MP News: MP के निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र को पक्षकार बनाया है। अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
भोपाल- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्यप्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS विद्यार्थियों के आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पुराने मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। साथ ही इसी मुद्दे से जुड़ी नई याचिका पर राज्य शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को नोटिस जारी किया गया है।
मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संबंधित प्रवेश प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। अब अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।

क्या है निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण का मामला?
मामला निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS वर्ग के विद्यार्थियों को आरक्षण का लाभ दिलाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि EWS अभ्यर्थियों को समायोजित करने के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आरक्षण व्यवस्था का लाभ चाहते हैं।
नई याचिका पर राज्य शासन और NMC को नोटिस
कुमारी दरक्षा अंजुम सहित अन्य की ओर से दायर नई याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS अभ्यर्थियों के प्रवेश से संबंधित मांग उठाई गई है।
प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश शासन और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। यानी इस मामले में आगे आने वाला न्यायिक निर्णय प्रवेश व्यवस्था पर असर डाल सकता है।
पुराने मामले में अब केंद्र सरकार भी शामिल
EWS आरक्षण से जुड़ा यह विवाद पहले से हाईकोर्ट में लंबित है। अथर्व चतुर्वेदी विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन नाम से दायर रिट याचिका वर्ष 2024 से अदालत में लंबित है।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भी पक्षकार बनाने की मांग की थी। कोर्ट ने मौखिक आवेदन को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को मामले में शामिल करने की अनुमति दे दी।
केंद्र की ओर से नोटिस डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु को स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र से दो सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
2024 के आदेश में क्या कहा गया था?
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2024 के आदेश का भी हवाला दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस आदेश में NMC को निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण लागू करने के लिए एक वर्ष के भीतर सीटें बढ़ाने से संबंधित निर्देश दिए गए थे।
अब नए मामले में केंद्र सरकार का पक्ष भी रिकॉर्ड पर आने के बाद इस मुद्दे पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
विद्यार्थियों के लिए क्यों अहम है मामला?
निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों की सीटों को लेकर हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होते हैं। ऐसे में EWS आरक्षण से जुड़ा कोई भी फैसला संबंधित अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि अदालत सीटें बढ़ाने से संबंधित व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने का फैसला करती है, तो भविष्य के प्रवेश सत्रों में EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम लाभ और सीटों की संख्या अदालत के फैसले तथा संबंधित नियामकीय व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
अगली सुनवाई 11 सितंबर को
फिलहाल मामले में केंद्र सरकार के जवाब का इंतजार है। राज्य शासन और NMC को भी नई याचिका पर अपना पक्ष रखना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को निर्धारित है। उस सुनवाई में सामने आने वाले जवाब और कोर्ट के निर्देश से निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।
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