MP News: कोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप! दो TI समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR, 30 मिनट की कार्रवाई पर उठे सवाल

MP News: राजस्थान की चौमहला कोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश पुलिस के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज हुई है। 30 मिनट में की गई मादक पदार्थ जब्ती कार्रवाई को कोर्ट ने संदिग्ध माना। मध्यप्रदेश- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश पुलिस पर बड़ी कार्रवाई हुई है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट के आदेश के बाद एमपी पुलिस के दो थाना प्रभारियों (TI) समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के डग थाना क्षेत्र में की गई मादक पदार्थों की जब्ती कार्रवाई से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश के आगर मालवा की कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की थी। पुलिस ने दावा किया था कि कार्रवाई के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य का मादक पदार्थ (एमडी), स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम और हथियार बरामद किए गए। हालांकि आरोप है कि इस कार्रवाई की पूरी जानकारी स्थानीय डग पुलिस को नहीं दी गई। केवल फोन पर महिलाओं द्वारा अभद्रता किए जाने की सूचना दी गई, लेकिन छापेमारी की सही जगह और सहायता की आवश्यकता के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई। कोर्ट ने क्यों माना कार्रवाई को संदिग्ध? गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि एमपी पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए गांव में प्रवेश किया, घरों में तोड़फोड़ की और उनके परिवार को झूठे मामले में फंसा दिया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार: 30 मिनट में पूरी कार्रवाई पर सवाल इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने कार्रवाई को संदिग्ध मानते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। किन पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला? कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट, पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा, शुभम सहित पूरी टीम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 10 लाख रुपये मांगने का भी आरोप परिवादी हमीद खान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की थी। रुपये देने में असमर्थता जताने पर उनके परिवार के दो सदस्यों शाहिर खान और मनोवर खान को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मादक पदार्थों का मामला दर्ज कर दिया गया। पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके घरों की तलाशी में केवल एक लाइसेंसशुदा बंदूक, एक एयर गन और सात मोबाइल फोन मिले थे। किसी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था। अब आगे क्या? राजस्थान में दर्ज हुई यह एफआईआर मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। दोनों राज्यों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला पुलिस कार्रवाई और एनडीपीएस मामलों की जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।

ट्रेन में सीट नहीं मिली तो युवक ने फैलाई बम की अफवाह, रेलवे स्टेशन पर मचा हड़कंप; जांच के बाद गिरफ्तार

लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर सीट नहीं मिलने से नाराज युवक ने ट्रेन में बम होने की झूठी सूचना फैला दी। सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तलाशी ली, जांच में मामला फर्जी निकला। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लखनऊ- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर एक युवक की हरकत से रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। ट्रेन में सीट नहीं मिलने से नाराज युवक ने ट्रेन में बम होने की झूठी सूचना दे दी। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई और ट्रेन की सघन जांच शुरू कर दी गई। सीट नहीं मिलने पर फैलाई बम की अफवाह पुलिस के मुताबिक, तेलंगाना निवासी 26 वर्षीय युवक ट्रेन से सफर करने के लिए ऐशबाग रेलवे स्टेशन पहुंचा था। ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उसे सीट नहीं मिल सकी। इसी बात से नाराज होकर उसने ट्रेन में बम रखे होने की झूठी सूचना फैला दी। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन अलर्ट हो गया। सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल ट्रेन को रोककर सभी डिब्बों की बारीकी से जांच शुरू कर दी। यात्रियों में मची अफरा-तफरी बम की सूचना फैलते ही यात्रियों में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्रियों को एहतियात के तौर पर ट्रेन से नीचे उतारा गया। स्टेशन परिसर और ट्रेन के प्रत्येक कोच की गहन तलाशी ली गई। घंटों चली जांच के बाद भी किसी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रेन को सुरक्षित घोषित कर आगे के लिए रवाना कर दिया। पूछताछ में सामने आई सच्चाई जांच के दौरान पुलिस ने सूचना देने वाले युवक की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि सीट नहीं मिलने के कारण उसने गुस्से में आकर बम की झूठी सूचना दी थी। जीआरपी ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने दी चेतावनी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बम जैसी झूठी सूचनाएं सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करती हैं और आपातकालीन संसाधनों का अनावश्यक उपयोग करवाती हैं। इससे यात्रियों में भय का माहौल बनता है और प्रशासन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी केवल सत्यापित आधार पर ही संबंधित एजेंसियों को दें।

E20 Petrol Insurance Claim: E20 पेट्रोल डलवाने पर रिजेक्ट हो जाएगा इंश्योरेंस क्लेम? बढ़े विवाद के बाद कंपनी ने दी बड़ी सफाई

E20 Petrol Insurance Claim को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है? ICICI Lombard ने जारी की नई सफाई, जानिए पूरी सच्चाई। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। E20 Petrol Insurance Claim: देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 Fuel) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसी बीच वाहन मालिकों के बीच एक नया डर पैदा हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंजन या अन्य पार्ट्स को नुकसान होता है तो क्या इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है? इस मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बाद ICICI Lombard ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। क्या था पूरा विवाद? हाल ही में ICICI Lombard द्वारा जारी किए गए एक FAQ (Frequently Asked Questions) में कहा गया था कि यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी में ऐसा ईंधन इस्तेमाल करता है जिसके लिए वाहन डिजाइन नहीं किया गया है, तो इसे गलत उपयोग या लापरवाही माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस क्लेम की समीक्षा अलग तरीके से की जा सकती है। इसके अलावा FAQ में यह भी बताया गया था कि मोटर इंश्योरेंस पॉलिसियां आमतौर पर ऐसे नुकसान को कवर नहीं करतीं जो धीरे-धीरे समय के साथ विकसित होते हैं, जैसे ईंधन से होने वाला रासायनिक क्षरण या इंजन के अंदरूनी हिस्सों की खराबी। पुरानी गाड़ियों के मालिकों में बढ़ी चिंता इस जानकारी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। खासकर उन वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई जिनकी गाड़ियां E20 फ्यूल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। लोगों को डर था कि कहीं E20 पेट्रोल भरवाने के कारण भविष्य में उनका इंश्योरेंस क्लेम खारिज न कर दिया जाए। ICICI Lombard ने दी नई सफाई विवाद बढ़ने के बाद ICICI Lombard ने नया स्पष्टीकरण जारी करते हुए ग्राहकों को आश्वस्त किया। कंपनी ने स्पष्ट कहा कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी अमान्य नहीं होगी। कंपनी के अनुसार, E20 पेट्रोल का उपयोग करना किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं माना जाएगा। यह सरकार की पर्यावरण-अनुकूल पहल का हिस्सा है और कंपनी केवल ईंधन के प्रकार के आधार पर किसी क्लेम को रिजेक्ट नहीं करती। क्लेम मंजूर होने का आधार क्या है? कंपनी ने कहा कि किसी भी मोटर इंश्योरेंस क्लेम का फैसला मुख्य रूप से दुर्घटना, चोरी या अन्य अप्रत्याशित घटनाओं के आधार पर किया जाता है। यदि कोई क्लेम सामान्य पेट्रोल या डीजल के इस्तेमाल के दौरान मान्य होता है, तो वही क्लेम E20 पेट्रोल के उपयोग की स्थिति में भी वैध रहेगा। हालांकि, सामान्य इंश्योरेंस नियमों के अनुसार धीरे-धीरे होने वाली मैकेनिकल खराबी या सामान्य घिसावट अब भी पॉलिसी कवरेज से बाहर रह सकती है। E20 Fuel क्या है? E20 फ्यूल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। कई नए वाहन पहले से ही E20-रेडी तकनीक के साथ बाजार में उपलब्ध हैं।

CIBIL Score 730 से कम? RBI के नए ECL नियम के बाद होम, कार और एजुकेशन लोन लेना हो सकता है बेहद मुश्किल

RBI का नया Expected Credit Loss (ECL) Framework 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। जानिए क्यों CIBIL Score 730 से कम होने पर होम लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, RBI का नया ECL Framework: CIBIL Score 730 से कम होने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें अगर आपका CIBIL Score 730 से कम है और आप भविष्य में होम लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2027 से नया Expected Credit Loss (ECL) Framework लागू करने जा रहा है, जिसके बाद बैंकों द्वारा लोन देने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सकती है। क्या है RBI का Expected Credit Loss (ECL) Framework? वर्तमान व्यवस्था में बैंक तब तक किसी लोन को जोखिमपूर्ण नहीं मानते, जब तक वह लंबे समय तक बकाया रहकर NPA (Non-Performing Asset) नहीं बन जाता। लेकिन ECL Framework के तहत बैंक को लोन देने से पहले ही संभावित नुकसान का आकलन करना होगा। इसका मतलब है कि बैंक ग्राहक के वित्तीय व्यवहार, भुगतान इतिहास, CIBIL Score, आय, रोजगार की स्थिरता और भविष्य में डिफॉल्ट की संभावना जैसे कई कारकों का गहन मूल्यांकन करेंगे। 730 से कम CIBIL Score वालों पर क्या होगा असर? रिपोर्ट्स के अनुसार देश के लगभग 62 प्रतिशत लोगों का CIBIL Score 730 से नीचे है। ऐसे ग्राहकों को ECL लागू होने के बाद लोन प्राप्त करने में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। बैंकों को जोखिम वाले ग्राहकों के लिए ज्यादा पूंजी अलग रखनी होगी। यदि कोई ग्राहक लगातार दो EMI चूकता है, तो बैंक को उसके लिए पहले की तुलना में कई गुना अधिक प्रावधान रखना पड़ सकता है। ऐसे में बैंक कम क्रेडिट स्कोर वाले आवेदकों को लोन देने से बच सकते हैं। महंगा हो सकता है लोन विशेषज्ञों का मानना है कि कम CIBIL Score वाले ग्राहकों को भविष्य में तीन स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है: 1. लोन रिजेक्ट होने की संभावना बढ़ेगी कम स्कोर वाले आवेदकों के आवेदन सीधे खारिज किए जा सकते हैं। 2. ब्याज दर ज्यादा हो सकती है यदि लोन स्वीकृत होता भी है तो बैंक अधिक जोखिम के कारण ऊंची ब्याज दर वसूल सकते हैं। 3. अतिरिक्त गारंटी की मांग कुछ मामलों में बैंक अतिरिक्त सिक्योरिटी या गारंटर की मांग भी कर सकते हैं। बैंकों पर भी पड़ेगा असर बैंकिंग सेक्टर की रिपोर्ट्स के मुताबिक ECL Framework लागू होने के बाद बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। अनुमान है कि इस बदलाव से बैंकिंग उद्योग का लाभ लगभग 42,000 करोड़ रुपये तक प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना सकते हैं। क्या करें ग्राहक? यदि आप आने वाले वर्षों में किसी भी प्रकार का बड़ा लोन लेना चाहते हैं, तो अभी से अपना CIBIL Score सुधारने पर ध्यान दें। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान, कम क्रेडिट उपयोग और पुराने लोन का नियमित भुगतान आपके स्कोर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

PM Kisan Yojana: पीएम किसान की 23वीं किस्त पर बड़ा अपडेट, जाने कब आएगी 

PM Kisan Yojana: योजना की 23वीं किस्त अप्रैल में आएगी या नहीं? जानें किस्त जारी होने का नियम, संभावित तारीख और किसानों को मिलने वाली राशि की पूरी जानकारी। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PM Kisan Yojana: देश के करोड़ों किसानों के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) की 23वीं किस्त को लेकर इन दिनों काफी चर्चा हो रही है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह किस्त अप्रैल 2026 में जारी हो सकती है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। क्या अप्रैल में आएगी 23वीं किस्त? अगर नियम और पिछले रिकॉर्ड को देखा जाए, तो अप्रैल में 23वीं किस्त जारी होने की संभावना बेहद कम है। इस हिसाब से अप्रैल में अगली किस्त आना संभव नहीं माना जा रहा। कब आ सकती है 23वीं किस्त? पिछले ट्रेंड के अनुसार: अब 4 महीने जोड़ने पर 23वीं किस्त का समय जून 2026 के आसपास बनता है।इसलिए संभावना है कि 23वीं किस्त जून या जुलाई 2026 में जारी हो सकती है।हालांकि, आधिकारिक घोषणा का अभी इंतजार है। किसानों को कैसे मिलता है पैसा? इस योजना के तहत: जरूरी सलाह किसानों के लिए कुल मिलाकर, अप्रैल में 23वीं किस्त आने की खबरें केवल अफवाह हैं। किसानों को अगली किस्त के लिए जून-जुलाई तक इंतजार करना पड़ सकता है।

Salary Hike 2026: कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, औसतन 9.1% बढ़ेगी सैलरी — इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा फायदा

Salary Hike 2026: साल 2026 में भारत में कर्मचारियों की सैलरी औसतन 9.1% बढ़ सकती है। Deloitte रिपोर्ट के अनुसार लाइफ साइंसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट की उम्मीद है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क।  Salary Hike 2026: साल 2026 में नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस साल कंपनियां औसतन 9.1% तक सैलरी इंक्रीमेंट दे सकती हैं। यह बढ़ोतरी पिछले साल के 9.0% के मुकाबले हल्की बढ़त जरूर है, लेकिन आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच इसे स्थिर रुझान माना जा रहा है। क्या कहती है रिपोर्ट? Deloitte India के टैलेंट आउटलुक सर्वे के अनुसार, करीब 500 कंपनियों के डेटा के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है। कंपनियां फिलहाल लागत नियंत्रण और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सैलरी बढ़ोतरी को सीमित दायरे में रख रही हैं। इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा इंक्रीमेंट रिपोर्ट के मुताबिक कुछ सेक्टर इस साल वेतन वृद्धि में आगे रह सकते हैं: इसके अलावा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी सैलरी ग्रोथ सकारात्मक रहने की उम्मीद है। ITES सेक्टर में हल्की सुस्ती आईटीईएस सेक्टर में इस साल थोड़ी धीमी वृद्धि देखने को मिल सकती है, जहां सैलरी इंक्रीमेंट घटकर करीब 8.5% रहने का अनुमान है। जूनियर कर्मचारियों को ज्यादा फायदा कंपनियां अब अपने इंक्रीमेंट बजट का बड़ा हिस्सा जूनियर कर्मचारियों और इंडिविजुअल कॉन्ट्रिब्यूटर्स पर खर्च कर रही हैं। इस वर्ग को औसतन 9.7% तक की सबसे ज्यादा सैलरी बढ़ोतरी मिल सकती है। क्यों स्थिर है सैलरी ग्रोथ? विशेषज्ञों के अनुसार: इन्हीं कारणों से कंपनियां वेतन वृद्धि को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं। CEO सैलरी में भी धीमी बढ़ोतरी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पेशेवर सीईओ का औसत वेतन करीब 5% बढ़कर 10.5 करोड़ रुपये पहुंच गया है। हालांकि, कोविड-19 के बाद यह सबसे धीमी वृद्धि मानी जा रही है।

CCTV ban India: अप्रैल से CCTV कैमरों पर सख्ती! TP-Link, Hikvision समेत कई ब्रांड पर बैन की तैयारी

