रतलाम- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। रतलाम निवासी हितेश कुमार टटावत(पिता मानक लाल टटावत, उम्र 43 वर्ष) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन के पश्चात परिजनों ने मानव सेवा की भावना से देहदान का संकल्प लिया, जो समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण बन गया।
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परिवार के सदस्य कपिल टटावत ने देहदान की प्रक्रिया के लिए काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी से सहयोग मांगा। सूचना मिलते ही तत्काल रतलाम मंडल रेल चिकित्सा अस्पताल पहुंचकर देहदान हेतु डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे मेडिकल कॉलेज से संपर्क किया गया, लेकिन वहां पूर्व से ही व्यवस्था पूर्ण होने के कारण नई चुनौती उत्पन्न हुई।

इसके पश्चात मंदसौर सुंदरलाल पटवा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शशी गांधी से संपर्क किया गया, जिन्होंने पूर्व में देहदान को लेकर अपील भी की थी। डॉ. गांधी ने प्रदेश शासन, जिला कलेक्टर एवं जिला रोगी कल्याण समिति के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक पत्र जारी किया, जिससे देहदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकी।
भाई-बहन की सराहनीय पहल
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बड़े भाई कपिल टटावत एवं बहन सोना टटावत ने अपने पिता मानक लाल टटावत और माता कस्तूरी देवी टटावतके देहदान के लिए भी अथक प्रयास कर स्वीकृति प्राप्त की थी। समाजसेवी गोविंद काकानी ने बताया कि बीते तीन महीनों में जिले से यह छठा देहदान है, जबकि इससे पूर्व पांच देहदान सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।
रतलाम, मंदसौर और नीमच के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के प्रायोगिक प्रशिक्षण के लिए मानव शरीरों की आवश्यकता होती है। ऐसे में देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश शासन द्वारा देहदान पर गार्ड ऑफ ऑनर देने की पहल से लोगों में जागरूकता और प्रोत्साहन तेजी से बढ़ा है।
सूर्यास्त से पूर्व गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए किए गए निरंतर प्रयासों से देहदान सम्मानपूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, रेलवे अस्पताल, पत्रकार बंधु एवं समाजसेवियों का सराहनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम के पश्चात रेलवे अस्पताल के डॉ. नरेश, स्टाफ, जिला प्रशासन की ओर से रोगी कल्याण समिति सदस्य गोविंद काकानी, पत्रकारगण एवं परिजनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
रतलाम जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए शव वाहन से रात्रि 8 बजे देह को सुरक्षित रूप से मंदसौर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां व्यवस्थित रूप से प्राप्त होने की पुष्टि भी हो गई।
यह देहदान न केवल चिकित्सा शिक्षा के लिए अमूल्य योगदान है, बल्कि समाज में मानवता, सेवा और जागरूकता का सशक्त संदेश भी देता है।