रॉयल कॉलेज में छात्रों को मिले करियर बनाने के टिप्स, ट्रैफिक डीएसपी ने समझाया जिंदगी बचाने का मंत्र

रतलाम- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। रतलाम के रॉयल कॉलेज में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ बेहतर भविष्य बनाने और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया गया। बीएससी लाइफ साइंस विभाग द्वारा आयोजित ‘आगाज़’ कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा, रोजगार के अवसर और व्यक्तित्व विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने छात्रों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत यातायात जागरूकता के संदेश के साथ हुई। मुख्य वक्ता ट्रैफिक डीएसपी आनंद स्वरूप सोनी ने विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित रहने के जरूरी नियम समझाए। उन्होंने हेलमेट और सीट बेल्ट के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम दे सकती है। इस अवसर पर साईं श्री इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य डॉ. श्वेता विनचुरकर और जिला रोजगार अधिकारी अभिषेक कटारा ने भी विद्यार्थियों से संवाद किया। दोनों अतिथियों ने पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व निखारने, कौशल विकसित करने और करियर की सही दिशा चुनने के महत्वपूर्ण सुझाव दिए। ट्रैफिक डीएसपी ने दिलाई सड़क सुरक्षा की शपथ कार्यक्रम में ट्रैफिक डीएसपी आनंद स्वरूप सोनी ने यातायात नियमों के पालन को प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि सड़क पर वाहन चलाते समय सावधानी बरतना केवल अपनी ही नहीं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। उन्होंने दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने का महत्व समझाया। साथ ही कॉलेज के स्टाफ और विद्यार्थियों को सुरक्षित यातायात की शपथ दिलाई। इस दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़ी रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ सवालों के जवाब दिए। सही उत्तर देने वाले छात्रों को पुरस्कृत कर उनका उत्साह बढ़ाया गया। असफलता से घबराएं नहीं, चुनौतियों को अवसर बनाएं कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ. श्वेता विनचुरकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। अनुशासन, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों का भी उतना ही महत्व है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीखना चाहिए। प्रत्येक चुनौती व्यक्ति को कुछ नया सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देती है। डॉ. विनचुरकर ने समय प्रबंधन, लक्ष्य के प्रति एकाग्रता और आत्मविश्वास को व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानकर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। जिला रोजगार अधिकारी ने बताए नौकरी और स्वरोजगार के अवसर कार्यक्रम में जिला रोजगार अधिकारी अभिषेक कटारा ने युवाओं को रोजगार की बदलती जरूरतों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और करियर के अनुसार तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल भी विकसित करना चाहिए। इससे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। कटारा ने रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को करियर की तैयारी के दौरान अपनी क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाने की सलाह दी। विद्यार्थियों को इन विषयों पर मिला मार्गदर्शन सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन हेलमेट और सीट बेल्ट का महत्व समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास सरकारी एवं निजी क्षेत्र में करियर की तैयारी रोजगार, स्वरोजगार और कौशल विकास तकनीकी और सॉफ्ट स्किल्स की उपयोगिता लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का दिया संदेश बीएससी लाइफ साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कपिल केरोल ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए निरंतर सीखना और अपनी क्षमताओं में सुधार करना जरूरी है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अन्य उपयोगी गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष और प्राध्यापक उपस्थित रहे। प्रो. मिताली पुरोहित और प्रो. अलका उपाध्याय ने किया संचालन आगाज़ कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो. मिताली पुरोहित और प्रो. अलका उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अतिथियों के विचार सुने और विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। समापन अवसर पर कॉलेज प्रशासक दिनेश राजपुरोहित ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। शिक्षा के साथ जीवन कौशल पर भी जोर रॉयल कॉलेज में आयोजित आगाज़ कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक गतिविधियों के साथ व्यावहारिक जानकारी हासिल करने का अवसर बना। सड़क सुरक्षा से लेकर रोजगार की तैयारी और व्यक्तित्व विकास तक, अलग-अलग विषयों पर मिले मार्गदर्शन ने छात्रों को जिम्मेदारी, अनुशासन और भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूक किया।

रतलाम के रॉयल कॉलेज में टेक-कम-कल्चरल मीट, विद्यार्थियों ने दिखाई तकनीकी और सांस्कृतिक प्रतिभा

