MP News: मंदसौर गोलीकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस  

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। MP News: सुप्रीम कोर्ट ने मंदसौर गोलीकांड की जांच के लिए गठित जैन आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने के संबंध में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। यह आदेश पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर दिया गया।  

चार सप्ताह में सरकार को देना होगा जवाब  

सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति संदीप दास और न्यायमूर्ति विक्रम मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा और सर्वम रितम खरे की दलीलों को सुनने के बाद राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।  

मामले का पूरा घटनाक्रम  

6 जून 2017 को मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी स्थित पार्श्वनाथ चौपाटी पर किसानों के आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा गोली चलाए जाने से पांच किसानों की मौत हो गई थी। इस घटना की सीबीआई जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पारस सकलेचा ने 15 सितंबर 2017 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दायर की थी। हालांकि, शासन द्वारा जैन आयोग के गठन के आधार पर यह याचिका खारिज कर दी गई थी।  

चार साल बाद भी विधानसभा में पेश नहीं हुई रिपोर्ट  

राज्य सरकार ने 12 जून 2017 को जैन आयोग का गठन किया, जिसने 13 जून 2018 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। लेकिन चार साल बीतने के बावजूद यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश नहीं की गई। इसके बाद पारस सकलेचा ने 3 मई 2022 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक नई याचिका दाखिल कर रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने की मांग की।  

याचिका में तर्क दिया गया कि जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा 3(4) के तहत सरकार को किसी भी जांच आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के छह महीने के भीतर उस पर कार्रवाई कर विधानसभा में पेश करना अनिवार्य है।  

हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका  

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने 14 अक्टूबर 2024 को इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घटना को सात वर्ष बीत चुके हैं, ऐसे में रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने का अब कोई आधार नहीं बनता।  

सुप्रीम कोर्ट की दखल  

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पारस सकलेचा ने 8 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तंखा और सर्वम रितम खरे ने सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठाया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।  

क्या है आगे की राह  

अब राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि जैन आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जाएगी या नहीं।  

MP News: 18 महीने बाद जिंदा लौटी महिला, परिवार कर चुका था अंतिम संस्कार, चार लोग काट रहे थे हत्या की सजा  

मंदसौर- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिस महिला को 18 महीने पहले मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था, वह जिंदा लौट आई। इस घटना ने पुलिस और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इस मामले में चार लोगों को हत्या का दोषी मानते हुए जेल भेज दिया गया था।  

कैसे हुआ खुलासा  

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ललिता बाई नामक यह महिला अचानक पुलिस स्टेशन पहुंची और अपने जीवित होने की पुष्टि की। जब यह खबर उसके परिवार तक पहुंची तो वे हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने डेढ़ साल पहले ही उसके शव की पहचान कर अंतिम संस्कार कर दिया था।  

ललिता के पिता रमेश नानूराम बांछड़ा ने बताया कि उन्होंने शारीरिक निशानों के आधार पर शव की पहचान की थी, जिसमें उसके हाथ पर टैटू और पैर के चारों ओर बंधा काला धागा शामिल था। शव की पहचान के बाद परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।  

 हत्या का मामला दर्ज कर जेल भेजे गए थे चार लोग  

इस कथित हत्या के मामले में पुलिस ने चार लोगों इमरान, शाहरुख, सोनू और एजाज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन ललिता के जिंदा लौटने के बाद अब यह मामला उलझ गया है।  

ललिता ने बताई अपनी आपबीती  

अपने लापता होने की कहानी बताते हुए ललिता ने पुलिस को बताया कि वह शाहरुख के साथ भानुपरा गई थी। वहां दो दिन रहने के बाद उसे कथित तौर पर शाहरुख नामक एक अन्य व्यक्ति को 5 लाख रुपये में बेच दिया गया। इसके बाद वह डेढ़ साल तक कोटा में रही और फिर किसी तरह भागकर अपने गांव लौटी।  

जांच में जुटी पुलिस  

ललिता ने अपनी पहचान की पुष्टि के लिए आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज पेश किए। गांधी सागर पुलिस स्टेशन की प्रभारी तरुणा भारद्वाज ने बताया कि ललिता कुछ दिन पहले ही पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने आई थी कि वह जीवित है। पुलिस ने पड़ोसियों और परिवार के सदस्यों से उसकी पहचान सत्यापित कराई, जिन्होंने पुष्टि की कि वह सच में ललिता ही है।  

अब पुलिस इस पूरे मामले की दोबारा जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया था, वह किसका था और हत्या के मामले में जेल में बंद चार लोगों का क्या होगा।  

क्या होगा आगे  

ललिता के जिंदा लौटने से कई सवाल खड़े हो गए हैं  

1. जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था  

2. क्या ललिता के परिवार से कोई गलती हुई या फिर किसी ने जानबूझकर उन्हें गुमराह किया  

3. जिन चार लोगों को हत्या का दोषी मानकर जेल भेजा गया, उनके साथ अब क्या होगा  

पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। यह घटना मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था और पुलिस जांच के तरीकों पर भी सवाल खड़े कर रही है।  

हत्या का अंदेशा : रतलाम रेल कर्मचारी का शव मंदसौर के गांव में मिला, शरीर पर मारपीट के मिले निशान

पब्लिक वार्ता – मंदसौर/रतलाम,
जयदीप गुर्जर। रतलाम रेल मंडल के जूनियर इंजीनियर का शव तालाब किनारे मिलने पर सनसनी फैल गई। मृतक का नाम दीक्षांत पंड्या है, जो की रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के उपाध्यक्ष पद पर भी था। शव मंदसौर जिले भावगढ़ थाना क्षेत्र के गांव खोड़ाना में एक तालाब किनारे मिला है। मृतक के शरीर पर चोट के निशान बताए जा रहे है, जिससे पुलिस हत्या का अंदेशा जता रही है। आपको बता दे मंदसौर जिले का गांव खोड़ाना रतलाम के ढोढर के समीप है। दोनों क्षेत्र की पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है।

पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर लाल रंग की गाड़ी खड़ी मिली है। प्रारंभिक जांच में शरीर पर चोट के निशान मिले है। मृतक दीक्षांत पंड्या रेल मंडल के कैरेज एंड वैगन विभाग में पदस्थ थे। पुलिस व एफएसएल की टीम ने जांच शुरू कर दी है। सूचना मिलने के बाद परिजन भी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करने में जुट गई है।