28 दिन रिचार्ज खत्म? अब 30 दिन वैलिडिटी पर जोर, यूजर्स को सालाना बचत का मौका

मोबाइल रिचार्ज में बड़ा बदलाव! 28 दिन की जगह 30 दिन वैलिडिटी वाले प्लान को बढ़ावा, जानें कैसे साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज से बचकर आपकी होगी बचत। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इससे यूजर्स को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज से राहत मिल सकती है और कुल खर्च भी कम हो सकता है। 28 दिन रिचार्ज पर सरकार सख्त, 30 दिन प्लान को बढ़ावा मोबाइल यूजर्स की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बाद सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को साफ संकेत दिया है कि 28 दिन की बजाय 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान को प्राथमिकता दी जाए। अब कंपनियों को अपने प्लान में पारदर्शिता दिखानी होगी और यूजर्स को स्पष्ट विकल्प देने होंगे। क्यों उठाना पड़ा ये कदम? दरअसल 28 दिन का प्लान यूजर्स के लिए “छुपा हुआ अतिरिक्त खर्च” बन गया था। यह मुद्दा संसद में भी उठा, जहां इसे यूजर्स पर अतिरिक्त बोझ बताया गया। 28 दिन vs 30 दिन प्लान: समझें पूरा गणित 28 दिन प्लान: 30 दिन प्लान: गणित:365 ÷ 28 = लगभग 13 रिचार्ज365 ÷ 30 = 12 रिचार्ज अभी क्या दे रही हैं कंपनियां? देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां जैसे अभी ज्यादातर 28 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान ही ऑफर कर रही हैं, जिनकी कीमत ₹199 से ₹299 के बीच होती है। सरकार के नए निर्देश क्या हैं? सरकार ने कंपनियों से कहा है कि: हालांकि, प्लान की कीमत तय करने की आजादी अभी भी कंपनियों के पास रहेगी। यूजर्स के लिए क्यों जरूरी है ये बदलाव? आगे क्या बदल सकता है? अब आपको क्या करना चाहिए? FAQs 1. 28 दिन प्लान में दिक्कत क्या है?इसमें साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है। 2. क्या 30 दिन प्लान सस्ते होंगे?जरूरी नहीं, लेकिन कुल सालाना खर्च कम हो सकता है। 3. क्या 28 दिन प्लान बंद हो जाएंगे?अभी नहीं, लेकिन इनकी संख्या कम हो सकती है। 4. सरकार ने क्या कहा है?30 दिन वाले प्लान को प्रमोट करने और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। 5. यूजर्स को क्या फायदा होगा?कम रिचार्ज, कम खर्च और ज्यादा सुविधा।

Share Market: 1300 अंक टूटा सेंसेक्स: शेयर बाजार में कोहराम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1300 अंक टूटा और निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हुआ। निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानिए गिरावट की बड़ी वजह। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Share Market: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,342.27 अंक यानी 1.72% गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 394.75 अंक यानी 1.63% टूटकर 23,866.85 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों को बड़ा झटका लगा और बाजार पूंजीकरण में करीब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। टॉप 30 शेयरों में अधिकांश में गिरावट बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 2 शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी 28 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस गिरावट में कई बड़े शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें प्रमुख रूप से बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की कमाई हुई साफ मंगलवार को शेयर बाजार में तेजी के कारण निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ था, लेकिन बुधवार की गिरावट ने यह कमाई लगभग पूरी तरह मिटा दी। बीएसई का कुल मार्केट कैप मंगलवार को करीब 447 लाख करोड़ रुपये था, जो गिरकर 441.90 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इन सेक्टरों में ज्यादा गिरावट बाजार में आई इस गिरावट का असर कई सेक्टरों पर देखने को मिला। इन सभी क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। एफआईआई की बिकवाली बनी बड़ी वजह शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। 10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,673 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। प्रॉफिट बुकिंग का भी असर पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग की। इससे भी बाजार पर दबाव बढ़ा और इंडेक्स नीचे आ गए। मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। इंडिया VIX में उछाल बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX भी 11 मार्च को 8% से ज्यादा बढ़कर 20.5 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। बाजार में आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह लेने की सलाह दी जा रही है।

Gold Rate Today: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना-चांदी चमके, 24 कैरेट सोना ₹1.63 लाख के पार

Gold Rate Today 7 March 2026: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी, जानें 24K, 22K और 18K गोल्ड का ताजा भाव और बड़े शहरों में आज का सराफा रेट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Gold Rate Today: सराफा बाजार में कई दिनों की गिरावट के बाद शनिवार (7 मार्च 2026) को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुझान फिर से सुरक्षित निवेश यानी सोने और चांदी की ओर बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और लगातार हो रही जवाबी कार्रवाइयों के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में लगा रहे हैं, जिससे इनके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। 24 कैरेट सोने का ताजा भाव सराफा बाजार में आज 24 कैरेट सोना 163800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। एक दिन पहले इसकी कीमत 161280 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। यानी एक ही दिन में सोना करीब 2520 रुपये महंगा हो गया है। 22 कैरेट सोने का रेट आज 22 कैरेट सोना 150150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।जबकि शुक्रवार को इसका भाव 147850 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस तरह इसमें भी करीब 2300 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 18 कैरेट सोने का भाव 18 कैरेट सोने की कीमत में भी तेजी देखने को मिली है।आज इसका भाव 122880 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि एक दिन पहले यह 121000 रुपये प्रति 10 ग्राम था। बड़े शहरों में आज का गोल्ड रेट क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें? विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सैन्य तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। सोना पारंपरिक रूप से एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए ऐसे हालात में इसकी मांग बढ़ जाती है और कीमतों में तेजी आ जाती है।

Post Office: ₹3 लाख निवेश पर 5 साल में ₹1.23 लाख ब्याज, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Post Office: अगर आप सुरक्षित निवेश के साथ तय और बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस की Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है। खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई यह स्कीम मौजूदा समय में 8.2% सालाना ब्याज दे रही है। ₹3 लाख जमा पर कितना मिलेगा रिटर्न? कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर कोई वरिष्ठ नागरिक इस स्कीम में ₹3,00,000 का एकमुश्त निवेश करता है, तो 5 साल की अवधि में उसे करीब ₹1,23,000 ब्याज मिलेगा। यानी मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग ₹4,23,000 हो जाएगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है और अगर हर तिमाही ब्याज क्लेम नहीं किया जाता, तो उस पर अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता। कौन खोल सकता है खाता? निवेश सीमा और नियम मैच्योरिटी और एक्सटेंशन नियम अगर खाता बंद कर दिया जाता है तो निवेशक कुल अधिकतम सीमा ₹30 लाख के भीतर नया खाता फिर से खोल सकता है। TDS और टैक्स नियम अगर एक वित्तीय वर्ष में SCSS सहित सभी खातों से मिलने वाला कुल ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाता है तो TDS लागू होगा। हालांकि, पात्र निवेशक Form 15G/15H जमा कर TDS से राहत पा सकते हैं। क्यों है यह स्कीम खास? ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और नियमित आय चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की वरिष्ठ नागरिक बचत योजना एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।

मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया। ओपनिंग के दौरान सेंसेक्स में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 500 अंकों से अधिक टूट गया। इस भारी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को तगड़ा झटका लगा है और करीब 17.50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा बाजार कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 3.30 फीसदी यानी 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर खुला, जो करीब 11 महीने का निचला स्तर है। सुबह के सत्र में हल्की रिकवरी के बाद भी सेंसेक्स 80,500 के आसपास ही कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी 533 अंकों की गिरावट के साथ 24,645 के स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर भी पिछले कई महीनों का लोअर लेवल माना जा रहा है। इन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर पर दिखा। खासकर रियल्टी, ऑटो, आईटी, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी रही। टॉप लूजर शेयरों में शामिल रहे: वहीं बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच डिफेंस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे वेस्ट एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल में उछाल, भारत के लिए बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 6% बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5.5% की तेजी के साथ 70 डॉलर के करीब पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल गुजरता है और इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। 17.50 लाख करोड़ का निवेशकों को झटका शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 4.63 लाख करोड़ रुपए था, जो सोमवार को गिरकर 4.45 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी महज कुछ घंटों में निवेशकों के 17.50 लाख करोड़ रुपए डूब गए। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि: फिलहाल बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहने की संभावना है और निवेशकों की नजर अब पूरी तरह मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है।

1 अप्रैल से SGB नियम बदले, सोने के निवेशकों को बड़ा झटका अब SGB मैच्योरिटी पर लगेगा LTCG टैक्स

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोने में निवेश करने वालों के लिए 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बार के बजट में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के टैक्स नियमों में अहम संशोधन किया है। अब सेकेंड्री मार्केट से खरीदे गए SGB पर मैच्योरिटी के बाद मिलने वाला लाभ टैक्स फ्री नहीं रहेगा। अब तक SGB में निवेश करने वालों को मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती थी, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह छूट केवल चुनिंदा निवेशकों तक सीमित कर दी गई है। किसे मिलेगा टैक्स छूट का फायदा? सीए नितिन कौशिक के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से टैक्स फ्री लाभ केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगा जिन्होंने: ऐसे निवेशकों को 2.5% सालाना ब्याज के साथ मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री मिलेगा। सेकेंड्री मार्केट निवेशकों के लिए झटका जो निवेशक SGB को स्टॉक एक्सचेंज या किसी अन्य व्यक्ति से खरीदते हैं, उन्हें अब: यानी अब सेकेंड्री मार्केट से SGB खरीदना पहले जितना फायदेमंद नहीं रहेगा। उदाहरण से समझें नया नियम मान लीजिए आपने एक्सचेंज से ₹7,000 में एक SGB खरीदा और मैच्योरिटी पर इसकी कीमत ₹11,000 हो गई। पहले यही लाभ पूरी तरह टैक्स फ्री होता था। गिफ्ट या ट्रांसफर करने पर भी खत्म होगा फायदा सीए के अनुसार, अगर SGB एक बार भी स्टॉक एक्सचेंज के जरिए या गिफ्ट के रूप में ट्रांसफर होता है, तो उस पर मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त हो जाएगी। निवेश रणनीति पर क्या पड़ेगा असर? यह बदलाव उन निवेशकों की रणनीति को बड़ा झटका देगा जो: अब यह रणनीति प्रभावी नहीं रहेगी क्योंकि मैच्योरिटी पर टैक्स देना होगा। निवेशकों के लिए सलाह

Budget 2026 Sasta-Mehnga: कपड़े, जूते से दवाओं तक सस्ताई, जानिए क्या होगा महंगा

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Budget 2026 Sasta-Mehnga: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में आम बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश किया। यह उनके कार्यकाल का लगातार 9वां बजट रहा। बजट भाषण में उन्होंने कई बड़े ऐलान किए, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। सरकार ने कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी घटाने की घोषणा की है, जिससे रोजमर्रा की कई चीजें सस्ती होंगी, वहीं कुछ सेक्टर्स में महंगाई भी बढ़ सकती है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार उन वस्तुओं पर ड्यूटी कम कर रही है, जो भारत में निर्मित होती हैं या जिनका देश में उत्पादन बढ़ाया जाना है। खासतौर पर लेदर, टेक्सटाइल, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। Budget 2026 में ये सामान होंगे सस्ते बजट के ऐलान के बाद निम्नलिखित वस्तुओं की कीमतों में राहत मिलने की संभावना है— सरकार ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात होने वाली वस्तुओं पर टैरिफ दर 20% से घटाकर 10% कर दी है, जिससे कई आयातित सामान सस्ते होंगे। मोबाइल, जूते और पढ़ाई पर मिलेगी राहत कच्चे चमड़े और इससे जुड़े उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटने से जूते, बेल्ट और बैग सस्ते हो सकते हैं। वहीं मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स जैसे बैटरियों के सस्ते होने से मोबाइल फोन की कीमतों में भी गिरावट आ सकती है। बजट में विदेश में पढ़ाई करने वालों को भी बड़ी राहत दी गई है। टीसीएस (TCS) की दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है, जिससे विदेश में पढ़ाई करना सस्ता होगा। इसके अलावा स्पोर्ट्स से जुड़े उपकरणों पर भी कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। इन सेक्टर्स में बढ़ सकती है महंगाई जहां एक ओर कई चीजें सस्ती होंगी, वहीं कुछ वस्तुएं महंगी भी हो सकती हैं। कस्टम ड्यूटी बढ़ने से इन सेक्टर्स में असर दिखेगा— इन उत्पादों की कीमतों में आने वाले समय में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर क्या कहता है बजट 2026? बजट 2026 में सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थ, ग्रीन एनर्जी और एजुकेशन को प्राथमिकता दी है। आम लोगों के लिए कई जरूरी चीजों को सस्ता करने का प्रयास किया गया है, जबकि कुछ सेक्टर्स में टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है।

Rupee Crash 2025: पहली बार डॉलर के मुकाबले 90 के पार, जानिए क्या-क्या बड़े नुकसान होंगे?