रतलाम- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। रतलाम के रॉयल कॉलेज में बीसीए और बीएससी (कंप्यूटर साइंस) के विद्यार्थियों के लिए ‘टेक-कम-कल्चरल मीट’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तकनीकी ज्ञान, शैक्षणिक मार्गदर्शन और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं विशेषज्ञों ने उन्हें आईटी क्षेत्र में करियर की संभावनाओं और सफलता के महत्वपूर्ण मंत्र बताए। आयोजन में विद्यार्थियों को बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट रखने, नए प्रयोग करने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं देश के विकास में करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान विभिन्न शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया। आईटी क्षेत्र में भारतीय युवाओं की बढ़ती भूमिका पर चर्चा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. संजय वाते रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों की जानकारी दी। डॉ. वाते ने कहा कि दुनिया की कई बड़ी आईटी कंपनियों और तकनीकी संस्थानों में भारतीय प्रतिभाएं महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। भारतीय युवा अपनी योग्यता और तकनीकी कौशल के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहने की सलाह दी। साथ ही कहा कि आईटी ऐसा क्षेत्र है, जहां सफलता के लिए लगातार नई तकनीक सीखना और अपने कौशल को विकसित करना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से नवाचार को बढ़ावा देने और तकनीकी ज्ञान का उपयोग समाज कल्याण एवं राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। बड़े सपने और स्पष्ट लक्ष्य ही सफलता की कुंजी कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि शासकीय स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय की विभागाध्यक्ष डॉ. अनामिका सारस्वत ने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए बड़े सपने देखने के साथ उन्हें पूरा करने की दिशा में ईमानदारी और निरंतर मेहनत करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने, संवाद कौशल विकसित करने और जीवन में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का संदेश दिया। वहीं शासकीय पीएम श्री कॉलेज, रतलाम की प्रो. आयुषी सोनी ने विद्यार्थियों को अनुशासन और नियमित परिश्रम का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि कॉलेज जीवन में पढ़ाई के साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी भी व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक है। तकनीकी दक्षता के साथ सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन टेक-कम-कल्चरल मीट के दौरान कंप्यूटर साइंस के विद्यार्थियों ने अपनी तकनीकी दक्षता और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता कार्यक्रम में कॉलेज की विभागाध्यक्ष प्रो. दीपिका कुमावत सहित सभी प्राध्यापक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. आंचल नागल ने किया। अंत में कॉलेज प्रशासक प्रो. दिनेश राजपुरोहित ने अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

नवोदय में कक्षा 9 की सीट पाने का मौका, 30 सितंबर तक आवेदन; अप्रैल में होगी चयन परीक्षा

जवाहर नवोदय विद्यालय कक्षा 9 प्रवेश 2027 के लिए आवेदन शुरू हैं। 30 सितंबर तक फॉर्म भरें, चयन परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को होगी। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9 में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट है। कक्षा 9 लेटरल एंट्री चयन परीक्षा 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक विद्यार्थी 30 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। प्रवेश के लिए चयन परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को आयोजित की जाएगी। आवेदन की प्रक्रिया निशुल्क रखी गई है। परीक्षा में कक्षा 8 के स्तर के प्रश्न पूछे जाएंगे और विद्यार्थियों को चार विषयों से कुल 100 अंकों की परीक्षा देनी होगी। नवोदय कक्षा 9 प्रवेश 2027 की जरूरी तारीखें अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख और परीक्षा की तारीख सबसे महत्वपूर्ण हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ऑनलाइन आवेदन 30 सितंबर 2026 तक किया जा सकता है। चयन परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को होगी। इसलिए पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को आवेदन की प्रक्रिया समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए। महत्वपूर्ण जानकारी एक नजर में कौन विद्यार्थी आवेदन कर सकता है? कक्षा 9 में प्रवेश के लिए विद्यार्थी का जन्म 1 मई 2012 से 31 जुलाई 2014 के बीच होना चाहिए। यह आयु सीमा सभी वर्गों के अभ्यर्थियों पर लागू होगी। इसके अलावा उम्मीदवार संबंधित जिले का वास्तविक निवासी होना चाहिए। सत्र 2026-27 में विद्यार्थी का उसी जिले के सरकारी या सरकार से मान्यता प्राप्त स्कूल में कक्षा 8 में अध्ययनरत होना भी जरूरी है। जिस जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए आवेदन किया जा रहा है, वह भी उम्मीदवार के संबंधित जिले में होना चाहिए। ग्रामीण और शहरी उम्मीदवारों को लेकर क्या है नियम? कक्षा 9 के प्रवेश में ग्रामीण या शहरी स्थिति का निर्धारण विद्यार्थी द्वारा कक्षा 8 में पढ़े गए स्कूल के क्षेत्र के आधार पर किया जाएगा। यदि विद्यार्थी ने कक्षा 8 के दौरान एक दिन भी शहरी क्षेत्र के स्कूल में पढ़ाई की है, तो उसे शहरी उम्मीदवार माना जाएगा। इसलिए आवेदन करते समय स्कूल और निवास से जुड़ी जानकारी सावधानी से भरना जरूरी है। चार विषयों से होगी 100 अंकों की परीक्षा नवोदय कक्षा 9 चयन परीक्षा में कुल चार विषय शामिल होंगे। गणित और सामान्य विज्ञान से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा का स्तर कक्षा 8 के पाठ्यक्रम के अनुरूप रहेगा। गणित और सामान्य विज्ञान दोनों मिलाकर परीक्षा के 70 अंक होंगे, इसलिए इन विषयों की तैयारी पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहेगा। दिव्यांग विद्यार्थियों को मिलेगा अतिरिक्त समय चयन परीक्षा की सामान्य अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित है। दिव्यांग उम्मीदवारों को वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर 50 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए पात्र उम्मीदवार के पास संबंधित वैध प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा। आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी? ऑनलाइन आवेदन करते समय विद्यार्थी और अभिभावक से जुड़ी कुछ जानकारियां तथा दस्तावेज तैयार रखने होंगे। आवेदन के लिए प्रमुख रूप से: फोटो और हस्ताक्षर JPG फॉर्मेट में होने चाहिए। इनकी फाइल का आकार 10 से 100 KB के बीच निर्धारित किया गया है। आवेदन भरते समय इन बातों का रखें ध्यान ऑनलाइन फॉर्म में दी गई जानकारी को जमा करने से पहले अच्छी तरह जांच लेना चाहिए। नाम, जन्मतिथि, स्कूल, जिला और अन्य व्यक्तिगत जानकारी में गलती होने पर आगे परेशानी हो सकती है। नवोदय विद्यालय में अभिभावकों की सहायता के लिए निशुल्क हेल्प डेस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। आवेदन से जुड़ी किसी समस्या की स्थिति में अभिभावक संबंधित जवाहर नवोदय विद्यालय से सहायता ले सकते हैं। गलत या फर्जी जानकारी के आधार पर किया गया आवेदन बाद में निरस्त किया जा सकता है। इसलिए फॉर्म में केवल सही और सत्यापित जानकारी ही दर्ज करनी चाहिए। परीक्षा की तैयारी कैसे करें? क्योंकि परीक्षा का स्तर कक्षा 8 के अनुरूप होगा, विद्यार्थियों को सबसे पहले अपने कक्षा 8 के पाठ्यक्रम को मजबूत करना चाहिए। गणित और सामान्य विज्ञान के लिए नियमित अभ्यास के साथ हिंदी और अंग्रेजी के प्रश्नों पर भी ध्यान देना जरूरी है। परीक्षा में समय प्रबंधन भी अहम रहेगा। 100 प्रश्नों के लिए निर्धारित समय को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को मॉक टेस्ट और पुराने प्रश्नपत्रों के जरिए अभ्यास करना चाहिए।

MP News: एमपी के सरकारी स्कूलों में 9वीं से AI की पढ़ाई, 1 सितंबर से शुरू होंगी ऑनलाइन कक्षाएं

MP News: मध्य प्रदेश के 1848 सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए AI असिस्टेंट पाठ्यक्रम शुरू होगा। ऑनलाइन कक्षाएं 1 सितंबर से संचालित होंगी। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में स्कूली विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है। प्रदेश के चयनित शासकीय हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI असिस्टेंट का व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत इसके लिए प्रदेश के 1,848 ICT स्कूलों का चयन किया गया है। इन विद्यालयों में पाठ्यक्रम की ऑनलाइन कक्षाएं 1 सितंबर 2026 से शुरू होंगी। पाठ्यक्रम उन्हीं स्कूलों में संचालित किया जाएगा, जहां ICT लैब उपलब्ध है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से पाठ्यक्रम के संचालन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से वीडियो आधारित पाठ पढ़ाए जाएंगे और पढ़ाई के साथ उनकी शंकाओं का समाधान भी कराया जाएगा। स्मार्ट क्लास में वीडियो के जरिए होगी पढ़ाई AI असिस्टेंट पाठ्यक्रम की सैद्धांतिक कक्षाएं ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से संचालित की जाएंगी। स्कूल शिक्षा विभाग के विमर्श पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री और YouTube माध्यम से वीडियो को स्कूल की स्मार्ट क्लास में विद्यार्थियों को दिखाया जाएगा। सप्ताह में तीन दिन कक्षाएं निर्धारित की गई हैं। सोमवार और बुधवार को नए पाठ से जुड़े वीडियो विद्यार्थियों को दिखाए जाएंगे। इन कक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान भी कराया जाएगा। तीसरी कक्षा निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होगी। इस तरह विद्यार्थियों को केवल वीडियो देखने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पाठ को समझने और उससे जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा। शुक्रवार को अभ्यास, शनिवार को होगी पुनरावृत्ति ऑनलाइन पाठ के बाद विद्यार्थियों को संबंधित विषयवस्तु का अभ्यास और प्रायोगिक कार्य कराया जाएगा। सप्ताह के दौरान दिखाए गए दोनों वीडियो से जुड़ी अभ्यास एवं प्रायोगिक गतिविधियां शुक्रवार को कराई जाएंगी। शनिवार को पुनरावृत्ति दिवस रखा गया है। इस दिन विद्यार्थियों को सप्ताह में पढ़ाए गए पाठ को दोहराने का अवसर मिलेगा। यदि कोई पाठ या वीडियो विद्यार्थियों को कठिन लगता है, तो उसे विमर्श पोर्टल से डाउनलोड कर दोबारा दिखाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विषय को बेहतर तरीके से समझने में मदद करना है। 1848 स्कूलों की सूची में किया गया संशोधन AI पाठ्यक्रम के लिए चयनित स्कूलों की सूची में संशोधन भी किया गया है। जानकारी के अनुसार 24 प्रयोगशालाओं को दूसरे ICT स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा 48 स्कूलों को CBSE से संचालित होने के कारण सूची से हटा दिया गया है। मध्य प्रदेश ओपन स्कूल के माध्यम से पहले से AI पाठ्यक्रम संचालित कर रहे 42 विद्यालयों को भी नई सूची से बाहर किया गया है। कुछ अन्य विद्यालयों को ICT लैब उपलब्ध नहीं होने या पहले से IT एवं IT आधारित सेवाओं का ट्रेड संचालित होने के कारण सूची में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे 15 विद्यालय सूची से हटाए गए हैं। प्राचार्य और ICT प्रशिक्षक की अहम जिम्मेदारी पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन में स्कूल के प्राचार्य और ICT प्रशिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्हें विद्यार्थियों की समय पर उपस्थिति और कक्षाओं में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। तकनीकी समस्या के कारण यदि किसी दिन निर्धारित वीडियो नहीं चल पाता है, तो उसे अगले कार्य दिवस में अनिवार्य रूप से दिखाने के निर्देश हैं। विद्यार्थियों की शंकाओं के समाधान के लिए रोजगार कौशल, अंग्रेजी और जीव विज्ञान के शिक्षक तथा AI असिस्टेंट विषय के कंप्यूटर प्रशिक्षक सहयोग करेंगे। स्कूलों में AI शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है? AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कारोबार, संचार और कई अन्य क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों को इस तकनीक की शुरुआती समझ देना उनके लिए आगे की पढ़ाई और कौशल विकास में उपयोगी हो सकता है। मध्य प्रदेश में शुरू किया जा रहा यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को AI से जुड़े बुनियादी ज्ञान के साथ व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने पर केंद्रित है। खास बात यह है कि पढ़ाई के साथ अभ्यास और पुनरावृत्ति के लिए अलग दिन निर्धारित किए गए हैं।

MP News: MP में निजी मेडिकल कॉलेजों की EWS सीटों पर बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

MP News: MP के निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र को पक्षकार बनाया है। अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS विद्यार्थियों के आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पुराने मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। साथ ही इसी मुद्दे से जुड़ी नई याचिका पर राज्य शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को नोटिस जारी किया गया है। मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संबंधित प्रवेश प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। अब अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी। क्या है निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण का मामला? मामला निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS वर्ग के विद्यार्थियों को आरक्षण का लाभ दिलाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि EWS अभ्यर्थियों को समायोजित करने के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाए। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आरक्षण व्यवस्था का लाभ चाहते हैं। नई याचिका पर राज्य शासन और NMC को नोटिस कुमारी दरक्षा अंजुम सहित अन्य की ओर से दायर नई याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS अभ्यर्थियों के प्रवेश से संबंधित मांग उठाई गई है। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। यानी इस मामले में आगे आने वाला न्यायिक निर्णय प्रवेश व्यवस्था पर असर डाल सकता है। पुराने मामले में अब केंद्र सरकार भी शामिल EWS आरक्षण से जुड़ा यह विवाद पहले से हाईकोर्ट में लंबित है। अथर्व चतुर्वेदी विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन नाम से दायर रिट याचिका वर्ष 2024 से अदालत में लंबित है। इस मामले में याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने की मांग की थी। कोर्ट ने मौखिक आवेदन को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को मामले में शामिल करने की अनुमति दे दी। केंद्र की ओर से नोटिस डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु को स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र से दो सप्ताह में जवाब मांगा गया है। 2024 के आदेश में क्या कहा गया था? याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2024 के आदेश का भी हवाला दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस आदेश में NMC को निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण लागू करने के लिए एक वर्ष के भीतर सीटें बढ़ाने से संबंधित निर्देश दिए गए थे। अब नए मामले में केंद्र सरकार का पक्ष भी रिकॉर्ड पर आने के बाद इस मुद्दे पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के लिए क्यों अहम है मामला? निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों की सीटों को लेकर हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होते हैं। ऐसे में EWS आरक्षण से जुड़ा कोई भी फैसला संबंधित अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि अदालत सीटें बढ़ाने से संबंधित व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने का फैसला करती है, तो भविष्य के प्रवेश सत्रों में EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम लाभ और सीटों की संख्या अदालत के फैसले तथा संबंधित नियामकीय व्यवस्था पर निर्भर करेगी। अगली सुनवाई 11 सितंबर को फिलहाल मामले में केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार है। राज्य शासन और NMC को भी नई याचिका पर अपना पक्ष रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को निर्धारित है। उस सुनवाई में सामने आने वाले जवाब और कोर्ट के निर्देश से निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।

MP Board Exam: 9वीं से 12वीं तक बदला पेपर पैटर्न, लघु उत्तरीय सवालों में नहीं मिलेगा विकल्प

