FD पर अब नहीं चलेगी बैंकों की मनमानी, RBI ने बदले नियम; 1 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था

RBI ने FD और RD पर ब्याज दरों से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। 1 अक्टूबर 2026 से बैंक एक ही जमा पर अलग-अलग ब्याज नहीं दे सकेंगे। जानें पूरा अपडेट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने जमा योजनाओं पर ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य सभी ग्राहकों के लिए समान और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना है। RBI की ओर से जारी संशोधित निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। इसके बाद बैंक एक ही दिन, समान अवधि और समान राशि की जमा पर अलग-अलग शाखाओं में अलग-अलग ब्याज दरें नहीं दे सकेंगे। साथ ही हर दिन सुबह 10 बजे बैंक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नई जमा दरें सार्वजनिक करेंगे। अब तक कई मामलों में ग्राहकों को अलग-अलग शाखाओं या बातचीत के आधार पर अलग ब्याज दरें मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नए नियम लागू होने के बाद इस तरह की व्यवस्था पर रोक लग जाएगी। RBI ने क्यों बदले FD से जुड़े नियम? 30 जुलाई 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक- डिपॉजिट पर ब्याज दर) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026’जारी किया। RBI का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, ग्राहकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना और ब्याज दरों को लेकर किसी भी तरह की असमानता को खत्म करना है। 3 करोड़ रुपये से कम की FD वालों को क्या फायदा मिलेगा? सबसे बड़ा बदलाव 3 करोड़ रुपये से कम की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और आवर्ती जमा (RD) पर किया गया है। नए नियमों के अनुसार— अब रोज सुबह वेबसाइट पर दिखेंगी नई ब्याज दरें RBI ने सभी संबंधित बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपनी Deposit Rates रोजाना सुबह 10 बजे आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करें। इस व्यवस्था से ग्राहकों को— बल्क FD (Bulk Deposit) पर भी लागू होंगे नए नियम RBI ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एकमुश्त जमा को Bulk Deposit की श्रेणी में रखा है। ऐसी जमा राशि आमतौर पर— करते हैं। पहले ऐसे मामलों में ब्याज दरें बातचीत के आधार पर तय होती थीं। अब बैंक इन जमा पर लागू ब्याज दरों को भी प्रतिदिन सुबह 10 बजे सार्वजनिक करेंगे। किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम? RBI के नए निर्देश निम्न संस्थानों पर लागू होंगे— ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है? इन नियमों के बाद FD कराने वाले ग्राहकों को बैंक की अलग-अलग शाखाओं में ब्याज दरों का अंतर देखने को नहीं मिलेगा। वेबसाइट पर प्रकाशित दरें ही लागू होंगी, जिससे निवेशकों के लिए तुलना करना आसान होगा और बैंकिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

Gold Price Today: सप्ताह के पहले दिन फिर फिसला सोना, जानिए आपके शहर में आज क्या है 22 और 24 कैरेट का भाव

Gold Price Today: 27 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली, मुंबई, भोपाल समेत प्रमुख शहरों के 22 और 24 कैरेट गोल्ड के ताजा रेट यहां देखें  नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Gold Price Today: सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी 27 जुलाई को घरेलू बाजार में गोल्ड रेट में फिर गिरावट दर्ज की गई। इससे आभूषण खरीदने की योजना बना रहे लोगों को कुछ राहत मिली है। राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में 22 और 24 कैरेट सोने के दाम नीचे आए हैं। दूसरी ओर चांदी की कीमत में भी नरमी देखने को मिली है। हालांकि, बीते सप्ताह की तुलना में दोनों कीमती धातुओं ने अच्छी बढ़त दर्ज की थी। Gold Price Today: प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव देश के अलग-अलग शहरों में आज 22 और 24 कैरेट सोने के दाम इस प्रकार हैं। दिल्ली में सोने का भाव राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना ₹1,45,070 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,32,990 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। मुंबई और कोलकाता में गोल्ड रेट मुंबई और कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,920 प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोना ₹1,32,840 प्रति 10 ग्राम बिक रहा है। भोपाल और अहमदाबाद में आज का रेट भोपाल और अहमदाबाद में 24 कैरेट गोल्ड ₹1,44,970 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड ₹1,32,890 प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध है। चेन्नई में सोने की कीमत चेन्नई में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,45,080 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,32,990 प्रति 10 ग्राम है। जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ का भाव इन तीनों शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,45,070 प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट सोने का रेट ₹1,32,990 प्रति 10 ग्राम बना हुआ है। हैदराबाद और पुणे में गोल्ड रेट हैदराबाद और पुणे में 24 कैरेट सोना ₹1,44,920 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,32,840 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है। चांदी की कीमत में भी आई गिरावट सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली। सोमवार सुबह चांदी का भाव ₹2,39,900 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। हालांकि पिछले एक सप्ताह में चांदी करीब ₹10,000 प्रति किलो महंगी हुई थी। पिछले सप्ताह कैसा रहा बाजार? हालिया गिरावट के बावजूद पिछले सप्ताह सोने की कीमतों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी। पिछले सप्ताह का ट्रेंड अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतें केवल स्थानीय मांग और सप्लाई से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल भी इन पर बड़ा असर डालती है। डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक स्थिति, ब्याज दरों और निवेशकों की खरीदारी जैसे कारक भी कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान

LTCG Tax पर सरकार का साफ रुख, इक्विटी निवेशकों को फिलहाल नहीं मिलेगी टैक्स राहत

LTCG Tax: सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि इक्विटी पर LTCG Tax खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। जानिए मौजूदा टैक्स नियम, FPI और घरेलू निवेशकों के लिए क्या व्यवस्था है नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। LTCG Tax: शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट कर दी है। लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि क्या रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म किया जा सकता है। अब सरकार ने संसद में इस पर अपना स्पष्ट रुख सामने रख दिया है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लिखित जवाब में कहा कि फिलहाल सरकार के पास इक्विटी निवेश पर लगने वाले LTCG Taxको समाप्त करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) और घरेलू निवेशकों के लिए इक्विटी पर टैक्स की दर समान है। बाजार से जुड़े निवेशकों के बीच लंबे समय से टैक्स में राहत की मांग उठती रही है। हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि टैक्स नीतियों की समय-समय पर समीक्षा होती रहती है, लेकिन इस समय किसी बदलाव का निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार ने संसद में क्या कहा? लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार के पास रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इक्विटी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स समाप्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि कर संबंधी नीतियों की समीक्षा समय-समय पर की जाती है। हर साल बजट तैयार करते समय आर्थिक परिस्थितियों, राजस्व आवश्यकताओं और अन्य वित्तीय पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाते हैं। इक्विटी निवेश पर अभी कितना LTCG Tax लगता है? फिलहाल सूचीबद्ध (Listed) शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पर निम्न नियम लागू हैं। दो वर्षों में सरकार को मिला 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक टैक्स इक्विटी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से सरकार की आय लगातार बढ़ रही है। असेसमेंट वर्ष टैक्स संग्रह AY 2024-25 ₹72,249 करोड़ AY 2025-26. ₹1,29,158 करोड़ कुल ₹2.01 लाख करोड़ से अधिक इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि LTCG टैक्स सरकार के लिए राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। FPI और घरेलू निवेशकों के टैक्स में क्या अंतर है? सरकार ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि इक्विटी निवेश के मामले में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को कोई अतिरिक्त टैक्स छूट नहीं दी गई है। घरेलू निवेशकों की तरह ही FPI को भी सूचीबद्ध शेयरों से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होता है। FPI को किस निवेश पर मिली है छूट? सरकार के अनुसार, हालिया आयकर संशोधन के तहत FPI को केवल Government Securities (G-Secs) में निवेश से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर टैक्स राहत दी गई है। यह छूट केवल सरकारी बॉन्ड में निवेश पर लागू होती है। इक्विटी निवेश पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। टैक्स नीतियों की समीक्षा कब होती है? वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार समय-समय पर कर नीतियों की समीक्षा करती है। विशेष रूप से: इसका मतलब यह है कि भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव संभव हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के सामने नहीं है। निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी ध्यान रखें

31 जुलाई नहीं, इन टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त है ITR फाइल करने की आखिरी तारीख, जानें पूरा नियम

