Ratlam News: नेहरू युवा केंद्र द्वारा आयोजित ‘यह दिवाली माय भारत के साथ’ कार्यक्रम में बाजार एवं अस्पताल स्वच्छता अभियान संपन्न

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: नेहरू युवा केंद्र, रतलाम ने व्यापारी संघ और जिला अस्पताल के सहयोग से “यह दिवाली माय भारत के साथ” कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें स्वच्छता अभियान को लेकर विशेष जागरूकता फैलाई गई। इस आयोजन का उद्देश्य स्वच्छता और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना था। बाजार में स्वच्छता अभियानबाजार क्षेत्र में स्वच्छता अभियान का आयोजन जिला युवा अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव के निर्देशन में किया गया। इसमें व्यापारी संघ के समन्वय से सफाई के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अरुण जैन, कुशल राजपूत, युवराज देवड़ा, मुकेश जैन, सुफियान, आकाश अग्रवाल, हार्दिक अग्रवाल, मुकेश जी जैन और आदित्य तिवारी सहित कई युवा कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अस्पताल में स्वच्छता अभियानदूसरी ओर, जिला अस्पताल के समन्वय में आयोजित अभियान में युवाओं ने अस्पताल परिसर की स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाई। इसमें नितिन बैरागी, हिमांशु चौहान, आदित्य चौहान, तोहिद खान, धर्मेंद्र नेक, और विकास जाट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें अस्पताल के आरएमओ अभिषेक सर का विशेष सहयोग भी प्राप्त हुआ। केंद्र के सौरभ श्रीवास्तव ने बताया आगे भी इसी तरह के समन्वय और प्रयासों के माध्यम से समाज में स्वच्छता और एकता की भावना को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दी और इस पर्व को स्वच्छता और समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ मनाने का संकल्प लिया।

Ratlam News: अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा के रतलाम जिलाध्यक्ष पद पर भारतसिंह गुर्जर की नियुक्ति

रतलाम- पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा मध्यप्रदेश द्वारा रतलाम जिले में भारतसिंह गुर्जर को जिला अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। जावरा के दाहखेड़ा निवासी भारतसिंह गुर्जर परवलिया पंचायत से सरपंच है। यह नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष सोनू गुर्जर (पहलगांव) के आदेश पर की गई है। जिनका कार्यकाल आगामी चुनाव सम्मपन तक प्रभावी रहेगा। यह नियुक्ति समाज सेवा में उनके योगदान और गुर्जर समाज के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए की गई है। इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र सौंपा गया। जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विधायक रामकिशोर दोगने, प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्रसिंह पटेल सहित युवा महासभा के पदाधिकारी व गुर्जर समाज के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में रतलाम जिले के साथ ही प्रदेश के 39 जिलों की कार्यकारिणी का गठन किया गया। नियुक्ति के अवसर पर समाज के वरिष्ठ जनों और स्थानीय नेताओं ने उनका स्वागत किया। स्वागत करने वालों में अरुण गुर्जर, सोहन गुर्जर, ईश्वरसिंह गुर्जर, राहुल गुर्जर, नागदा से कांग्रेस नेता विशाल गुर्जर, किसान यूनियन मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक गुर्जर और लखन मकवाना आदि शामिल थे। सभी ने भारत सिंह के उज्जवल भविष्य और समाज के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दी। अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा के इस निर्णय का स्वागत करते हुए उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने विश्वास जताया कि श्री भारत सिंह समाज की प्रगति और युवाओं के हित में अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएंगे।

Dhanteras2024: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता लक्ष्मी के लिए भोग रेसिपी

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Dhanteras2024:  धनतेरस का पर्व हर साल दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है, जिससे दीपावली की शुरुआत होती है। इस वर्ष धनतेरस का पर्व मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन को लेकर लोगों के मन में शुभ मुहूर्त और तिथि को लेकर कई सवाल रहते हैं। यहां जानिए धनतेरस की पूजा तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता लक्ष्मी के भोग के बारे में। धनतेरस 2024 की तिथि और शुभ मुहूर्तज्योतिषाचार्य के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत मंगलवार, 29 अक्टूबर को सुबह 10:31 बजे से होगी और यह बुधवार, 30 अक्टूबर दोपहर 1:15 बजे तक रहेगी। चूंकि धनतेरस की पूजा शाम को होती है, इसलिए धनतेरस 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।  धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:31 बजे से 8:13 बजे तक रहेगा। धनतेरस पूजा विधिधनतेरस के दिन शाम के समय कुबेर देवता के साथ माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर को पूजास्थल पर स्थापित करें। दीप जलाकर उन्हें फल और फूल अर्पित करें और उनका प्रिय भोग लगाएं। पूजा के दौरान “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। धनतेरस के लिए विशेष भोग रेसिपीमाता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए धनतेरस के दिन मखाने और दूध की खीर का भोग लगाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए मखाने, दूध, चीनी, ड्राई फ्रूट्स और इलायची पाउडर का उपयोग करें।

Diwali 2024 Date: 31 अक्टूबर या 1 नवंबर? जानें महालक्ष्मी पूजा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Diwali 2024 Date: इस साल दिवाली के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति है क्योंकि अमावस्या तिथि दो दिन, 31 अक्टूबर और 1 नवंबर, को पड़ रही है। ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि लक्ष्मी पूजा कब करनी चाहिए।  दिवाली की सही तारीखज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक जोशी के अनुसार हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस साल अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर 2024 को दोपहर 3:52 बजे शुरू होगी और 1 नवंबर 2024 को शाम 5:14 बजे समाप्त होगी।  वेदिक पंचांग के अनुसार, व्रत और त्योहारों को उदया तिथि के आधार पर मनाया जाता है। हालांकि, दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद से लेकर रात के समय तक रहता है। इस साल, ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 31 अक्टूबर को प्रदोष काल और निशिता काल (मध्यरात्रि) में लक्ष्मी पूजा करना सबसे शुभ रहेगा।  लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्तज्योतिषियों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2024 को लक्ष्मी पूजा के लिए यह शुभ मुहूर्त होंगे:  – प्रदोष काल: शाम 5:36 से रात 8:11 तक  – वृषभ लग्न: शाम 6:25 से रात 8:20 तक  – लक्ष्मी पूजा का निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से 12:31 तक  इस दिन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:25 से 7:13 के बीच माना गया है। इस 48 मिनट के दौरान लक्ष्मी पूजन करना सबसे अधिक शुभ होगा।  क्यों 31 अक्टूबर है सही तिथि?ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर से शुरू हो रही है और लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल और निशिता काल में ही आता है। इसलिए 31 अक्टूबर को दिवाली मनाना और लक्ष्मी पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। 1 नवंबर को निशिता काल उपलब्ध नहीं है, जिससे इस दिन पूजा करना शुभ नहीं माना जाएगा।  (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के आधार पर है। इसे किसी भी प्रकार से उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करे।)

Ratlam News: जनजाति गौरव दिवस पर जनजाति विकास मंच ने पटेल सम्मेलन आयोजित किया

सैलाना- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: जनजाति विकास मंच, सैलाना विकास खंड द्वारा गांव के पटेलों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को भव्यता से मनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मांगीलाल खराड़ी ने भगवान बिरसा मुंडा और जनजातीय परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए उनकी महानता का विस्तार से वर्णन किया। इस अवसर पर सैलाना के अनुविभागीय अधिकारी मनीष जैन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने भारत माता, भगवान बिरसा मुंडा और टंट्या मामा के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने पटेलों के अधिकारों पर चर्चा करते हुए गांवों में शांति और एकता बनाए रखने की अपील की। L जिला सह कार्यवाहक मोहन राणा ने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। इसके अलावा, जिला संयोजक मांगीलाल खराड़ी ने जनजाति गौरव दिवस के महत्व को रेखांकित किया। तहसील संयोजक कैलाश भगत ने अपने वक्तव्य में ग्रामीणों को नशामुक्ति और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए जागरूक किया। पेसा जिला समन्वयक दिनेश वसुनिया ने पेसा कानून की विशेषताओं, रुढ़िवादी परंपराओं और पारंपरिक ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने गांवों में कानून की जागरूकता बढ़ाने के लिए पटेलों से आग्रह किया। कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के सैलाना ब्लॉक समन्वयक रतनलाल चरपोटा ने किया, जबकि ग्राम पंचायत कागसी के सरपंच समरथ भाभर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए पटेलों ने हिस्सा लिया।

Guru Pushya Nakshatra 2024: दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र में अमृत सिद्धि का योग, शुभ मुहूर्त में इन चीजों की खरीदारी से होगा लाभ

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Guru Pushya Nakshatra 2024: इस वर्ष 24 अक्टूबर 2024, गुरुवार को दिवाली से पहले गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है, जो हर प्रकार की खरीदारी और निवेश के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस दिन अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग भी विद्यमान रहेगा, जो इसे और भी शुभ बनाता है। इस नक्षत्र को खास तौर पर सोना, चांदी और वाहन खरीदने के लिए उत्तम माना जाता है।  ज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक जोशी के अनुसार 2024 में गुरु पुष्य नक्षत्र 24 अक्टूबर कार्तिक कृष्ण अष्टमी गुरुवार प्रातः सूर्योदय पूर्व 6:15 से प्रारम्भ होकर दिनांक 25 अक्टूबर शुक्रवार को प्रातः 7:40 तक रहेगा। गुरुवार को प्रातः 06:42 से 08:07 तक, प्रातः 09:32 से दोपहर 03:12, (चल, लाभ, अमृत) सायं 16:37 से 07:37 के मध्य बही खाता लाने का व चांदी – सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त रहेगा। क्या खरीदें गुरु पुष्य नक्षत्र में?ज्योतिष के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में सोना, चांदी, वाहन, लोहा, वस्त्र, और बहीखाते खरीदने का विशेष महत्व है। इसका संबंध गुरु (बृहस्पति) और शनि ग्रह से होता है, इसलिए इस नक्षत्र में की गई खरीदारी लंबे समय तक लाभकारी सिद्ध होती है। साथ ही, इस दिन नए व्यापार की शुरुआत या बड़े निवेश भी सफलता और समृद्धि लेकर आते हैं। अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्वगुरु पुष्य नक्षत्र के साथ अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का बनना इस दिन को और भी खास बनाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस प्रकार के योगों में किया गया कार्य विशेष रूप से सफल और शुभ होता है। अगर आप नया व्यापार शुरू करना चाह रहे हैं, तो यह दिन इसके लिए बेहद अनुकूल है। साथ ही, वाहन, संपत्ति या घर खरीदना भी लाभकारी होगा। दीपावली महापर्व के अवसर पर गुरु पुष्य नक्षत्र 24 अक्टूबर 2024 को होने वाले शुभ मुहूर्त के बारे में है। चौघड़िया मुहूर्त, स्थिरलम मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और राहु काल का विवरण निम्न है-चौघड़िया मुहूर्त:शुभ: प्रातः 06:24 से 07:50चर: सुबह 10:41 से 12:07लाभ: दोपहर 12:07 से 01:33अमृत: दोपहर 01:33 से 02:59शुभ: शाम 04:24 से 05:50अमृत: शाम 05:50 से 07:24चर: शाम 07:24 से 08:59स्थिरलम मुहूर्त:वृश्चिक: प्रातः 08:11 से 10:27कुम्भ: दोपहर 02:19 से 03:52वृषभ: रात 07:03 से 09:01अभिजीत मुहूर्त:सुबह 11:44 से 12:30 तकराहु काल:दोपहर 01:33 से 02:59 तकयह मुहूर्त विशेष रूप से नए वस्त्र क्रय करने हेतु सबसे श्रेष्ठ माना गया है। कौन सी राशियों के लिए है खास दिन?इस विशेष संयोग का कुछ राशियों पर विशेष प्रभाव रहेगा। तुला, मकर, और वृषभ राशियों के जातकों को भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे उन्हें सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होगी। इनके लिए यह समय किसी भी बड़े निवेश या नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम है। गुरु पुष्य नक्षत्र में क्यों करे खरीदारीअगर आप दिवाली (Diwali) से पहले अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं, तो गुरु पुष्य नक्षत्र 2024 का दिन सबसे अनुकूल समय है। चाहे आप सोना-चांदी खरीदें, या फिर किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करें, यह समय आपके लिए शुभ और फलदायी सिद्ध होगा। (Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। पब्लिक वार्ता न्यूज नेटवर्क इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करे।)

Ratlam News: महालक्ष्मी मंदिर में पुजारी को लेकर विवाद, आरोप; सूतक के दौरान मंदिर में पहुंचा, शुध्दिकरण कर खोला मंदिर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: रतलाम के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पंडित संजय पुजारी द्वारा सूतक के दौरान पूजा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने इस कृत्य का विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद रविवार रात को प्रशासन ने मंदिर का ताला लगा दिया और सोमवार सुबह 11 घंटे बाद मंदिर का ताला खोला गया। प्रशासन ने संजय पुजारी को हटाकर सत्यनारायण व्यास को अस्थायी पुजारी नियुक्त कर दिया। शहर के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर को हर साल दिवाली पर करोड़ों रुपए के नोटों और जेवरों से सजाया जाता है। इस वर्ष भी सजावट का काम शुरू हो चुका है, लेकिन पंडित संजय पुजारी के बड़े भाई के निधन से सूतक के चलते उन्हें पूजा से दूर रहने का कहा गया था। फिर भी उन्होंने पूजा की, जिससे श्रीमाली समाज में नाराजगी फैल गई। गौरतलब है की श्रीमाली ब्राह्मण समाज लक्ष्मी जी को कुलदेवी के रूप में पूजता है। पुजारी को समझाईश देने आए बाद भी उसने मंदिर में प्रवेश करना नहीं बंद किया। जिसके बाद समाज के लोग आक्रोशित होकर मंदिर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन की मौजूदगी में ताला लगवा दिया। समाज का विरोध और शुद्धिकरणश्री माली ब्राह्मण समाज ने मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और गंगाजल व गोमूत्र से शुद्धिकरण किया। समाज के अनुसार, सूतक के दौरान पूजा नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन पुजारी संजय ने नियमों का पालन नहीं किया। नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय की मौजूदगी में विवाद के समाधान के लिए पुजारी को बदला गया और सजावट का काम जारी रखने का निर्णय लिया गया। सजावट की जिम्मेदारी और सुरक्षामंदिर में दिवाली के दौरान सजावट के लिए भक्त बड़ी मात्रा में रुपए और आभूषण दान कर रहे हैं। विवाद के बाद लोगों ने चिंता जताई कि अब सजावट की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सजावट का कार्य रुकेगा नहीं और पुराने पुजारी के सहयोगी इसे पूरा करेंगे। साथ ही, मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के लिए पुलिस और पटवारियों की तैनाती की गई है, ताकि दान की गई धनराशि और आभूषणों का सही रिकॉर्ड रखा जा सके। अस्थायी रूप से नया पुजारी नियुक्ततहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि फिलहाल मंदिर में पटवारियों को तैनात किया गया है, जो अलग-अलग समय पर मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर के पुजारी परिवार में सूतक समाप्त होने के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार संजय पुजारी के मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर में दीपावली पर होने वाली सजावट को लेकर प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों को शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

Mahalaxmi Temple Ratlam: विदेशों से आ रहे फोन, हमारा “धन भी चढ़ाना है!”, हीरे – जवाहरातों की सजावट हुई शुरू

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Mahalaxmi Temple Ratlam: विश्व प्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी मंदिर दीपोत्सव के अवसर पर भक्तों द्वारा लाई जा रही स्वर्ण आभूषणों और नोटों की श्रृंगार सामग्री से सजने के लिए तैयार है। मंदिर में कार्यकर्ता नोटों की लड़ियां बनाते नजर आएंगे। जहां 10, 20, 50 से लेकर 2000 के नोट की लड़ियां बनाई जा रही है, जो मंदिर में सजने के लिए तैयार है। भक्तजन बड़ी संख्या में माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में पहुंच रहे हैं, जहां हर साल की तरह इस बार भी महालक्ष्मी का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसमें मंदिर परिसर में 29 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही पुलिस बल और पटवारियों की भी तैनाती की गई है, ताकि मंदिर में लाई जाने वाली सामग्री और दान-दक्षिणा का सही हिसाब रखा जा सके। इस बार मंदिर में चढ़ावे के लिए दुबई और अमेरिका में रह रहे भारतीय भी उत्सुक है। वहां से भक्त रतलाम में अपने रिश्तेदारों से फोन पर संपर्क कर रहे है। उन्हें जानना है की वे किस माध्यम से अपनी धनराशि मां लक्ष्मी के चरणों में साज सज्जा के लिए दे सकते है। हालांकी मंदिर में फिलहाल बैंक एकाउंट व अन्य डायरेक्ट माध्यम से राशि व आभूषण लेने की कोई सुविधा नहीं है। जिससे विदेश में रहने वाले भक्त अपनी धन सामग्री चढ़ा नहीं सकते है। गौरतलब है की मध्यप्रदेश के रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर दिवाली पर नोट, सोना – चांदी, हीरे – जवाहरातों की अपनी सजावट के लिए विश्व प्रसिद्ध है। लोग दूर – दूर से यहां दर्शन के लिए आते है। मान्यता है की यहां धन चढ़ाने से उसे वापस प्रसाद के रूप में ले जाने से घर व व्यापार – व्यवसाय में धन की वृद्धि होती है। भक्तों ने स्वर्ण आभूषण और नोट किए दानमंदिर में भक्त अपनी ओर से स्वर्ण आभूषणों और नोटों की गड्डियां मां के श्रृंगार के लिए भेंट कर रहे हैं। रतलाम के अलावा इंदौर, नागपुर, मुंबई, झाबुआ आदि अन्य राज्यों व शहरों से आए भक्तों ने आभूषणों और नोटों की गड्डियां दान की है। अब तक करीब 400 भक्तों ने महालक्ष्मी के श्रृंगार के लिए नोटों की गड्डियां सौंपी, जिसके बदले उन्हें मंदिर प्रशासन की ओर से टोकन प्रदान किया गया। यह टोकन दिवाली के बाद दिखाने पर ही श्रृंगार सामग्री भक्तों को वापस सौंपी जाएगी। सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने की विशेष व्यवस्थामंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है। मंदिर प्रशासन ने हर आने-जाने वाले भक्तों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 29 सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की है। इसके साथ ही, प्रशासन की ओर से पटवारियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है ताकि मंदिर में आई सामग्री और दान-दक्षिणा का पूरा रिकॉर्ड रखा जा सके। तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 6 लाख रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया है। बाहर से रंगरोगन का काम जल्द करवा लिया जाएगा। जीर्णोद्धार का कार्य दीपोत्सव के बाद शुरू किया जाएगा, ताकि भक्तों को किसी तरह की असुविधा न हो। नोट कैसे जमा कराएंमहालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव का आयोजन हर साल की तरह इस बार भी धूमधाम से मनाया जाएगा। धनतेरस से शुरू होने वाले इस उत्सव में मंदिर को सजाने का काम भक्तों द्वारा लाई गई नोटों की गड्डियों से किया जाएगा। मंदिर के पुजारी ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा 28 अक्टूबर तक श्रृंगार सामग्री स्वीकार की जाएगी। भक्तों को अपने साथ श्रृंगार सामग्री के अलावा नाम, पता, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य होगा ताकि रजिस्टर में उनकी एंट्री की जा सके।

Karwa Chauth 2024: कल है करवा चौथ, जानें कब निकलेगा चंद्रमा और पूजन का शुभ मुहूर्त

