मिडिल ईस्ट युद्ध से तेल 100 डॉलर पार, भारत में महंगाई का खतरा बढ़ा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गई है। भारत में महंगाई और LPG-पेट्रोल की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब गंभीर रूप ले चुका है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया, जिसके चलते तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ने लगा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के बाद से करीब 42% ज्यादा है। इससे भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और आम लोगों के बजट पर पड़ सकता है। रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाता है तो इससे महंगाई में 30 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है और आर्थिक विकास दर में करीब 15 बेसिस पॉइंट्स की कमी आ सकती है। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ परिवहन लागत भी बढ़ती है, जिससे खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर संकट से बढ़ी चिंता खाड़ी क्षेत्र एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा केंद्र है। साल 2025 में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला करीब 87% कच्चा तेल और 86% LNG एशियाई देशों में ही पहुंचा था। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ने से सप्लाई बाधित होने का जोखिम भी बढ़ गया है। LPG की कीमतों पर भी असर मिडिल ईस्ट संकट का असर अब घरेलू गैस पर भी दिखने लगा है। हाल ही में LPG की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जो करीब एक साल बाद पहली वृद्धि है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और देश में 90% से ज्यादा LPG मिडिल ईस्ट से आयात होती है। सरकार क्या कदम उठा सकती है? सरकार पहले भी तेल की कीमतों के झटके को कम करने के लिए टैक्स में कटौती जैसे कदम उठा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो सरकार को फिर से टैक्स में राहत, रणनीतिक तेल भंडार के उपयोग और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। आम लोगों पर क्या असर होगा? तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई दे सकता है।