Ratlam News: रतलाम में बिना अनुमति प्रदर्शन और चक्काजाम के मामले में सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार समेत 4 लोगों पर FIR दर्ज हुई है। विधायक ने इसे बीजेपी के दबाव में की गई कार्रवाई बताया।
रतलाम- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार एक बार फिर चर्चा में हैं। खाद, बीज, बिजली और ग्रामीण समस्याओं को लेकर किए गए प्रदर्शन के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि बिना अनुमति प्रदर्शन कर सड़क जाम करने और प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन करने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार पर FIR क्यों दर्ज हुई?

जानकारी के अनुसार, बुधवार को विधायक कमलेश्वर डोडियार ने भारत आदिवासी पार्टी के बैनर तले 47 सूत्रीय मांगों को लेकर रतलाम कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान हजारों समर्थकों के साथ उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने फोरलेन रोड से पैदल मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट पहुंचने का प्रयास किया। प्रशासन और पुलिस ने कई स्थानों पर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन समर्थकों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया।
कलेक्ट्रेट के बाहर हुआ चक्काजाम
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मुख्य गेट बंद कर दिया। इसके विरोध में विधायक और उनके समर्थक सिटी फोरलेन रोड पर बैठ गए। करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन चलता रहा, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और सड़क पर जाम की स्थिति बन गई।
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न नेताओं ने सभा को संबोधित किया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। बाद में एडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।
किन लोगों पर दर्ज हुआ केस?
स्टेशन रोड थाना पुलिस ने राजस्व निरीक्षक तरुण रघुवंशी की रिपोर्ट पर विधायक कमलेश्वर डोडियार समेत चार प्रमुख लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा, जिला पंचायत सदस्य शरद डोडियार और भील विद्यार्थी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश माल शामिल हैं।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 (ए) के तहत कार्रवाई की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण आमजन को परेशानी हुई, सड़क जाम रही और प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन किया गया।
विधायक कमलेश्वर डोडियार का पलटवार
एफआईआर दर्ज होने के बाद विधायक कमलेश्वर डोडियार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बीजेपी के दबाव में की गई है।
विधायक ने कहा, “हम किसानों, आदिवासियों और ग्रामीणों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन और अदालत तक लड़ते रहेंगे। यह झूठा मामला है और इसे निरस्त करवाया जाएगा।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी की बढ़ती राजनीतिक ताकत से घबराकर उन्हें कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
पहले भी जारी हुआ था प्रतिबंधात्मक आदेश
गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने 25 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर बिना अनुमति धरना-प्रदर्शन, रैली, चक्काजाम और सार्वजनिक मार्गों पर बैठने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई थी। प्रशासन का कहना है कि विधायक और उनके समर्थकों ने इसी आदेश का उल्लंघन किया।
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