रतलाम- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में पत्नी की हत्या के एक सनसनीखेज मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पत्नी की हत्या के दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इस मामले की खास बात यह रही कि आरोपी की गूगल सर्च हिस्ट्री को कोर्ट ने अहम डिजिटल सबूत मानते हुए फैसला दिया।
प्रधान सत्र न्यायाधीश नीना आशापुरे की अदालत ने आरोपी राकेश पिता कैलाश चौधरी, निवासी ग्राम झरसंदला, थाना बिलपांक को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने आरोपी पर 3 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
शराब, विवाद और हत्या
जिला लोक अभियोजक सुरेश कुमार वर्मा ने बताया कि आरोपी राकेश शराब पीने का आदी था और अक्सर देर रात घर आता था। इस बात को लेकर उसकी पत्नी बुलबुल उससे विरोध करती थी। रोज-रोज के झगड़ों से परेशान होकर आरोपी ने पत्नी के साथ मारपीट की और बाद में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
गूगल पर खोजे सबूत मिटाने के तरीके
हत्या के बाद आरोपी ने अपने मोबाइल फोन पर गूगल सर्च किया—
- क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने के निशान आते हैं?
- अगर निशान आते हैं तो उन्हें मिटाने के लिए कौन-सी क्रीम सबसे अच्छी है?
- पोस्टमार्टम में गला फाड़ा जाता है या नहीं?
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के मोबाइल की सर्च हिस्ट्री निकाली, जिससे यह साफ हुआ कि वह हत्या के बाद सबूत छिपाने के प्रयास कर रहा था।
चश्मदीद नहीं, डिजिटल सबूत बना आधार
बिलपांक थाना प्रभारी अयूब खान ने बताया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। हालांकि, सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। साथ ही यह भी साबित हुआ कि घटना से पहले मृतका को आखिरी बार आरोपी के साथ ही जीवित देखा गया था।
परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर भरोसा
कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, मोबाइल सर्च हिस्ट्री और डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट को मजबूत आधार मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला लोक अभियोजक सुरेश कुमार वर्मा ने मामले में प्रभावी पैरवी की।
यह फैसला न सिर्फ रतलाम बल्कि पूरे प्रदेश में यह संदेश देता है कि डिजिटल सबूत और सर्च हिस्ट्री भी अब अपराध में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, और कानून से बचना आसान नहीं है।