CIBIL Score 730 से कम? RBI के नए ECL नियम के बाद होम, कार और एजुकेशन लोन लेना हो सकता है बेहद मुश्किल

RBI का नया Expected Credit Loss (ECL) Framework 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। जानिए क्यों CIBIL Score 730 से कम होने पर होम लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,

RBI का नया ECL Framework: CIBIL Score 730 से कम होने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अगर आपका CIBIL Score 730 से कम है और आप भविष्य में होम लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 1 अप्रैल 2027 से नया Expected Credit Loss (ECL) Framework लागू करने जा रहा है, जिसके बाद बैंकों द्वारा लोन देने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सकती है।

क्या है RBI का Expected Credit Loss (ECL) Framework?

वर्तमान व्यवस्था में बैंक तब तक किसी लोन को जोखिमपूर्ण नहीं मानते, जब तक वह लंबे समय तक बकाया रहकर NPA (Non-Performing Asset) नहीं बन जाता। लेकिन ECL Framework के तहत बैंक को लोन देने से पहले ही संभावित नुकसान का आकलन करना होगा।

इसका मतलब है कि बैंक ग्राहक के वित्तीय व्यवहार, भुगतान इतिहास, CIBIL Score, आय, रोजगार की स्थिरता और भविष्य में डिफॉल्ट की संभावना जैसे कई कारकों का गहन मूल्यांकन करेंगे।

730 से कम CIBIL Score वालों पर क्या होगा असर?

रिपोर्ट्स के अनुसार देश के लगभग 62 प्रतिशत लोगों का CIBIL Score 730 से नीचे है। ऐसे ग्राहकों को ECL लागू होने के बाद लोन प्राप्त करने में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

बैंकों को जोखिम वाले ग्राहकों के लिए ज्यादा पूंजी अलग रखनी होगी। यदि कोई ग्राहक लगातार दो EMI चूकता है, तो बैंक को उसके लिए पहले की तुलना में कई गुना अधिक प्रावधान रखना पड़ सकता है। ऐसे में बैंक कम क्रेडिट स्कोर वाले आवेदकों को लोन देने से बच सकते हैं।

महंगा हो सकता है लोन

विशेषज्ञों का मानना है कि कम CIBIL Score वाले ग्राहकों को भविष्य में तीन स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है:

1. लोन रिजेक्ट होने की संभावना बढ़ेगी

कम स्कोर वाले आवेदकों के आवेदन सीधे खारिज किए जा सकते हैं।

2. ब्याज दर ज्यादा हो सकती है

यदि लोन स्वीकृत होता भी है तो बैंक अधिक जोखिम के कारण ऊंची ब्याज दर वसूल सकते हैं।

3. अतिरिक्त गारंटी की मांग

कुछ मामलों में बैंक अतिरिक्त सिक्योरिटी या गारंटर की मांग भी कर सकते हैं।

बैंकों पर भी पड़ेगा असर

बैंकिंग सेक्टर की रिपोर्ट्स के मुताबिक ECL Framework लागू होने के बाद बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। अनुमान है कि इस बदलाव से बैंकिंग उद्योग का लाभ लगभग 42,000 करोड़ रुपये तक प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि बैंक जोखिम वाले ग्राहकों को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना सकते हैं।

क्या करें ग्राहक?

यदि आप आने वाले वर्षों में किसी भी प्रकार का बड़ा लोन लेना चाहते हैं, तो अभी से अपना CIBIL Score सुधारने पर ध्यान दें। समय पर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान, कम क्रेडिट उपयोग और पुराने लोन का नियमित भुगतान आपके स्कोर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।