MP Weather: भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले 48 घंटे तक मेहरबान रहेगा मानसून

MP Weather: मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। भोपाल, इंदौर, रायसेन, सीधी समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी है। जानिए अगले 48 घंटे का मौसम अपडेट। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather: मध्य प्रदेश में कुछ दिनों के ब्रेक के बाद मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सोमवार देर रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला मंगलवार तक कई जिलों में जारी रहा। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवातीय परिसंचरण, प्रदेश से गुजर रही ट्रफ और बंगाल की खाड़ी व छत्तीसगढ़ की ओर से लगातार मिल रही नमी के कारण अगले 24 से 48 घंटे तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई जिलों में भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। बारिश की वापसी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही जिन किसानों की बोवनी अधूरी थी, उनके लिए भी यह बारिश राहत लेकर आई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बारिश खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। अगले 48 घंटे का मौसम कैसा रहेगा? मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश में मानसून सक्रिय बना रहेगा। इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना इन जिलों में मध्यम से तेज बारिश के आसार क्यों सक्रिय हुआ मानसून? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल तीन प्रमुख मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं। इन्हीं कारणों से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर बना हुआ है। किसानों के लिए राहत की खबर मानसून की सक्रियता से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंच रही है। जिन इलाकों में बोवनी बाकी थी, वहां अब कृषि कार्य तेज होने की उम्मीद है। पहले बारिश की कमी से किसान चिंतित थे, लेकिन लगातार हो रही वर्षा ने खरीफ फसलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दी हैं। मौसम से जुड़ी जरूरी बातें अगले दो दिनों में ध्यान रखें

MP Weather Update: 19 जुलाई से बदलेगा मौसम का मिजाज, मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश की संभावना

MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है और अब तक 11% कम बारिश दर्ज हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 19 जुलाई से नया सिस्टम एक्टिव होगा, जिससे कई जिलों में तेज और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। जानिए किन जिलों में येलो अलर्ट जारी हुआ है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मानसून इन दिनों कमजोर पड़ गया है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में बारिश का इंतजार लंबा हो गया है। प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि राहत की खबर यह है कि 19 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जिसके बाद प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश, किसान चिंतित मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। इसका असर प्रदेश के 35 जिलों में देखने को मिला है, जहां सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। जबलपुर सहित कई जिलों में बारिश की कमी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए इस समय पर्याप्त बारिश बेहद जरूरी है। फिलहाल प्रदेश में कोई मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं होने के कारण अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में केवल हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। 19 जुलाई से एक्टिव होगा नया सिस्टम, तेज होगी बारिश मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक 19 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। इसके सक्रिय होने के बाद मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। विशेष रूप से पूर्वी और मध्य मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश के साथ कुछ इलाकों में भारी वर्षा होने के भी संकेत हैं। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है तो मानसून दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है, जिससे खेती-किसानी और जल स्रोतों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। अलर्ट वाले प्रमुख जिलों में झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, इंदौर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, जबलपुर, डिंडौरी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, रीवा, सीधी और मैहर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। किसानों को मिलेगी राहत, मौसम अपडेट पर रखें नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 19 जुलाई के बाद बनने वाला सिस्टम अपेक्षित रूप से सक्रिय रहता है तो खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी और किसानों की चिंता काफी हद तक कम हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से मौसम संबंधी ताजा अपडेट पर नजर रखें। जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना बनेगी, वहां समय-समय पर आवश्यक चेतावनी और दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे।

MP Monsoon 2026: 9 दिन की देरी के बाद मध्य प्रदेश में मानसून की धमाकेदार एंट्री, 45 जिलों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

