MP UCC Bill पास: शादी का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, लिव इन से नौकरी रिकॉर्ड तक क्या बदल जाएगा?

MP UCC Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा से UCC बिल पास हो गया है। शादी के रजिस्ट्रेशन, लिव इन रिलेशन, नौकरी रिकॉर्ड और संपत्ति विवाद से जुड़े नए नियम क्या होंगे, जानिए पूरी जानकारी भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP UCC Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश UCC लागू करने वाला चौथा भाजपा शासित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसके लिए राज्यपाल और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी। कानून लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव विवाह पंजीकरण को लेकर देखने को मिलेगा। 23 सितंबर 2008 के बाद हुई ऐसी शादियां, जिनका अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकृत कराना होगा। इसके अलावा नौकरी के रिकॉर्ड, लिव इन रिलेशन और संपत्ति विवाद से जुड़े प्रावधान भी नए कानून का हिस्सा होंगे। राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना और दस्तावेजी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। MP UCC Bill में सबसे बड़ा बदलाव: शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कानून लागू होने के बाद 23 सितंबर 2008 या उसके बाद हुई सभी गैर-पंजीकृत शादियों का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष के भीतर कराना होगा। यदि किसी दंपति ने पहले ही विवाह पंजीकरण करा लिया है तो उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। दूसरी ओर, 23 सितंबर 2008 से पहले हुई शादियों के लिए रजिस्ट्रेशन पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा। राज्य के बाहर शादी करने वालों पर भी लागू होंगे नियम यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से मध्य प्रदेश का निवासी है और उसने किसी दूसरे राज्य में विवाह किया है, तब भी यह प्रावधान उस पर लागू होगा। यानी केवल शादी का स्थान बदलने से नियमों में कोई छूट नहीं मिलेगी। रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो क्या होगा? यदि निर्धारित समय में विवाह का पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो संबंधित रजिस्ट्रार नोटिस जारी कर सकता है। इसके अलावा अधिकतम 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, केवल रजिस्ट्रेशन नहीं होने के आधार पर विवाह को अवैध नहीं माना जाएगा। नौकरी के रिकॉर्ड में भी बदलेंगे नियम UCC लागू होने के बाद सरकारी और निजी संस्थानों में कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति बदलने के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। अब केवल विवाह कार्ड, शपथ-पत्र (हलफनामा) या अन्य दस्तावेजों के आधार पर सेवा रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाएगा। इसका प्रभाव भविष्य में इन मामलों पर पड़ सकता है— इनसे जुड़े विस्तृत नियम सरकार बाद में अलग से जारी कर सकती है। संपत्ति विवाद में अदालत नियुक्त कर सकेगी ‘रक्षक’ UCC विधेयक में संपत्ति विवाद से जुड़ा एक नया प्रावधान भी शामिल किया गया है। यदि किसी मामले में आवश्यकता महसूस होती है, तो अदालत एक “रक्षक” नियुक्त कर सकेगी। रक्षक की जिम्मेदारियां होंगी— लिव इन रिलेशन को लेकर भी प्रावधान विधेयक में लिव इन रिलेशन से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। कानून लागू होने के बाद इससे संबंधित प्रक्रियाएं और नियम अधिसूचना एवं विस्तृत नियमावली के माध्यम से स्पष्ट किए जाएंगे। किन लोगों पर लागू होगा यह कानून? यह कानून केवल मध्य प्रदेश में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका दायरा उन लोगों तक भी हो सकता है जो— यदि वे कानूनी रूप से मध्य प्रदेश के निवासी हैं, तो उन पर भी संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं। आगे क्या होगा? विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और अधिसूचना जारी होने पर कानून प्रभावी होगा। कई प्रक्रियाओं और नियमों की विस्तृत जानकारी सरकार अलग से अधिसूचित करेगी।

वाह विधायक जी! : एमपी के इस विधायक की चारो और चर्चा, कारण सरकारी वेतन – भत्ते और पेंशन को मना कर देना

सिफारिशों से भी दूर रहते है चेतन्य काश्यप, टोल टैक्स और पुलिस चालान तक भरता है यह विधायक! पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। मध्यप्रदेश के भाजपा विधायक ने सदन में एक अनोखी मिसाल पेश की। चेतन्य काश्यप ने विधायक के तौर पर मिलने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन नहीं लेने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि वह अपने खर्चा उठने में सक्षम है इसलिए यह राशि विधानसभा कोष में जमा कर दी जाए। काश्यप तीसरी बार रतलाम शहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए हैं और उन्होंने एक बार फिर से विधायक के रूप में सरकार से कोई वेतन, भत्ते और पेंशन नहीं लेने का ऐलान किया है। आपको बता दे इससे पहले के उनके दो कार्यकाल में भी उन्होंने किसी प्रकार का कोई सरकारी लाभ नहीं लिया था। बता दें कि प्रत्येक विधायक को प्रति माह लगभग 70 हजार के वेतन भत्ते मिलते हैं। इसके अलावा रेलवे कूपन और हवाई यात्राएं एवं आजीवन पेंशन व चिकित्सा भत्ता जैसी अन्य सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में कश्यप ने सभी सुविधा का त्याग करते हुए कहा कि यह राशि प्रदेश के विकास पर व्यय हो। राष्ट्र सेवा और जनहित मेरा ध्येय – विधायक काश्यपविधानसभा में भी उन्होंने पहले ही वक्तव्य में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना यह निर्णय रख दिया। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि जब ईश्वर की कृपा से वे जनहित के कार्य करने में सक्षम हैं, तो उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन-भत्ते और पेंशन का उपयोग शासन द्वारा जनहित में सीधे किया जाए।कश्यप ने सदन में कहा कि राष्ट्र सेवा और जनहित मेरा ध्येय है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैं राजनीति में आया हूं। किशोरावस्था से ही समाज सेवा के कार्यों में अग्रसर हूं तथा कई सेवा संस्थानों में प्रकल्पों का संचालन कर रहा हूं। ईश्वर ने इस योग्य बनाया है कि जनसेवा में थोड़ा सा योगदान कर सकूं। इसी तारतम्य में विधायक के रूप में मिलने वाले वेतन-भत्ते एवं पेंशन नहीं लेने का निश्चय किया है। पिछली दो विधानसभा में भी भत्ते नहीं लिए थे। मैं चाहता हूं कि मुझे प्राप्त होने वाले भत्ते एवं पेंशन का राजकीय कोष से आहरण न हो ताकि उस राशि का सदुपयोग प्रदेश के विकास एवं जनहित के कार्य हो सकें। सिफारिशों से दूरी रखते है काश्यपआमतौर पर एक राजनेता अपने लिए व कार्यकर्ताओं के लिए सहज ही सिफारिशें करते नजर आते है। मगर रतलाम के विधायक चेतन्य काश्यप का तौर तरीका बाकियों से अलग है। पुलिस थानों पर उनके नाम से की गई सिफारिशों को वो सिरे से इंकार कर देते है। उनके करीबी के अनुसार नियम व कायदे के पक्के विधायक काश्यप किसी कार्यकर्ता की गाड़ी का चालान अगर कट जाए तो वे नाराज कार्यकर्ता को बुलाकर खुद से चालान भरने की बात कहते हुए कार्यकर्ताओं को नियम पालन की नसीहत देकर मना लेते है। यही कारण है की पुलिस के सामने कोई भाजपाई विधायक जी का रोब नहीं दिखा पाता है। यहां तक की उनके नाम से टोल से गाड़ियां तक नहीं छोड़ी जाती है, जिसका कारण है कि वे खुद टोल टैक्स चुकाते है। विधायक काश्यप अपने फाउंडेशन के माध्यम से अनेक सेवा कार्यों को करते आ रहे है। जिससे गरीबों व कई समाज में वंचित लोगों को सहारा व प्रोत्साहन मिला है।

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