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Karwa Chauth 2024 Date and Significance:कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला करवा चौथ का व्रत इस साल 20 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। यह व्रत सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को और भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया था। व्रत के दिन भगवान गणेश, माता गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। करवा चौथ 2024 शुभ मुहूर्त (Karwa Chauth 2024 Shubh Muhurat): हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को सुबह 6:46 बजे होगी और इसका समापन 21 अक्टूबर को सुबह 4:16 बजे होगा। पूजा के लिए मुख्य रूप से दो शुभ मुहूर्त मिलेंगे:– अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 तक।– विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 तक।  चंद्रोदय का समय (Karwa Chauth Moonrise Time):  इस साल करवा चौथ पर चंद्रमा का उदय शाम 7:54 बजे होगा। करवा चौथ की पूजन विधि (Karwa Chauth Pujan Vidhi)– सूर्योदय से पहले स्नान करके पूजा घर की सफाई करें।  – सास द्वारा दिए गए भोजन का सेवन करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।  – शाम को एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें और करवे रखकर पूजा प्रारंभ करें।  – चंद्रोदय से एक घंटा पहले पूजा शुरू करें और करवा चौथ की कथा सुनें।  – चंद्रमा के दर्शन के बाद छलनी से चंद्र दर्शन करके अर्घ्य दें। फिर सास को थाली में मिष्ठान, फल और उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। करवा चौथ पर विशेष सावधानियां (Karwa Chauth Precautions):– पूजा के बाद विवाहित महिलाओं में करवा बांटें।  – दिन भर निराहार रहकर गणेश मंत्र का जाप करें।  – चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करने के साथ गणेश जी और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य दें।  – नमक युक्त भोजन से दूर रहें।  – व्रत को कम से कम 12 या 16 साल तक रखें और इसके बाद उद्यापन करें।  करवा चौथ व्रत से जुड़ी इन परंपराओं और नियमों का पालन करके महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ व्रत की कथा, क्या है इसके पीछे का रहस्य?

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ का पर्व सनातन धर्म में खास महत्व रखता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस साल करवा चौथ 20 अक्टूबर 2024, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिनें माता करवा और चंद्रमा की पूजा करती हैं और करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं। कहा जाता है कि इस कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। यहां जानिए करवा चौथ व्रत की पूरी कथा। करवा चौथ व्रत की कथा :प्राचीन समय में एक ब्राह्मण के सात पुत्र और एक पुत्री थी, जिसका नाम करवा था। करवा का विवाह एक योग्य ब्राह्मण के साथ हुआ था। एक दिन कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को करवा अपने ससुराल में थी। उस दिन उसने पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रखा। शाम के समय, जब चंद्रमा निकलने से पहले करवा चांद का इंतजार कर रही थी, तभी उसके भाइयों ने उसकी भूख देखकर उसे भोजन करने का आग्रह किया। करवा ने अपने भाइयों से कहा कि वह चंद्रमा के दर्शन के बाद ही भोजन करेगी, लेकिन उसके भाइयों से उसकी भूख बर्दाश्त नहीं हुई। इसलिए उन्होंने एक चाल चली। भाइयों ने पीपल के पेड़ के पीछे एक दीपक जलाकर छलपूर्वक करवा से कहा, “देखो, चांद निकल आया है, अब तुम अपना व्रत तोड़ सकती हो।” करवा ने बिना ध्यान दिए, उनके कहे अनुसार चंद्रमा के दर्शन कर व्रत तोड़ दिया और भोजन कर लिया। व्रत तोड़ते ही करवा का पति बीमार हो गया और उसका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। करवा को एहसास हुआ कि उसने चंद्रमा के उदय से पहले व्रत तोड़ा था, जो व्रत के नियमों का उल्लंघन था। उसने अपने गलती के लिए पश्चाताप किया और अगले वर्ष फिर से पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रखा। इस बार उसने सच्चे मन और श्रद्धा से व्रत किया और चंद्रमा के दर्शन कर विधिपूर्वक अपना व्रत तोड़ा। इस व्रत के प्रभाव से उसका पति स्वस्थ हो गया और उन्हें सुख-समृद्धि प्राप्त हुई। तब से यह मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं।करवा चौथ की यह कथा स्त्रियों को पति की दीर्घायु, प्रेम और विश्वास का प्रतीक बनाती है, और इसे पूर्ण निष्ठा से मनाने की परंपरा आज भी चलती आ रही है। करवा चौथ व्रत का महत्वकरवा चौथ व्रत न केवल पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को भी बढ़ाता है। इस व्रत को करने से रिश्तों में मजबूती आती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विवाहित महिलाएं इस व्रत को अपने सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि के लिए रखती हैं। यह व्रत महिलाओं को संपूर्ण जीवन में सौभाग्यशाली बनाता है और उनके जीवन में खुशहाली लाता है।