MP Monsoon 2026 Update: मध्य प्रदेश में 9 दिन की देरी से मानसून की एंट्री हो गई है। भोपाल, इंदौर सहित 45 जिलों में भारी बारिश, तेज आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Monsoon 2026: मध्य प्रदेश में आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दमदार एंट्री कर ली है। इस बार मानसून सामान्य तिथि से 9 दिन की देरी से पहुंचा, लेकिन आते ही प्रदेश के कई हिस्सों में झमाझम बारिश और तेज आंधी का दौर शुरू हो गया। मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम समेत 45 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। दो सीमाओं से हुई मानसून की एंट्री मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मानसून ने बुधवार को प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों से एक साथ प्रवेश किया। अलीराजपुर, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। मानसून के प्रभाव से कई इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं और कई स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई। भोपाल की दहलीज तक पहुंचा मानसून राजधानी भोपाल में भी मानसून की दस्तक महसूस होने लगी है। बुधवार शाम को अचानक मौसम बदला और गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। दिनभर की उमस और गर्मी के बाद हुई इस बारिश से लोगों को बड़ी राहत मिली। हालांकि मौसम विभाग ने अभी भोपाल में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन नर्मदापुरम तक इसके पहुंचने के बाद माना जा रहा है कि अगले कुछ घंटों या एक-दो दिन में राजधानी भी मानसून की चपेट में आ जाएगी। 9 दिन की देरी से पहुंचा मानसून मौसम केंद्र के पूर्वानुमान अधिकारी अरुण शर्मा ने बताया कि मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। इस वर्ष मानसून 24 जून को प्रदेश में सक्रिय हुआ, यानी यह लगभग 9 दिन देरी से पहुंचा है। उन्होंने बताया कि अगले 2 से 3 दिनों में मानसून पूरे मध्य प्रदेश को कवर कर सकता है, जिससे अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश की संभावना है। अब तक सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश एक जून से 24 जून तक के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में सामान्य वर्षा की तुलना में करीब 50 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद आने वाले दिनों में इस कमी की भरपाई होने की उम्मीद है। 45 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, दतिया, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, सागर, छतरपुर सहित कुल 45 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं सीहोर जिले के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। किसानों और आम लोगों को राहत मानसून की एंट्री से किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई है। खरीफ फसलों की बुवाई का इंतजार कर रहे किसानों को अब राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही लगातार पड़ रही गर्मी और उमस से भी लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

El Niño Alert: 12 राज्यों के 315 जिलों में कम बारिश का खतरा, कृषि मंत्री शिवराज ने बनाई विशेष मॉनिटरिंग सेल

El Niño Alert के बीच केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर है। 12 राज्यों के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई गई है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मॉनिटरिंग सेल गठित कर राज्यों को तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। El Niño Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के बढ़ते संकेतों के बीच केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हालात की समीक्षा करते हुए राज्यों को जरूरी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। 315 जिलों में कम बारिश की आशंका, 111 जिले सबसे संवेदनशील कृषि मंत्रालय की समीक्षा बैठक में सामने आया कि देश के करीब 315 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। इनमें से 111 जिलों को अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं सीमित होने के कारण फसलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में कई इलाकों में सामान्य औसत की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इससे खरीफ सीजन की बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश समेत 12 राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा अल नीनो का प्रभाव मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों में अधिक देखने को मिल सकता है। इन राज्यों में कृषि गतिविधियां काफी हद तक मानसून पर निर्भर हैं, इसलिए कम बारिश किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। कृषि मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे पहले से तैयार आकस्मिक योजनाओं (Contingency Plans) को तुरंत लागू करें और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करें। शिवराज सिंह चौहान ने बनाई विशेष मॉनिटरिंग सेल कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव की लगातार निगरानी के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सेल और क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप को सक्रिय किया गया है। ये टीमें मौसम, फसल और जल उपलब्धता की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगी और समय-समय पर राज्यों को आवश्यक सलाह देंगी। जल संरक्षण और वैकल्पिक फसलों पर जोर सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फैसला किया है। तालाब, चेक डैम, खेत-तालाब और अन्य जल संरचनाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने और फसल विविधीकरण बढ़ाने की सलाह दी गई है। किसानों से अपील: जल्दबाजी में न करें बुवाई कृषि मंत्रालय ने किसानों से अपील की है कि पर्याप्त बारिश होने तक बुवाई की जल्दबाजी न करें। कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों तक मौसम आधारित सलाह पहुंचाई जाएगी। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में अभी खरीफ फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर शुरू नहीं हुई है, इसलिए अगले कुछ सप्ताह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार का भरोसा सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में अनाज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और खाद्य सुरक्षा पर किसी भी तरह का संकट नहीं आने दिया जाएगा। हालांकि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसानों और कृषि उत्पादन को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

MP Weather: मध्य प्रदेश मौसम अलर्ट: 48 घंटे भारी, आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से किसानों पर संकट

भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather: प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। उत्तर भारत से सक्रिय होकर आगे बढ़े पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के असर से मध्य प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। मौसम विभाग ने ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वीडियो देखिए अगले 48 घंटे क्यों हैं अहम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटे प्रदेश के लिए संवेदनशील रहेंगे। कई जिलों में तेज हवाओं (30-40 किमी/घंटा) के साथ बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना है। इससे तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज हो सकती है और ठंड का असर बढ़ेगा। 23-24 फरवरी को फिर बदलेगा मौसम एक नया पश्चिमी विक्षोभ 23 फरवरी से सक्रिय होगा। इन जिलों में ओलावृष्टि की आशंका राजगढ़, नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी के कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। आंधी-तूफान का अलर्ट ग्वालियर, भिंड, दतिया और मुरैना में तेज हवाएं चलने के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इन शहरों में हल्की बारिश इंदौर, भोपाल और उज्जैन में आंशिक बादल छाए रहेंगे, साथ ही कुछ इलाकों में हल्की बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। किसानों के लिए खतरे की घंटी फरवरी में तीसरी बार मौसम बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खड़ी गेहूं और चने की फसल पर बारिश और ओलावृष्टि से बड़ा नुकसान हो सकता है।कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक: सलाह:किसान 23 फरवरी से पहले फसल की कटाई पूरी कर लें और अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखें। पिछले 48 घंटे का हाल प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। उज्जैन, मंदसौर, धार, शिवपुरी, ग्वालियर, भोपाल समेत 25 जिलों के करीब 80 शहरों में बारिश हुई।श्योपुर में 63 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी चली और कई गांवों में खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन ने कई क्षेत्रों में सर्वे शुरू कर दिया है। तापमान में गिरावट बारिश और ठंडी हवाओं के कारण अधिकांश शहरों में दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी भोपाल में अधिकतम तापमान करीब 28°C और न्यूनतम 17°C रहने का अनुमान है।

MP Weather Update: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बढ़ा बारिश का खतरा,मध्यप्रदेश में कब तक बरसेगी बारिश? IMD ने दी बड़ी चेतावनी

भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather Update: मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बने दोहरे सिस्टम के असर से राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया है, जिससे ठंडक में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में बारिश और ठंड दोनों का असर बढ़ सकता है। दो सिस्टमों का डबल इफेक्ट मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस समय प्रदेश पर दो प्रमुख मौसम प्रणालियों का असर है। इन दोनों सिस्टमों से लगातार नमी आ रही है, जिससे आसमान में बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर बारिश हो रही है। नवंबर में दस्तक देगा पश्चिमी विक्षोभ मौसम विभाग के अनुसार, 1 नवंबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में दस्तक देगा, जिसका सीधा असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा।इससे बारिश की गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है।1 से 4 नवंबर के बीच कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है।इसके साथ ही दिन और रात का तापमान गिरने से ठंड का असर भी बढ़ेगा। इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट IMD ने जिन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, वे हैं —भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सीधी, रीवा, विदिशा, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगौन, आगर, मंदसौर, नीमच, मऊगंज, अनुपपुर, गुना, मुरैना, श्योपुरकलां, सिंगरौली और शहडोल। किसानों और आम जनता के लिए चेतावनी मौसम विभाग ने कहा है कि लगातार बारिश से फसलों को नुकसान की संभावना है।किसानों को सलाह दी गई है कि वे साथ ही, आम जनता को भी बिजली कड़कने, तेज हवा और जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने की अपील की गई है।

Heat Waves Alert: रतलाम, मंदसौर और निमच में अगले दो दिन हीटवेव की चेतावनी, तापमान 44 डिग्री तक पहुंचने के आसार

रतलाम- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Heat Waves Alert: मध्यप्रदेश में गर्मी ने दस्तक दे दी है और राज्य के अधिकांश हिस्सों में तापमान 39 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। 29 अप्रैल 2025 को शाम 5:30 बजे तक गुना में सबसे अधिक तापमान 43.5 डिग्री दर्ज किया गया। बीते 24 घंटों में तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं देखा गया है। राज्य के ग्वालियर, गुना, रतलाम, उज्जैन, सागर और टीकमगढ़ जिलों में सामान्य से अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया है, जबकि शेष जिलों में तापमान सामान्य के आसपास बना रहा। तापमान पूर्वानुमान:भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 30 अप्रैल को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य सीमा में रहने की संभावना है, लेकिन यह 39 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हीटवेव चेतावनी:आगामी दो दिनों में रतलाम, मंदसौर और नीमच जिलों में लू चलने की संभावना है। प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सावधानियां व सुझाव:

MP Weather Update: एमपी में भीषण गर्मी का कहर: 13 जिलों में पारा 40 के पार, दो जिलों में लू, कुछ इलाकों में बारिश का अलर्ट

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather Update: मध्य प्रदेश में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को प्रदेश के 13 जिलों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सबसे अधिक तापमान रतलाम में 42.6 डिग्री और नर्मदापुरम में 42.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जहां लू जैसे हालात बने रहे। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक गर्मी और बढ़ने की चेतावनी जारी की है। भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन में पहली बार 40 के पार पाराइस सीजन में पहली बार भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों का तापमान 40 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया। भोपाल में रविवार को तापमान 40.5 डिग्री, ग्वालियर में 40.2 डिग्री और उज्जैन में 40.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं इंदौर और जबलपुर भी भीषण गर्मी की चपेट में रहे, जहां तापमान क्रमशः 39.8 और 39.6 डिग्री सेल्सियस रहा। रात में भी नहीं मिल रही राहतगर्मी का असर रात के तापमान पर भी देखने को मिल रहा है। धार में रात का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन की सबसे गर्म रातों में से एक रही। हालांकि पचमढ़ी में रविवार को प्रदेश का सबसे कम तापमान 14.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो थोड़ी राहत देने वाला रहा। लू और बारिश दोनों का अलर्ट जारीमौसम विभाग के मुताबिक, 9 अप्रैल को बालाघाट, डिंडोरी, सिंगरौली, मंडला और अनूपपुर जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। दूसरी ओर, राजस्थान से सटे एमपी के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को गर्मी और लू से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अगले 3 दिन सतर्क रहेंविशेषज्ञों के अनुसार, अगले तीन दिन तक प्रदेश में गर्म हवाओं और तेज धूप का असर बना रहेगा। दिन में बाहर निकलने से बचें, धूप में छाता या टोपी का उपयोग करें और पानी की कमी न होने दें। ताजा मौसम अपडेट और अलर्ट के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।

MP Weather: MP में 27-31 मार्च के बीच लू के आसार, रतलाम-नर्मदापुरम सबसे गर्म, भोपाल-इंदौर में भी बढ़ेगी गर्मी

भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP Weather: मध्यप्रदेश में बारिश और ओलों का दौर थमते ही गर्मी ने जोर पकड़ लिया है। प्रदेश के कई जिलों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री के पार पहुंच चुका है। रतलाम में लगातार दूसरे दिन तापमान 39 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया, जबकि नर्मदापुरम में भी गर्मी तीखी बनी रही। मौसम विभाग ने 27 से 31 मार्च के बीच लू चलने की संभावना जताई है, खासतौर पर मालवा-निमाड़ के जिलों रतलाम, उज्जैन, खरगोन, खंडवा और धार में लू का असर ज्यादा रह सकता है।   मौसम विभाग के अनुसार, दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे पारा 40 डिग्री के पार जा सकता है। सोमवार को रतलाम में सबसे अधिक 39.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि नर्मदापुरम में 38.9 डिग्री, धार में 38.6 डिग्री, खरगोन में 37.2 डिग्री, शाजापुर में 37.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 37 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।     बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 35.5 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, ग्वालियर में 36.1 डिग्री, उज्जैन में 37.5 डिग्री और जबलपुर में 35 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।   अगले दो दिन ऐसा रहेगा मौसम   25 मार्च को गर्मी का असर रहेगा और तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।   26 मार्च को तीखी धूप के कारण गर्मी और बढ़ेगी, बारिश की संभावना नहीं है।   मौसम विभाग ने मार्च से मई तक 15 से 20 दिन लू चलने की संभावना जताई है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा रहेगा, जिससे 30 से 35 दिन तक गर्म हवाएं चल सकती हैं।   भोपाल में मार्च में दिन में तेज गर्मी पड़ने के साथ बारिश का भी ट्रेंड है। 30 मार्च 2021 को अधिकतम तापमान 41 डिग्री पहुंचा था। 9 मार्च 1979 की रात में पारा 6.1 डिग्री तक गिर गया था। 2014 से 2023 के बीच अधिकतर बार तापमान 38 से 41 डिग्री के बीच रहा।   इंदौर में मार्च में गर्मी का असर तेज होने लगता है। यहां दिन का पारा 41.1 डिग्री तक पहुंच चुका है, जो 28 मार्च 1892 को दर्ज किया गया था। 4 मार्च 1898 को रात में पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक रहा था। 24 घंटे में करीब एक इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जबकि पूरे महीने में दो इंच पानी गिर चुका है।   ग्वालियर में 31 मार्च 2022 को दिन का पारा रिकॉर्ड 41.8 डिग्री पहुंच गया जबकि 1 मार्च 1972 की रात में न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री रिकॉर्ड हो चुका है। साल 2015 में पूरे महीने 5 इंच से ज्यादा पानी गिरा। 12 मार्च 1915 को 24 घंटे में करीब 2 इंच बारिश हुई थी।   जबलपुर में मार्च में भी रातें ठंडी रहती हैं। पारा औसत 15 डिग्री के आसपास ही रहता है। वहीं, दिन में 36 से 40 डिग्री के बीच तापमान दर्ज किया जाता है। 31 मार्च 2017 को दिन का पारा 41.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है जबकि 4 मार्च 1898 में रात का तापमान 3.3 डिग्री दर्ज किया गया था। यहां मार्च में मावठा भी गिरता है। पिछले 10 में से 9 साल बारिश हो चुकी है।   उज्जैन में दिन गर्म रहते हैं। 22 मार्च 2010 को पारा रिकॉर्ड 42.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। 1 मार्च 1971 की रात में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री रहा था। पिछले साल दिन में तापमान 36 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। उज्जैन में 2017 सबसे गर्म साल रहा था। मौसम विभाग के अनुसार, इस महीने बारिश भी होती है। एक दिन में पौने 2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 17 मार्च 2013 का है।   गर्मी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां बरतें। दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें, हल्के और सूती कपड़े पहनें, ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लें, धूप में निकलते समय छाता, टोपी या गमछा इस्तेमाल करें और जरूरत हो तो ओआरएस या इलेक्ट्रॉल का सेवन करें।  

