राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत केंद्र सरकार गधा, घोड़ा और ऊंट पालन को बढ़ावा देने के लिए 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। जानिए योजना की पूरी जानकारी और आवेदन प्रक्रिया।
नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। देश में गधों की लगातार घटती संख्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत अब गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार आर्थिक सहायता दे रही है। इस योजना के तहत गधे, घोड़े और ऊंट पालने वालों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है, जो अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य इन पशुओं का संरक्षण करना और पशुपालकों को नया रोजगार उपलब्ध कराना है।
गधे के साथ इन जानवरों के लिए भी मिलेगा लाभ
इस योजना के तहत सिर्फ गधा ही नहीं बल्कि घोड़े और ऊंट के पालन के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी।
अगर कोई पशुपालक इन पशुओं के पालन के लिए 1 करोड़ रुपये तक का प्रोजेक्ट शुरू करता है, तो सरकार उसमें 50 फीसदी यानी 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी।
योजना का फायदा लेने के लिए कितने गधे पालने होंगे?
योजना के तहत सब्सिडी पाने के लिए पशुपालक को एक यूनिट बनानी होगी जिसमें—
- 50 मादा गधे
- 5 नर गधे
पालने होंगे। इसके लिए सरकार की ओर से 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी। यह राशि अधिकतम 50 लाख रुपये तक हो सकती है।
सरकार यह सहायता दो किस्तों में देती है—
- पहली किस्त बैंक से लोन मिलने के बाद
- दूसरी किस्त प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद
घोड़े और ऊंट के लिए क्या है नियम?
घोड़ा पालन के लिए एक यूनिट में—
- 10 मादा घोड़े
- 2 नर घोड़े
पालने होंगे।
वहीं ऊंट पालन के लिए यूनिट का आकार अलग-अलग प्रोजेक्ट के हिसाब से तय किया जाता है।
कैसे करें आवेदन?
इस योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक पशुपालकों को राष्ट्रीय पशुधन मिशन की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन करना होगा।
आवेदन के लिए प्रक्रिया इस प्रकार है—
- वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाएं।
- अपने प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी भरें।
- आवेदन स्वीकृत होने के बाद बैंक से लोन लें।
- वेरिफिकेशन पूरा होते ही सब्सिडी की राशि आपके खाते में जारी कर दी जाएगी।
क्यों जरूरी है यह योजना?
पिछले कुछ वर्षों में देश में गधों की संख्या तेजी से कम हुई है। कई इलाकों में गधे पारंपरिक कामों जैसे ईंट-भट्टों और ग्रामीण परिवहन में उपयोग होते रहे हैं। ऐसे में सरकार इस योजना के जरिए गधों के संरक्षण के साथ पशुपालन आधारित रोजगार को बढ़ावा देना चाहती है।
