Kisan Andolan News: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे किसानों ने फिलहाल मार्च रोक दिया है। सरकार ने शिवराज सिंह चौहान के साथ 8–10 दिनों में बैठक कराने का भरोसा दिया।
नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। Kisan Andolan News: भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में मंगलवार को पंजाब से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की ओर रवाना हुए। हालांकि शंभू, खनौरी और कुंडली बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत से आंदोलन में नया मोड़ आ गया।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि हरियाणा के कृषि मंत्री ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार कर लिया है। साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक कराने का भरोसा भी दिया गया है। इस आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल अपना दिल्ली मार्च रोकने का फैसला किया है।

आंदोलन की अगली रणनीति अब प्रस्तावित बैठक और किसान नेताओं की रिहाई के बाद तय की जाएगी। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार के अगले कदम पर उनकी आगे की रणनीति निर्भर करेगी।
सरकार ने क्या भरोसा दिया?
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसान यूनियनों द्वारा सौंपा गया मांग पत्र सरकार को मिल गया है। इसे संबंधित अधिकारियों के पास विचार के लिए भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर किसानों और केंद्र सरकार के बीच बैठक कराने का प्रयास करेगी। बैठक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत प्रतिनिधि के साथ कराई जा सकती है।
सरवन सिंह पंधेर ने क्या कहा?
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के अनुसार,
- हरियाणा सरकार ने किसानों का ज्ञापन स्वीकार कर लिया है।
- 8 से 10 दिनों के भीतर केंद्रीय कृषि मंत्री से बैठक होने की उम्मीद है।
- मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी और बीएम सिंह की रिहाई पर भी सहमति बनी है।
- नेताओं की रिहाई के बाद किसान आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।
किसान क्यों कर रहे हैं आंदोलन?
किसानों का कहना है कि उनके आंदोलन का मुख्य कारण भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील है।
उनका आरोप है कि यदि यह समझौता लागू होता है तो भारतीय कृषि क्षेत्र पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों की प्रमुख चिंताएं हैं—
- सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आ सकते हैं।
- विदेशी बीज और कृषि उत्पादों से घरेलू किसानों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- छोटे किसानों और कृषि मजदूरों की आय प्रभावित हो सकती है।
- छोटे व्यापारियों के कारोबार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
आगे क्या होगा?
सरकार ने किसानों के मांग पत्र पर विचार करने और जल्द बैठक कराने का आश्वासन दिया है। दूसरी ओर किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो आगे का निर्णय उसी आधार पर लिया जाएगा। फिलहाल दिल्ली मार्च स्थगित कर दिया गया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
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