Paper Leak Law 2026: पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नया संशोधन बिल पेश किया है। इसमें 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, STF और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव शामिल है।
नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। Paper Leak Law 2026: देशभर में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने कानून को और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 संसद में पेश किया है।
इस संशोधन का मकसद केवल पेपर लीक करने वालों को कड़ी सजा देना ही नहीं, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करना है। प्रस्तावित बदलावों में जेल की अवधि बढ़ाने, भारी आर्थिक दंड लगाने और जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

हालांकि, संसद के दोनों सदनों में जारी हंगामे के कारण इस विधेयक पर अभी विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी है। यदि यह संशोधन पारित होता है तो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जाएगा।
क्या है Paper Leak Law 2026?
केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्तावित किया है। नए बिल का उद्देश्य संगठित पेपर लीक नेटवर्क, परीक्षा माफिया और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय करना है।
सरकार का मानना है कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाना भी जरूरी है।
व्यक्तिगत नकल पर बढ़ेगी सजा
2024 के कानून में व्यक्तिगत स्तर पर नकल या अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल तक की जेल और अधिकतम ₹10 लाख जुर्माने का प्रावधान था।
प्रस्तावित बदलाव
- अधिकतम 10 साल तक की जेल
- अधिकतम ₹50 लाख तक जुर्माना
इसका उद्देश्य परीक्षा में धोखाधड़ी को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखना है।
पेपर लीक गिरोहों पर होगी सख्त कार्रवाई
संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ भी सरकार ने सजा और आर्थिक दंड बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
नए बिल में प्रस्ताव
- कम से कम 7 साल की जेल
- कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना
पहले ऐसे मामलों में न्यूनतम 5 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था।
परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की भी तय होगी जवाबदेही
संशोधन बिल में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं के लिए भी कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं।
यदि कोई एजेंसी लापरवाही या मिलीभगत की दोषी पाई जाती है तो उस पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है।
STF करेगी जांच, दो महीने में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
नए बिल में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रस्ताव है।
साथ ही जांच को लंबा खिंचने से रोकने के लिए दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर
संशोधन बिल में परीक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे मामलों की पैरवी के लिए एक या अधिक स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी शामिल है, ताकि अभियोजन प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।
अपील की व्यवस्था भी होगी समयबद्ध
प्रस्तावित बिल के अनुसार—
- फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी।
- उचित कारण होने पर अधिकतम 90 दिन तक की देरी स्वीकार की जा सकेगी।
- अपील की सुनवाई हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ करेगी।
- अपील स्वीकार होने के बाद तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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