अगस्त में कब मिलेगी Ladli Behna Yojana की अगली किस्त? जानिए भुगतान की संभावित तारीख और जरूरी शर्तें

Ladli Behna Yojana की 39वीं किस्त अगस्त 2026 में कब आ सकती है? जानें संभावित तारीख, DBT, आधार लिंक, e-KYC और भुगतान न रुकने के जरूरी नियम। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की Ladli Behna Yojana से जुड़ी लाखों महिलाओं की नजर अब अगस्त में आने वाली अगली किस्त पर टिकी हुई है। जुलाई में 38वीं किस्त जारी होने के बाद अब लाभार्थी यह जानना चाहती हैं कि 39वीं किस्त उनके खाते में कब पहुंचेगी और कहीं किसी तकनीकी कारण से भुगतान रुक तो नहीं जाएगा। प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है। यही वजह है कि Ladli Behna Yojana की प्रत्येक किस्त का इंतजार बड़ी संख्या में लाभार्थी करती हैं। हालांकि फिलहाल 39वीं किस्त की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है, लेकिन पिछले रिकॉर्ड के आधार पर इसकी संभावित समय-सीमा सामने आई है। यदि आप भी Ladli Behna Yojana की लाभार्थी हैं, तो बैंक खाते की स्थिति, DBT और समग्र e-KYC जैसी जरूरी प्रक्रियाओं की समय रहते जांच करना बेहद आवश्यक है। छोटी सी चूक भी भुगतान में देरी का कारण बन सकती है। अगस्त में कब आ सकती है Ladli Behna Yojana की 39वीं किस्त? अब तक Ladli Behna Yojana की 38 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। पिछले कई महीनों का रिकॉर्ड देखें तो सरकार अधिकांश किस्तें हर महीने की 10 तारीख के आसपास जारी करती रही है। हालांकि त्योहार, प्रशासनिक कार्यक्रम या अन्य कारणों से भुगतान की तारीख में एक-दो दिन का बदलाव भी देखने को मिला है। इसी पैटर्न को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि Ladli Behna Yojana की 39वीं किस्त 10 अगस्त 2026 के आसपास लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जा सकती है। महत्वपूर्ण: अभी तक राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। भुगतान की तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही अंतिम मानी जाएगी। किन कारणों से रुक सकता है Ladli Behna Yojana का भुगतान? Ladli Behna Yojana की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। इसलिए कुछ जरूरी शर्तों का पूरा होना आवश्यक है। भुगतान रुकने के प्रमुख कारण समग्र e-KYC क्यों जरूरी है? सरकार ने Ladli Behna Yojana के लाभार्थियों के लिए समग्र पोर्टल पर e-KYC को अनिवार्य किया है। यदि किसी महिला की e-KYC अभी तक पूरी नहीं हुई है, तो उसकी अगली किस्त रोकी जा सकती है। यह प्रक्रिया नजदीकी CSC सेंटर, ग्राम पंचायत या वार्ड कार्यालय में आधार और मोबाइल नंबर के माध्यम से पूरी कराई जा सकती है। बैंक खाते में DBT और आधार लिंक जरूर जांचें Ladli Behna Yojana की राशि सीधे खाते में भेजी जाती है। इसलिए लाभार्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि— जरूरत पड़ने पर अपनी बैंक शाखा जाकर इन सभी जानकारियों की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा। ऐसे चेक करें Ladli Behna Yojana की किस्त का स्टेटस यदि आप Ladli Behna Yojana की अगली किस्त की स्थिति जानना चाहती हैं, तो ऑनलाइन स्टेटस भी देख सकती हैं। स्टेटस चेक करने का तरीका क्या करें ताकि अगली किस्त बिना रुकावट मिले? यदि आप Ladli Behna Yojana का लाभ लगातार लेना चाहती हैं, तो समय-समय पर अपने बैंक खाते की स्थिति, आधार लिंकिंग और समग्र e-KYC की जांच जरूर करें। इन प्रक्रियाओं में कोई कमी होने पर उसे जल्द पूरा करा लेना बेहतर होगा ताकि अगली किस्त मिलने में किसी तरह की परेशानी न हो।

MP News: इंदौर में अवैध कॉलोनियों पर बड़ा एक्शन: 21 कॉलोनियां घोषित अवैध, जमीनों की खरीदी-बिक्री पर सख्ती

MP News: इंदौर में प्रशासन ने 21 अवैध कॉलोनियों को अवैध घोषित कर खसरों में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। 30 से अधिक भू-स्वामी जांच के दायरे में आए हैं। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर जिला प्रशासन ने शहर और आसपास विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 कॉलोनियों को अवैध घोषित कर दिया है। इन कॉलोनियों से संबंधित जमीनों की जानकारी अब राजस्व अभिलेख (खसरे) में दर्ज की जाएगी, जिससे भविष्य में इन जमीनों पर होने वाले लेन-देन और विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। इस कार्रवाई के बाद संबंधित जमीनों पर प्लॉट बेचने, नई कॉलोनी विकसित करने और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं आसान नहीं रहेंगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम अवैध कॉलोनाइजेशन पर रोक लगाने और खरीदारों के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इन कॉलोनियों से जुड़े 30 से अधिक भू-स्वामी भी प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आए हैं। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश जारी किए गए हैं। अवैध कॉलोनियों की जांच के बाद हुई कार्रवाई कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर जिले के सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। जांच के दौरान मल्हारगंज और कनाड़िया अनुभाग को छोड़कर आठ अनुभागों से कुल 133 संदिग्ध कॉलोनियों की सूची तैयार कर प्रशासन को भेजी गई। इन मामलों की सुनवाई के बाद प्रथम चरण में 21 कॉलोनियों को अवैध घोषित किया गया और संबंधित खसरों के कॉलम-12 में प्रविष्टि दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए। खरीदी-बिक्री और प्लॉटिंग पर पड़ेगा असर अवैध घोषित होने के बाद इन जमीनों पर भविष्य में प्लॉटिंग, बिक्री और कॉलोनी विकास से जुड़े कार्यों पर सख्त कानूनी निगरानी रहेगी। इससे बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लगाने में प्रशासन को मदद मिलेगी। राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि दर्ज होने के बाद ऐसे मामलों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और संभावित खरीदारों को जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। 30 से अधिक भू-स्वामी जांच के दायरे में सुनवाई के दौरान सामने आया कि 21 मामलों में 30 से अधिक भू-स्वामियों की जमीन पर बिना अनुमति कॉलोनियां विकसित की जा रही थीं। इनमें मुख्य रूप से देपालपुर तहसील के कालीबिल्लौद, बिचौली हप्सी के जामन्याखुर्द, असरावद खुर्द, मिर्जापुर, उमरीखेड़ा और कैलोद कर्ताल सहित कई क्षेत्रों की जमीनें शामिल हैं। अपर कलेक्टर ने क्या कहा? अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य के अनुसार, संबंधित अनुभागों से जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार प्रकरण दर्ज किए गए और सभी पक्षों की सुनवाई की गई। सुनवाई पूरी होने के बाद 21 कॉलोनियों को अवैध घोषित करने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रमुख बातें एक नजर में प्रभावित क्षेत्र

LPG e-KYC की आखिरी तारीख नजदीक, 16 अगस्त के बाद लाखों उपभोक्ताओं को हो सकती है परेशानी

16 अगस्त तक LPG e-KYC नहीं कराने वाले लाखों गैस उपभोक्ताओं को घरेलू सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। जानिए क्या है पूरा मामला और e-KYC कराने का आसान तरीका। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LPG e-KYC: घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए यह समय बेहद अहम है। गैस कंपनियां लगातार ग्राहकों को e-KYC कराने के लिए एसएमएस भेज रही हैं। संदेश में 16 अगस्त तक आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करने की बात कही गई है। मध्य प्रदेश में अब भी करीब 39.84 लाख उपभोक्ताओं की LPG e-KYC बाकी है। ऐसे में अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ गैस एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ गया है। कई जगहों से सिलेंडर डिलीवरी प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि घरेलू सिलेंडर नहीं मिलने या कमर्शियल दर पर सिलेंडर देने को लेकर गैस कंपनियों की ओर से कोई सार्वजनिक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। फिलहाल एजेंसियों को मौखिक निर्देश मिलने की बात सामने आई है। LPG e-KYC क्यों बनी जरूरी? सरकार और तेल विपणन कंपनियां लंबे समय से एलपीजी कनेक्शन का आधार आधारित सत्यापन करा रही हैं। इसका उद्देश्य फर्जी कनेक्शन, डुप्लीकेट लाभार्थियों और सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना है। e-KYC पूरी होने के बाद उपभोक्ता का गैस कनेक्शन आधार से सत्यापित हो जाता है, जिससे रिकॉर्ड अपडेट रहता है। क्या 947 रुपये का सिलेंडर 2935 रुपये में मिलेगा? सोशल मीडिया और कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि e-KYC नहीं कराने पर घरेलू उपभोक्ताओं को कमर्शियल सिलेंडर खरीदना पड़ेगा। फिलहाल स्थिति क्या है? ऐसे में उपभोक्ताओं को अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय समय रहते e-KYC पूरी कर लेनी चाहिए। घर बैठे ऐसे कराएं LPG e-KYC e-KYC कराने के लिए तीन आसान विकल्प उपलब्ध हैं। 1. IndianOil ONE App यदि आपका कनेक्शन इंडियन ऑयल का है, तो आधिकारिक ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। 2. नजदीकी गैस एजेंसी आधार कार्ड और गैस कनेक्शन की जानकारी लेकर संबंधित एजेंसी पर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जा सकता है। 3. सिलेंडर डिलीवरी के समय कई एजेंसियां डिलीवरी कर्मचारी के माध्यम से भी e-KYC की सुविधा दे रही हैं। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह

Internship 2026: भारतीय सेना का खास इंटर्नशिप प्रोग्राम, मीडिया छात्रों को मिलेगा ₹75 हजार तक स्टाइपेंड, 2 अगस्त तक करें आवेदन

Internship 2026: भारतीय सेना ने BJMC छात्रों के लिए 75 दिन का इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया है। चयनित अभ्यर्थियों को ₹75 हजार तक स्टाइपेंड मिलेगा। जानें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Internship 2026: पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भारतीय सेना ने एक शानदार अवसर उपलब्ध कराया है। सेना ने मीडिया और रणनीतिक संचार से जुड़े छात्रों के लिए 75 दिनों का विशेष इंटर्नशिप प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ आकर्षक स्टाइपेंड भी दिया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक मीडिया, डिजिटल कम्युनिकेशन और रणनीतिक सूचना प्रबंधन की बेहतर समझ देना है। ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को सेना के कम्युनिकेशन सिस्टम और प्रोफेशनल मीडिया वर्किंग स्टाइल से भी परिचित कराया जाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि 2 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन कर सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। Indian Army Internship 2026 क्या है? यह इंटर्नशिप कार्यक्रम AICTE Internship Portal के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इसका संचालन भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय (Additional Directorate General) द्वारा किया जाएगा। इसमें पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) के छात्रों को आधुनिक मीडिया, रणनीतिक संचार और डिजिटल कम्युनिकेशन की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी। कैसे होगी पूरी ट्रेनिंग? इंटर्नशिप की अवधि 75 दिन होगी। ट्रेनिंग शेड्यूल क्या-क्या सीखने का मिलेगा मौका? प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। प्रमुख विषय कितना मिलेगा स्टाइपेंड? चयनित अभ्यर्थियों को हर महीने ₹30,000 का स्टाइपेंड दिया जाएगा। पूरे प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने पर कुल ₹75 हजार तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। हालांकि, स्टाइपेंड प्राप्त करने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। निर्धारित उपस्थिति से कम रहने पर आर्थिक लाभ नहीं दिया जाएगा। कार्यालय में इन नियमों का करना होगा पालन भारतीय सेना ने सुरक्षा कारणों से कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज आवेदन के साथ निम्न दस्तावेज जमा करना आवश्यक होगा। ध्यान रहे कि दिल्ली में रहने और अन्य व्यक्तिगत खर्चों की व्यवस्था अभ्यर्थियों को स्वयं करनी होगी। आवेदन से पहले जान लें यह महत्वपूर्ण बात भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इंटर्नशिप पूरी करने के बाद किसी भी प्रकार की स्थायी नौकरी या नियुक्ति की गारंटी नहीं दी जाएगी।

MP News: छात्रों ने AI से लिखे उत्तर, कॉपी के आखिर में छोड़ गए ‘लिंक पर क्लिक करें’

MP News: सागर विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के दौरान ChatGPT से सामूहिक नकल का मामला सामने आया। जांच शुरू, संबंधित कॉलेज के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए गए हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग के बीच मध्य प्रदेश के सागर से एक गंभीर मामला सामने आया है। डॉ. हरी सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान उत्तरपुस्तिकाओं में ऐसे संकेत मिले, जिनसे ChatGPT की मदद से सामूहिक नकल किए जाने का संदेह पैदा हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने छिंदवाड़ा जिले के सौंसर स्थित एक निजी कॉलेज के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए हैं। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि शुरुआती जांच में सामने आए संकेत सही साबित होते हैं तो यह विश्वविद्यालय परीक्षाओं में AI के कथित दुरुपयोग का प्रदेश के चर्चित मामलों में से एक माना जा सकता है। उत्तरपुस्तिका में मिला संदिग्ध संदेश, यहीं से शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार, मई में विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 17 कॉलेजों में स्नातक द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित हुई थीं। केंद्रीय मूल्यांकन के दौरान अर्थशास्त्र विषय की एक उत्तरपुस्तिका में परीक्षक की नजर उत्तर के अंत में लिखे एक असामान्य संदेश पर पड़ी। उत्तर के नीचे “वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें” जैसा उल्लेख लिखा हुआ था। परीक्षा की उत्तरपुस्तिका में इस तरह का संदेश मिलने पर परीक्षक ने तत्काल परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी दी। तीन विषयों की कॉपियों में मिले एक जैसे उत्तर शुरुआती जांच के बाद संबंधित कॉलेज की अन्य उत्तरपुस्तिकाओं की भी जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के उत्तर काफी हद तक एक जैसे हैं। विश्वविद्यालय को प्राथमिक स्तर पर यह संदेह हुआ कि कई उत्तर ChatGPT या अन्य AI टूल की मदद से तैयार किए गए हो सकते हैं। यह समानता केवल एक विषय तक सीमित नहीं रही, बल्कि तीन अलग-अलग विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं में भी ऐसे संकेत मिले। पूरे कॉलेज के परीक्षा परिणाम पर लगी रोक मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सतपुड़ा कॉलेज ऑफ इंफॉर्मेशन एंड बायोटेक्नोलॉजी, सौंसर (छिंदवाड़ा) के सभी परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिए हैं। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध अन्य महाविद्यालयों के परिणाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। जांच समिति करेगी अंतिम फैसला विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल के अनुसार, संबंधित कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी किया जा रहा है। पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। समिति अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद यह तय करेगी कि मामले में क्या कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने सहित अन्य अनुशासनात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं। एक नजर में पूरा मामला महत्वपूर्ण जानकारी

MP News: ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

MP News: ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन बनेगा। 500 करोड़ की केंद्रीय सहायता, 9 हजार करोड़ निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार का रास्ता खुलेगा। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मिली है। ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ)विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए गुरुवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके जरिए मोबाइल, नेटवर्किंग उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स और भविष्य की 5जी-6जी तकनीकों के उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत-2047 के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे भारत के दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि अब देश केवल टेलीकॉम सेवाओं का उपभोक्ता नहीं, बल्कि आधुनिक दूरसंचार उपकरणों का वैश्विक निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार देगी 500 करोड़ रुपये की सहायता परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपये की 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता मंजूर की है। करीब 350 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाला यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर तैयार होगा, ताकि उद्योगों को तेजी से उत्पादन शुरू करने में सुविधा मिल सके। एक ही परिसर में मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं इस एकीकृत औद्योगिक परिसर में दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं— इससे भारत में हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। 9 हजार करोड़ निवेश और 10 हजार से अधिक रोजगार सरकार के अनुसार इस परियोजना के माध्यम से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लगभग 9 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होगा। इससे 10 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी। पहले चरण में इन कंपनियों का निवेश परियोजना के पहले चरण में देश की प्रमुख कंपनियां निवेश करेंगी। इनमें शामिल हैं— इन कंपनियों की ओर से लगभग 2 हजार करोड़ रुपये का शुरुआती निवेश किया जाएगा, जिससे 4,500 से अधिक उच्च वेतन वाले रोजगारसृजित होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर करेंगी संचालन परियोजना के संचालन और प्रबंधन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा। इसमें— यह मॉडल केंद्र और राज्य सरकार की साझा भागीदारी वाली महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल होगा। केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत को दूरसंचार क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए मजबूत स्वदेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है। उनके अनुसार ग्वालियर का यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन भारत को दुनिया पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया को भारत पर निर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

MP News: MP के सरकारी स्कूलों के लिए नई सौगात, लगातार 3 साल 100% रिजल्ट पर मिलेगा ₹5 लाख का इनाम

MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 3 साल लगातार 100% बोर्ड रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को ₹5 लाख और प्राचार्यों को ₹1 लाख पुरस्कार देने की घोषणा की। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि जो शासकीय विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें 5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। यह घोषणा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में आयोजित महर्षि सांदीपनि गुरुपर्व एवं अलंकरण समारोह के दौरान की गई। इस अवसर पर प्रदेश के पहले ‘गीता भवन’ का भी लोकार्पण हुआ, जिसका निर्माण लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों और संस्था प्रमुखों को सम्मानित करना सरकार की प्राथमिकता है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा, नवाचार और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। 100% रिजल्ट देने वाले सरकारी स्कूलों को मिलेगा 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जो सरकारी विद्यालय लगातार तीन वर्षों तक बोर्ड परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम देंगे, उन्हें विद्यालय के सर्वांगीण विकास के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार होगा और विद्यार्थियों के प्रदर्शन में भी सुधार आएगा। राचार्यों को मिलेगा 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार समारोह में मुख्यमंत्री ने लगातार तीन वर्षों तक उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों के लिए भी विशेष पुरस्कार की घोषणा की। ऐसे विद्यालयों के संस्था प्रमुखों को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती पूरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 10,000 नए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाकर पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। ‘मिशन बुनियाद’ के तहत AI आधारित पढ़ाई प्रदेश में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मिशन बुनियाद’ की शुरुआत की घोषणा भी की। इस योजना के तहत प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों (कक्षा 9वीं से 12वीं) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को नई तकनीकों से जोड़ना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। उज्जैन में हुआ प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन में करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जयिनी ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की ऐतिहासिक भूमि है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि सांदीपनि की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु और माता-पिता के महत्व को रेखांकित किया।

Government Scheme 2026: नौकरी छूटने पर मिलेगी आर्थिक राहत, जानिए क्या है अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

Government Scheme 2026 अगर आपकी ESIC वाली नौकरी छूट गई है तो अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के तहत 90 दिन तक 50% सैलरी मिल सकती है। जानें पात्रता, दस्तावेज और क्लेम प्रक्रिया। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Government Scheme 2026: प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए नौकरी का सुरक्षित रहना हमेशा तय नहीं होता। आर्थिक मंदी, कंपनी की वित्तीय स्थिति या अन्य कारणों से अचानक नौकरी चली जाए तो परिवार की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी स्थिति में अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना बड़ी राहत देने वाली योजना साबित हो सकती है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को नौकरी छूटने के बाद 90 दिनों तक उनकी औसत मजदूरी का 50 प्रतिशत बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है। केंद्र सरकार ने इस योजना की अवधि 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक बढ़ाने को मंजूरी दी है। लोकसभा में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लिखित उत्तर में बताया कि योजना के तहत क्लेम प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान और तेज बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। क्या है अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना? अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) ESIC के तहत बीमित कर्मचारियों के लिए शुरू की गई एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसका उद्देश्य नौकरी छूटने के बाद कर्मचारियों को कुछ समय तक आर्थिक सहायता देना है, ताकि वे नई नौकरी मिलने तक अपने खर्च पूरे कर सकें। यह योजना पहली बार 1 जुलाई 2018 को प्रायोगिक रूप से लागू की गई थी। शुरुआत में कर्मचारियों को औसत वेतन का 25 प्रतिशत भुगतान किया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया। ध्यान दें: इस योजना का लाभ जीवन में केवल एक बार ही लिया जा सकता है। अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना: एक नजर में योजना का नाम: अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) 🏢 संचालित संस्था: कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) किसके लिए: ESIC में पंजीकृत निजी क्षेत्र के कर्मचारी मिलने वाला लाभ: औसत वेतन का 50% बेरोजगारी भत्ता लाभ की अवधि: अधिकतम 90 दिन (3 महीने) लाभ कितनी बार मिलेगा: जीवन में सिर्फ एक बार योजना की वर्तमान अवधि: 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 पात्रता: कम से कम 1 वर्ष की नौकरी और ESIC में 78 दिनों का अंशदान क्लेम कब कर सकते हैं: नौकरी छूटने के 30 दिन बाद जरूरी दस्तावेज: आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, शपथ पत्र और क्लेम फॉर्म भुगतान का तरीका: राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। उदाहरण: यदि आपकी आखिरी मासिक सैलरी ₹20,000 थी, तो पात्र होने पर आपको 3 महीने तक हर महीने ₹10,000 की आर्थिक सहायता मिल सकती है। कौन उठा सकता है योजना का लाभ? इस योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी। नौकरी छूटने के कितने दिन बाद मिलेगा पैसा? योजना के तहत बेरोजगारी भत्ता नौकरी छूटने के 30 दिन बाद देय होता है। यदि पात्रता पूरी होती है तो कर्मचारी क्लेम कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की आखिरी मासिक सैलरी 20,000 रुपये थी, तो उसे तीन महीने तक हर महीने 10,000 रुपये तक का भुगतान मिल सकता है। क्लेम करने की प्रक्रिया यदि आपकी नौकरी छूट चुकी है और 30 दिन पूरे हो चुके हैं, तो इन चरणों का पालन करें— क्लेम के लिए जरूरी दस्तावेज क्लेम करते समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होगी— इन दस्तावेजों को संबंधित ESIC शाखा या DCBO कार्यालय में जमा किया जा सकता है। इच्छुक कर्मचारी डाक के माध्यम से भी दस्तावेज भेज सकते हैं। ESIC से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

MP News: इंदौर मेट्रो के आसपास होगा बड़ा बदलाव, 31 किमी कॉरिडोर पर बनेंगे 4 TOD क्लस्टर, हाईराइज डेवलपमेंट को मिलेगी रफ्तार

MP News: इंदौर मेट्रो के 31.32 किमी रूट के आसपास 4 TOD क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। जानिए किन इलाकों में होगा हाईराइज डेवलपमेंट और क्या होंगे बड़े बदलाव। इंदौर- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर शहर आने वाले वर्षों में एक नए शहरी विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है। मेट्रो परियोजना के साथ अब शहर में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) की योजना को भी गति दी जा रही है। इसका उद्देश्य मेट्रो स्टेशनों के आसपास आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाओं वाले क्षेत्रों का विकास करना है। 31.32 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे में विशेष विकास क्षेत्र तैयार किए जाएंगे। यहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन, हरित क्षेत्र और आधुनिक शहरी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ शहर के विकास की दिशा भी बदल सकती है। इसके लिए पहले चरण में चार प्रमुख क्लस्टर तैयार किए गए हैं। Indore Metro TOD Corridor क्या है? ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) ऐसा शहरी विकास मॉडल है, जिसमें मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास योजनाबद्ध तरीके से आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास किया जाता है। इस मॉडल का उद्देश्य लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है। पहले चरण में इन 4 क्लस्टर में होगा विकास शुरुआत में मेट्रो रूट के प्रमुख स्टेशनों को जोड़ते हुए चार क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। पहला क्लस्टर दूसरा क्लस्टर तीसरा क्लस्टर चौथा क्लस्टर मेट्रो कॉरिडोर के आसपास क्या-क्या बदलेगा? TOD योजना लागू होने के बाद मेट्रो रूट के आसपास कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रमुख विकास कार्य शहरवासियों और विशेषज्ञों से भी लिए जाएंगे सुझाव TOD कॉरिडोर तैयार करने वाली एजेंसी अरुप (Arup) शहर के नागरिकों, शहरी योजनाकारों और संबंधित विशेषज्ञों से सुझाव भी लेगी। इन सुझावों के आधार पर विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर मॉडल तैयार हो सके। मास्टर प्लान के साथ होगा समन्वय इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (ITPI) के इंदौर रीजनल सेंटर द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि TOD योजना को इंदौर के नए मास्टर प्लान और रीजनल प्लान के साथ जोड़ा जाएगा। आईटीपीआई इंदौर रीजनल सेंटर की सचिव प्रकृति सेठी और चेयरमैन डी. एल. गोयल के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर TOD से जुड़े नियमों और विकास संबंधी प्रावधानों में संशोधन पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि परियोजना प्रभावी ढंग से लागू हो सके। विशेषज्ञों ने साझा किए अंतरराष्ट्रीय अनुभव कार्यक्रम में अरुप कंसल्टेंसी फर्म के विशेषज्ञ जिग्नेश मेहता और रोमी राय ने विभिन्न शहरों में लागू TOD मॉडल के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास क्लस्टर आधारित विकास से शहरी यातायात, भूमि उपयोग और आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

MP News: किसानों की मांग पर सरकार का बड़ा फैसला, अब 60% मूंग खरीदेगी; ई-टोकन व्यवस्था भी फिलहाल स्थगित

MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की मांग मानते हुए मूंग खरीदी की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% कर दी है। स्लॉट बुकिंग और खरीदी की तारीख भी बढ़ी, ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। किसानों की मांग और जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए अब पात्र किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 25 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी जाएगी। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के हजारों मूंग उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार ने स्लॉट बुकिंग और खरीदी की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई जाएगी। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, ओबीसी कल्याण मंत्री कृष्णा गौर और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। MP मूंग खरीदी में सरकार ने किया बड़ा बदलाव बैठक के बाद कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत ही समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने का प्रावधान है। इसी नियम के आधार पर पहले किसानों की उपज का केवल 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की लगातार मांग और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने फैसला बदला और अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक MSP पर खरीदा जाएगा। स्लॉट बुकिंग और खरीदी की तारीख बढ़ाई गई सरकार ने किसानों को अधिक समय देने के लिए खरीदी प्रक्रिया की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों को मिलेगा फायदा सरकार के अनुसार नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह निर्णय किसानों के लिए काफी राहत लेकर आएगा। औसतन यह करीब तीन क्विंटल प्रति एकड़ तक की खरीदी के बराबर माना जा रहा है, जिससे अधिक किसानों को MSP का लाभ मिल सकेगा। खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल बंद किसानों की दूसरी बड़ी मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी। जब तक समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक खाद वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा। किसानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मुख्य फैसले एक नजर में सरकार का क्या कहना है? कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। किसानों की मांग और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मूंग खरीदी की सीमा बढ़ाने का फैसला लिया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।

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