इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत का बड़ा फैसला। मुख्य आरोपी आयूष खोवारे को 1 साल के सश्रम कारावास की सजा, जबकि दो सह-आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया गया। जानिए पूरा मामला।
इंदौर- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। MP News: इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी आयूष खोवारे को दोषी करार दिया है। षष्टम अपर सत्र न्यायाधीश अयाज मोहम्मद की अदालत ने आरोपी को खतरनाक हथियार से हमला करने के मामले में एक वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118(1) और 126(2) के तहत आयूष खोवारे को दोषी मानते हुए एक वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 118(1) के तहत 2,000 रुपये और धारा 126(2) के तहत 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सह-आरोपी सुमित चौहान और देवेन्द्र उर्फ सागर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए। इस कारण दोनों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन के अनुसार, 18 अक्टूबर 2024 की रात करीब 11 बजे फरियादी आयूष पटेल अपने साथी सुमित चौहान के साथ दुकान बंद कर स्कूटी से घर लौट रहा था। इसी दौरान राऊ थाना क्षेत्र स्थित छोगाला रेस्टोरेंट के पास पुरानी रंजिश के चलते मोटरसाइकिल पर आए आयूष खोवारे और देवेन्द्र उर्फ सागर ने उसका रास्ता रोक लिया।
आरोप था कि देवेन्द्र ने फरियादी की आंखों में मिर्च पाउडर डाला, जबकि आयूष खोवारे ने चाकू से उसकी पीठ पर हमला कर उसे घायल कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
हत्या के प्रयास का आरोप क्यों नहीं हुआ साबित?
सुनवाई के दौरान अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि पीड़ित को लगी चोट शरीर के किसी संवेदनशील या जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले अंग पर नहीं थी। इसलिए हत्या के प्रयास का आरोप सिद्ध नहीं हो सका।
हालांकि, फरियादी के लगातार एक जैसे बयान और एफएसएल रिपोर्ट में जब्त चाकू पर मानव रक्त मिलने की पुष्टि ने यह साबित कर दिया कि आयूष खोवारे ने खतरनाक हथियार से हमला किया था। इसी आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराया।
दो सह-आरोपी क्यों हुए बरी?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फरियादी ने सुमित चौहान के खिलाफ कोई ठोस आरोप सिद्ध नहीं किया। वहीं, देवेन्द्र उर्फ सागर द्वारा आंखों में मिर्च पाउडर डालने के आरोप को मेडिकल साक्ष्यों से समर्थन नहीं मिला। चिकित्सकीय परीक्षण में आंखों में लालिमा, सूजन या जलन के कोई स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए। इसी वजह से दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
अदालत का अंतिम आदेश
न्यायालय ने आदेश दिया कि विचारण के दौरान आयूष खोवारे द्वारा जेल में बिताई गई एक वर्ष आठ माह की अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। साथ ही, वसूल किया गया अर्थदंड पीड़ित को प्रतिकर (मुआवजा) के रूप में प्रदान किया जाएगा।
इस फैसले के साथ बहुचर्चित इंदौर चाकूबाजी केस में अदालत ने मुख्य आरोपी को सजा सुनाते हुए कानूनी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया, जबकि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दो अन्य आरोपियों को राहत प्रदान की।
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