BREAKING भाई-बहन की पहाड़ी पर शुरू हुआ त्रिवेणी वन अभियान, वट-पीपल-नीम की त्रिवेणी रोपी

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रतलाम- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। हरियाली अमावस्या के अवसर पर रतलाम में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई पहल शुरू की गई। शिवगढ़ रोड स्थित भाई-बहन की पहाड़ी पर त्रिवेणी वन रोपण अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता तथा शिवगंगा अभियान, झाबुआ के संस्थापक महेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और समाजजनों की मौजूदगी में मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन के साथ पहली त्रिवेणी रोपी गई। इसमें वट, पीपल और नीम के पौधे शामिल रहे। अभियान के आयोजकों ने इसे केवल पौधारोपण तक सीमित न रखते हुए लंबे समय तक पौधों के संरक्षण और देखभाल से जोड़ने का संकल्प लिया।

एक त्रिवेणी से त्रिवेणी वनम्की संकल्पना

बिरसा मुंडा सामाजिक सेवा समिति की ओर से आयोजित इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को त्रिवेणी रोपण से जोड़ना है। अभियान की संकल्पना ‘एक त्रिवेणी से त्रिवेणी वनम्’ के रूप में रखी गई है।

इसके तहत परिवारों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों को अपने शुभ अवसरों पर त्रिवेणी लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि सामूहिक स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास भविष्य में बड़े हरित क्षेत्र के निर्माण में मदद कर सकते हैं।

भारत माता पूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता पूजन के साथ हुई। मंच पर निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, अखंड ज्ञान आश्रम के संत स्वामी देवस्वरूपानंद महाराज, पद्मश्री महेश शर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक तेजराम मांगरोदा, राजू महाराज और समिति के अशोक पाटीदार सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।

अतिथियों का स्वागत समिति से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने किया। सोनाक्षी चावड़ा ने सामूहिक वंदे मातरम् का गायन किया।

महेश शर्मा बोले- प्रकृति से अलग नहीं है मनुष्य

मुख्य अतिथि पद्मश्री महेश शर्मा ने कहा कि मनुष्य प्रकृति से अलग नहीं है, बल्कि उसका अभिन्न हिस्सा है। प्रकृति का संरक्षण मानव जीवन के संरक्षण से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल व्यक्तिगत प्रयास न रखकर सामूहिक जनआंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए।

महेश शर्मा ने लोगों से आह्वान किया कि वे केवल एक बार पौधा लगाने तक सीमित न रहें। अपने जीवन के शुभ अवसरों को वृक्षारोपण से जोड़कर लगातार त्रिवेणी रोपित करने की दिशा में आगे बढ़ें।

संतों ने बताया त्रिवेणी का आध्यात्मिक महत्व

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज ने त्रिवेणी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि त्रिवेणी वन के निर्माण का संकल्प है।

स्वामी देवस्वरूपानंद महाराज सहित उपस्थित संतों ने अपने आशीर्वचन दिए। संतों ने त्रिवेणी वनम् को हरित और प्रेरणादायी स्थल के रूप में विकसित करने के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

अभियान की आगामी कार्ययोजना बताई

कार्यक्रम के दौरान बिरसा मुंडा सामाजिक सेवा समिति के अशोक पाटीदार ने ‘त्रिवेणी वनम्’ अभियान की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने अभियान से अधिक से अधिक परिवारों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को जोड़ने के लक्ष्य की जानकारी दी।

अभियान में पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। यानी त्रिवेणी लगाने के बाद उसकी नियमित देखरेख पर भी ध्यान दिया जाएगा।

वट, पीपल और नीम की त्रिवेणी रोपी

हरियाली अमावस्या के अवसर पर आयोजित इस पहल में वट, पीपल और नीम का सामूहिक रोपण किया गया। आयोजकों के अनुसार त्रिवेणी का उद्देश्य हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ छाया, जैव विविधता और पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में काम करना है।

कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों और समाजजनों ने भी त्रिवेणी रोपण में सहभागिता की।

इस अवसर पर हार्टफुलनेस संस्था के जोनल को-ऑर्डिनेटर संजय खंडेलवाल ने संस्था की गतिविधियों तथा प्रकृति और समाज के प्रति उसके दृष्टिकोण की जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में प्रीतेश गादिया ने आभार व्यक्त किया।

रतलाम में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामूहिक पहल

भाई-बहन की पहाड़ी पर शुरू हुआ त्रिवेणी वन अभियान रतलाम में पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक सहभागिता से जोड़ने की कोशिश है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लगाए गए पौधों की देखभाल कितनी निरंतरता से की जाती है और कितने परिवार व संस्थाएं इससे जुड़ती हैं।

‘एक त्रिवेणी से त्रिवेणी वनम्’ की सोच के साथ शुरू हुई यह पहल भविष्य में बड़े हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होती है तो इसका लाभ पर्यावरण के साथ स्थानीय लोगों और जैव विविधता को भी मिल सकता है।

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