Ratlam News: रतलाम में निजी स्कूलों की मनमानी पर घिरी प्रशासनिक व्यवस्था, ग्राहक पंचायत ने जनसुनवाई में उठाया मुद्दा

रतलाम- पब्लिक वार्ता,

न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की रतलाम इकाई ने जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में जोरदार तरीके से आवाज उठाई। प्रांतीय उपाध्यक्ष अनुराग लोखंडे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपते हुए निजी शिक्षण संस्थाओं द्वारा फीस, किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर की जा रही मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

हर साल बढ़ता आर्थिक बोझ, अभिभावक परेशान

ग्राहक पंचायत ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद निजी स्कूल प्रबंधन हर साल अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाल रहे हैं। वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया जारी होने के कारण तत्काल निगरानी व्यवस्था लागू करने की जरूरत बताई गई, ताकि कोई भी स्कूल मनमाने तरीके से शुल्क और सामग्री थोप न सके।

संयुक्त निगरानी टीम बनाने का सुझाव

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि प्रवेश सत्र के दौरान आकस्मिक जांच के लिए एक संयुक्त टीम गठित की जाए, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अभिभावक और उपभोक्ता हितों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हों। इस टीम की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।

इन मुद्दों पर जताई गंभीर आपत्ति

  • एनसीईआरटी से अलग महंगी किताबें अनिवार्य:
    स्कूल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अलावा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू कर रहे हैं, जिनमें रिक्त स्थान ज्यादा होते हैं और हर साल नई खरीद जरूरी होती है।
  • हर साल बदलते पाठ्यक्रम और किताबें:
    बिना पाठ्यक्रम बदलाव के भी निजी प्रकाशकों की नई किताबें शामिल कर अभिभावकों को मजबूर किया जाता है।
  • यूनिफॉर्म में अनावश्यक बदलाव:
    लगभग हर वर्ष अलग-अलग कक्षाओं की यूनिफॉर्म बदलकर अतिरिक्त खर्च कराया जाता है।
  • चिह्नित दुकानों से खरीद का दबाव:
    कई स्कूलों का दुकानदारों से आर्थिक अनुबंध होता है, जिससे अभिभावकों को वहीं से किताबें, यूनिफॉर्म और सामग्री खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है।
  • फीस वसूली में मनमानी:
    शासन की गाइडलाइन के बावजूद विभिन्न मदों के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जाता है।
  • पालक-शिक्षक संघ का औपचारिक गठन:
    अधिकांश स्कूलों में पालक-शिक्षक संघ का गठन केवल औपचारिकता तक सीमित रहता है।

कार्रवाई की मांग

ग्राहक पंचायत ने प्रशासन से मांग की कि इन सभी बिंदुओं पर सख्त निगरानी रखते हुए दोषी संस्थाओं पर कार्रवाई की जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके और विद्यार्थियों को बिना आर्थिक दबाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में अनुराग लोखंडे के साथ महेंद्र भंडारी, सत्येन्द्र जोशी, श्याम ललवानी, नरेश सकलेचा, संजीव राव और जिला प्रचार प्रमुख नीरज कुमार शुक्ला सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।