रतलाम- पब्लिक वार्ता,
न्यूज़ डेस्क। सर्किल जेल रतलाम में बंदियों के आध्यात्मिक उत्थान और नैतिक जागरण को लेकर एक विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। ‘अपराध से मुक्ति, आध्यात्म से युक्ति’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन ‘खुशी एक पहल वेलफेयर सोसाइटी’ द्वारा किया गया, जिसमें संतों ने बंदियों को आत्मचिंतन और सुधार की राह अपनाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत हरिराम शास्त्री महाराज ने कहा कि आधुनिक समय में जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह सुधार और आत्मपरिवर्तन का केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग, ध्यान, प्रार्थना और सत्संग के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक बदलाव ला सकता है। जब व्यक्ति अपनी गलतियों को स्वीकार कर नई दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेता है, तभी वास्तविक सुधार संभव होता है।
उन्होंने आगे कहा कि अध्यात्म मनुष्य को संयम, आत्मबल और सकारात्मक सोच प्रदान करता है, जिससे वह अपराध की प्रवृत्तियों से दूर होकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जुड़ सकता है।
इस अवसर पर संत गोपाल राम महाराज और संत रामानुजन महाराज ने भी बंदियों को अनुशासन, सन्मार्ग और नैतिक जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के दौरान बंदियों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और संतों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। संतों का पुष्पहार से स्वागत किया गया और बंदियों को प्रेरणादायक संदेशों के साथ आध्यात्मिक साहित्य भी वितरित किया गया।
इस दौरान सर्किल जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया, उप जेल अधीक्षक ब्रजेश मकवाना, पतंजलि योगपीठ युवा भारत जिला प्रभारी विशाल कुमार वर्मा, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय सहित कई समाजसेवी और जेल स्टाफ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन अनिल पुरोहित ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन रत्नेश विजयवर्गीय द्वारा किया गया।