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। Rupee Crash 2025: भारतीय मुद्रा रुपया 2025 में लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ते हुए बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.14 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। मार्केट ओपन होने के साथ ही रुपया 89.97 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 90 के स्तर के नीचे लुढ़क गया। यह अब तक का सबसे खराब स्तर है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्यों गिर रहा है रुपया? मार्केट डीलरों के अनुसार, रुपये की तेज गिरावट के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं— India-US ट्रेड डील में देरी दोनों देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट लटकने से विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है। इंपोर्टर्स की भारी डॉलर खरीद बैंकिंग सेक्टर से लगातार डॉलर खरीदने की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। घरेलू और विदेशी बाजारों में बिकवाली ग्लोबल अनिश्चितताओं और घरेलू मार्केट में कमजोरी के चलते रुपये को सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। RBI की सीमित दखलअंदाजी डीलरों का अनुमान है कि RBI ने थोड़ी मात्रा में डॉलर बेचे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर इंटरवेंशन नहीं दिखा है। रुपये के लिए फिलहाल 90.20 का टेक्निकल सपोर्ट माना जा रहा है। रुपया गिरने से आम जनता को क्या नुकसान? रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना हर आम नागरिक की जेब पर सीधा असर डालता है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा भारत अपना 80% कच्चा तेल आयात करता है।रुपया गिरते ही— और पेट्रोल-डीजल बढ़ते ही ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स चार्ज बढ़ जाते हैं, जिससे लगभग हर चीज़ महंगी हो जाती है। इंपोर्टेड सामान होगा महंगा इन सभी का आयात महंगा हो जाएगा। महंगाई (Inflation) और बढ़ेगी रुपया टूटने का मतलब है— ज़्यादा इंपोर्ट कॉस्टमहंगा कच्चा मालमहंगी मैन्युफैक्चरिंगमहंगी मार्केट कीमतें इससे WPI और CPI दोनों में उछाल दिख सकता है।  पढ़ाई और विदेश यात्रा महंगी विदेश जाने वाले छात्रों और यात्रियों का खर्च सीधे बढ़ जाएगा। क्योंकि सभी भुगतान डॉलर में ही होते हैं। कंपनियों का प्रॉफिट घटेगा कई भारतीय कंपनियां विदेशी कच्चे माल पर निर्भर हैं।रुपया कमजोर होते ही कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे— 2025 रुपये के लिए इतना खराब क्यों रहा? यही साल अब तक रुपये के लिए सबसे बुरा साबित हो रहा है।US Dollar के मुकाबले भारतीय मुद्रा 5% तक कमजोर हो चुकी है। कारण—  रुपया आगे और कितना टूट सकता है? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है— “अब डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के ऊपर बना रहा तो जल्द ही 91–92 का स्तर भी संभव है।” हालांकि RBI कब और कितनी बड़ी दखल देगा, यह आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेगा।

MP News: रतलाम राइज कॉन्क्लेव 2025: 30,402 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 35 हजार रोजगार की सौगात; एमपी बना निवेशकों की पहली पसंद

रतलाम- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। MP News: रतलाम में आयोजित ‘एमपी राइज 2025 कॉन्क्लेव’ में मध्यप्रदेश को निवेश और रोजगार के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में प्रदेश को 30,402 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिससे 35,520 से अधिक रोजगार के नए अवसरसृजित होंगे। इस मेगा इवेंट के जरिए रतलाम अब स्किल, स्केल और स्टार्टअप्स का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब रतलाम सिर्फ सेव, साड़ी और सोने के लिए नहीं, बल्कि उन्नत औद्योगिक और नवाचार गतिविधियों के लिए जाना जाएगा। इस अवसर पर 94 औद्योगिक इकाइयों और क्लस्टर्स का भूमि पूजन व लोकार्पण किया गया, जिन पर 2012 करोड़ से अधिक की लागत आएगी। मुख्य घोषणाएं और उपलब्धियां: एमएसएमई इकाइयों को नवकरणीय ऊर्जा संयंत्रों के लिए सब्सिडी288 एमएसएमई इकाइयों को ₹270 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित140 वृहद इकाइयों को ₹425 करोड़ की वित्तीय सहायता538 एमएसएमई इकाइयों को भूमि आवंटन पत्र35 बड़ी इकाइयों को भूमि आवंटन के आशय पत्र4 लाख से अधिक हितग्राहियों को ₹3861 करोड़ का स्वरोजगार ऋण वितरणसूरत में 29 जून को रोड-शो की घोषणा …और अन्य प्रमुख कंपनियों के साथ कुल 30402 करोड़ निवेश और 35520 रोजगार सृजन प्रस्ताव। मुख्यमंत्री की अन्य घोषणाएं: मुख्यमंत्री का विज़न: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “हमारी नीति है कि जहां कॉन्क्लेव होता है, वहीं पर निवेश के साथ उद्योगों का भूमि पूजन और लोकार्पण भी हो। यह आयोजन केवल शोपीस नहीं, बल्कि युवाओं और निवेशकों के लिए एक ठोस अवसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेश का अगला पावरहाउस बन चुका है।” एमपी का औद्योगिक परिदृश्य:

