रतलाम- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। Ashutosh Sharma: मध्य प्रदेश के युवा क्रिकेटर आशुतोष शर्मा की संघर्षभरी कहानी आज हर किसी को प्रेरित कर रही है। एक समय था जब आशुतोष के पास खाने तक के पैसे नहीं थे और गुजारा करने के लिए उन्होंने अम्पायरिंग तक करनी पड़ी। लेकिन अपनी मेहनत और जुनून की बदौलत उन्होंने खुद को साबित किया और अब चारों तरफ उनकी तारीफ हो रही है।

क्रिकेटर बनने का सपना और मुश्किलों से भरा सफर
आशुतोष बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे। उन्होंने कई टूर्नामेंट खेले और शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें क्रिकेट में लगातार मौके नहीं मिले। उन्होंने खुलासा किया कि एक ट्रायल मैच में 45 गेंदों पर 90 रन बनाने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इस फैसले से वे डिप्रेशन में चले गए।
आशुतोष ने बताया, मैं सिर्फ जिम जाता और होटल के कमरे में जाकर सो जाता। क्रिकेट में कोई मौका न मिलने के कारण मैं बहुत निराश था।
पेट भरने के लिए की अम्पायरिंग
परिस्थितियां इतनी कठिन हो गईं कि आशुतोष के पास खाने तक के पैसे नहीं थे। मजबूरन उन्होंने गुजारा करने के लिए अम्पायरिंग करनी शुरू कर दी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने क्रिकेट करियर को बचाने के लिए मेहनत जारी रखी।
संघर्ष के बाद मिली पहचान
अपने प्रदर्शन और मेहनत के दम पर आशुतोष ने खुद को साबित किया और अब वे सुर्खियों में हैं। उनकी कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालातों में भी अपने सपनों को साकार करने का जुनून रखते हैं।