Ratlam News: रतलाम में हाईवे ट्रकों को निशाना बनाने वाला गिरोह गिरफ्तार, लहसुन-सरसों समेत 8.59 लाख का माल जब्त

Ratlam News: रतलाम के नामली थाना क्षेत्र में हाईवे ट्रकों को निशाना बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया। 4 आरोपी गिरफ्तार, लहसुन-सरसों समेत 8.59 लाख का मश्रुका जब्त। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले में महू-नीमच हाईवे पर ट्रकों से कृषि उपज चोरी करने वाले गिरोह का नामली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह से जुड़े सात अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। आरोपियों पर हाईवे से गुजरने वाले ट्रकों की तिरपाल काटकर लहसुन और सरसों की बोरियां चोरी करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की कृषि उपज, बिना नंबर की मोटरसाइकिलें, अवैध हथियार और कच्ची शराब समेत कुल करीब 8 लाख 59 हजार रुपए का मश्रुका जब्त किया है। वीडियो देखे पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य चोरी की मोटरसाइकिलों से हाईवे की रेकी करते थे। स्पीड ब्रेकर, घाटी या अन्य स्थानों पर धीमे होने वाले ट्रकों को चिन्हित कर वारदात को अंजाम दिया जाता था। नामली पुलिस की कार्रवाई से गिरोह का खुलासा हाईवे पर लगातार ट्रकों को निशाना बनाकर चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पान्द्रो, प्रभारी एसडीओपी अजय सारवान के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी अमित कोरी के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इसके अलावा तकनीकी सहायता और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों के आधार पर आरोपियों की तलाश की गई। खेत के मकान के पीछे छिपे थे संदिग्ध 16 सितंबर 2026 को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति धर्मेंद्र बापू के खेत पर बने मकान के पीछे रुके हुए हैं। सूचना मिलते ही नामली पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान अमन कंजर, राहुल कंजर और निखिल कंजर को मौके से पकड़ा गया। अंधेरे का फायदा उठाकर अनीश कंजर, चिंटू कंजर और अमित कंजर फरार हो गए। पुलिस ने मौके से बिना नंबर की मोटरसाइकिलें और प्लास्टिक की केनों में भरी करीब 30 लीटर कच्ची हाथ भट्टी की शराब जब्त की। तलाशी के दौरान आरोपी अमन सिसोदिया के पास से 32 बोर का पिस्टलनुमा देशी कट्टा, मैगजीन और दो जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए। इस मामले में नामली थाने पर आबकारी अधिनियम की धारा 49-ए और आर्म्स एक्ट की धारा 25/27 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पूछताछ में सामने आई ट्रकों से चोरी की वारदातें पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने ट्रकों से कृषि उपज चोरी करने की वारदातों का खुलासा किया। आरोपियों ने करीब 20 से 25 दिन पहले एक ट्रक से तिरपाल काटकर 14 कट्टे लहसुन चोरी करना स्वीकार किया। इसके अलावा करीब चार दिन पहले एक अन्य ट्रक से 13 कट्टे सरसों चोरी करने की बात भी सामने आई है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी की गई लहसुन और सरसों की बोरियां बरामद कर ली हैं। पुलिस अब गिरोह से जुड़ी अन्य वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है। इस तरह वारदात को देते थे अंजाम पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह के सदस्य तीन-तीन लोगों की टीम बनाकर चोरी की मोटरसाइकिलों से हाईवे की रेकी करते थे। तिरपाल से ढके ट्रकों की पहचान करने के बाद उनकी निगरानी की जाती थी। खासतौर पर स्पीड ब्रेकर, घाटी और ऐसे स्थानों को चुना जाता था जहां ट्रकों की रफ्तार कम हो जाती है। ट्रक के धीमे होते ही मोटरसाइकिल पर बीच में बैठा आरोपी रस्सी की मदद से ट्रक के ऊपर चढ़ जाता था। इसके बाद वह तिरपाल काटकर ट्रक में भरी कृषि उपज को सड़क किनारे नीचे गिरा देता था। पीछे चल रहे साथी मोटरसाइकिल से नीचे गिराई गई कृषि उपज को समेटकर ले जाते थे। चोरी का सामान हाईवे से करीब 500 मीटर दूर खेत में बने मकान में छिपाकर रखा जाता था। आवश्यकता के अनुसार वहां से कृषि उपज निकालकर बेचने या ठिकाने लगाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। चार आरोपी गिरफ्तार, सात की तलाश जारी नामली पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमन पिता दीपू सिसोदिया, उम्र 22 वर्ष, निवासी उखेड़िया; राहुल पिता गोरिया हाड़ा, उम्र 30 वर्ष, निवासी उखेड़िया; निखिल पिता बबलू हाड़ा, उम्र 23 वर्ष, निवासी उखेड़िया और सोनू पिता राजेंद्र सिसोदिया, उम्र 22 वर्ष, निवासी मेवासा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार गिरोह से जुड़े अनीश हाड़ा, चिंटू हाड़ा, अमित हाड़ा, अभिषेक सिसोदिया, आशीष चौहान, राजकुमार राणावत और धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया फिलहाल फरार हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। 8.59 लाख रुपए का मश्रुका जब्त पुलिस कार्रवाई में जब्त सामग्री का विवरण इस प्रकार है: कुल जब्त मश्रुका की कीमत करीब 8 लाख 59 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका इस कार्रवाई में थाना प्रभारी नामली अमित कोरी, थाना प्रभारी जावरा शहर दीपक मंडलोई, उपनिरीक्षक रघुवीर जोशी, केके पटेल, सहायक उपनिरीक्षक जुगलकिशोर रावत, राजेंद्र जगताप सहित नामली थाना पुलिस और साइबर सेल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस द्वारा गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश के साथ-साथ अन्य संभावित वारदातों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।

Ratlam News: रतलाम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का शव घर के बरामदे में मिला, सिर पर धारदार हथियार से चोट के निशान

Ratlam News: रतलाम के शिवगढ़ थाना क्षेत्र में 36 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवीबाई का शव खून से लथपथ मिला। पुलिस ने हत्या की आशंका जताकर जांच शुरू की। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के शिवगढ़ थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक महिला का शव खून से लथपथ हालत में मिलने से सनसनी फैल गई। नयाखेड़ा गांव में 36 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवीबाई का शव उसके घर के बरामदे में जमीन पर पड़ा मिला। महिला के सिर पर गहरी चोट के निशान दिखाई दिए हैं। घटना की सूचना मिलते ही शिवगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हत्या की आशंका जताई है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वीडियो देखे मृतका की पहचान देवीबाई पति स्वर्गीय रायसिंह डामोर, निवासी नयाखेड़ा के रूप में हुई है। खेत पर जा रहे ग्रामीण ने देखा शव शुक्रवार सुबह गांव का अन्नुसिंह रोज की तरह खेत पर काम करने जा रहा था। रास्ते में देवीबाई के घर के सामने से गुजरते समय उसकी नजर बरामदे में पड़ी महिला पर गई। देवीबाई सामान्यत: बरामदे में खाट पर सोती थी, लेकिन उस सुबह वह जमीन पर पड़ी हुई दिखाई दी। पास जाकर देखने पर अन्नुसिंह ने महिला को खून से लथपथ पाया। उसके सीधे कान के पास सिर पर गहरी चोट थी। ग्रामीण ने तुरंत इसकी जानकारी देवीबाई के देवर भूरालाल डामोर को दी, जिसके बाद घटना की सूचना पुलिस तक पहुंची। पुलिस और एफएसएल टीम ने घटनास्थल की जांच की सूचना मिलने के बाद शिवगढ़ थाना प्रभारी आरके मकवाना, सब इंस्पेक्टर प्रतापसिंह भदौरिया और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए रतलाम से एएसपी राकेश पंद्रों और एफएसएल अधिकारी डॉ. अतुल मित्तल भी मौके पर पहुंचे। रावटी और सरवन थाना प्रभारी सहित पुलिस टीम ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और घटनास्थल से जरूरी जानकारी जुटाई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। धारदार हथियार से चोट के निशान प्रारंभिक जानकारी के अनुसार महिला के सिर पर धारदार हथियार से वार किए जाने जैसे चोट के निशान मिले हैं। घटनास्थल पर जमीन पर खून बिखरा हुआ था, जिसके आधार पर पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। शिवगढ़ थाना प्रभारी आरके मकवाना ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हत्या की आशंका है। महिला की मौत के कारणों और घटना की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। पुलिस जुटा रही है घटना से जुड़े सुराग फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के पीछे क्या कारण हो सकते हैं।

संत कमल किशोर नागर को धमकी से आक्रोश, रतलाम नागर समाज ने एसपी को सौंपा ज्ञापन

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। रतलाम में पूज्य संत श्री कमल किशोर जी नागर को कथा के दौरान प्राप्त हुए धमकी भरे पत्र के मामले ने नागर ब्राह्मण समाज में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना के विरोध में समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य के गृह मंत्री के नाम पुलिस अधीक्षक रतलाम को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। नागर ब्राह्मण समाज रतलाम का कहना है कि संत कमल किशोर नागर मालवा क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक पहचान से जुड़े प्रतिष्ठित संत हैं। ऐसे में उन्हें धमकी मिलना गंभीर विषय है और प्रशासन को इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए। बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद ज्ञापन नागर ब्राह्मण समाज रतलाम के अध्यक्ष जितेंद्र नागर, रतलाम नागर ब्राह्मण न्यास के अध्यक्ष संजय दवे और नागर महिला मंडल की अध्यक्षा मीनाक्षी रावल के नेतृत्व में सौंपा गया। इस दौरान समाज के पदाधिकारी, प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने संत को प्राप्त धमकी भरे पत्र की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की। ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें ज्ञापन के माध्यम से समाज ने पुलिस और प्रशासन के सामने निम्न मांगें रखीं— गौसेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित हैं संत समाज के सदस्यों ने कहा कि संत श्री कमल किशोर नागर लंबे समय से गौसेवा, धर्म, संस्कार और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके धार्मिक और सामाजिक योगदान को देखते हुए समाज उन्हें मालवा क्षेत्र का गौरव मानता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी संत या सामाजिक-धार्मिक व्यक्तित्व को धमकी मिलना चिंताजनक स्थिति है। इसलिए पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

Ratlam News: रतलाम में रेलवे भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, रेटिना टेस्ट ने खोली डमी अभ्यर्थियों की पोल

Ratlam News: रतलाम में रेलवे भर्ती PET के दौरान रेटिना टेस्ट से डमी अभ्यर्थियों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। पंकज और गौरव दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े गए। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रेलवे भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में डमी अभ्यर्थियों के जरिए परीक्षा देने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बुधवार को रतलाम के रेलवे फुटबॉल मैदान में रेटिना टेस्ट और पहचान जांच के दौरान दो युवकों की पहचान वास्तविक अभ्यर्थियों से अलग मिली। इसके बाद दोनों को मौके पर पकड़ लिया गया। जांच में सामने आया कि फिरोजाबाद निवासी पंकज यादव वास्तविक अभ्यर्थी मनीष सिंह की जगह और गौरव यादव वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। दोनों मामलों में डमी अभ्यर्थियों के जरिए रेलवे भर्ती की प्रक्रिया में शामिल होने की कोशिश की गई थी। वीडियो देखे इससे पहले 6 सितंबर को बिहार के दो युवकों के वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह PET देने का मामला भी सामने आया था। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद रेलवे भर्ती परीक्षा की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रेटिना टेस्ट में अलग निकली पहचान रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पश्चिम रेलवे की ओर से रतलाम के रेलवे फुटबॉल मैदान में ग्रुप डी लेवल-1 पदों के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जा रही है। बुधवार सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच टाइमिंग टेक्नोलॉजी के नामित कर्मचारियों ने अभ्यर्थियों की पहचान प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान रेटिना टेस्ट के साथ फोटो और रिकॉर्ड का मिलान किया गया। जांच के दौरान परीक्षा देने पहुंचे युवकों की पहचान रिकॉर्ड में दर्ज वास्तविक अभ्यर्थियों से अलग पाई गई। संदेह होने पर आरपीएफ कर्मचारियों की मदद से दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। मनीष की जगह पंकज पहुंचा था जांच में पता चला कि 33 वर्षीय पंकज यादव, निवासी अलीनगर, फिरोजाबाद, वास्तविक अभ्यर्थी 26 वर्षीय मनीष सिंह के स्थान पर PET देने पहुंचा था। मनीष सिंह, निवासी फिरोजाबाद, परीक्षा में शामिल होने के लिए रतलाम आया ही नहीं था। मामले के सामने आने के बाद वह फरार बताया गया है। अनुज की जगह गौरव ने दी परीक्षा दूसरे मामले में 21 वर्षीय गौरव यादव, निवासी ग्राम जफराबाद, फिरोजाबाद, वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। पहचान प्रक्रिया के दौरान गौरव की जानकारी वास्तविक अभ्यर्थी के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाई। इसके बाद रेलवे अधिकारियों और आरपीएफ की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। पकड़े गए युवकों में गौरव यादव, पंकज यादव और वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर के नाम सामने आए हैं। वहीं मनीष सिंह की तलाश की जा रही है। रेलवे भर्ती में लगातार सामने आ रहे डमी अभ्यर्थी रतलाम में रेलवे भर्ती PET के दौरान यह पहला मामला नहीं है। 6 सितंबर को भी बिहार के दो युवकों के वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने का मामला सामने आया था। इसके महज तीन दिन बाद एक बार फिर डमी अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से परीक्षा की निगरानी व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि दोनों मामलों में पहचान की जांच के दौरान फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। रेटिना टेस्ट बना अहम जांच का जरिया इस मामले में रेटिना टेस्ट और फोटो रिकॉर्ड का मिलान निर्णायक साबित हुआ। शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की पहचान की पुष्टि के दौरान रिकॉर्ड से अंतर सामने आया, जिसके बाद संदिग्ध अभ्यर्थियों को रोककर जांच की गई। रेलवे भर्ती PET से जुड़ी अहम जानकारी मुख्य तथ्य: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल रेलवे भर्ती जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। रतलाम में लगातार डमी अभ्यर्थियों के मामले सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि फर्जीवाड़े की कोशिशें परीक्षा केंद्र तक कैसे पहुंच रही हैं। हालांकि, पहचान जांच के दौरान मामलों का पकड़ा जाना यह भी दिखाता है कि अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने के लिए तकनीकी जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Paper Leak Law 2026: 10 साल तक जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, जानें नए संशोधन बिल की हर बड़ी बात

Paper Leak Law 2026: पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार ने नया संशोधन बिल पेश किया है। इसमें 10 साल तक की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, STF और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव शामिल है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Paper Leak Law 2026: देशभर में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने कानून को और सख्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 संसद में पेश किया है। इस संशोधन का मकसद केवल पेपर लीक करने वालों को कड़ी सजा देना ही नहीं, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करना है। प्रस्तावित बदलावों में जेल की अवधि बढ़ाने, भारी आर्थिक दंड लगाने और जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि, संसद के दोनों सदनों में जारी हंगामे के कारण इस विधेयक पर अभी विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी है। यदि यह संशोधन पारित होता है तो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जाएगा। क्या है Paper Leak Law 2026? केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्तावित किया है। नए बिल का उद्देश्य संगठित पेपर लीक नेटवर्क, परीक्षा माफिया और परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी तय करना है। सरकार का मानना है कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाना भी जरूरी है। व्यक्तिगत नकल पर बढ़ेगी सजा 2024 के कानून में व्यक्तिगत स्तर पर नकल या अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल तक की जेल और अधिकतम ₹10 लाख जुर्माने का प्रावधान था। प्रस्तावित बदलाव इसका उद्देश्य परीक्षा में धोखाधड़ी को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखना है। पेपर लीक गिरोहों पर होगी सख्त कार्रवाई संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ भी सरकार ने सजा और आर्थिक दंड बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। नए बिल में प्रस्ताव पहले ऐसे मामलों में न्यूनतम 5 साल की जेल और ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था। परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की भी तय होगी जवाबदेही संशोधन बिल में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं के लिए भी कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। यदि कोई एजेंसी लापरवाही या मिलीभगत की दोषी पाई जाती है तो उस पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया है। STF करेगी जांच, दो महीने में पूरी करनी होगी प्रक्रिया नए बिल में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रस्ताव है। साथ ही जांच को लंबा खिंचने से रोकने के लिए दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य भी तय किया गया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट और स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर संशोधन बिल में परीक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे मामलों की पैरवी के लिए एक या अधिक स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अधिकार देने का प्रस्ताव भी शामिल है, ताकि अभियोजन प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके। अपील की व्यवस्था भी होगी समयबद्ध प्रस्तावित बिल के अनुसार—

CJP Protest: 26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन, जेपी नड्डा ने पिलाया जूस; पीएम मोदी बोले- जल्द स्वस्थ हों

CJP Protest:सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। पीएम मोदी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। CJP Protest: करीब 26 दिनों तक चले लंबे अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार देर रात अपना उपवास समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती वांगचुक को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अनशन समाप्त होने के कुछ ही समय बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनम वांगचुक के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने डॉक्टरों की सलाह का पालन करने और जल्द पुराना वजन प्राप्त करने की शुभकामनाएं भी दीं। लंबे समय तक चले इस आंदोलन के खत्म होने के बाद अब सरकार और आंदोलनकारियों के बीच औपचारिक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। 26 दिन बाद खत्म हुआ अनशन सोनम वांगचुक ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों और लद्दाख की एपेक्स बॉडी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त किया। उन्होंने लिखा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था। लंबी बातचीत और देश में संभावित तनाव की आशंका को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया। पीएम मोदी ने क्या कहा? अनशन समाप्त होने की जानकारी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह सोनम वांगचुक से आग्रह करते हैं कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार अपनी दिनचर्या अपनाएं और जल्द अपना पुराना वजन वापस प्राप्त करें। उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य की भी कामना की। डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे सोनम वांगचुक लगातार 26 दिनों तक उपवास रहने के कारण उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें कुछ समय तक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम अब उन्हें चरणबद्ध तरीके से सामान्य आहार देना शुरू करेगी ताकि शरीर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट सके। वांगचुक ने हिंसा से दूर रहने की अपील की अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द एक वीडियो जारी कर पूरी प्रक्रिया और शर्तों की जानकारी देंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता न अपनाएं और शांति बनाए रखें। प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद आया फैसला अनशन समाप्त होने से कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो संदेश सामने आया था, जिसमें उन्होंने परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार की कार्रवाई का उल्लेख किया। इसके बाद देर रात सोनम वांगचुक द्वारा अनशन समाप्त करने की जानकारी सामने आई। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी आधिकारिक कारण-परिणाम संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। आगे क्या हो सकता है? अनशन समाप्त होने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार और लद्दाख से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच लंबित मुद्दों पर औपचारिक वार्ता तेज होगी। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो आंदोलन से जुड़े कई मुद्दों के समाधान का रास्ता खुल सकता है।

MP UCC Bill पास: शादी का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, लिव इन से नौकरी रिकॉर्ड तक क्या बदल जाएगा?

MP UCC Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा से UCC बिल पास हो गया है। शादी के रजिस्ट्रेशन, लिव इन रिलेशन, नौकरी रिकॉर्ड और संपत्ति विवाद से जुड़े नए नियम क्या होंगे, जानिए पूरी जानकारी भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP UCC Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश UCC लागू करने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसके लिए राज्यपाल और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी। कानून लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव विवाह पंजीकरण को लेकर देखने को मिलेगा। 23 सितंबर 2008 के बाद हुई ऐसी शादियां, जिनका अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकृत कराना होगा। इसके अलावा नौकरी के रिकॉर्ड, लिव इन रिलेशन और संपत्ति विवाद से जुड़े प्रावधान भी नए कानून का हिस्सा होंगे। राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना और दस्तावेजी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। MP UCC Bill में सबसे बड़ा बदलाव: शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कानून लागू होने के बाद 23 सितंबर 2008 या उसके बाद हुई सभी गैर-पंजीकृत शादियों का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष के भीतर कराना होगा। यदि किसी दंपति ने पहले ही विवाह पंजीकरण करा लिया है तो उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। दूसरी ओर, 23 सितंबर 2008 से पहले हुई शादियों के लिए रजिस्ट्रेशन पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा। राज्य के बाहर शादी करने वालों पर भी लागू होंगे नियम यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से मध्य प्रदेश का निवासी है और उसने किसी दूसरे राज्य में विवाह किया है, तब भी यह प्रावधान उस पर लागू होगा। यानी केवल शादी का स्थान बदलने से नियमों में कोई छूट नहीं मिलेगी। रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो क्या होगा? यदि निर्धारित समय में विवाह का पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो संबंधित रजिस्ट्रार नोटिस जारी कर सकता है। इसके अलावा अधिकतम 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, केवल रजिस्ट्रेशन नहीं होने के आधार पर विवाह को अवैध नहीं माना जाएगा। नौकरी के रिकॉर्ड में भी बदलेंगे नियम UCC लागू होने के बाद सरकारी और निजी संस्थानों में कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति बदलने के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। अब केवल विवाह कार्ड, शपथ-पत्र (हलफनामा) या अन्य दस्तावेजों के आधार पर सेवा रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका प्रभाव भविष्य में इन मामलों पर पड़ सकता है— इनसे जुड़े विस्तृत नियम सरकार बाद में अलग से जारी कर सकती है। संपत्ति विवाद में अदालत नियुक्त कर सकेगी ‘रक्षक’ UCC विधेयक में संपत्ति विवाद से जुड़ा एक नया प्रावधान भी शामिल किया गया है। यदि किसी मामले में आवश्यकता महसूस होती है, तो अदालत एक “रक्षक” नियुक्त कर सकेगी। रक्षक की जिम्मेदारियां होंगी— लिव इन रिलेशन को लेकर भी प्रावधान विधेयक में लिव इन रिलेशन से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। कानून लागू होने के बाद इससे संबंधित प्रक्रियाएं और नियम अधिसूचना एवं विस्तृत नियमावली के माध्यम से स्पष्ट किए जाएंगे। किन लोगों पर लागू होगा यह कानून? यह कानून केवल मध्य प्रदेश में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा उन लोगों तक भी हो सकता है जो— यदि वे कानूनी रूप से मध्य प्रदेश के निवासी हैं, तो उन पर भी संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं। आगे क्या होगा? विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और अधिसूचना जारी होने पर कानून प्रभावी होगा। कई प्रक्रियाओं और नियमों की विस्तृत जानकारी सरकार अलग से अधिसूचित करेगी।

अस्पताल से सोनम वांगचुक की सरकार को चिट्ठी, इन शर्तों पर अनशन खत्म करने को हुए तैयार

CJP Protest: अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने सरकार को पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की शर्तें रखीं। छात्रों पर कार्रवाई न करने, मुआवजा और संसद में चर्चा की मांग की। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। CJP Protest: देशभर में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल से केंद्र सरकार को एक अहम पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने साफ किया है कि यदि सरकार कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं। वांगचुक ने अपने पत्र में छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने और संसद में पूरे मामले पर गंभीर चर्चा कराने की मांग भी दोहराई। उनकी यह चिट्ठी ऐसे समय आई है जब आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद भी इस मुद्दे पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। JP नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात का किया जिक्र सोनम वांगचुक ने पत्र में बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने दोनों नेताओं का धन्यवाद करते हुए लिखा कि बातचीत के दौरान सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि चर्चा में पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने, संसद में सार्थक बहस कराने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार जैसे मुद्दों पर भी बात हुई। ’20 जुलाई का चलो संसद मार्च शांतिपूर्ण रहा’ अपने पत्र में वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित चलो संसद मार्च का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि पुलिस की सख्ती और बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया ने देखा कि युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे। इसलिए आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास को कमजोर करेगी। करीब 65 सांसदों ने की अनशन खत्म करने की अपील वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों की मुलाकात के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कई सांसद उनसे मिलने भी आए और बाकी भी मिलने वाले हैं। सभी का मानना है कि देशहित में उन्हें स्वस्थ रहकर आगे भी काम करना चाहिए। “मैं जीना चाहता हूं, छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं” पत्र में वांगचुक ने भावुक शब्दों में लिखा कि वह अपने छात्रों, शिक्षा और समाज के लिए किए जा रहे कार्यों के बीच वापस लौटना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तभी संभव है जब उन युवाओं के साथ न्याय हो, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू किया गया था। कब खत्म करेंगे अनशन? वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा देती है कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल होगी, तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत अपील नहीं बल्कि देश के लाखों छात्रों की अपेक्षाओं का सवाल है।

MP News: MP के 1100 करोड़ के चावल घोटाले में बड़ा एक्शन, महाराष्ट्र से दो राइस मिल संचालक गिरफ्तार

MP News: मध्य प्रदेश के चर्चित चावल घोटाले में एसआईटी ने महाराष्ट्र के गोंदिया से दो राइस मिल संचालकों को गिरफ्तार किया है। अब तक 10 गिरफ्तारी, 5 आरोपी फरार हैं। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के चर्चित MP चावल घोटाले की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। विशेष जांच दल (SIT) ने महाराष्ट्र के गोंदिया से दो राइस मिल संचालकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि छिंदवाड़ा स्थित एथनॉल प्लांट के नाम पर निकला करोड़ों रुपये का फोर्टिफाइड चावल उनकी राइस मिल में खपाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी जुगल खंडेलवाल और उनके भाई किशनलाल खंडेलवाल हैं। इस कार्रवाई के साथ अब तक इस मामले में कुल 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि पांच आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस पूरे नेटवर्क में अन्य राइस मिलों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसी वजह से एसआईटी जांच का दायरा लगातार बढ़ा रही है। महाराष्ट्र से हुई गिरफ्तारी, एसआईटी की जांच तेज एसआईटी ने महाराष्ट्र के गोंदिया पहुंचकर जुगल खंडेलवाल और किशनलाल खंडेलवाल को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि छिंदवाड़ा स्थित एथनॉल प्लांट के नाम पर जारी किया गया करीब 40 ट्रक फोर्टिफाइड चावल, जिसकी कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है, आरोपितों की राइस मिल में पहुंचाया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक कड़ी है और जांच आगे बढ़ने पर अन्य राइस मिलों और संबंधित लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।  क्या है पूरा चावल घोटाला? यह मामला 3 जून को मध्य प्रदेश के बालाघाट और सिवनी जिलों में सामने आया था। जांच में आरोप लगा कि एफसीआई (FCI) के गोदामों से निकला फोर्टिफाइड चावल अपने निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंचा। जांच के मुताबिक, 12.66 करोड़ रुपये मूल्य का 54,590 क्विंटल फोर्टिफाइड चावल छिंदवाड़ा स्थित एवीजे एग्रिको ग्रुप के एथनॉल प्लांट के लिए जारी किया गया था, लेकिन वह प्लांट तक पहुंचा ही नहीं। 1100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है जांच जांच अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। यदि जांच में ये आशंकाएं सही साबित होती हैं, तो यह मध्य प्रदेश के सबसे बड़े खाद्यान्न घोटालों में से एक माना जा सकता है। एथनॉल नीति क्या कहती है? प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार, एफसीआई के गोदामों में रखा पुराना और मानव उपभोग के लिए अनुपयोगी हो चुका चावल एथनॉल उत्पादन में उपयोग किया जा सकता है। महत्वपूर्ण जानकारी जांच अभी जारी, और बढ़ सकती हैं गिरफ्तारियां एसआईटी की जांच अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड और संबंधित राइस मिलों की जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हैं और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं

Ratlam News: रतलाम में दूषित पानी का कहर: कुएं का पानी पीने से 80 से ज्यादा ग्रामीण बीमार, 21 अस्पताल में भर्ती

रतलाम के पिपलोदा तहसील के आजमपुर डोडिया गांव में कथित रूप से दूषित कुएं का पानी पीने से 80 से अधिक ग्रामीण बीमार हो गए। 21 मरीज अस्पताल में भर्ती, जांच जारी। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के पिपलोदा तहसील अंतर्गत ग्राम आजमपुर डोडिया में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब बड़ी संख्या में ग्रामीण अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर बीमार पड़ने लगे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गांव के कुएं का कथित रूप से दूषित पानी पीने के बाद यह स्थिति सामने आई है। करीब 800 आबादी वाले इस गांव में 80 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से 21 मरीजों की हालत को देखते हुए पिपलोदा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शेष लोगों का इलाज गांव में लगाए गए अस्थायी चिकित्सा शिविर में किया गया। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की टीमें लगातार गांव में डटी हुई हैं। जांच पूरी होने तक प्रशासन ने संबंधित कुएं को सील कर दिया है और ग्रामीणों के लिए टैंकरों से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। फिलहाल बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। तीन दिनों से सामने आ रहे थे बीमारी के लक्षण ग्रामीणों के मुताबिक पिछले तीन दिनों से कई लोगों को लगातार पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत हो रही थी। जैसे ही सूचना स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची, बीएमओ डॉ. पवन पाटीदार के निर्देश पर 108 एंबुलेंस गांव भेजी गई। इसके बाद मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर लगाया, जहां करीब 80 ग्रामीणों की जांच की गई। मरीजों को दवाइयां देने के साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर सर्वे भी किया, ताकि किसी अन्य प्रभावित व्यक्ति की पहचान समय रहते हो सके। 21 मरीज अस्पताल में भर्ती स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गंभीर स्थिति वाले 21 मरीजों को पिपलोदा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें शामिल हैं— डॉक्टरों की निगरानी में सभी मरीजों का उपचार जारी है। दूषित कुएं के पानी की आशंका, जांच शुरू प्राथमिक जांच में ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि गांव के मीठे पानी वाले कुएं का पानी दूषित होने के कारण लोग बीमार पड़े हैं। घटना के बाद पीएचई विभाग ने कुएं के पानी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेज दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की एपिडेमियोलॉजिस्ट टीम भी गांव पहुंची और प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य जांच की। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी। एहतियात के तौर पर कुआं सील, टैंकरों से पेयजल आपूर्ति स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित कुएं को तत्काल सील कर दिया है। फिलहाल गांव में— पीएचई विभाग का कहना है कि क्लोरीनेशन और जांच रिपोर्ट संतोषजनक आने के बाद ही कुएं के पानी के उपयोग की अनुमति दी जाएगी। ग्रामीण नल-जल योजना का पानी नहीं पीते ग्रामीणों का कहना है कि गांव में दो सरकारी कुएं हैं। इनमें से एक का पानी मीठा होने के कारण अधिकांश लोग उसी का उपयोग पीने के लिए करते हैं। उनका यह भी कहना है कि नल-जल योजना के तहत मिलने वाले पानी का स्वाद उन्हें पसंद नहीं आता और उसकी आपूर्ति भी नियमित नहीं रहती। इसी वजह से अधिकांश परिवार कुएं के पानी पर निर्भर हैं। एक माह पहले पानी की जांच हुई थी ग्राम सचिव प्रकाशचंद शर्मा के अनुसार करीब एक माह पहले पीएचई विभाग ने कुएं के पानी की जांच की थी और उसे पीने योग्य बताया था। उन्होंने बताया कि कुएं की समय-समय पर सफाई भी कराई जाती है। हालांकि गर्मी के कारण इस समय कुएं में पानी की मात्रा काफी कम हो गई है। दो दिन पहले निकाली गई थी कुएं की गाद सरपंच समरथ ने बताया कि दो दिन पहले मोटर लगाकर कुएं का पानी खाली कराया गया था और गाद भी निकाली गई थी। उनके अनुसार कुएं की पूरी सफाई के लिए कई बार पूरा पानी निकालना जरूरी होता है, लेकिन इस प्रक्रिया का कुछ ग्रामीण विरोध भी करते हैं। तहसीलदार ने अस्पताल पहुंचकर लिया हालचाल घटना की सूचना मिलने के बाद पिपलोदा तहसीलदार प्रीति साठे सिविल अस्पताल पहुंचीं और भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से फिलहाल केवल सुरक्षित और उबला हुआ पानी पीने तथा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।

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