MP News: कोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप! दो TI समेत 100 पुलिसकर्मियों पर FIR, 30 मिनट की कार्रवाई पर उठे सवाल

MP News: राजस्थान की चौमहला कोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश पुलिस के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज हुई है। 30 मिनट में की गई मादक पदार्थ जब्ती कार्रवाई को कोर्ट ने संदिग्ध माना।

मध्यप्रदेश- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश पुलिस पर बड़ी कार्रवाई हुई है। राजस्थान के झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट के आदेश के बाद एमपी पुलिस के दो थाना प्रभारियों (TI) समेत करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला जनवरी 2026 में राजस्थान के डग थाना क्षेत्र में की गई मादक पदार्थों की जब्ती कार्रवाई से जुड़ा है, जिसे कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, 28 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश के आगर मालवा की कोतवाली पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की थी। पुलिस ने दावा किया था कि कार्रवाई के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य का मादक पदार्थ (एमडी), स्मैक, कैटामाइन, नशीले इंजेक्शन, केमिकल ड्रम और हथियार बरामद किए गए।

हालांकि आरोप है कि इस कार्रवाई की पूरी जानकारी स्थानीय डग पुलिस को नहीं दी गई। केवल फोन पर महिलाओं द्वारा अभद्रता किए जाने की सूचना दी गई, लेकिन छापेमारी की सही जगह और सहायता की आवश्यकता के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की गई।

कोर्ट ने क्यों माना कार्रवाई को संदिग्ध?

गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चौमहला कोर्ट में परिवाद दायर कर आरोप लगाया कि एमपी पुलिस ने बिना स्थानीय पुलिस को सूचना दिए गांव में प्रवेश किया, घरों में तोड़फोड़ की और उनके परिवार को झूठे मामले में फंसा दिया।

जांच अधिकारी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार:

30 मिनट में पूरी कार्रवाई पर सवाल

  • पुलिस द्वारा जब्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले।
  • वीडियोग्राफी किए जाने का दावा भी जांच में संदिग्ध पाया गया।
  • सीसीटीवी फुटेज में पुलिस वाहन गांव में केवल 30 मिनट तक ही दिखाई दिए।
  • विशेषज्ञों के अनुसार एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी, जब्ती, पंचनामा और गिरफ्तारी जैसी कानूनी प्रक्रियाएं इतने कम समय में पूरी करना बेहद मुश्किल है।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने कार्रवाई को संदिग्ध मानते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।

किन पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हुआ मामला?

कोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, सहायक उप निरीक्षक अजय जाट, पुलिसकर्मी राहुल विश्वकर्मा, शुभम सहित पूरी टीम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

10 लाख रुपये मांगने का भी आरोप

परिवादी हमीद खान ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की थी। रुपये देने में असमर्थता जताने पर उनके परिवार के दो सदस्यों शाहिर खान और मनोवर खान को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मादक पदार्थों का मामला दर्ज कर दिया गया।

पीड़ित परिवार का दावा है कि उनके घरों की तलाशी में केवल एक लाइसेंसशुदा बंदूक, एक एयर गन और सात मोबाइल फोन मिले थे। किसी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था।

अब आगे क्या?

राजस्थान में दर्ज हुई यह एफआईआर मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। दोनों राज्यों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला पुलिस कार्रवाई और एनडीपीएस मामलों की जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।