MP Board Exam: 2026-27 में 9वीं से 12वीं तक परीक्षा पैटर्न बदलेगा। प्रश्नपत्र में तार्किक सवाल बढ़ेंगे और लघु उत्तरीय प्रश्नों में विकल्प नहीं मिलेगा। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Board Exam: मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक सभी विषयों की अंकयोजना और प्रश्नों का पैटर्न जारी कर दिया है।मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर नए सत्र के पाठ्यक्रम और अंकयोजना की जानकारी उपलब्ध है। नए पैटर्न में विद्यार्थियों को पहले की तुलना में अति लघु उत्तरीय प्रश्न अधिक हल करने होंगे, जबकि लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या में बदलाव किया गया है। खास बात यह है कि लघु उत्तरीय प्रश्नों में विकल्प की सुविधा नहीं दी जाएगी। मंडल के अनुसार प्रश्नपत्रों में केवल सीधे तथ्य पूछने के बजाय तर्क और समझ पर आधारित प्रश्नों को महत्व दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि विद्यार्थियों के लिए केवल महत्वपूर्ण प्रश्नों को याद करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें पाठ्यपुस्तक के पूरे विषय को समझकर पढ़ना होगा। CBSE की तर्ज पर तैयार होगा प्रश्नपत्र MP Board Exam: माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 9वीं से 12वीं तक के लिए नए सत्र की अंकयोजना जारी की है। बोर्ड की ओर से प्रश्नपत्र के स्वरूप में बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों की विषय की समझ और तार्किक क्षमता को परखना है। मंडल सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य के अनुसार, अब प्रश्न सीधे-सीधे पूछने के बजाय तार्किक तरीके से पूछे जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को पूरे पाठ्यक्रम की बेहतर तैयारी करनी होगी। नए पैटर्न में छोटे उत्तर वाले प्रश्नों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों को कम शब्दों में सटीक उत्तर लिखने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। 10वीं बोर्ड में 75 अंक का प्रश्नपत्र कक्षा 10वीं के लिए लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र 75 अंकों का रहेगा। इसमें वस्तुनिष्ठ से लेकर अति लघु, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल होंगे। वस्तुनिष्ठ भाग में वैकल्पिक प्रश्न, रिक्त स्थान, सत्य-असत्य, सही जोड़ी का मिलान और एक वाक्य में उत्तर जैसे प्रश्न शामिल रहेंगे। अति लघु उत्तरीय प्रश्नों में 12 प्रश्न दो-दो अंक के होंगे। इसके बाद तीन लघु उत्तरीय प्रश्न तीन-तीन अंक और तीन दीर्घ उत्तरीय प्रश्न चार-चार अंक के होंगे। 12वीं के नॉन-प्रायोगिक विषयों में 80 अंक का पेपर कक्षा 12वीं के नॉन-प्रायोगिक विषयों के लिए लिखित प्रश्नपत्र 80 अंकों का होगा। इसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का हिस्सा 32 अंकों का रखा गया है। इसके अलावा अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न भी शामिल होंगे। 12वीं नॉन-प्रायोगिक विषयों की अंकयोजना वस्तुनिष्ठ भाग में छह अंक के वैकल्पिक प्रश्न, छह अंक के रिक्त स्थान, छह अंक के सत्य-असत्य, सात अंक के सही जोड़ी मिलान और सात अंक के एक वाक्य में उत्तर वाले प्रश्न शामिल हैं। 12वीं के प्रायोगिक विषयों का पेपर 70 अंक का जिन विषयों में प्रायोगिक परीक्षा होती है, उनके लिए लिखित प्रश्नपत्र 70 अंकों का रहेगा। 12वीं प्रायोगिक विषयों की अंकयोजना वस्तुनिष्ठ भाग में छह अंक के वैकल्पिक प्रश्न, छह अंक के रिक्त स्थान, छह अंक के सत्य-असत्य, पांच अंक का सही जोड़ी मिलान और पांच अंक के एक वाक्य में उत्तर वाले प्रश्न रहेंगे। लघु उत्तरीय प्रश्नों में खत्म होगा विकल्प नए MP Board Exam Pattern 2026-27 में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक लघु उत्तरीय प्रश्नों से जुड़ा है। अब इन प्रश्नों में विद्यार्थियों को वैकल्पिक प्रश्न चुनने की सुविधा नहीं मिलेगी। यानी जिस प्रश्न को प्रश्नपत्र में पूछा गया है, उसका उत्तर देना होगा। इस बदलाव के कारण विद्यार्थियों को प्रत्येक अध्याय की अच्छी तैयारी करनी होगी। केवल चुनिंदा प्रश्न याद करके परीक्षा की तैयारी करना पहले की तुलना में जोखिम भरा हो सकता है। रटने के बजाय समझकर पढ़ना होगा नए पैटर्न का सबसे बड़ा असर विद्यार्थियों की तैयारी पर पड़ेगा। प्रश्नों को तार्किक और समझ आधारित बनाने से केवल परिभाषा या उत्तर याद करना पर्याप्त नहीं रहेगा। विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक पढ़ते समय यह समझना होगा कि किसी घटना, सिद्धांत, प्रक्रिया या तथ्य के पीछे कारण क्या है और उसका उपयोग किस परिस्थिति में किया जा सकता है। परीक्षा की तैयारी के लिए इन बातों पर दें ध्यान MP Board Exam 2026-27 में विद्यार्थियों के लिए क्या बदलेगा? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नए पैटर्न में प्रश्नों की संख्या और उनके अंक वितरण को बदला गया है। कक्षा 10वीं में अति लघु उत्तरीय प्रश्नों का बड़ा हिस्सा रहेगा, जबकि लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न तीन-तीन रहेंगे। कक्षा 12वीं में विषय के स्वरूप के अनुसार 80 या 70 अंकों का लिखित पेपर होगा। आधिकारिक MPBSE अकादमिक पोर्टल पर 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक की अंकयोजना उपलब्ध कराई गई है। विद्यार्थियों को अभी से बदलनी होगी तैयारी की रणनीति नए पैटर्न को देखते हुए बोर्ड विद्यार्थियों को अपनी तैयारी का तरीका बदलना होगा। अब सिर्फ परीक्षा से कुछ महीने पहले महत्वपूर्ण प्रश्नों की तैयारी करने के बजाय पूरे साल पाठ्यपुस्तक को समझकर पढ़ना ज्यादा उपयोगी रहेगा। खासकर 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को अति लघु, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की अलग-अलग तैयारी करनी चाहिए। साथ ही लिखने की गति और समय प्रबंधन पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

Internship 2026: भारतीय सेना का खास इंटर्नशिप प्रोग्राम, मीडिया छात्रों को मिलेगा ₹75 हजार तक स्टाइपेंड, 2 अगस्त तक करें आवेदन

Internship 2026: भारतीय सेना ने BJMC छात्रों के लिए 75 दिन का इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया है। चयनित अभ्यर्थियों को ₹75 हजार तक स्टाइपेंड मिलेगा। जानें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Internship 2026: पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भारतीय सेना ने एक शानदार अवसर उपलब्ध कराया है। सेना ने मीडिया और रणनीतिक संचार से जुड़े छात्रों के लिए 75 दिनों का विशेष इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ आकर्षक स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक मीडिया, डिजिटल कम्युनिकेशन और रणनीतिक सूचना प्रबंधन की बेहतर समझ देना है। ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को सेना के कम्युनिकेशन सिस्टम और प्रोफेशनल मीडिया वर्किंग स्टाइल से भी परिचित कराया जाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि 2 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन कर सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। Indian Army Internship 2026 क्या है? यह इंटर्नशिप कार्यक्रम AICTE Internship Portal के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसका संचालन भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय (Additional Directorate General) द्वारा किया जाएगा। इसमें पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) के छात्रों को आधुनिक मीडिया, रणनीतिक संचार और डिजिटल कम्युनिकेशन की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। कैसे होगी पूरी ट्रेनिंग? इंटर्नशिप की अवधि 75 दिन होगी। ट्रेनिंग शेड्यूल क्या-क्या सीखने का मिलेगा मौका? प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। प्रमुख विषय कितना मिलेगा स्टाइपेंड? चयनित अभ्यर्थियों को हर महीने ₹30,000 का स्टाइपेंड दिया जाएगा। पूरे प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने पर कुल ₹75 हजार तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। हालांकि, स्टाइपेंड प्राप्त करने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। निर्धारित उपस्थिति से कम रहने पर आर्थिक लाभ नहीं दिया जाएगा। कार्यालय में इन नियमों का करना होगा पालन भारतीय सेना ने सुरक्षा कारणों से कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज आवेदन के साथ निम्न दस्तावेज जमा करना आवश्यक होगा। ध्यान रहे कि दिल्ली में रहने और अन्य व्यक्तिगत खर्चों की व्यवस्था अभ्यर्थियों को स्वयं करनी होगी। आवेदन से पहले जान लें यह महत्वपूर्ण बात भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद किसी भी प्रकार की स्थायी नौकरी या नियुक्ति की गारंटी नहीं दी जाएगी।

MP News: छात्रों ने AI से लिखे उत्तर, कॉपी के आखिर में छोड़ गए ‘लिंक पर क्लिक करें’

MP News: सागर विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के दौरान ChatGPT से सामूहिक नकल का मामला सामने आया। जांच शुरू, संबंधित कॉलेज के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए गए हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच मध्य प्रदेश के सागर से एक गंभीर मामला सामने आया है। डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान उत्तरपुस्तिकाओं में ऐसे संकेत मिले, जिनसे ChatGPT की मदद से सामूहिक नकल किए जाने का संदेह पैदा हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने छिंदवाड़ा जिले के सौंसर स्थित एक निजी कॉलेज के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए हैं। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि शुरुआती जांच में सामने आए संकेत सही साबित होते हैं तो यह विश्वविद्यालय परीक्षाओं में AI के कथित दुरुपयोग का प्रदेश के चर्चित मामलों में से एक माना जा सकता है। उत्तरपुस्तिका में मिला संदिग्ध संदेश, यहीं से शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार, मई में विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 17 कॉलेजों में स्नातक द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित हुई थीं। केंद्रीय मूल्यांकन के दौरान अर्थशास्त्र विषय की एक उत्तरपुस्तिका में परीक्षक की नजर उत्तर के अंत में लिखे एक असामान्य संदेश पर पड़ी। उत्तर के नीचे “वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें” जैसा उल्लेख लिखा हुआ था। परीक्षा की उत्तरपुस्तिका में इस तरह का संदेश मिलने पर परीक्षक ने तत्काल परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी दी। तीन विषयों की कॉपियों में मिले एक जैसे उत्तर शुरुआती जांच के बाद संबंधित कॉलेज की अन्य उत्तरपुस्तिकाओं की भी जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के उत्तर काफी हद तक एक जैसे हैं। विश्वविद्यालय को प्राथमिक स्तर पर यह संदेह हुआ कि कई उत्तर ChatGPT या अन्य AI टूल की मदद से तैयार किए गए हो सकते हैं। यह समानता केवल एक विषय तक सीमित नहीं रही, बल्कि तीन अलग-अलग विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं में भी ऐसे संकेत मिले। पूरे कॉलेज के परीक्षा परिणाम पर लगी रोक मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सतपुड़ा कॉलेज ऑफ इंफॉर्मेशन एंड बायोटेक्नोलॉजी, सौंसर (छिंदवाड़ा) के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए हैं। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध अन्य महाविद्यालयों के परिणाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। जांच समिति करेगी अंतिम फैसला विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल के अनुसार, संबंधित कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। समिति अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद यह तय करेगी कि मामले में क्या कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने सहित अन्य अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं। एक नजर में पूरा मामला महत्वपूर्ण जानकारी