31 जुलाई सभी के लिए ITR की आखिरी तारीख नहीं है। जानें किन टैक्सपेयर्स को 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न भरने की छूट मिली है और नए नियम क्या कहते हैं। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। ITR Filling: अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं और आपको लगता है कि 31 जुलाई 2026 ही अंतिम तारीख है, तो एक बार अपने टैक्स प्रोफाइल की जांच जरूर कर लें। सभी टैक्सपेयर्स के लिए यह डेडलाइन समान नहीं है। वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए सरकार ने कुछ श्रेणी के टैक्सपेयर्स को ITR दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। खासतौर पर बिजनेस इनकम वाले लोगों, कुछ प्रोफेशनल्स और इंट्राडे या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेड करने वालों के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 हो सकती है। यदि आपने पूरे वित्त वर्ष में केवल एक बार भी इंट्राडे ट्रेडिंग या F&O में ट्रेड किया है, तो इनकम टैक्स कानून के तहत आपकी आय का वर्गीकरण बदल सकता है। ऐसे में आपकी ITR फाइलिंग की डेडलाइन भी अलग हो सकती है। किन लोगों के लिए 31 अगस्त 2026 है आखिरी तारीख? वित्त अधिनियम 2026 के अनुसार जिन टैक्सपेयर्स की आय बिजनेस या प्रोफेशन से है और जिनके खातों का टैक्स ऑडिट आवश्यक नहीं है, वे 31 अगस्त 2026 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इस श्रेणी में शामिल हो सकते हैं— इंट्राडे ट्रेडिंग करने वालों के लिए क्या नियम है? अगर आपने पूरे साल में सिर्फ एक बार भी इंट्राडे शेयर ट्रेडिंग की है, तो इनकम टैक्स विभाग इसे स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम मानता है। इसका मतलब यह है कि आपकी आय केवल कैपिटल गेन के रूप में नहीं बल्कि बिजनेस इनकम के रूप में भी मानी जा सकती है। ऐसी स्थिति में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई के बजाय 31 अगस्त 2026 हो सकती है। स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम क्या होती है? इंट्राडे ट्रेडिंग में शेयर उसी दिन खरीदे और बेचे जाते हैं। इस तरह होने वाला लाभ या नुकसान स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। इसके नुकसान को केवल स्पेकुलेटिव मुनाफे से ही समायोजित (Adjust) किया जा सकता है। F&O ट्रेडिंग करने वालों के लिए क्या है नियम? फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग से होने वाली आय को नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाता है। हालांकि इसमें शेयरों की डिलीवरी नहीं होती, लेकिन इनकम टैक्स कानून के तहत इसे बिजनेस इनकम की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए F&O ट्रेड करने वालों को भी अपनी ITR फाइलिंग की समय-सीमा समझना जरूरी है। टैक्स ऑडिट जरूरी होने पर क्या होगी आखिरी तारीख? यदि F&O या अन्य बिजनेस गतिविधियों के कारण आपका टर्नओवर टैक्स ऑडिट की निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है, तो पहले टैक्स ऑडिट कराना होगा। ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 होगी। महत्वपूर्ण जानकारी ITR फाइल करने से पहले यह जरूर जांच लें

Gold-Silver Rate Crash: दो दिन में ₹22,000 टूटी चांदी, सोना भी हुआ धड़ाम; खरीदारी का सुनहरा मौका?

