डिजिटल डेस्क- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल सप्लाई लाइन होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है।
कच्चा तेल 110 डॉलर पार जाने का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। पिछले कुछ हफ्तों में ही तेल कीमतों में तेजी देखी जा चुकी है, जो आने वाले दिनों में बड़े आर्थिक संकट का संकेत है।
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर बदलाव का असर देश पर पड़ता है। हालांकि फिलहाल राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियां छोटे उतार-चढ़ाव का सीधा बोझ आम जनता पर नहीं डालतीं।
लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो:
- पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं
- रुपया कमजोर हो सकता है
- महंगाई दर पर असर पड़ सकता है
यानी सीधे तौर पर आपकी जेब पर असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी।
भारत का मास्टर प्लान: सप्लाई नहीं होगी बंद
इस संभावित संकट से निपटने के लिए भारत ने पहले से ही बैकअप प्लान तैयार कर लिया है:
1. वैकल्पिक समुद्री रास्ते:
भारतीय तेल कंपनियां अब सऊदी अरब और यूएई के उन बंदरगाहों का उपयोग करेंगी जो युद्ध प्रभावित क्षेत्र से दूर हैं।
2. नए देशों से तेल खरीद:
भारत अब खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी कच्चा तेल खरीदने की रणनीति पर काम कर रहा है।
3. रिफाइनरी की कंटिंजेंसी योजना:
देश की रिफाइनरी कंपनियों ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष इमरजेंसी प्लान तैयार किया है, ताकि किसी भी हालत में पेट्रोल-डीजल की कमी न हो।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो:
- आयात बिल बढ़ेगा
- चालू खाता घाटा बढ़ सकता है
- महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ेगा
हालांकि सरकार और तेल कंपनियों की तैयारियों को देखते हुए फिलहाल तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है।