MP News: उज्जैन में जलती चिता के पास किन्नर अघोरी का वीडियो वायरल, मानव मांस खाने के दावे से मचा हंगामा

MP News: उज्जैन में किन्नर अघोरी का वीडियो वायरल हुआ है। जलती चिता से कथित मानव मांस खाने के दावे पर संत समाज ने आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। उज्जैन- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: उज्जैन में श्मशान घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में खुद को अघोरी और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बताने वाली काली उर्फ नंद गिरी जलती चिता के पास दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह चिता से कथित तौर पर मानव अवशेष निकालकर खाने का दावा करती नजर आती हैं। वीडियो सामने आने के बाद संत समाज और आम लोगों के बीच इसे लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। संत समाज के कुछ लोगों ने इस तरह की गतिविधि को अघोर परंपरा की मर्यादा के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई जा रही सामग्री वास्तव में मानव मांस या मानव अवशेष ही है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल वीडियो में किए गए दावे के तौर पर देखा जा रहा है। वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है? वायरल वीडियो में रात के समय श्मशान में जलती चिता के पास एक महिला दिखाई देती है। उसके शरीर पर भस्म लगी हुई है और उसके हाथ में तलवार नजर आती है। वीडियो में वह चिता के पास जाकर तलवार की मदद से कुछ सामग्री निकालती दिखाई देती है। इसके बाद उस सामग्री पर पानी डालकर उसे ठंडा करती है और फिर खाने का दावा करती है। वीडियो में वह खुद को अघोरी बताते हुए कथित तौर पर मानव मांस खाने की बात कहती है। वीडियो के अंत में वह पेट भरने की बात भी कहती सुनाई देती है। यह वीडियो इंस्टाग्राम के Digambarladyaghorinagasadhvi नामक अकाउंट से शेयर किए जाने के बाद तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। वीडियो को लेकर संत समाज में नाराजगी वीडियो वायरल होने के बाद अघोर परंपरा से जुड़े संतों ने इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन पर आपत्ति जताई है। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि के मुताबिक अघोर परंपरा की अपनी मर्यादा होती है। उनके अनुसार तंत्र से जुड़ी क्रियाओं को सार्वजनिक प्रदर्शन का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रचार के लिए इस तरह की गतिविधियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करना परंपरा के अनुरूप नहीं है। संत समाज की ओर से यह भी सवाल उठाया गया है कि धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं के नाम पर सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री प्रसारित करने से आम लोगों के बीच गलत संदेश जा सकता है। पुलिस में शिकायत का दावा मामले में अघोरी अखाड़े के पीठाधीश्वर और राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ की ओर से पुलिस में शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में कथित तौर पर जलती चिता के पास जाकर मानव अवशेषों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे पाखंड फैलाने वाली गतिविधि बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि वीडियो में दिखाई दे रही सामग्री वास्तव में मानव शव के अवशेष है, तो मामले की जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। जांच के बाद साफ होगी वीडियो की सच्चाई सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन किसी वायरल वीडियो के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि उसमें दिखाई गई सामग्री वास्तव में मानव मांस ही है। मामले में पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी की ओर से वीडियो की सामग्री, उसकी वास्तविकता और घटना की परिस्थितियों की पुष्टि होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। Disclaimer इस खबर में वायरल सोशल मीडिया वीडियो और उससे जुड़े दावों का उल्लेख किया गया है। वीडियो में दिखाई गई सामग्री वास्तव में मानव मांस या मानव अवशेष है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। खबर में किसी व्यक्ति के संबंध में लगाए गए आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित पक्षों और आधिकारिक जांच से सामने आने वाली जानकारी के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। पाठकों से अपील है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी दावे को अंतिम सत्य न मानें और भ्रामक जानकारी को आगे साझा करने से बचें।

Ratlam News: रतलाम में क्रेटा कार से 73.72 लाख रुपये बरामद, बोरे में मिली नकदी

Ratlam News: रतलाम के नामली में पुलिस ने बिना नंबर की क्रेटा कार से 73 लाख 72 हजार 500 रुपये बरामद किए। नकदी के स्रोत और दस्तावेजों की जांच जारी है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: नामली थाना क्षेत्र में शनिवार शाम पुलिस की चेकिंग के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने से मामला चर्चा में आ गया। पंचेड़ फंटे पर पुलिस ने बिना नंबर की सफेद क्रेटा कार को रोककर तलाशी ली। कार में रखे यूरिया के बोरे से नोटों की कई गड्डियां बरामद हुईं। पुलिस के अनुसार, नकदी की गिनती पूरी होने पर कुल 73 लाख 72 हजार 500 रुपये सामने आए। रकम में 100, 200 और 500 रुपये के नोट शामिल थे। नोटों की गिनती के लिए नामली के सराफा व्यापारियों से दो मशीनें मंगवाई गई थीं। मामले की सूचना मिलने के बाद एएसपी राकेश पंद्रो भी नामली थाने पहुंचे। पुलिस ने कार और नकदी को जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब मुख्य सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या है और इसे कहां ले जाया जा रहा था। पंचेड़ फंटे पर पुलिस ने रोकी बिना नंबर की कार शनिवार शाम नामली पुलिस पंचेड़ फंटे पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान बिना नंबर की सफेद रंग की क्रेटा कार को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कार में रखे यूरिया के बोरे से नोटों की गड्डियां मिलीं। पुलिस ने नकदी को कब्जे में लेकर थाने पहुंचाया और पूरी रकम की गिनती कराई। मशीनों से हुई नोटों की गिनती रकम काफी अधिक होने के कारण सामान्य तरीके से गिनती में समय लग सकता था। इसके लिए नामली के सराफा कारोबारियों से दो नोट गिनने वाली मशीनें मंगवाई गईं। थाना प्रभारी के चैंबर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में नकदी की गिनती की गई। गिनती पूरी होने के बाद रकम ₹73,72,500 निकली। एक नजर में पूरा मामला युवक ने जमीन बेचकर रकम लाने की बात कही पुलिस पूछताछ में युवक ने खुद को कृषक बताया है। उसके अनुसार, वह जमीन बेचकर मिली रकम लेकर आया था। वह किसी काम से रतलाम गया था, लेकिन काम नहीं होने पर रकम लेकर उमठ पालिया स्थित अपने घर लौट रहा था। हालांकि, इतनी बड़ी नकदी मिलने के बाद पुलिस अब उसके दावे से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है। वकील का दावा—सोना खरीदने गया था युवक मामले में युवक की पहचान मीजान पुत्र रईस खां के रूप में सामने आई है। उसकी ओर से जावरा के अधिवक्ता महेंद्र सिंह सिसोदिया भी थाने पहुंचे। अधिवक्ता के मुताबिक, मीजान अपनी कार से रतलाम सोना खरीदने गया था। खरीदारी नहीं होने पर वह वापस उमठ पालिया लौट रहा था। वकील ने यह भी बताया कि मीजान और उसके पिता कृषक हैं तथा जमीन की खरीद-बिक्री का काम भी करते हैं। अधिवक्ता के अनुसार, कार से मिली रकम से संबंधित हिसाब-किताब मौजूद है और परिवार आयकर भी भरता है। इन दावों की पुष्टि के लिए पुलिस जमीन की बिक्री, नकदी के स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस कर रही नकदी के स्रोत की जांच पुलिस का पूरा फोकस फिलहाल बरामद रकम के स्रोत और उसके दस्तावेजी आधार पर है। जमीन बिक्री से जुड़ी जानकारी, नकदी के लेन-देन और युवक द्वारा बताए गए कारणों का सत्यापन किया जा रहा है। एएसपी राकेश पंद्रो के अनुसार, नकदी की गिनती पूरी हो चुकी है और कुल 73 लाख 72 हजार 500 रुपये मिले हैं। युवक ने जमीन बेचकर रकम लाने की बात कही है। अब संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।

New Rules: 1 सितंबर से बदलेंगे कई जरूरी नियम और कीमतें, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

New Rules: सितंबर 2026 से LPG कीमत, Tata-Hyundai कारों के दाम और यात्रा से जुड़े बदलाव असर डाल सकते हैं। जानिए क्या महंगा होगा और किसे राहत मिलेगी। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। New Rules: ’हर महीने की पहली तारीख के साथ कई कीमतों और प्रक्रियाओं में बदलाव देखने को मिलता है। सितंबर 2026 भी इससे अलग नहीं है। इस बार घरेलू बजट से लेकर कार खरीदने की योजना बनाने वालों तक, कई लोगों को नए महीने की शुरुआत में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। सबसे बड़ा असर ऑटो सेक्टर में दिखाई देने वाला है। Tata Motors Passenger Vehicles ने 1 सितंबर 2026 से अपनी कारों और SUV की कीमतों में 25,000 रुपये तक बढ़ोतरी की घोषणा की है। दूसरी ओर Hyundai Motor India भी सितंबर से अपनी पूरी गाड़ियों की रेंज की कीमतों में 1 प्रतिशत तक वृद्धि करने जा रही है। LPG और विमान ईंधन जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी 1 सितंबर को नजर रहेगी। इनके रेट में मासिक समीक्षा के आधार पर बदलाव हो सकता है। LPG सिलेंडर के दाम 1 सितंबर को बदल सकते हैं तेल कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। इसलिए 1 सितंबर को घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट सामने आ सकते हैं। अगस्त में 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में बड़ी कटौती देखने को मिली थी, जबकि घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत में बदलाव नहीं किया गया था। सितंबर में घरेलू LPG सस्ता होगा या महंगा, यह तेल कंपनियों की 1 सितंबर की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए अभी किसी निश्चित नए रेट का दावा करना सही नहीं होगा। LPG ग्राहकों के लिए जरूरी बात जिन उपभोक्ताओं की LPG e-KYC प्रक्रिया लंबित है, उन्हें अपनी स्थिति जरूर जांच लेनी चाहिए। e-KYC से जुड़ी अंतिम तारीख और नियम कंपनी के आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करना बेहतर रहेगा। जरूरी सलाह: LPG से जुड़ी किसी भी समयसीमा या कीमत के लिए अपने गैस वितरक अथवा संबंधित तेल कंपनी के आधिकारिक पोर्टल की जानकारी को प्राथमिकता दें। Tata की कारें 1 सितंबर से हो सकती हैं महंगी कार खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सितंबर की शुरुआत जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। Tata Motors Passenger Vehicles ने 1 सितंबर 2026 से अपने यात्री वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 25,000 रुपये तक बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह बदलाव ICE यानी पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी लागू होगा। कंपनी के मुताबिक बढ़ोतरी सभी मॉडल में एक जैसी नहीं होगी। वास्तविक राशि मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से अलग-अलग रहेगी। इसका मतलब यह है कि हर Tata कार की कीमत सीधे 25,000 रुपये नहीं बढ़ेगी। कंपनी ने बढ़ती इनपुट लागत और लगातार महंगाई के दबाव को कीमतों में संशोधन की प्रमुख वजहों में शामिल किया है। Tata कार खरीदने वालों के लिए क्या मायने रखता है? अगर कोई ग्राहक Tata की कार खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे मौजूदा कीमत, डीलर ऑफर और 1 सितंबर के बाद लागू होने वाली नई कीमत की तुलना करनी चाहिए। केवल एक्स-शोरूम कीमत नहीं, बल्कि बीमा, RTO, एक्सेसरीज और अन्य शुल्क जोड़कर अंतिम ऑन-रोड कीमत देखना ज्यादा उपयोगी रहेगा। Hyundai की कारें भी सितंबर से महंगी होंगी Hyundai Motor India ने भी सितंबर 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में 1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कीमत में बदलाव मॉडल और वेरिएंट के अनुसार अलग-अलग होगा। कंपनी ने बढ़ती इनपुट और कमोडिटी लागत, परिचालन खर्च तथा मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को कीमत बढ़ाने की वजह बताया है। इसका असर Hyundai की अलग-अलग कारों और SUV पर अलग मात्रा में पड़ सकता है। इसलिए ग्राहक को बुकिंग से पहले संबंधित मॉडल की नई कीमत और डीलर से मिलने वाले ऑफर की पुष्टि करनी चाहिए। Hyundai की आधिकारिक वेबसाइट पर भी कंपनी अलग-अलग शहरों और मॉडल के हिसाब से मौजूदा एक्स-शोरूम कीमतें उपलब्ध कराती है। ATF की कीमत बदली तो हवाई यात्रा पर भी असर हर महीने की शुरुआत में Aviation Turbine Fuel यानी ATF की कीमतों की भी समीक्षा होती है। यही ईंधन विमानों में इस्तेमाल किया जाता है। अगर सितंबर में ATF की कीमत बढ़ती है तो एयरलाइंस की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। आगे चलकर इसका कुछ असर हवाई किराए पर पड़ सकता है। हालांकि सिर्फ ATF की कीमत में बदलाव से टिकट का किराया कितना बदलेगा, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। इसलिए सितंबर की शुरुआत में हवाई यात्रा करने वालों के लिए भी ATF की नई कीमत एक महत्वपूर्ण अपडेट होगी। CNG और PNG की कीमतों पर भी नजर CNG और PNG के दाम हर जगह एक ही समय और एक ही स्तर पर बदलना जरूरी नहीं है। स्थानीय गैस वितरण कंपनियों, लागत और अन्य कारकों के आधार पर इनके रेट अलग हो सकते हैं। यही वजह है कि सितंबर में CNG या PNG के संबंध में किसी एक राष्ट्रीय दर को सभी शहरों पर लागू मानना सही नहीं होगा। वाहन मालिकों और घरेलू PNG उपभोक्ताओं को अपने शहर की संबंधित गैस कंपनी की नई दर जरूर देखनी चाहिए। विदेश जाने वालों के लिए एयरपोर्ट पर क्या बदलेगा? अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से जुड़ी इमिग्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल प्रक्रियाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि बोर्डिंग पास पर इमिग्रेशन स्टांप से जुड़ी व्यवस्था को लेकर किसी भी बदलाव को लागू मानने से पहले संबंधित एयरपोर्ट या सरकारी एजेंसी की आधिकारिक सूचना देखना जरूरी है। इसलिए यात्रियों को सितंबर से जुड़ी ऐसी खबरों को अंतिम नियम मानकर यात्रा की तैयारी नहीं करनी चाहिए। एयरलाइन और इमिग्रेशन अधिकारियों की ताजा गाइडलाइन ही सबसे भरोसेमंद आधार होगी। 1 सितंबर का असर आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा? सितंबर में सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो नई कार खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। Tata की कीमतों में 25,000 रुपये तक और Hyundai की कीमतों में 1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की घोषणा हो चुकी है। दूसरी तरफ LPG और ईंधन की कीमतों में बदलाव होने पर इसका असर घर … Read more

MP News: एमपी के सरकारी स्कूलों में 9वीं से AI की पढ़ाई, 1 सितंबर से शुरू होंगी ऑनलाइन कक्षाएं

MP News: मध्य प्रदेश के 1848 सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए AI असिस्टेंट पाठ्यक्रम शुरू होगा। ऑनलाइन कक्षाएं 1 सितंबर से संचालित होंगी। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश में स्कूली विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है। प्रदेश के चयनित शासकीय हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI असिस्टेंट का व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत इसके लिए प्रदेश के 1,848 ICT स्कूलों का चयन किया गया है। इन विद्यालयों में पाठ्यक्रम की ऑनलाइन कक्षाएं 1 सितंबर 2026 से शुरू होंगी। पाठ्यक्रम उन्हीं स्कूलों में संचालित किया जाएगा, जहां ICT लैब उपलब्ध है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से पाठ्यक्रम के संचालन को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास के माध्यम से वीडियो आधारित पाठ पढ़ाए जाएंगे और पढ़ाई के साथ उनकी शंकाओं का समाधान भी कराया जाएगा। स्मार्ट क्लास में वीडियो के जरिए होगी पढ़ाई AI असिस्टेंट पाठ्यक्रम की सैद्धांतिक कक्षाएं ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से संचालित की जाएंगी। स्कूल शिक्षा विभाग के विमर्श पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री और YouTube माध्यम से वीडियो को स्कूल की स्मार्ट क्लास में विद्यार्थियों को दिखाया जाएगा। सप्ताह में तीन दिन कक्षाएं निर्धारित की गई हैं। सोमवार और बुधवार को नए पाठ से जुड़े वीडियो विद्यार्थियों को दिखाए जाएंगे। इन कक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान भी कराया जाएगा। तीसरी कक्षा निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होगी। इस तरह विद्यार्थियों को केवल वीडियो देखने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पाठ को समझने और उससे जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा। शुक्रवार को अभ्यास, शनिवार को होगी पुनरावृत्ति ऑनलाइन पाठ के बाद विद्यार्थियों को संबंधित विषयवस्तु का अभ्यास और प्रायोगिक कार्य कराया जाएगा। सप्ताह के दौरान दिखाए गए दोनों वीडियो से जुड़ी अभ्यास एवं प्रायोगिक गतिविधियां शुक्रवार को कराई जाएंगी। शनिवार को पुनरावृत्ति दिवस रखा गया है। इस दिन विद्यार्थियों को सप्ताह में पढ़ाए गए पाठ को दोहराने का अवसर मिलेगा। यदि कोई पाठ या वीडियो विद्यार्थियों को कठिन लगता है, तो उसे विमर्श पोर्टल से डाउनलोड कर दोबारा दिखाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विषय को बेहतर तरीके से समझने में मदद करना है। 1848 स्कूलों की सूची में किया गया संशोधन AI पाठ्यक्रम के लिए चयनित स्कूलों की सूची में संशोधन भी किया गया है। जानकारी के अनुसार 24 प्रयोगशालाओं को दूसरे ICT स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा 48 स्कूलों को CBSE से संचालित होने के कारण सूची से हटा दिया गया है। मध्य प्रदेश ओपन स्कूल के माध्यम से पहले से AI पाठ्यक्रम संचालित कर रहे 42 विद्यालयों को भी नई सूची से बाहर किया गया है। कुछ अन्य विद्यालयों को ICT लैब उपलब्ध नहीं होने या पहले से IT एवं IT आधारित सेवाओं का ट्रेड संचालित होने के कारण सूची में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे 15 विद्यालय सूची से हटाए गए हैं। प्राचार्य और ICT प्रशिक्षक की अहम जिम्मेदारी पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन में स्कूल के प्राचार्य और ICT प्रशिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्हें विद्यार्थियों की समय पर उपस्थिति और कक्षाओं में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। तकनीकी समस्या के कारण यदि किसी दिन निर्धारित वीडियो नहीं चल पाता है, तो उसे अगले कार्य दिवस में अनिवार्य रूप से दिखाने के निर्देश हैं। विद्यार्थियों की शंकाओं के समाधान के लिए रोजगार कौशल, अंग्रेजी और जीव विज्ञान के शिक्षक तथा AI असिस्टेंट विषय के कंप्यूटर प्रशिक्षक सहयोग करेंगे। स्कूलों में AI शिक्षा क्यों महत्वपूर्ण है? AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कारोबार, संचार और कई अन्य क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर पर विद्यार्थियों को इस तकनीक की शुरुआती समझ देना उनके लिए आगे की पढ़ाई और कौशल विकास में उपयोगी हो सकता है। मध्य प्रदेश में शुरू किया जा रहा यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को AI से जुड़े बुनियादी ज्ञान के साथ व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने पर केंद्रित है। खास बात यह है कि पढ़ाई के साथ अभ्यास और पुनरावृत्ति के लिए अलग दिन निर्धारित किए गए हैं।

India Post GDS भर्ती 2026: 10वीं पास के लिए डाक विभाग में बड़ा मौका

India Post GDS भर्ती 2026 में 25 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होगी। 10वीं पास उम्मीदवार 31 अगस्त से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। जानें योग्यता और तारीख। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। India Post GDS भर्ती 2026 का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। डाक विभाग ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) Online Engagement Schedule-II, July 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन 31 अगस्त 2026 से शुरू होगा, जबकि ऑनलाइन आवेदन 2 सितंबर से किए जा सकेंगे। इस भर्ती में ब्रांच पोस्टमास्टर (BPM), असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर (ABPM) और डाक सेवक के पद शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 25 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की जाएगी। पदों की सर्किलवार संख्या आधिकारिक पोर्टल पर जारी विवरण के अनुसार देखी जा सकेगी। खास बात यह है कि GDS पदों पर चयन के लिए सामान्य तौर पर लिखित परीक्षा नहीं होती। उम्मीदवारों की 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार की जाती है। इसलिए 10वीं में अच्छे अंक वाले अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। कितने पदों पर होगी भर्ती? India Post GDS: इस भर्ती में 25 हजार से अधिक GDS पदों पर नियुक्ति की जानकारी सामने आई है। इनमें मुख्य रूप से तीन तरह के पद शामिल हैं— पदों की सटीक संख्या और सर्किलवार वैकेंसी आधिकारिक GDS पोर्टल पर उपलब्ध भर्ती विवरण से जांची जानी चाहिए। कौन कर सकता है आवेदन? India Post GDS भर्ती के लिए उम्मीदवार का 10वीं कक्षा पास होना जरूरी है। 10वीं में गणित और अंग्रेजी विषयों का अध्ययन एवं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही संबंधित राज्य या पोस्टल सर्किल की स्थानीय भाषा का ज्ञान भी जरूरी है। उम्मीदवार को कंप्यूटर चलाने का सामान्य ज्ञान और साइकिल चलाने की क्षमता भी होनी चाहिए। आयु सीमा उम्मीदवार की उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाती है। EWS वर्ग के उम्मीदवारों को आयु सीमा में अलग से छूट नहीं दी जाती। India Post GDS में रोज कितने घंटे काम करना होगा? ग्रामीण डाक सेवक नियमित केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के समान पद नहीं है। India Post के नियमों के अनुसार GDS को सामान्य तौर पर कम से कम 4 घंटे और अधिकतम 5 घंटे प्रतिदिन काम करना होता है। उन्हें 65 वर्ष की उम्र के बाद GDS के रूप में सेवा में नहीं रखा जा सकता। GDS के लिए यह भी जरूरी है कि उसके पास अपनी और परिवार की आजीविका के लिए आय का कोई अन्य साधन हो। BPM, ABPM और डाक सेवक का काम क्या होगा? ब्रांच पोस्टमास्टर (BPM) BPM को संबंधित ब्रांच पोस्ट ऑफिस के कामकाज की जिम्मेदारी संभालनी होती है। डाक सेवाओं के साथ IPPB से जुड़े काम और ग्राहकों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने का काम भी इसमें शामिल होता है। BPM के रूप में चयन होने पर ब्रांच पोस्ट ऑफिस चलाने के लिए जरूरी परिसर की व्यवस्था उम्मीदवार को अपने खर्च पर करनी होती है। असिस्टेंट ब्रांच पोस्टमास्टर (ABPM) ABPM को डाक टिकट और स्टेशनरी की बिक्री, डाक वितरण, IPPB से जुड़े लेन-देन और BPM की सहायता जैसे काम करने होते हैं। डाक सेवक डाक सेवक को डाक, पार्सल और मेल बैग के वितरण से जुड़े काम करने पड़ सकते हैं। इसके अलावा पोस्ट ऑफिस या मेल ऑफिस में सॉर्टिंग, डाक के आवागमन और अन्य विभागीय कार्य भी सौंपे जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार मार्केटिंग और बिजनेस से जुड़े काम भी दिए जा सकते हैं। कितनी मिलेगी राशि? GDS को नियमित सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन नहीं मिलता। उन्हें Time Related Continuity Allowance (TRCA) के रूप में राशि दी जाती है। आधिकारिक India Post जानकारी के अनुसार शुरुआती TRCA स्लैब इस प्रकार हैं। पद TRCA स्लैब BPM ₹12,000 से ₹29,380 ABPM/डाक सेवक ₹10,000 से ₹24,470 इसके अलावा नियमों के अनुसार महंगाई भत्ता और कुछ अन्य सुविधाएं भी लागू हो सकती हैं। चयन कैसे होगा? GDS भर्ती में लिखित परीक्षा आयोजित नहीं की जाती। उम्मीदवारों का चयन 10वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार मेरिट से किया जाता है। मेरिट में चयन होने के बाद उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें 10वीं की मार्कशीट, पहचान और अन्य लागू प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है। गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन पाए जाने पर उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है। आवेदन शुल्क कितना है? GDS भर्ती में निर्धारित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क लागू होता है, जबकि पात्र आरक्षित और अन्य छूट प्राप्त श्रेणियों को नियमानुसार फीस में छूट मिलती है। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को मौजूदा भर्ती के Fee Instructions जरूर देखना चाहिए। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार India Post के आधिकारिक GDS पोर्टल से आवेदन कर सकते हैं। भर्ती के लिए आधिकारिक पोर्टल पर अलग से Registration और Application प्रक्रिया दी गई है। आवेदन के मुख्य चरण इस प्रकार हैं— जरूरी सावधानी India Post ने उम्मीदवारों को फर्जी कॉल, ई-मेल और संदेशों से सावधान रहने की सलाह दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती से जुड़ी जानकारी आधिकारिक माध्यमों से ही प्राप्त करें। उम्मीदवार indiapost.gov.in और आधिकारिक GDS Online Engagement पोर्टल पर ही भर्ती की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया जांचें।

Ratlam News: इंदौर गई थी 74 वर्षीय महिला, पीछे से घर में घुसे चोर; 6 लाख से ज्यादा का माल साफ

Ratlam News: रतलाम की अमृत सागर कॉलोनी में सूने मकान का ताला तोड़कर चोर 6 लाख से अधिक के सोने-चांदी के जेवर और नकदी ले गए। पुलिस जांच में जुटी। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम के दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र में चोरी की वारदात सामने आई है। अमृत सागर कॉलोनी स्थित एक सूने मकान का ताला तोड़कर चोर नकदी और सोने-चांदी के जेवर समेत 6 लाख रुपए से अधिक का सामान लेकर फरार हो गए। घटना के समय मकान मालकिन अपनी बड़ी बहन से मिलने इंदौर गई हुई थीं। मामले की जानकारी गुरुवार सुबह उस समय हुई, जब पड़ोसी ने फोन कर घर के दरवाजे खुले होने की सूचना दी। रतलाम पहुंचने पर महिला ने मकान के मुख्य गेट और बरामदे के गेट के ताले टूटे देखे। अंदर जांच करने पर अलमारी में रखी नकदी और जेवर गायब मिले। इंदौर गई थीं मकान मालकिन, पड़ोसी ने दी सूचना अमृत सागर कॉलोनी निवासी 74 वर्षीय राजाबाई राठी, पति स्वर्गीय बालकृष्ण राठी ने दीनदयाल नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह 16 अगस्त को अपनी बड़ी बहन के यहां इंदौर गई थीं। गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे पड़ोसी भेरूलाल टांक का फोन आया। उन्होंने बताया कि राजाबाई के घर के दरवाजे खुले हुए हैं। सूचना मिलने के बाद वह रतलाम पहुंचीं और मकान की स्थिति देखकर चोरी की जानकारी हुई। ताले तोड़कर घर में घुसे चोर घर की जांच करने पर सामने आया कि चोरों ने मेन गेट और बरामदे वाले गेट का ताला तोड़ा था। इसके साथ ही दरवाजे के नकूचे के आसपास का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त किया गया था। अंदर रखी अलमारी की जांच करने पर अलग-अलग लिफाफों में रखे 1.41 लाख रुपए नकद गायब मिले। इसके अलावा सोने और चांदी के जेवर भी चोरी हुए हैं। सोने के जेवर भी ले गए शिकायत के मुताबिक चोर करीब 15 ग्राम वजन की सोने की एक जोड़ी लटकन और एक जोड़ी टॉप्स ले गए। इनकी कीमत करीब 2.44 लाख रुपए बताई गई है। इसके साथ ही करीब 1 ग्राम वजन का सोने का सिक्का भी चोरी हुआ है। 900 ग्राम चांदी के आभूषण चोरी चोरी हुए सामान में चांदी के जेवर और बर्तन भी शामिल हैं। इनमें एक गिलास, दो कटोरी, एक चम्मच, छह जोड़ी पायल और 12 जोड़ी बिछिया शामिल हैं। इसके अलावा 100 ग्राम और 50 ग्राम के चांदी के सिक्के भी चोरी हुए। कुल मिलाकर करीब 900 ग्राम चांदी के सामान की चोरी हुई, जिसकी कीमत लगभग 2.34 लाख रुपए बताई गई है। एक लेडीज रिस्ट वॉच भी चोर अपने साथ ले गए। नकदी और जेवर समेत चोरी गए सामान की कुल कीमत 6 लाख रुपए से अधिक बताई गई है। अलमारी में रखे थे मंडल के रुपए भी राजाबाई राठी ने पुलिस को बताया कि वह माहेश्वरी मंडल की संरक्षक भी हैं। 15 अगस्त को तीज का सामूहिक आयोजन किया गया था, जिसमें भोजन की व्यवस्था की गई थी। आयोजन से जुड़े खर्च की राशि भी अलमारी में रखी हुई थी। चोरी के दौरान यह रकम भी चोरों के हाथ लग गई। पुलिस ने शुरू की जांच, CCTV फुटेज खंगाल रही घटना की सूचना मिलने के बाद दीनदयाल नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस कॉलोनी तथा आसपास आने-जाने वाले रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। फिलहाल पुलिस चोरी करने वालों की पहचान और उनकी तलाश में जुटी है। मामले में आगे की जांच के आधार पर चोरी के घटनाक्रम और आरोपियों के संबंध में जानकारी सामने आ सकती है।

Ratlam News: रतलाम में 1950 से ज्यादा नामांतरण मामलों का रास्ता साफ, 1958-59 के रिकॉर्ड से होगी कार्रवाई

Ratlam News: रतलाम में चार साल से अटके 1950 से अधिक नामांतरण मामलों का रास्ता साफ हुआ। अब 1958-59 या बाद के राजस्व रिकॉर्ड से जमीन का नामांतरण हो सकेगा। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News; जिले में जमीन के नामांतरण को लेकर पिछले करीब चार साल से अटके 1950 से अधिक मामलों में अब समाधान की उम्मीद जगी है। 1956-57 के पुराने बंदोबस्त रिकॉर्ड को आधार बनाकर रोके गए नामांतरण मामलों में अब 1958-59 या उसके बाद उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। इस फैसले से उन जमीन मालिकों और खरीदारों को राहत मिलने की संभावना है, जो नामांतरण के लिए लंबे समय से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। पुराने रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने और बाद के दस्तावेजों में निजी स्वामित्व सामने आने के कारण बड़ी संख्या में प्रकरण उलझे हुए थे। मामले की पड़ताल के बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया ने राजस्व रिकॉर्ड और पूर्व में मिले शासन के मार्गदर्शन को देखा। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि 1958-59 के रिकॉर्ड को भी नामांतरण की कार्रवाई में आधार बनाया जा सकता है। क्यों अटके थे नामांतरण के मामले? नामांतरण की समस्या की जड़ 1956-57 के बंदोबस्त रिकॉर्ड से जुड़ी हुई है। उस समय के कई अभिलेखों में बड़ी संख्या में जमीनें सरकारी खाते में दर्ज थीं। बाद के 1961-62 के खसरों में इन्हीं में से कई जमीनें निजी स्वामित्व में दर्ज दिखाई दीं। इससे रिकॉर्ड में पुरानी और नई प्रविष्टियों के बीच अंतर पैदा हो गया। सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि 1958 से 1962 के बीच के खसरा रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं बताया गया है। यह रिकॉर्ड कब और किस परिस्थिति में गायब हुआ, इससे संबंधित नस्ती भी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। जब जमीनों की खरीद-बिक्री के बाद नए नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन तहसील कार्यालय पहुंचे, तो 1956-57 के रिकॉर्ड में जमीन सरकारी दर्ज होने के कारण कई प्रकरणों पर आपत्ति खड़ी हो गई। इसके चलते कुछ आवेदन लंबित रहे तो कुछ को निरस्त कर दिया गया। 1958-59 के रिकॉर्ड से क्या बदलेगा? अब 1956-57 के बंदोबस्त रिकॉर्ड को ही अंतिम आधार मानने के बजाय 1958-59 या उसके बाद उपलब्ध राजस्व अभिलेखों को भी देखा जा सकेगा। इससे उन मामलों में रास्ता खुल सकता है, जहां बाद के खसरों में जमीन का स्वामित्व बदल चुका है और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। कलेक्टर ने क्या कहा? कलेक्टर अजय कटेसरिया के अनुसार मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता में 1958-59 के रिकॉर्ड को देखने का प्रावधान है और इसे अधिकार अभिलेख के रूप में माना जाता है। शासन से पूर्व में मिले मार्गदर्शन के आधार पर अब संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 16 महीने पहले ही मिल चुका था शासन का मार्गदर्शन नामांतरण की इस समस्या को लेकर तत्कालीन कलेक्टर राजेश बाथम ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव से मार्गदर्शन मांगा था। इसके जवाब में 3 अप्रैल 2025 को राजस्व मंत्रालय ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, जिले में इस दिशा-निर्देश को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया। बाद में पटवारी और राजस्व निरीक्षकों से मिली जानकारी के आधार पर वर्तमान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने मामले की पड़ताल की, जिसके बाद पुराने शासन निर्देश सामने आए। जमीन मालिकों की परेशानी भी सामने आई नामांतरण अटकने से आम लोगों को किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, इसके उदाहरण भी सामने आए हैं। रामलाल वाघेला ने बताया कि वह करीब छह महीने से नामांतरण के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। करमदी के पास रिंग रोड क्षेत्र में स्थित उनकी जमीन के खसरा-खतौनी रिकॉर्ड में मालिकाना हक का नाम बदलवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। दूसरे मामले में मुकेश कुमार, निवासी धामनोद, ने बताया कि जमीन का सौदा होने के बाद नामांतरण नहीं होने से आगे की प्रक्रिया अटक गई। उनका कहना है कि उन्होंने 1961-62 से आगे के उपलब्ध रिकॉर्ड भी कार्यालय में प्रस्तुत किए, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रॉपर्टी कारोबारियों को भी राहत की उम्मीद जिला प्रॉपर्टी एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पिपाड़ा का कहना है कि यदि पुराने सरकारी रिकॉर्ड की विसंगति दूर हो जाती है तो जमीन की खरीद-बिक्री और नामांतरण से जुड़ी कई समस्याएं अपने आप कम हो सकती हैं। जमीन की खरीद-बिक्री में राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में रिकॉर्ड स्पष्ट होने से खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। 1950 से अधिक लंबित मामलों पर अब नजर रतलाम जिले में करीब 1950 से अधिक नामांतरण प्रकरण लंबे समय से लंबित बताए गए हैं। अब 1958-59 या उसके बाद के उपलब्ध रिकॉर्ड को आधार बनाकर नियमानुसार कार्रवाई की संभावना बनने से इन मामलों के निराकरण का रास्ता खुल गया है। हालांकि, प्रत्येक मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए नामांतरण स्वतः नहीं होगा, बल्कि संबंधित प्रकरण में रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर सक्षम राजस्व अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय, पूर्णिमा और भद्रा की पूरी जानकारी

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 पर 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय, पूर्णिमा तिथि, भद्रा और दोपहर के मुहूर्त की पूरी जानकारी यहां जानें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन 2026 इस बार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पर्व की तारीख को लेकर कुछ लोगों के मन में 27 और 28 अगस्त को लेकर असमंजस है, जिसकी वजह श्रावण पूर्णिमा की तिथि है। पंचांग गणना के अनुसार श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह करीब 9:09 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:49 बजे समाप्त होगी। इसी आधार पर 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने की जानकारी दी गई है। राखी बांधने के लिए मुख्य शुभ समय 28 अगस्त की सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। इसमें सुबह 7:33 से 9:10 बजे तक लाभ मुहूर्त और 9:10 से 9:48 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा। Raksha Bandhan 2026 कब मनाया जाएगा? इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। त्योहार की तारीख श्रावण पूर्णिमा की तिथि के आधार पर निर्धारित की गई है। पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और अगले दिन 28 अगस्त की सुबह समाप्त होगी। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में समय में एक-दो मिनट का अंतर संभव है। राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया है। मुख्य शुभ समय: सुबह के इस समय में भी दो प्रमुख मुहूर्त बताए गए हैं। लाभ मुहूर्त सुबह 7:33 बजे से 9:10 बजे तक लाभ मुहूर्त रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में राखी बांधना शुभ माना जाता है। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त इसके बाद सुबह 9:10 बजे से 9:48 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा। जो परिवार सुबह राखी बांधने की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए 7:33 से 9:48 बजे के बीच का समय खास तौर पर उपयोगी रहेगा। सुबह का समय न मिले तो दोपहर में कब बांधें राखी? हर परिवार के लिए सुबह राखी बांधना संभव नहीं होता। नौकरी, यात्रा या दूसरे कारणों से यदि सुबह का समय निकल जाए तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोपहर में भी राखी बांधी जा सकती है। दोपहर का शुभ समय: 12:23 बजे से 2:00 बजे तक। इसलिए सुबह का मुख्य मुहूर्त नहीं मिल पाने पर परिवार दोपहर के बताए गए शुभ समय में रक्षाबंधन की रस्म पूरी कर सकता है। 27 और 28 अगस्त को लेकर क्यों है भ्रम? रक्षाबंधन की तारीख को लेकर भ्रम की मुख्य वजह पूर्णिमा की अवधि है। पूर्णिमा 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। रक्षाबंधन पर भद्रा की क्या स्थिति रहेगी? रक्षाबंधन के दौरान भद्रा का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक परंपरा में भद्रा के दौरान राखी बांधने से बचने की मान्यता है। शिमला के राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल के अनुसार, भद्रा काल 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं रहने की बात कही गई है। हालांकि, मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से समय का मिलान करना उचित रहेगा। Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का महत्व क्या है? रक्षाबंधन केवल राखी बांधने की रस्म तक सीमित नहीं है। यह भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और आपसी जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती है। भाई भी बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है। आज बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके भी बदले हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन वीडियो कॉल और ऑनलाइन माध्यमों से भी एक-दूसरे से जुड़ते हैं, लेकिन पर्व का भाव आज भी पारिवारिक प्रेम और अपनापन ही है। Raksha Bandhan 2026: जरूरी समय एक नजर में मुख्य जानकारी

Ratlam News: रतलाम में जमीन विवाद के बीच युवक की मौत, शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन; जांच की मांग

Ratlam News: रतलाम के सरवनीखुर्द में जमीन विवाद के बीच शंकर गरवाल की कीटनाशक पीने से मौत हो गई। परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन कर जांच की मांग की। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: जिले के सरवनीखुर्द गांव में जमीन विवाद से जुड़ा मामला सामने आया है। 45 वर्षीय शंकर गरवाल की कीटनाशक पीने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों और जय आदिवासी युवाशक्ति संगठन से जुड़े लोगों ने बाजना रोड पर शव रखकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। करीब एक घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच, जमीन से जुड़े विवाद की पड़ताल और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, शंकर ने 23 अगस्त को अपने खेत की जमीन के पास कीटनाशक पी लिया था। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 25 अगस्त की दोपहर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जमीन पर कब्जे और खदान को लेकर लगाए आरोप परिजनों का आरोप है कि शंकर की खेती की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया था। उनका कहना है कि परिवार लंबे समय से इस जमीन पर खेती करता आ रहा था। परिजनों के मुताबिक, जमीन पर खदान का पट्टा मिलने के बाद शंकर वहां खेती नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने खदान संचालक पर परेशान करने और डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए हैं। परिवार का दावा है कि शंकर ने जमीन से जुड़े मामले को लेकर कई बार शिकायतें की थीं। उनका आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इन्हीं परिस्थितियों को लेकर परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पोस्टमार्टम के बाद सड़क पर रखा शव बुधवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शंकर का शव लेकर गांव की ओर जा रहे थे। इसी दौरान बाजना रोड पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर डीएसपी गायत्री सोनी, डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने परिजनों तथा संगठन के लोगों से बातचीत कर उनकी मांगें सुनीं। करीब एक घंटे चले प्रदर्शन के कारण सड़क पर यातायात प्रभावित रहा और दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई। खनिज और राजस्व विभाग की भूमिका की जांच की मांग प्रदर्शन कर रहे परिजनों और आदिवासी संगठनों ने जमीन से जुड़े मामले में खनिज विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनकी प्रमुख मांग है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है, वहां खदान का पट्टा किस आधार पर दिया गया और संबंधित प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जाए। परिजनों ने यह भी मांग की कि जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी या खदान संचालक की लापरवाही अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। परिवार को मुआवजा और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो थाने का घेराव किया जाएगा। पुलिस ने जांच का भरोसा दिया पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को मामले की जांच कर वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजनों और संगठन के लोगों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया। डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस जांच में जमीन विवाद, शिकायतों, खदान पट्टे से जुड़े दस्तावेजों और लगाए गए अन्य आरोपों की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा। परिवार में पत्नी और चार बच्चे शंकर गरवाल के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और तीन बेटियां हैं। मौत के बाद परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

Ratlam News: रतलाम में ईद मिलाद जुलूस के दौरान तेज साउंड पर कार्रवाई, 10 संचालकों पर केस

Ratlam News: रतलाम में ईद मिलादुन्नबी जुलूस के दौरान तेज साउंड और यातायात व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आईं। पुलिस ने 10 साउंड संचालकों पर केस दर्ज किए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को शहर में निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस के दौरान तेज आवाज में साउंड सिस्टम और बैंड बजने को लेकर कई जगह से शिकायतें सामने आईं। दूसरी ओर, शहर के कई हिस्सों में घंटों यातायात प्रभावित रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज ध्वनि को लेकर स्थिति उस समय और चर्चा में आ गई, जब कुछ लोगों ने स्मार्टवॉच के जरिए शोर का स्तर मापने और 117 डेसिबल तक रीडिंग मिलने के वीडियो पुलिस को भेजे। कुछ रहवासियों ने घरों में कांच के बर्तन गिरने तक की शिकायत की। शिकायतों और वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने देर शाम कार्रवाई करते हुए 10 साउंड संचालकों के खिलाफ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य संचालकों की भी पहचान की जा रही है। जुलूस में कई साउंड सिस्टम, तेज आवाज को लेकर शिकायतें जुलूस मार्ग पर करीब 15 से अधिक साउंड सिस्टम और बैंड शामिल होने की जानकारी सामने आई। कुछ साउंड सिस्टम की आवाज काफी दूर तक सुनाई देने की बात कही गई। जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के साथ इंदौर, उज्जैन और धार से भी साउंड सिस्टम बुक कराए गए थे। जुलूस के दौरान कई जगह तेज आवाज को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। जुलूस में शामिल कुछ लोग भी तेज आवाज से बचने के लिए कान बंद करते नजर आए। मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मियों के भी कान बंद करते हुए दिखाई देने की बात सामने आई। जुलूस से एक दिन पहले मंगलवार को डीआईजी निमिष अग्रवाल ने एसपी अमित कुमार के साथ जुलूस मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। शांति समिति की बैठक में भी साउंड सिस्टम और ध्वनि नियंत्रण को लेकर चर्चा हुई थी। इसके बावजूद जुलूस के दौरान तेज आवाज को लेकर शिकायतें सामने आईं। कुछ लोगों ने अपनी स्मार्टवॉच से शोर का स्तर मापकर वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्मार्टवॉच से प्राप्त डेसिबल रीडिंग को आधिकारिक ध्वनि मापन मानने से पहले मानक उपकरण और अधिकृत माप की पुष्टि जरूरी होती है। ध्वनि प्रदूषण के लिए निर्धारित मानक उपलब्ध जानकारी के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम की आवाज संबंधित क्षेत्र के एंबिएंट नॉइज स्टैंडर्ड से अधिकतम 10 डेसिबल या 75 डेसिबल, इनमें जो कम हो, उससे अधिक नहीं होनी चाहिए। आवासीय क्षेत्रों के लिए एंबिएंट नॉइज स्टैंडर्ड दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल बताया गया है। सामान्य तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहता है, हालांकि संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुसार परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। सुबह से शाम तक कई इलाकों में यातायात प्रभावित ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के चलते शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। जानकारी के मुताबिक सुबह करीब 10 बजे से शाम 5 बजे तक कई प्रमुख हिस्सों में वाहनों की आवाजाही धीमी रही और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। रूट डायवर्जन की व्यवस्था के बावजूद कुछ स्थानों पर यातायात दबाव कम नहीं हो सका। जुलूस की भीड़, साउंड सिस्टम और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए गए। पार्षद कुरैशी की मौत के बाद भी साउंड बजने की शिकायत खबर के अनुसार पार्षद कुरैशी की मौत की सूचना मिलने के बाद भी जुलूस समाप्त होने तक कई स्थानों पर साउंड सिस्टम तेज आवाज में बजते रहे। इस घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मौत और तेज ध्वनि के बीच किसी प्रत्यक्ष चिकित्सकीय संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए दोनों घटनाओं को सीधे तौर पर जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। देर शाम पुलिस की कार्रवाई, 10 पर प्रकरण तेज आवाज को लेकर मिली शिकायतों के बाद पुलिस ने देर शाम कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार कुल 10 साउंड संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। मामले में थाना स्तर पर कार्रवाई की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक माणकचौक थाना क्षेत्र में पांच, दीनदयाल नगर में एक और स्टेशन रोड थाना क्षेत्र में दो प्रकरण दर्ज किए गए। शेष मामलों से संबंधित कार्रवाई का विवरण पुलिस की ओर से अलग-अलग स्तर पर सामने आना है। पुलिस ने तीन साउंड सिस्टम जब्त किए हैं। वहीं, एक संचालक पर 20 हजार रुपये और दूसरे पर 10 हजार रुपये का जुर्माना किए जाने की जानकारी है। एएसपी विवेक कुमार ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर साउंड संचालकों की पहचान कर रही है। आगे भी हो सकती है कार्रवाई पुलिस की कार्रवाई अभी केवल दर्ज प्रकरणों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। फुटेज में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित साउंड संचालकों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।

0%