MP News: MP के सरकारी स्कूलों के लिए नई सौगात, लगातार 3 साल 100% रिजल्ट पर मिलेगा ₹5 लाख का इनाम

MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 साल लगातार 100% बोर्ड रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को ₹5 लाख और प्राचार्यों को ₹1 लाख पुरस्कार देने की घोषणा की। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि जो शासकीय विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह घोषणा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में आयोजित महर्षि सांदीपनि गुरुपर्व एवं अलंकरण समारोह के दौरान की गई। इस अवसर पर प्रदेश के पहले ‘गीता भवन’ का भी लोकार्पण हुआ, जिसका निर्माण लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुखों को सम्मानित करना सरकार की प्राथमिकता है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा, नवाचार और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। 100% रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को मिलेगा 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जो सरकारी विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार होगा और विद्यार्थियों के प्रदर्शन में भी सुधार आएगा। राचार्यों को मिलेगा 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री ने लगातार तीन वर्षों तक उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों के लिए भी विशेष पुरस्कार की घोषणा की। ऐसे विद्यालयों के संस्था प्रमुखों को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती पूरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 10,000 नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाकर पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। ‘मिशन बुनियाद’ के तहत AI आधारित पढ़ाई प्रदेश में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मिशन बुनियाद’ की शुरुआत की घोषणा भी की। इस योजना के तहत प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों (कक्षा 9वीं से 12वीं) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। उज्जैन में हुआ प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जयिनी ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की ऐतिहासिक भूमि है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि सांदीपनि की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु और माता-पिता के महत्व को रेखांकित किया।

MP News: एमपी के छात्रों को बड़ी राहत! निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस घटाने की तैयारी, सालाना शुल्क 35 हजार करने का प्रस्ताव

MP News: मध्य प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना करने का प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलने पर लाखों छात्रों को सस्ती इंजीनियरिंग शिक्षा का लाभ मिल सकता है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश के कई निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शिक्षण शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है तो छात्रों को सालाना फीस में बड़ी राहत मिल सकती है। शुल्क विनियामक समिति (FRC) को भेजे गए प्रस्ताव में कई निजी संस्थानों ने वार्षिक शिक्षण शुल्क को घटाकर 35 हजार रुपये करने की मांग की है। मौजूदा समय में अधिकांश निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस 40 हजार से 60 हजार रुपये के बीच है। फीस कम होने से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों के लिए भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधिक किफायती हो सकती है। इससे निजी कॉलेजों में लंबे समय से खाली रह रही सीटों के भरने की भी उम्मीद जताई जा रही है। क्यों घटाई जा रही है इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस? प्रदेश के निजी इंजीनियरिंग संस्थान पिछले कई वर्षों से छात्रों की कमी का सामना कर रहे हैं। प्रवेश कम होने के कारण कॉलेजों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में 58 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर, इस दौरान केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हुआ है। निजी कॉलेजों में पिछले वर्षों के दौरान औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाया, जबकि सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। कॉलेजों का क्या है तर्क? फीस कम करने का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का कहना है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से प्रति छात्र खर्च लगातार बढ़ रहा है। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि यदि फीस कम होगी तो— विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं छात्रों की संख्या घटने का कारण? शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इंजीनियरिंग में दाखिले कम होने के पीछे कई वजहें हैं। प्रमुख कारण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी यदि प्रस्ताव मंजूर होता है ध्यान दें: फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है। अंतिम निर्णय शुल्क विनियामक समिति (FRC) की मंजूरी के बाद ही लागू होगा। शुल्क विनियामक समिति की मंजूरी का इंतजार कॉलेजों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अब शुल्क विनियामक समिति विचार करेगी। यदि समिति इसे मंजूरी देती है तो आगामी शैक्षणिक सत्र में नई फीस लागू की जा सकती है। हालांकि अभी तक समिति की ओर से अंतिम निर्णय जारी नहीं किया गया है।

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