Ratlam News: रतलाम पटवारी सुसाइड केस: धरना के बाद बड़ा एक्शन, 7 दिन का अल्टीमेटम

रतलाम के पटवारी सुसाइड केस में बड़ा मोड़, नायब तहसीलदार निलंबित। 7 घंटे धरना, विधायक का अल्टीमेटम—7 दिन में FIR नहीं तो कलेक्ट्रेट घेराव।

रतलाम- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम जिले के आलोट में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी की आत्महत्या के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों और पटवारी संघ के विरोध के बीच प्रशासन ने नायब तहसीलदार सविता राठौर को निलंबित कर दिया है। मेडिकल कॉलेज में करीब 7 घंटे तक चले धरने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।

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7 घंटे धरना, फिर प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन

बुधवार सुबह से ही परिजन एफआईआर दर्ज होने तक पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए धरने पर बैठ गए। उनके साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और संगठन भी शामिल हो गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति संभालने पहुंचे अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर परिजनों को समझाया। जब अनुग्रह राशि की बात हुई तो परिजन भड़क उठे और साफ कहा—“हमें पैसे नहीं, न्याय चाहिए।”

आखिरकार प्रशासन ने 7 दिन में जांच पूरी करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।

विधायक और पुलिस में तीखी बहस, दिया अल्टीमेटम

धरने के दौरान सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि मामले को दबाया नहीं जाए और 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो मृतक की तेरहवीं के दिन कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।

पहले भी हुआ था विरोध, लेटर को माना जाए ‘मृत्यु पूर्व बयान’

इससे पहले मंगलवार रात भी थाना औद्योगिक क्षेत्र में करीब 5 घंटे तक धरना चला था। परिजनों की मांग थी कि मृतक द्वारा लिखे गए लेटर को मृत्यु पूर्व बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) माना जाए और तत्काल केस दर्ज किया जाए।

पटवारी संघ ने भी आरोप लगाया कि मृतक पर अधिकारियों द्वारा अनुचित दबाव डाला जा रहा था और छुट्टी तक नहीं दी गई थी।

क्या है पूरा मामला? कैसे हुई घटना

रविशंकर खराड़ी अपने भाई की शादी के कार्यक्रम में शामिल होने गांव गए थे, लेकिन अचानक वापस रतलाम लौट आए। वे रिसेप्शन में भी शामिल नहीं हुए और उनका फोन बंद था।

मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे उनकी गर्भवती पत्नी ने दरवाजा तोड़कर देखा तो वे फंदे पर लटके मिले। मृतक के परिवार में पत्नी, 4 साल की बेटी, मां और छोटी बहन हैं।

प्रशासन की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

बढ़ते विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच कलेक्टर ने नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। फिलहाल पुलिस मर्ग कायम कर जांच कर रही है।

अब सबकी नजर 7 दिन की डेडलाइन पर टिकी है। अगर इस दौरान एफआईआर दर्ज नहीं होती, तो मामला और बड़ा आंदोलन बन सकता है।