डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए? जानिए कब करें शिकायत और कैसे वापस मिल सकता है आपका पैसा
डिजिटल धोखाधड़ी होने पर कितने समय में शिकायत करनी चाहिए? बैंक, साइबर क्राइम पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने का तरीका जानें। RBI के नियमों के अनुसार पैसा वापस मिलने की पूरी प्रक्रिया समझें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेक। देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं। यूपीआई, नेट बैंकिंग और कार्ड पेमेंट ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि आपकी एक छोटी सी देरी लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है। डिजिटल धोखाधड़ी होने के बाद सबसे पहले क्या करें? यदि आपके खाते से बिना अनुमति के पैसा कट जाता है या किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक को इसकी जानकारी दें। बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें और अपने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, यूपीआई या नेट बैंकिंग सेवाओं को तुरंत ब्लॉक करवाएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते शिकायत करने पर संबंधित एजेंसियां संदिग्ध ट्रांजैक्शन को फ्रीज करने का प्रयास कर सकती हैं। कितने समय में करनी चाहिए शिकायत? विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल फ्रॉड की शिकायत 24 से 48 घंटे के भीतर करना सबसे प्रभावी माना जाता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत यदि ग्राहक पांच दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर देता है तो उसे “Zero Liability” यानी शून्य जिम्मेदारी का लाभ मिल सकता है। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, पैसे की रिकवरी की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी। देर होने पर धोखेबाज राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे जांच और रिकवरी मुश्किल हो जाती है। RBI के नियम: कितना पैसा वापस मिलेगा? शून्य जिम्मेदारी अगर धोखाधड़ी बैंक की तकनीकी गड़बड़ी, सिस्टम फेलियर या किसी तीसरे पक्ष की गलती से हुई है और ग्राहक ने पांच दिनों के भीतर शिकायत कर दी है, तो पूरी राशि वापस मिलने की संभावना रहती है। सीमित जिम्मेदारी यदि शिकायत कुछ देरी से, आमतौर पर 4 से 7 दिनों के भीतर दर्ज की जाती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित हो सकती है। ऐसे मामलों में बैंक नियमों के अनुसार आंशिक या सीमित राहत दे सकता है। पूरी जिम्मेदारी यदि ग्राहक ने खुद OTP, PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा की हो, फर्जी लिंक पर क्लिक किया हो या शिकायत दर्ज करने में अत्यधिक देरी की हो, तो नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक पर आ सकती है और पैसा वापस मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है। अपने अकाउंट को ऐसे रखें सुरक्षित शिकायत के बाद भी समाधान न मिले तो क्या करें? यदि बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो आप बैंक के शिकायत निवारण सेल या RBI के बैंकिंग लोकपाल के पास अपील कर सकते हैं। बड़ी रकम की धोखाधड़ी होने पर पुलिस में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है, ताकि कानूनी कार्रवाई के साथ आपकी रिकवरी की संभावना मजबूत हो सके।