Ratlam News: रतलाम में एमपी राइज-2025: 27 जून को मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ, 2 लाख हितग्राहियों को मिलेगा लाभ, 5450 रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

रतलाम- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: मध्यप्रदेश में उद्योग, कौशल और रोजगार के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत करने जा रहा है एमपी राइज-2025 कॉन्क्लेव, जिसका आयोजन 27 जून को रतलाम के नेहरू स्टेडियम में होगा। इस भव्य आयोजन का शुभारंभ स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग और औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। एमएसएमई दिवस पर खास आयोजन, रतलाम बना औद्योगिक केंद्र एमपी राइज कॉन्क्लेव इस बार और भी खास है क्योंकि इसका आयोजन 27 जून – अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर हो रहा है। रतलाम को आयोजन स्थल के रूप में चुनना रणनीतिक दृष्टिकोण से अहम है, क्योंकि यह शहर अब मध्यप्रदेश के नए औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब के रूप में तेजी से उभर रहा है। 2500+ प्रतिभागी, 858.57 करोड़ की 18 इकाइयों का लोकार्पण-भूमिपूजन इस आयोजन में देशभर से 2500 से अधिक प्रतिभागी, उद्योगपति, युवा उद्यमी, निवेशक, बैंक प्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री 858.57 करोड़ रुपये लागत की 18 औद्योगिक इकाइयों का भूमि पूजन और लोकार्पण करेंगे, जिससे 3 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे। 2 लाख से ज्यादा हितग्राही होंगे लाभांवित कॉन्क्लेव में 2 लाख से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे पीएम स्वनिधि, स्टार्टअप इंडिया, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, स्टैंडअप इंडिया आदि के तहत ऋण और वित्तीय सहायता दी जाएगी। 2,419 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का ऋण वितरण प्रस्तावित है। 5450 से अधिक रोजगार, 2,850 करोड़ निवेश प्रस्ताव एमपी राइज 2025 के तहत 2,850 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के आशय पत्र जारी होंगे, जिससे 5450 से अधिक रोजगार के अवसर खुलेंगे। मुख्यमंत्री कार्यक्रम में रोजगार ऑफर लेटर भी वितरित करेंगे। 5 ग्रामोद्योग इकाइयों का भूमि पूजन, 2.96 करोड़ की डीबीटी खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत 5 इकाइयों का भूमि पूजन होगा और 2.96 करोड़ रुपये की डीबीटी राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर की जाएगी। प्रदर्शनी में दिखेगा मालवा का हुनर, 100 से अधिक स्टॉल्स कॉन्क्लेव में मालवा अंचल के पारंपरिक उत्पादों, एमएसएमई इकाइयों, स्टार्टअप्स और विभागीय योजनाओं से संबंधित 100+ स्टॉल्स की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यहां रतलाम, इंदौर, देवास, भोपाल, उज्जैन, धार, शिवपुरी जैसे जिलों की यूनिट्स अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी। वॉलमार्ट, ओएनडीसी और एनएसडीसी के साथ एमओयू कार्यक्रम में वॉलमार्ट, ओएनडीसी और एनएसडीसी के साथ महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को ग्लोबल स्किलिंग का अवसर मिलेगा। थीमैटिक सत्रों में मिलेगा औद्योगिक नीति और स्किल डेवलपमेंट का ज्ञान कॉन्क्लेव में तीन प्रमुख थीमैटिक सत्र आयोजित होंगे: मुख्यमंत्री का विशेष संबोधन और निवेशकों से संवाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष संबोधन देंगे, जिसमें वे राज्य सरकार की औद्योगिक नीति, महिला उद्यमिता, रोजगार सृजन और युवाओं के कौशल विकास पर सरकार की प्रतिबद्धता साझा करेंगे। साथ ही वे प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन बैठकें भी करेंगे।