Weather Update: भारत के शहर भीषण गर्मी से निपटने को तैयार नहीं, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Weather Update: भारत के प्रमुख शहरों में भीषण गर्मी से बचाव के लिए दीर्घकालिक समाधान की कमी है। सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नीति निर्माता सिर्फ तत्काल राहत देने वाले उपायों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि लंबे समय तक प्रभावी रहने वाली रणनीतियों की कमी बनी हुई है।    9 प्रमुख शहरों का अध्ययन, स्थिति चिंताजनक   रिपोर्ट में दिल्ली, बेंगलुरु, फरीदाबाद, ग्वालियर, कोटा, लुधियाना, मेरठ, मुंबई और सूरत में गर्मी से बचाव की तैयारियों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि इन शहरों में पानी की उपलब्धता, कार्यस्थल समय में बदलाव और अस्पतालों की तैयारियों जैसे तात्कालिक उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन हीट एक्शन प्लान को लेकर कोई ठोस दीर्घकालिक नीति नहीं बनाई गई है।   हीटवेव का खतरा बढ़ेगा, समाधान जरूरी   विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में हीटवेव की तीव्रता और अवधि बढ़ने की आशंका है। यदि शहरी नियोजन में बदलाव, ग्रीन कवर बढ़ाने, ऊर्जा व्यवस्था मजबूत करने और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।   संस्थान और प्रशासन में तालमेल की कमी   रिपोर्ट में बताया गया कि नगर निकाय और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की भारी कमी है। हीट एक्शन प्लान का संस्थागत ढांचा कमजोर है और इसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नजर आती है।   क्या करने की जरूरत? रिपोर्ट में अहम सुझाव   1. स्थानीय प्रशासन को दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी, जिसमें ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, गर्मी सहन करने योग्य इमारतें और सार्वजनिक स्थानों को अधिक आरामदायक बनाने पर जोर दिया जाए।   2. आपदा प्रबंधन निधि से हीटवेव से निपटने के लिए धन जुटाने की व्यवस्था करनी होगी।   3. हीट ऑफिसर्स की नियुक्ति कर उनके अधिकार बढ़ाने होंगे, ताकि वे गर्मी से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर सकें।   4. शहरी नियोजन में बदलाव कर गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी होगी।   हीटवेव से बचने के लिए ठोस रणनीति जरूरी   सस्टेनेबल फ्यूचर्स कोलैबोरेटिव के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भीषण गर्मी से बचने के लिए तत्काल उपायों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक समाधान अपनाने होंगे। अन्यथा, भविष्य में गर्मी का संकट और गंभीर हो सकता है।  

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