उज्जैन- पब्लिक। वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। MP News: सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, साहस और लोककल्याणकारी छवि आज भी समाज में प्रासंगिक बनी हुई है। विक्रमोत्सव 2025 के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में रतलाम के शास्त्री नगर निवासी एडवोकेट एवं पूर्व उप संचालक अभियोजन कैलाश व्यास ने कहा कि विक्रमादित्य का कार्यकाल ईसा की पहली शताब्दी का माना जाता है, फिर भी लगभग 2100 वर्षों बाद भी वे लोकमानस में न्यायप्रिय सम्राट और संरक्षक के रूप में स्थापित हैं।


व्यास ने बताया कि सम्राट विक्रमादित्य को अपने पूज्य भ्राता भृतहरि से राज्य की विरासत के साथ-साथ उच्च आदर्श भी मिले थे। भृतहरि ने कहा था कि न्यायविद एवं विद्वान की प्रशंसा हो या निंदा, वह सौ वर्ष जिए या तत्काल मृत्यु को प्राप्त हो, लेकिन उसे न्याय के मार्ग से कभी विचलित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान न्याय व्यवस्था में दंड का सुधारात्मक सिद्धांत, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, महिलाओं एवं बच्चों के विशेष संरक्षण की अवधारणा उसी न्याय प्रणाली से प्रेरित प्रतीत होती है।

विक्रमोत्सव में न्यायविदों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व जिला न्यायाधीश आर. एस. चुण्डावत ने विक्रमादित्य कालीन साहित्य और न्याय व्यवस्था पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पूर्व जिला जज एस. सी. पाल, पूर्व जिला जज जे. सी. सुनहरे सहित कई विधि शोधार्थी और अभिभाषक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विक्रमोत्सव आयोजन समिति की ओर से कैलाश व्यास का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में विनोद शर्मा, दिनेश पंडिया, रवींद्रसिंह कुशवाह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं समापन जिला विधिक सेवा अधिकारी चंद्रेश मंडलोई द्वारा आभार प्रकट करने के साथ हुआ।
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