CCTV ban India भारत सरकार CCTV कैमरों की सुरक्षा को लेकर सख्त, Hikvision, TP-Link और Dahua जैसे ब्रांड्स पर बैन की तैयारी। जानिए नए नियम, असर और क्या करें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। CCTV ban India: देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार CCTV कैमरों को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 अप्रैल से Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स के कुछ CCTV कैमरों की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर में लगे CCTV कैमरों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि कई कैमरे तय साइबर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते, जिससे डेटा लीक और हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है। क्यों लिया जा रहा है ये बड़ा फैसला? दरअसल, हाल ही में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि भारत के कुछ रेलवे स्टेशनों पर लगे CCTV कैमरों की फीड विदेशी एजेंसियों तक पहुंच रही थी। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और सरकार ने तुरंत सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए। सरकार अब ऐसे सभी कैमरों पर रोक लगाने की तैयारी में है जो: कैसे खतरा बन रहे हैं CCTV कैमरे? आजकल ज्यादातर CCTV कैमरे इंटरनेट से जुड़े होते हैं। ये सिर्फ मोबाइल ऐप ही नहीं, बल्कि कंपनी के सर्वर से भी कनेक्ट रहते हैं। अगर: तो आपकी निजी वीडियो फीड आसानी से हैक हो सकती है। नए नियम क्या होंगे? सरकार के नए नियमों के तहत: बाजार पर क्या असर पड़ेगा? इस फैसले से बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है: पहले से लगे कैमरों का क्या होगा? देश में पहले से करोड़ों CCTV कैमरे लगे हुए हैं। इनमें से कई: ऐसे कैमरे सबसे ज्यादा खतरे में हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को इन सभी कैमरों का ऑडिट कराना होगा। जंग और साइबर अटैक में CCTV बन सकते हैं हथियार हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में यह देखा गया है कि हैकर्स CCTV कैमरों को टारगेट करके लोगों की लोकेशन और मूवमेंट ट्रैक करते हैं। ऐसे में कमजोर सिक्योरिटी वाले कैमरे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। यूजर्स क्या करें? (जरूरी टिप्स)

RBI new rules 2026: 1 अप्रैल से बदलेंगे डिजिटल पेमेंट नियम: हर ट्रांजैक्शन में अब 2FA जरूरी, जानें पूरी डिटेल

RBI new rules 2026: 1 अप्रैल 2026 से RBI के नए डिजिटल पेमेंट नियम लागू—अब हर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए 2FA अनिवार्य। जानें UPI, कार्ड और वॉलेट यूजर्स पर क्या होगा असर और कैसे रहें सुरक्षित। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। RBI new rules 2026: Reserve Bank of India (RBI) ने डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर में ऑनलाइन पेमेंट के नियमों में बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इन नए नियमों के तहत अब हर डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है। क्या है नया नियम? अब तक कई मामलों में सिर्फ OTP डालकर पेमेंट पूरा हो जाता था, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद ऐसा संभव नहीं होगा। अब हर ट्रांजैक्शन के लिए दो स्तर की सुरक्षा जरूरी होगी। उदाहरण के तौर पर: यानी अब पेमेंट के दौरान एक अतिरिक्त सुरक्षा लेयर जोड़ी जाएगी। क्यों जरूरी हुआ ये बदलाव? पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जैसे तरीकों से ठग OTP हासिल कर लेते हैं। ऐसे में सिर्फ OTP आधारित सुरक्षा अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही थी। इसी को देखते हुए RBI ने यह सख्त कदम उठाया है। रोजमर्रा के पेमेंट पर क्या असर पड़ेगा? इन नए नियमों का असर आम लोगों के रोजमर्रा के लेन-देन पर भी देखने को मिलेगा। पेमेंट में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता हैहर ट्रांजैक्शन में एक अतिरिक्त स्टेप होगानए डिवाइस या बड़ी रकम पर ज्यादा सिक्योरिटी चेक्स होंगे हालांकि, इससे यूजर्स को पहले से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। बैंकों की जिम्मेदारी भी बढ़ी RBI के नए निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी तकनीकी खामी के कारण फ्रॉड होता है, तो बैंक और पेमेंट प्लेटफॉर्म को ग्राहक को मुआवजा देना पड़ सकता है। इससे यूजर्स का भरोसा और मजबूत होगा। इंटरनेशनल पेमेंट पर भी लागू होंगे नियम RBI ने साफ किया है कि ये सुरक्षा नियम सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन पर भी लागू किए जाएंगे। अक्टूबर 2026 तक विदेशी पेमेंट्स में भी 2FA अनिवार्य कर दिया जाएगा। क्या करें यूजर्स?

1 अप्रैल से रूस का बड़ा फैसला: पेट्रोल निर्यात पर 4 महीने की रोक

रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है। जानें इसके पीछे की वजह, वैश्विक तेल बाजार पर असर और भारत पर संभावित प्रभाव। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। वैश्विक तेल बाजार में जारी अस्थिरता के बीच रूस ने बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल से पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह पाबंदी 31 जुलाई तक लागू रहने की संभावना है। सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है। क्या है पूरा मामला? रूसी सरकार की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। स्थानीय एजेंसी TASS के मुताबिक यह फैसला चार महीने तक लागू रह सकता है। क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? रूस के इस कदम के पीछे कई अहम कारण हैं: 1. वैश्विक बाजार में अस्थिरता मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। 2. रिफाइनरियों पर खतरा पिछले साल रूस की कई तेल रिफाइनरियों पर हमले हुए थे, खासकर यूक्रेन से जुड़े संघर्ष के चलते। इससे उत्पादन प्रभावित हुआ। 3. घरेलू मांग में बढ़ोतरी देश के भीतर पेट्रोल की मांग अचानक बढ़ने से सप्लाई पर दबाव आया, जिससे किल्लत की स्थिति बन सकती थी। पेट्रोल की किल्लत से बचाव की रणनीति रूस सरकार का कहना है कि कच्चे तेल का प्रसंस्करण (रिफाइनिंग) फिलहाल स्थिर है, लेकिन एहतियात के तौर पर निर्यात रोकना जरूरी है। इससे घरेलू बाजार में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रहेगा और कीमतों पर नियंत्रण बना रहेगा। पहले भी लग चुकी है पाबंदी यह पहली बार नहीं है जब रूस ने ऐसा कदम उठाया हो। इससे पहले भी सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोक लगाई थी ताकि देश के अंदर ईंधन की कमी और महंगाई को रोका जा सके। आंकड़ों के अनुसार, रूस ने पिछले साल करीब 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल निर्यात किया था, जो रोजाना लगभग 1.17 लाख बैरल के बराबर है। भारत और दुनिया पर क्या होगा असर? रूस के इस फैसले का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। सप्लाई कम होने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल आ सकता है। हालांकि भारत जैसे देशों पर सीधा असर सीमित रह सकता है, क्योंकि भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल आयात करता है, पेट्रोल नहीं।

8th Pay Commission: 8वां वेतन आयोग: कब लागू होगा, कितनी बढ़ेगी सैलरी? पूरी जानकारी

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जानें कब लागू होगा, कितनी बढ़ेगी सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और एरियर पर पूरी जानकारी। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। 8th Pay Commission: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। संसद में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आयोग की टाइमलाइन और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग? सरकार के अनुसार, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था। आयोग को अपनी सिफारिशें पेश करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आ सकती है। हालांकि, आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद ही लागू करने की तारीख तय होगी। 1 जनवरी 2026 से मिलेगा लाभ (लेकिन देरी संभव) सरकार ने संकेत दिया है कि वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक: मिलेगा एरियर (बकाया) अच्छी खबर यह है कि: कितनी बढ़ेगी सैलरी? अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के अनुसार: तुलना करें: फीडबैक के जरिए बन रही रिपोर्ट 8वां वेतन आयोग इस बार अलग तरीके से काम कर रहा है। सरकार ने MyGov पोर्टल पर: क्या तय करेगा अंतिम फैसला? सैलरी बढ़ोतरी का अंतिम निर्णय इन कारकों पर निर्भर करेगा: