MP 1 अगस्त 2026 से भोपाल मंडल के सभी आरक्षण केंद्रों पर तत्काल टिकट के लिए नई टोकन व्यवस्था लागू होगी। जानिए एसी, नॉन-एसी टोकन समय और नए नियम।
भोपाल- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। MP मध्य प्रदेश के लाखों रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। पश्चिम मध्य रेलवे ने भोपाल मंडल के सभी आरक्षण केंद्रों पर तत्काल टिकट बुकिंग को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई टोकन व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से प्रभावी होगी।
नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा उन यात्रियों को मिलेगा जो अपने लिए या अपने परिवार के सदस्यों के लिए तत्काल टिकट बनवाने आरक्षण केंद्र पहुंचेंगे। ऐसे यात्रियों को सबसे पहले मौका दिया जाएगा, जबकि अन्य प्रतिनिधियों को बाद में टिकट बुकिंग की सुविधा मिलेगी। रेलवे का उद्देश्य दलालों की गतिविधियों पर रोक लगाना और आम यात्रियों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना है।

यात्रियों को अब निर्धारित समय पर टोकन लेना होगा और उसी क्रम के अनुसार टिकट बुकिंग की जाएगी। इससे काउंटरों पर भीड़ कम होने और प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित रहने की उम्मीद है।
1 अगस्त से लागू होगी नई टोकन व्यवस्था
पश्चिम मध्य रेलवे के अनुसार भोपाल मंडल के सभी आरक्षण केंद्रों पर तत्काल टिकट के लिए टोकन प्रणाली शुरू की जा रही है। हर टोकन पर संबंधित काउंटर नंबर दर्ज रहेगा और उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से टिकट बुकिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और एक व्यक्ति द्वारा कई बार टोकन लेकर दलाली करने की संभावना काफी हद तक कम होगी।
एसी और नॉन-एसी तत्काल टिकट के लिए अलग समय
नई व्यवस्था के तहत एसी और नॉन-एसी तत्काल टिकटों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।
एसी तत्काल टिकट
- टोकन वितरण: सुबह 8:30 बजे से 9:00 बजे तक
- प्रति काउंटर अधिकतम 10 टोकन
नॉन-एसी तत्काल टिकट
- टोकन वितरण: सुबह 9:00 बजे से 9:30 बजे तक
- प्रति काउंटर अधिकतम 15 टोकन
जरूरत पड़ने पर रेलवे इन टोकनों की संख्या में बदलाव भी कर सकेगा।
‘ए’ और ‘बी’ श्रेणी में बांटे जाएंगे टोकन
रेलवे ने टोकन को दो अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है।
‘ए’ श्रेणी
इस श्रेणी में वे यात्री शामिल होंगे जो—
- स्वयं के लिए टिकट बनवा रहे हों।
- माता-पिता के लिए।
- दादा-दादी के लिए।
- पति या पत्नी के लिए।
- भाई-बहन के लिए।
- बच्चों के लिए।
इन यात्रियों को स्वप्रमाणित आधार कार्ड या अन्य मान्य पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवश्यकता होने पर पारिवारिक संबंध का प्रमाण भी देना पड़ सकता है।
‘बी’ श्रेणी
इस श्रेणी में वे प्रतिनिधि शामिल होंगे जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से टिकट बनवाएंगे।
उन्हें अपने साथ-साथ संबंधित यात्री का भी स्वप्रमाणित पहचान पत्र जमा करना होगा।
पहले परिवार, फिर अन्य प्रतिनिधियों को मिलेगा मौका
नई व्यवस्था के अनुसार पहले ‘ए’ श्रेणी के सभी टोकनधारकों का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद ‘बी’ श्रेणी के प्रतिनिधियों को टिकट बुकिंग की अनुमति मिलेगी।
रेलवे का मानना है कि इससे वास्तविक यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और तत्काल टिकट पाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक निष्पक्ष होगी।
दलालों पर लगेगी प्रभावी रोक
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि टोकन पूरी तरह हस्तांतरणीय (Non-Transferable) नहीं होंगे। यानी एक व्यक्ति अपना टोकन किसी दूसरे को नहीं दे सकेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य—
- दलालों की भूमिका कम करना।
- टिकट बुकिंग में पारदर्शिता बढ़ाना।
- वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देना।
- काउंटरों पर व्यवस्था बनाए रखना है।
रेलवे की पहल से आम यात्रियों को मिलेगा फायदा
पश्चिम मध्य रेलवे का कहना है कि नई टोकन व्यवस्था का मकसद वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देना और तत्काल टिकट प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य स्थानों पर भी इस तरह की प्रणाली अपनाई जा सकती है।
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