Gold-Silver Rate Crash: सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट। दो दिन में चांदी ₹22,000 प्रति किलो और सोना ₹7,600 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हुआ। जानिए गिरावट की वजह और ताजा रेट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Gold-Silver Rate Crash: सोना और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जबरदस्त टूट दर्ज की गई, जबकि सोना भी हजारों रुपये सस्ता हो गया। दो दिनों के भीतर चांदी करीब ₹22,000 प्रति किलो और सोना ₹7,600 से अधिक प्रति 10 ग्राम तक फिसल चुका है। खुलते ही ₹8,000 से ज्यादा टूटी चांदी MCX पर 3 जुलाई एक्सपायरी वाली चांदी गुरुवार को ₹2,37,572 प्रति किलो पर बंद हुई थी। शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही इसका भाव गिरकर ₹2,29,561 प्रति किलो पर पहुंच गया। यानी एक ही झटके में चांदी ₹8,011 प्रति किलो सस्ती हो गई। अगर पिछले दो दिनों की बात करें तो बुधवार को चांदी ₹2,51,807 प्रति किलो पर बंद हुई थी। वहां से शुक्रवार तक इसमें कुल ₹22,246 प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। Gold Rate Crash: सोना भी हुआ हजारों रुपये सस्ता चांदी की तरह सोने की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। 5 अगस्त एक्सपायरी वाले 24 कैरेट गोल्ड का भाव शुक्रवार को गिरकर ₹1,46,252 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह गुरुवार के बंद भाव ₹1,49,309 प्रति 10 ग्राम से ₹3,057 कम है। वहीं 17 जून को सोने का भाव ₹1,53,879 प्रति 10 ग्राम था। इस हिसाब से दो कारोबारी दिनों में सोना ₹7,627 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। रिकॉर्ड हाई से कितना नीचे आया सोना? इस साल जनवरी में सोने ने नया रिकॉर्ड बनाया था। वायदा बाजार में सोने का भाव पहली बार ₹2 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा था और इसका हाई लेवल ₹2,04,375 दर्ज किया गया था। वर्तमान कीमत की तुलना करें तो सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब ₹58,123 प्रति 10 ग्राम नीचे आ चुका है। इससे निवेशकों और खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। अचानक क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, सोना और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका का केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) है। फेडरल रिजर्व ने अपनी जून 2026 की बैठक में ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया है। हालांकि अधिकारियों ने बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताई है और भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ने पर निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों से दूरी बनाते हैं, जिससे इनकी कीमतों पर दबाव आता है। निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या है संकेत? सोना और चांदी में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन शादी-ब्याह या निवेश के लिए खरीदारी करने वालों के लिए यह राहत भरी खबर है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी फेड की नीतियों के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल, सोना और चांदी दोनों अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, जिससे बाजार में खरीदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

CIBIL Score 730 से कम? RBI के नए ECL नियम के बाद होम, कार और एजुकेशन लोन लेना हो सकता है बेहद मुश्किल

RBI का नया Expected Credit Loss (ECL) Framework 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। जानिए क्यों CIBIL Score 730 से कम होने पर होम लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, RBI का नया ECL Framework: CIBIL Score 730 से कम होने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें अगर आपका CIBIL Score 730 से कम है और आप भविष्य में होम लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2027 से नया Expected Credit Loss (ECL) Framework लागू करने जा रहा है, जिसके बाद बैंकों द्वारा लोन देने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सकती है। क्या है RBI का Expected Credit Loss (ECL) Framework? वर्तमान व्यवस्था में बैंक तब तक किसी लोन को जोखिमपूर्ण नहीं मानते, जब तक वह लंबे समय तक बकाया रहकर NPA (Non-Performing Asset) नहीं बन जाता। लेकिन ECL Framework के तहत बैंक को लोन देने से पहले ही संभावित नुकसान का आकलन करना होगा। इसका मतलब है कि बैंक ग्राहक के वित्तीय व्यवहार, भुगतान इतिहास, CIBIL Score, आय, रोजगार की स्थिरता और भविष्य में डिफॉल्ट की संभावना जैसे कई कारकों का गहन मूल्यांकन करेंगे। 730 से कम CIBIL Score वालों पर क्या होगा असर? रिपोर्ट्स के अनुसार देश के लगभग 62 प्रतिशत लोगों का CIBIL Score 730 से नीचे है। ऐसे ग्राहकों को ECL लागू होने के बाद लोन प्राप्त करने में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। बैंकों को जोखिम वाले ग्राहकों के लिए ज्यादा पूंजी अलग रखनी होगी। यदि कोई ग्राहक लगातार दो EMI चूकता है, तो बैंक को उसके लिए पहले की तुलना में कई गुना अधिक प्रावधान रखना पड़ सकता है। ऐसे में बैंक कम क्रेडिट स्कोर वाले आवेदकों को लोन देने से बच सकते हैं। महंगा हो सकता है लोन विशेषज्ञों का मानना है कि कम CIBIL Score वाले ग्राहकों को भविष्य में तीन स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है: 1. लोन रिजेक्ट होने की संभावना बढ़ेगी कम स्कोर वाले आवेदकों के आवेदन सीधे खारिज किए जा सकते हैं। 2. ब्याज दर ज्यादा हो सकती है यदि लोन स्वीकृत होता भी है तो बैंक अधिक जोखिम के कारण ऊंची ब्याज दर वसूल सकते हैं। 3. अतिरिक्त गारंटी की मांग कुछ मामलों में बैंक अतिरिक्त सिक्योरिटी या गारंटर की मांग भी कर सकते हैं। बैंकों पर भी पड़ेगा असर बैंकिंग सेक्टर की रिपोर्ट्स के मुताबिक ECL Framework लागू होने के बाद बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। अनुमान है कि इस बदलाव से बैंकिंग उद्योग का लाभ लगभग 42,000 करोड़ रुपये तक प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना सकते हैं। क्या करें ग्राहक? यदि आप आने वाले वर्षों में किसी भी प्रकार का बड़ा लोन लेना चाहते हैं, तो अभी से अपना CIBIL Score सुधारने पर ध्यान दें। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान, कम क्रेडिट उपयोग और पुराने लोन का नियमित भुगतान आपके स्कोर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

28 दिन रिचार्ज खत्म? अब 30 दिन वैलिडिटी पर जोर, यूजर्स को सालाना बचत का मौका

मोबाइल रिचार्ज में बड़ा बदलाव! 28 दिन की जगह 30 दिन वैलिडिटी वाले प्लान को बढ़ावा, जानें कैसे साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज से बचकर आपकी होगी बचत। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अब सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इससे यूजर्स को साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज से राहत मिल सकती है और कुल खर्च भी कम हो सकता है। 28 दिन रिचार्ज पर सरकार सख्त, 30 दिन प्लान को बढ़ावा मोबाइल यूजर्स की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बाद सरकार ने टेलिकॉम कंपनियों को साफ संकेत दिया है कि 28 दिन की बजाय 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान को प्राथमिकता दी जाए। अब कंपनियों को अपने प्लान में पारदर्शिता दिखानी होगी और यूजर्स को स्पष्ट विकल्प देने होंगे। क्यों उठाना पड़ा ये कदम? दरअसल 28 दिन का प्लान यूजर्स के लिए “छुपा हुआ अतिरिक्त खर्च” बन गया था। यह मुद्दा संसद में भी उठा, जहां इसे यूजर्स पर अतिरिक्त बोझ बताया गया। 28 दिन vs 30 दिन प्लान: समझें पूरा गणित 28 दिन प्लान: 30 दिन प्लान: गणित:365 ÷ 28 = लगभग 13 रिचार्ज365 ÷ 30 = 12 रिचार्ज अभी क्या दे रही हैं कंपनियां? देश की बड़ी टेलिकॉम कंपनियां जैसे अभी ज्यादातर 28 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान ही ऑफर कर रही हैं, जिनकी कीमत ₹199 से ₹299 के बीच होती है। सरकार के नए निर्देश क्या हैं? सरकार ने कंपनियों से कहा है कि: हालांकि, प्लान की कीमत तय करने की आजादी अभी भी कंपनियों के पास रहेगी। यूजर्स के लिए क्यों जरूरी है ये बदलाव? आगे क्या बदल सकता है? अब आपको क्या करना चाहिए? FAQs 1. 28 दिन प्लान में दिक्कत क्या है?इसमें साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ता है। 2. क्या 30 दिन प्लान सस्ते होंगे?जरूरी नहीं, लेकिन कुल सालाना खर्च कम हो सकता है। 3. क्या 28 दिन प्लान बंद हो जाएंगे?अभी नहीं, लेकिन इनकी संख्या कम हो सकती है। 4. सरकार ने क्या कहा है?30 दिन वाले प्लान को प्रमोट करने और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। 5. यूजर्स को क्या फायदा होगा?कम रिचार्ज, कम खर्च और ज्यादा सुविधा।

Share Market: 1300 अंक टूटा सेंसेक्स: शेयर बाजार में कोहराम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1300 अंक टूटा और निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हुआ। निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानिए गिरावट की बड़ी वजह। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Share Market: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,342.27 अंक यानी 1.72% गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 394.75 अंक यानी 1.63% टूटकर 23,866.85 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों को बड़ा झटका लगा और बाजार पूंजीकरण में करीब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। टॉप 30 शेयरों में अधिकांश में गिरावट बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 2 शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी 28 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस गिरावट में कई बड़े शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें प्रमुख रूप से बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की कमाई हुई साफ मंगलवार को शेयर बाजार में तेजी के कारण निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ था, लेकिन बुधवार की गिरावट ने यह कमाई लगभग पूरी तरह मिटा दी। बीएसई का कुल मार्केट कैप मंगलवार को करीब 447 लाख करोड़ रुपये था, जो गिरकर 441.90 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इन सेक्टरों में ज्यादा गिरावट बाजार में आई इस गिरावट का असर कई सेक्टरों पर देखने को मिला। इन सभी क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। एफआईआई की बिकवाली बनी बड़ी वजह शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। 10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,673 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। प्रॉफिट बुकिंग का भी असर पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग की। इससे भी बाजार पर दबाव बढ़ा और इंडेक्स नीचे आ गए। मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। इंडिया VIX में उछाल बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX भी 11 मार्च को 8% से ज्यादा बढ़कर 20.5 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। बाजार में आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह लेने की सलाह दी जा रही है।

Gold Rate Today: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना-चांदी चमके, 24 कैरेट सोना ₹1.63 लाख के पार

Gold Rate Today 7 March 2026: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी, जानें 24K, 22K और 18K गोल्ड का ताजा भाव और बड़े शहरों में आज का सराफा रेट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Gold Rate Today: सराफा बाजार में कई दिनों की गिरावट के बाद शनिवार (7 मार्च 2026) को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुझान फिर से सुरक्षित निवेश यानी सोने और चांदी की ओर बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और लगातार हो रही जवाबी कार्रवाइयों के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में लगा रहे हैं, जिससे इनके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। 24 कैरेट सोने का ताजा भाव सराफा बाजार में आज 24 कैरेट सोना 163800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। एक दिन पहले इसकी कीमत 161280 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। यानी एक ही दिन में सोना करीब 2520 रुपये महंगा हो गया है। 22 कैरेट सोने का रेट आज 22 कैरेट सोना 150150 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।जबकि शुक्रवार को इसका भाव 147850 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस तरह इसमें भी करीब 2300 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 18 कैरेट सोने का भाव 18 कैरेट सोने की कीमत में भी तेजी देखने को मिली है।आज इसका भाव 122880 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि एक दिन पहले यह 121000 रुपये प्रति 10 ग्राम था। बड़े शहरों में आज का गोल्ड रेट क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें? विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सैन्य तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। सोना पारंपरिक रूप से एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए ऐसे हालात में इसकी मांग बढ़ जाती है और कीमतों में तेजी आ जाती है।

Post Office: ₹3 लाख निवेश पर 5 साल में ₹1.23 लाख ब्याज, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Post Office: अगर आप सुरक्षित निवेश के साथ तय और बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस की Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है। खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई यह स्कीम मौजूदा समय में 8.2% सालाना ब्याज दे रही है। ₹3 लाख जमा पर कितना मिलेगा रिटर्न? कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर कोई वरिष्ठ नागरिक इस स्कीम में ₹3,00,000 का एकमुश्त निवेश करता है, तो 5 साल की अवधि में उसे करीब ₹1,23,000 ब्याज मिलेगा। यानी मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग ₹4,23,000 हो जाएगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है और अगर हर तिमाही ब्याज क्लेम नहीं किया जाता, तो उस पर अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता। कौन खोल सकता है खाता? निवेश सीमा और नियम मैच्योरिटी और एक्सटेंशन नियम अगर खाता बंद कर दिया जाता है तो निवेशक कुल अधिकतम सीमा ₹30 लाख के भीतर नया खाता फिर से खोल सकता है। TDS और टैक्स नियम अगर एक वित्तीय वर्ष में SCSS सहित सभी खातों से मिलने वाला कुल ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाता है तो TDS लागू होगा। हालांकि, पात्र निवेशक Form 15G/15H जमा कर TDS से राहत पा सकते हैं। क्यों है यह स्कीम खास? ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और नियमित आय चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की वरिष्ठ नागरिक बचत योजना एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।

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