप लगे हैं। पूनम जान समेत अन्य पर जीआरपी ने केस दर्ज किया है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम में किन्नरों के दो समूहों के बीच चल रहे विवाद ने अब पुलिस थाने तक पहुंच बना ली है। शिकायत के मुताबिक, तीन किन्नरों को कथित तौर पर चाकू और डंडे दिखाकर जबरन कार में बैठाया गया और बाद में सुनसान स्थान पर ले जाकर उनके साथ मारपीट की गई। मामले में पूनम जान समेत अन्य लोगों के खिलाफ जीआरपी ने केस दर्ज किया है। शिकायतकर्ता किन्नर दीपा गुरु, जिनकी पहचान दिशा जागीरदार के रूप में बताई गई है, ने पुलिस को दिए आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विवाद गुरु बदलने, रतलाम छोड़ने और शहर में बस्ती मांगने के क्षेत्र को लेकर है। घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आने की बात कही गई है। घटना का CCTV देखे जीआरपी के अनुसार, शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। क्या है पूरा मामला? शिकायत के अनुसार, मंगलवार रात करीब 12:30 बजे दीपा गुरु रतलाम रेलवे स्टेशन से फ्रीगंज रोड स्थित ऑन व्हील रेस्टोरेंट के पीछे से जा रही थीं। इसी दौरान उन्हें किन्नर सनम मिलीं और दोनों साथ हो गईं। आरोप है कि इसी दौरान काले रंग की एक स्कॉर्पियो वहां आकर रुकी। शिकायत में कहा गया है कि वाहन में किन्नर पूनम जान, उनका पति नायक और अन्य साथी मौजूद थे। दीपा गुरु का आरोप है कि चाकू और डंडे दिखाकर उन्हें और सनम को जबरन वाहन में बैठाया गया। दोनों के मोबाइल फोन भी ले लिए गए। सैलाना बस स्टैंड से दो अन्य किन्नरों को भी बैठाने का आरोप शिकायत के मुताबिक, स्कॉर्पियो सैलाना बस स्टैंड पहुंची, जहां करीना और नित्या नाम की दो अन्य किन्नर मिलीं। आरोप है कि उन्हें भी धमकाकर कार में बैठाया गया और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए गए। इसके बाद सभी को भगतन की बावड़ी क्षेत्र स्थित पूनम जान के घर ले जाया गया। वहां से दिव्या को भी साथ लिया गया और फिर सभी को डी-मार्ट रोड के पास एक सुनसान स्थान पर ले जाने का आरोप लगाया गया। बेसबॉल बैट और डंडों से मारपीट का आरोप दीपा गुरु ने शिकायत में आरोप लगाया कि सुनसान स्थान पर उनके साथ लात-घूंसों के अलावा बेसबॉल बैट और डंडों से मारपीट की गई। शिकायत में दो साथियों को चाकू से घायल किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। आरोप है कि घटना के बाद सभी को कथित तौर पर राजी-खुशी छोड़ने के वीडियो बनाए गए, ताकि मामले को अलग रूप दिया जा सके। इसके बाद उन्हें मछली मार्केट के पास छोड़ने की बात शिकायत में कही गई है। गुरु बदलने और रतलाम छोड़ने का दबाव? शिकायतकर्ता के मुताबिक, पूरे विवाद की एक वजह गुरु बदलने और रतलाम में बस्ती मांगने के क्षेत्र को लेकर दबाव बनाना है। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने और एक किन्नर का पर्स छीनने का आरोप भी लगाया गया है। पर्स में करीब 10 से 15 हजार रुपये होने की बात शिकायत में कही गई है। इन सभी आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और फिलहाल इन्हें शिकायतकर्ता के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है। किन्नर काजल और पूनम जान के समूह के बीच विवाद मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, विवाद किन्नर गुरु काजल और पूनम जान के समूह के बीच बताया जा रहा है। रतलाम शहर में दोनों समूहों के अलग-अलग क्षेत्र होने की बात भी सामने आई है। घटना रेलवे क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण जीआरपी ने मामले में कार्रवाई की है। शिकायत मिलने के बाद इंदौर से जीआरपी डीएसपी ज्योति शर्मा रतलाम मेडिकल कॉलेज पहुंचीं और घायल किन्नरों से घटनाक्रम की जानकारी ली। जीआरपी ने दर्ज किया मामला इंदौर जीआरपी डीएसपी ज्योति शर्मा के अनुसार, किन्नर की शिकायत पर पूनम जान समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

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