नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। Rupee Crash 2025: भारतीय मुद्रा रुपया 2025 में लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ते हुए बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.14 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। मार्केट ओपन होने के साथ ही रुपया 89.97 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 90 के स्तर के नीचे लुढ़क गया। यह अब तक का सबसे खराब स्तर है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों गिर रहा है रुपया?
मार्केट डीलरों के अनुसार, रुपये की तेज गिरावट के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं—
India-US ट्रेड डील में देरी
दोनों देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट लटकने से विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है।
इंपोर्टर्स की भारी डॉलर खरीद
बैंकिंग सेक्टर से लगातार डॉलर खरीदने की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
घरेलू और विदेशी बाजारों में बिकवाली
ग्लोबल अनिश्चितताओं और घरेलू मार्केट में कमजोरी के चलते रुपये को सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है।
RBI की सीमित दखलअंदाजी
डीलरों का अनुमान है कि RBI ने थोड़ी मात्रा में डॉलर बेचे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर इंटरवेंशन नहीं दिखा है। रुपये के लिए फिलहाल 90.20 का टेक्निकल सपोर्ट माना जा रहा है।
रुपया गिरने से आम जनता को क्या नुकसान?
रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना हर आम नागरिक की जेब पर सीधा असर डालता है।
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा
भारत अपना 80% कच्चा तेल आयात करता है।
रुपया गिरते ही—
- तेल खरीदने पर ज़्यादा डॉलर खर्च
- सरकार पर आयात बिल बढ़ने का दबाव
- पेट्रोल-डीजल महंगे होने की संभावना
और पेट्रोल-डीजल बढ़ते ही ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स चार्ज बढ़ जाते हैं, जिससे लगभग हर चीज़ महंगी हो जाती है।
इंपोर्टेड सामान होगा महंगा
- मोबाइल फ़ोन
- लैपटॉप
- कार के पार्ट्स
- मेडिकल इक्विपमेंट
- गोल्ड
इन सभी का आयात महंगा हो जाएगा।
महंगाई (Inflation) और बढ़ेगी
रुपया टूटने का मतलब है—
ज़्यादा इंपोर्ट कॉस्ट
महंगा कच्चा माल
महंगी मैन्युफैक्चरिंग
महंगी मार्केट कीमतें
इससे WPI और CPI दोनों में उछाल दिख सकता है।
पढ़ाई और विदेश यात्रा महंगी
विदेश जाने वाले छात्रों और यात्रियों का खर्च सीधे बढ़ जाएगा।
- ट्यूशन फीस महंगी
- हॉस्टल/रेंट महंगा
- टिकट और होटल महंगे
क्योंकि सभी भुगतान डॉलर में ही होते हैं।
कंपनियों का प्रॉफिट घटेगा
कई भारतीय कंपनियां विदेशी कच्चे माल पर निर्भर हैं।
रुपया कमजोर होते ही कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे—
- प्रॉफिट कम
- निवेशक भावना कमजोर
- शेयर बाजार पर दबाव
2025 रुपये के लिए इतना खराब क्यों रहा?
यही साल अब तक रुपये के लिए सबसे बुरा साबित हो रहा है।
US Dollar के मुकाबले भारतीय मुद्रा 5% तक कमजोर हो चुकी है।
कारण—
- ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल
- मजबूत होता अमेरिकी डॉलर
- विदेशी निवेशक का पैसा निकालना
- घरेलू आर्थिक चुनौतियाँ
रुपया आगे और कितना टूट सकता है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है—
“अब डॉलर के मुकाबले रुपया 90 के ऊपर बना रहा तो जल्द ही 91–92 का स्तर भी संभव है।”
हालांकि RBI कब और कितनी बड़ी दखल देगा, यह आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेगा।