Ratlam News: बच्चा चोर की अफवाह में ग्रामीणों का हमला, मंदिर से लौट रहे युवकों की पिटाई

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रतलाम- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: बिलपांक थाना क्षेत्र के सिमलावदा के पास बुधवार दोपहर बच्चा चोर की आशंका में ग्रामीणों ने कार सवार छह युवकों को घेरकर बेरहमी से पीट दिया। घटना इंदौर फोरलेन स्थित झालरापाड़ा गांव के पास की है। सभी युवक इंदौर के घाटाबिल्लौद क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं और राजस्थान के प्रसिद्ध सांवलियाजी मंदिर में दर्शन कर लौट रहे थे।

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कैसे फैली अफवाह और हुआ हमला

जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे युवकों की कार ढाबे पर रुकी। इसी दौरान आसपास से गुजर रहे बच्चों को देखकर कुछ ग्रामीणों को संदेह हुआ और देखते ही देखते बच्चा चोर गिरोह की अफवाह फैल गई। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और कार सवारों को घेर लिया। भीड़ में शामिल महिलाओं समेत कई लोगों ने लात-घूंसे और डंडों से युवकों की पिटाई शुरू कर दी। आक्रोशित ग्रामीणों ने कार के शीशे और कांच भी तोड़ दिए।

कार में मिले ‘मनोरंजन वाले’ नोट

घटना के दौरान कार की डिक्की से 10 और 20 रुपये के मनोरंजन के लिए बनाए गए नकली नोट भी मिले, जिससे ग्रामीणों का शक और गहरा गया। हालांकि पुलिस ने इन नोटों को लेकर किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

चार युवक छुड़ाए गए, दो मौके से भागे

मारपीट के दौरान कार में सवार छह में से दो युवक मौके से भाग निकले, जबकि चार को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। सूचना मिलते ही सातरुंडा चौकी प्रभारी लोकेन्द्रसिंह डावर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और चारों युवकों को भीड़ से छुड़ाकर बिलपांक थाने ले गए, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।

युवकों का दावा—दर्शन कर लौट रहे थे

युवकों ने पुलिस को बताया कि वे सुबह रतलाम के चिकलिया टोल नाके से गुजरने की रसीद भी दिखा चुके हैं और ढाबे पर भोजन व टॉयलेट के लिए रुके थे। इसी दौरान उन्हें बच्चा चोर समझ लिया गया।

पुलिस जांच जारी, कोई शिकायत नहीं

पुलिस के अनुसार, अब तक बच्चा चोरी की कोई आधिकारिक शिकायत सामने नहीं आई है। युवकों के बताए पते और पहचान की पुष्टि की जा रही है।

वायरल रीलों से बढ़ रहा डर और भ्रम

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर बच्चा चोर गिरोह से जुड़े कई वीडियो बिना पुष्टि के वायरल हो रहे हैं। इन्हीं अफवाहों के कारण लोग डर और भ्रम में आकर किसी भी अनजान व्यक्ति को संदिग्ध मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अफवाहों के आधार पर कानून हाथ में लेना न सिर्फ निर्दोष लोगों के लिए खतरनाक है, बल्कि यह स्वयं एक अपराध भी है।

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