Share Market: 1300 अंक टूटा सेंसेक्स: शेयर बाजार में कोहराम, निवेशकों के 5 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1300 अंक टूटा और निफ्टी 23,900 के नीचे बंद हुआ। निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे, जानिए गिरावट की बड़ी वजह। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Share Market: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,342.27 अंक यानी 1.72% गिरकर 76,863.71 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 394.75 अंक यानी 1.63% टूटकर 23,866.85 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों को बड़ा झटका लगा और बाजार पूंजीकरण में करीब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। टॉप 30 शेयरों में अधिकांश में गिरावट बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 2 शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि बाकी 28 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस गिरावट में कई बड़े शेयरों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें प्रमुख रूप से बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की कमाई हुई साफ मंगलवार को शेयर बाजार में तेजी के कारण निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ था, लेकिन बुधवार की गिरावट ने यह कमाई लगभग पूरी तरह मिटा दी। बीएसई का कुल मार्केट कैप मंगलवार को करीब 447 लाख करोड़ रुपये था, जो गिरकर 441.90 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इन सेक्टरों में ज्यादा गिरावट बाजार में आई इस गिरावट का असर कई सेक्टरों पर देखने को मिला। इन सभी क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। एफआईआई की बिकवाली बनी बड़ी वजह शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। 10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 4,673 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। प्रॉफिट बुकिंग का भी असर पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग की। इससे भी बाजार पर दबाव बढ़ा और इंडेक्स नीचे आ गए। मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता वैश्विक स्तर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। इंडिया VIX में उछाल बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडेक्स इंडिया VIX भी 11 मार्च को 8% से ज्यादा बढ़कर 20.5 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। बाजार में आगे क्या रहेगा रुख विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ निवेश करने और किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वित्तीय सलाहकार की सलाह लेने की सलाह दी जा रही है।

Post Office: ₹3 लाख निवेश पर 5 साल में ₹1.23 लाख ब्याज, जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Post Office: अगर आप सुरक्षित निवेश के साथ तय और बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस की Senior Citizens Savings Scheme (SCSS) आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती है। खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई गई यह स्कीम मौजूदा समय में 8.2% सालाना ब्याज दे रही है। ₹3 लाख जमा पर कितना मिलेगा रिटर्न? कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर कोई वरिष्ठ नागरिक इस स्कीम में ₹3,00,000 का एकमुश्त निवेश करता है, तो 5 साल की अवधि में उसे करीब ₹1,23,000 ब्याज मिलेगा। यानी मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग ₹4,23,000 हो जाएगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है और अगर हर तिमाही ब्याज क्लेम नहीं किया जाता, तो उस पर अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलता। कौन खोल सकता है खाता? निवेश सीमा और नियम मैच्योरिटी और एक्सटेंशन नियम अगर खाता बंद कर दिया जाता है तो निवेशक कुल अधिकतम सीमा ₹30 लाख के भीतर नया खाता फिर से खोल सकता है। TDS और टैक्स नियम अगर एक वित्तीय वर्ष में SCSS सहित सभी खातों से मिलने वाला कुल ब्याज तय सीमा से अधिक हो जाता है तो TDS लागू होगा। हालांकि, पात्र निवेशक Form 15G/15H जमा कर TDS से राहत पा सकते हैं। क्यों है यह स्कीम खास? ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित और नियमित आय चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की वरिष्ठ नागरिक बचत योजना एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।

मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया। ओपनिंग के दौरान सेंसेक्स में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 500 अंकों से अधिक टूट गया। इस भारी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को तगड़ा झटका लगा है और करीब 17.50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा बाजार कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 3.30 फीसदी यानी 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर खुला, जो करीब 11 महीने का निचला स्तर है। सुबह के सत्र में हल्की रिकवरी के बाद भी सेंसेक्स 80,500 के आसपास ही कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी 533 अंकों की गिरावट के साथ 24,645 के स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर भी पिछले कई महीनों का लोअर लेवल माना जा रहा है। इन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर पर दिखा। खासकर रियल्टी, ऑटो, आईटी, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी रही। टॉप लूजर शेयरों में शामिल रहे: वहीं बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच डिफेंस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे वेस्ट एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल में उछाल, भारत के लिए बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 6% बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5.5% की तेजी के साथ 70 डॉलर के करीब पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल गुजरता है और इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। 17.50 लाख करोड़ का निवेशकों को झटका शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 4.63 लाख करोड़ रुपए था, जो सोमवार को गिरकर 4.45 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी महज कुछ घंटों में निवेशकों के 17.50 लाख करोड़ रुपए डूब गए। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि: फिलहाल बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहने की संभावना है और निवेशकों की नजर अब पूरी तरह मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है।

Rupee Crash 2025: पहली बार डॉलर के मुकाबले 90 के पार, जानिए क्या-क्या बड़े नुकसान होंगे?

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,  न्यूज़ डेस्क। Rupee Crash 2025: भारतीय मुद्रा रुपया 2025 में लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ते हुए बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.14 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। मार्केट ओपन होने के साथ ही रुपया 89.97 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 90 के स्तर के नीचे लुढ़क गया। यह अब तक का सबसे खराब स्तर है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्यों गिर रहा है रुपया? मार्केट डीलरों के अनुसार, रुपये की तेज गिरावट के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं— India-US ट्रेड डील में देरी दोनों देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट लटकने से विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है। इंपोर्टर्स की भारी डॉलर खरीद बैंकिंग सेक्टर से लगातार डॉलर खरीदने की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। घरेलू और विदेशी बाजारों में बिकवाली ग्लोबल अनिश्चितताओं और घरेलू मार्केट में कमजोरी के चलते रुपये को सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। RBI की सीमित दखलअंदाजी डीलरों का अनुमान है कि RBI ने थोड़ी मात्रा में डॉलर बेचे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर इंटरवेंशन नहीं दिखा है। रुपये के लिए फिलहाल 90.20 का टेक्निकल सपोर्ट माना जा रहा है। रुपया गिरने से आम जनता को क्या नुकसान? रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना हर आम नागरिक की जेब पर सीधा असर डालता है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा भारत अपना 80% कच्चा तेल आयात करता है।रुपया गिरते ही— और पेट्रोल-डीजल बढ़ते ही ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स चार्ज बढ़ जाते हैं, जिससे लगभग हर चीज़ महंगी हो जाती है। इंपोर्टेड सामान होगा महंगा इन सभी का आयात महंगा हो जाएगा। महंगाई (Inflation) और बढ़ेगी रुपया टूटने का मतलब है— ज़्यादा इंपोर्ट कॉस्टमहंगा कच्चा मालमहंगी मैन्युफैक्चरिंगमहंगी मार्केट कीमतें इससे WPI और CPI दोनों में उछाल दिख सकता है।  पढ़ाई और विदेश यात्रा महंगी विदेश जाने वाले छात्रों और यात्रियों का खर्च सीधे बढ़ जाएगा। क्योंकि सभी भुगतान डॉलर में ही होते हैं। कंपनियों का प्रॉफिट घटेगा कई भारतीय कंपनियां विदेशी कच्चे माल पर निर्भर हैं।रुपया कमजोर होते ही कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे— 2025 रुपये के लिए इतना खराब क्यों रहा? यही साल अब तक रुपये के लिए सबसे बुरा साबित हो रहा है।US Dollar के मुकाबले भारतीय मुद्रा 5% तक कमजोर हो चुकी है। कारण—  रुपया आगे और कितना टूट सकता है? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है— “अब डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के ऊपर बना रहा तो जल्द ही 91–92 का स्तर भी संभव है।” हालांकि RBI कब और कितनी बड़ी दखल देगा, यह आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेगा।