PM Narendra Modi Diwali 2024: प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार 11वीं बार जवानों के बीच मनाई दिवाली, कच्छ में बीएसएफ, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के जवानों संग बिताए खास पल

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। PM Narendra Modi Diwali 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल भी अपनी परंपरा को कायम रखते हुए दिवाली जवानों के बीच मनाई। इस बार वे गुजरात के कच्छ पहुंचे, जहां बीएसएफ, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के जवानों के साथ इस खास अवसर को साझा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi in Diwali) ने जवानों को मिठाई बांटी और उनके साथ उत्सव मनाया। यह लगातार 11वां वर्ष है जब प्रधानमंत्री ने जवानों के साथ दिवाली मनाई है, उनके इस कदम ने सैनिकों (Indian Army) के बीच आत्मीयता का विशेष संचार किया है। पीएम मोदी पिछले 11 सालों से हर दिवाली के मौके को खास बना देते हैं. एक-दो बार छोड़ दें तो बीते 8-10 सालों में पीएम मोदी का दीपावली त्यौहार दिल्ली से दूर ही मनता है। पीएम मोदी ने थल, जल और वायु तीनों सेनाओं को कच्छ से बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की कच्छ के क्रीक क्षेत्र में लक्की नाला में बीएसएफ, सेना, नौसेना और वायु सेना के हमारे बहादुर कर्मियों के साथ दिवाली मनाकर खुशी हुई। यह क्षेत्र चुनौतीपूर्ण भी है और दुर्गम भी। दिन अत्यधिक गर्म होते हैं और ठंड भी पड़ती है। क्रीक क्षेत्र में अन्य पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी हैं। हमारे सुरक्षाकर्मी दुर्गम स्थानों पर भी डटे रहते हैं और हमारी रक्षा करते हैं। हमें उन पर बहुत गर्व है। हमारा संकल्प है नेशन फर्स्ट, भारतीय सेना के जवानों के बीच दिवाली मनाता हूं तो मेरी दिवाली की मिठास कई गुना बढ़ जाती है। दुश्मन जब भारतीय सेना को देखता है तो उसे उसके मंसूबों का अंत दिखता है। इस दौरान महिला सैनिक जवानों ने पीएम के सामने देशभक्ति गीत भी प्रस्तुत किए। मोदी ने सभी को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए, अपने हाथों से मिठाई खिलाई। मोदी की यह विशेष परंपरा 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से जारी है, जब वे पहली बार सियाचिन पहुंचे थे। जानिए कब और कहां गए मोदी – 1. 2014 – प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार सियाचिन पहुंचे और वहां तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाई और उनका हौसला बढ़ाया।   2. 2015 – इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी अमृतसर में जवानों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे थे। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाई और भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस की सराहना की। 3. 2016 – पीएम मोदी ने लगातार तीसरे साल हिमाचल प्रदेश में चीन बॉर्डर के पास ITBP के जवानों के बीच दिवाली का जश्न मनाया। उन्होंने सीमावर्ती इलाके में तैनात जवानों को मिठाई खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया। 4. 2017 – इस वर्ष मोदी जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर पहुंचे और वहां सैनिकों के साथ दिवाली मनाई। यह दौर उन सैनिकों के लिए एक यादगार पल बन गया, जिन्होंने प्रधानमंत्री को अपने साथ पाया। 5. 2018 – मोदी दिवाली के मौके पर उत्तराखंड के केदारनाथ पहुंचे और वहां के हरशिल गाँव के निकट तैनात भारतीय सशस्त्र बल और ITBP के जवानों के साथ दिवाली मनाई। 6. 2019 – प्रधानमंत्री इस साल जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र पहुंचे और LoC पर तैनात सैनिकों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने सीमा की रक्षा में जुटे जवानों के साहस की सराहना की। 7. 2020 – इस बार पीएम मोदी राजस्थान के जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्ट पर तैनात सैनिकों के बीच दिवाली मनाने पहुंचे। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाई और भारतीय सीमा की सुरक्षा को लेकर उनकी भूमिका की प्रशंसा की। 8. 2021 – प्रधानमंत्री मोदी जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि वे एक प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि सैनिकों के परिवार के सदस्य के तौर पर आए हैं। 9. 2022 – मोदी इस वर्ष कारगिल में सैनिकों के साथ दिवाली मनाने पहुंचे। उन्होंने कारगिल युद्ध में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और वर्तमान में सीमा पर तैनात जवानों के साथ यह पर्व मनाया। 10. 2023 – इस साल प्रधानमंत्री हिमाचल प्रदेश के लेपचा पहुंचे और वहां जवानों के साथ दिवाली का जश्न मनाया। 11. 2024 – प्रधानमंत्री ने गुजरात के कच्छ में बीएसएफ, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के जवानों के साथ दिवाली मनाई। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाई और उनके साथ बातचीत कर देश के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इन दौरों से न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि देशवासियों को एकता, सुरक्षा और देशभक्ति के प्रति सजग रहने का संदेश भी दिया है। उनके इस विशेष प्रयास ने हर वर्ष जवानों को नई ऊर्जा दी है और देश के नागरिकों को गर्व का अनुभव कराया है।

MP News: मध्यप्रदेश के इस शहर में मुर्दे नहीं दीपक जलाते है; दिवाली पर फुलझड़ियों व रंगोलियों से सजता है श्मशान, जानिए क्या है वजह

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। MP News: मध्यप्रदेश के रतलाम में दिवाली से एक दिन पहले श्मशान दीपक से जगमगाते हुए दिखेगा। यहां रंगोलियां बनाई जाती है, आतिशबाजियां होती है। आमतौर पर श्मशान में जाने से लोग कतराते है, वो भी किसी खास त्योहार वाले दिन। लेकिन यहां इसके बिल्कुल उल्टा है। शहर का प्रसिद्ध त्रिवेणी मुक्तिधाम बुधवार शाम को दीपदान के आयोजन से जगमगा उठा। पूरे परिसर को रंगोली और दीपों से सजाया गया, जहां बच्चों ने फुलझड़ियां जलाकर और लोगों ने आतिशबाजी करके इस विशेष मौके को मनाया। महिलाओं ने ढोल की थाप पर पारंपरिक नृत्य कर माहौल को उल्लासमय बना दिया। त्रिवेणी मुक्तिधाम के अलावा शहर के भक्तन की बावड़ी और जवाहर नगर मुक्तिधाम में भी दीपों का यह उजाला देखने को मिला। आयोजन को करने वाले संस्था के प्रमुख सदस्य गोपाल सोनी ने बताया, “दीपावली का यह 5 दिवसीय पर्व न केवल हमारे घर-आंगन को रोशन करता है, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भी एक माध्यम है। हम मुक्तिधाम में दीप जलाकर, रंगोली सजाकर, और आतिशबाजी कर पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। इससे हम यह प्रार्थना करते हैं कि यदि हमारे पूर्वज अंधकार में हों, तो वे प्रकाश की ओर जाएं।” सोनी के अनुसार, इस परंपरा का आरंभ 2006 में हुआ था, और अब यह हर वर्ष बड़े उत्साह से मनाई जाती है। मोनिका शर्मा, जो अपने परिवार के साथ इस अवसर पर आईं, ने बताया, “पहले मुक्तिधाम में आने से लोग हिचकते थे, लेकिन अब यह परंपरा का हिस्सा बन गया है और सभी लोग इसमें शामिल होकर दीपदान करते हैं।” इस आयोजन का धार्मिक महत्व भी है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर किए जाने वाले इस दीपदान का उद्देश्य यमराज से यमयातना से मुक्ति प्राप्त करना है। गोपाल सोनी ने बताया, “नरक चतुर्दशी के इस दिन यमराज को दीपदान करने का विधान है, जिससे हमारे पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है। माना जाता है कि राजा बलि ने इस दिन का वरदान मांगा था कि जो व्यक्ति इस दिन यमराज को दीपदान करेगा, वह दुखों से मुक्त रहेगा।” पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्वजों की प्रसन्नता से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और पितृदोष भी समाप्त हो जाता है। रतलाम में इस अद्वितीय आयोजन ने न केवल पूर्वजों की स्मृति को जीवित रखा है बल्कि समाज में आस्था और परंपरा के महत्व को भी उजागर किया है।

Ratlam’s Lakshmi Temple : MP के इस शहर में है कुबेर का खजाना! ; प्रसाद में बंटते है कड़क नोट और गहने

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam’s Lakshmi Temple: आपसे कोई पूछे की कुबेर का खजाना कहां है? तो आपको जवाब नहीं मिलेगा। लेकिन मध्यप्रदेश के रतलाम शहर का एक ऐसा मंदिर है जिसे आप देख ले तो आपको आपका जवाब जरूर मिल जाएगा। रतलाम के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर दिवाली पर कुछ ऐसे ही नजर आता है। इस मंदिर में इतना धन – दौलत देखकर हर कोई इसे कुबेर के खजाने से ही जोड़ता है। लेकिन असल में यह कुबेर का खजाना नहीं बल्कि भक्तों का धन है जो महालक्ष्मी को अर्पण किया जाता है। दरअसल दीपावली (Diwali) के पर्व पर रतलाम का ऐतिहासिक महालक्ष्मी (Ratlam Lakshmi Mandir) मंदिर देशभर में अनूठा आकर्षण बना हुआ है। यहां महालक्ष्मी की मूर्ति को सजाने के लिए भक्तों द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये के नोट और आभूषणों से पूरा मंदिर परिसर कुबेर के खजाने की तरह जगमगा उठा है। यह देश का इकलौता मंदिर है जहां दीपावली पर भक्तों द्वारा दिए गए गहनों और नकदी से सजावट की जाती है। नोटों और आभूषणों की अद्भुत सजावटमंदिर में इस वर्ष दीपावली सजावट की शुरुआत 14 अक्टूबर, शरद पूर्णिमा से ही हो चुकी थी। विभिन्न मूल्यवर्ग के नोट, 1 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नए-नए नोट, मंदिर के हर कोने में सजाए गए हैं। ये नोट और आभूषण भक्तों द्वारा स्वेच्छा से श्रद्धा के साथ दिए जाते हैं। मंदसौर, नीमच, इंदौर, उज्जैन, नागदा, खंडवा, देवास सहित राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, जम्मू कश्मीर आदि तक से भक्तजन धन और आभूषणों के साथ मंदिर में माता महालक्ष्मी का श्रृंगार करने पहुंचते हैं। श्रद्धालु अपने घरों की तिजोरी से नकदी और गहने लेकर मंदिर में सजावट के लिए जमा कराते हैं। यहां तक कि कई भक्त तो 5 लाख रुपये तक नकद भी श्रद्धापूर्वक रखते हैं। इन नोटों से मंदिर के लिए विशेष वंदनवार बनाए जाते हैं, जिससे पूरा गर्भगृह कुबेर के खजाने जैसा दिखाई देने लगता है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाममंदिर में इतने विशाल खजाने की सुरक्षा के लिए 4 गार्ड और सीसीटीवी कैमरे तैनात हैं। साथ ही, मंदिर के निकट स्थित माणक चौक पुलिस थाना 24 घंटे मंदिर की सुरक्षा में मुस्तैद रहता है। भक्तजनों की संपत्ति की पवित्रता बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन हर प्रकार का एहतियात बरतता है। जितने विश्वास से भक्त यहां सजावट के लिए धन व आभूषण अर्पित करते है, उतने ही विश्वास से लेने भी आते है। हैरानी की बात है की आज तक कभी किसी के धन वापसी करते समय कोई विघ्न नहीं आया है। श्रद्धालुओं के नोट और आभूषण सुरक्षित, रजिस्टर में एंट्री के साथ टोकनमंदिर प्रशासन भक्तों की संपदा की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रबंध करता है। प्रत्येक भक्त के नोट और आभूषणों का नाम, पता और मोबाइल नंबर एक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके साथ ही, भक्त का पासपोर्ट आकार का फोटो भी लगाया जाता है और टोकन देकर यह संपत्ति उन्हें बाद में सुरक्षित रूप से लौटाई जाती है। यह व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि आज तक किसी भी भक्त की संपदा में कोई हेरफेर नहीं हुआ है। दीपावली के बाद प्रसाद में लौटाए जाएंगे गहने और नकदीसबसे विशेष और रहस्यमय पहलू यह है कि दीपावली का पर्व समाप्त होते ही भाई दूज के दिन भक्तों को उनका धन और गहने “प्रसाद” के रूप में लौटा दिए जाते हैं। मान्यता है कि जिनके धन से महालक्ष्मी का श्रृंगार होता है, उनके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। दो शताब्दियों पुरानी परंपरामंदिर के कुलदीप त्रिवेदी के अनुसार लगभग 200 वर्ष पहले राजा रतन सिंह ने अपने राज्य की समृद्धि और प्रजा की खुशहाली के लिए यह परंपरा शुरू की थी। उन्होंने अपनी संपदा पांच दिनों तक देवी महालक्ष्मी के चरणों में अर्पित करने का संकल्प लिया, जो आज तक निभाया जा रहा है। इसी क्रम में इस मंदिर में महालक्ष्मी के आठ स्वरूपों—अधी लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, लक्ष्मीनारायण, धन लक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी—की प्रतिमाएं स्थापित हैं। वास्तविक कुबेर के खजाने जैसा भव्य रूपदीपावली पर पूरे सप्ताह तक यह मंदिर वैभव और आस्था का अनोखा प्रतीक बन जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां दिए गए धन से महालक्ष्मी के आशीर्वाद से उनका घर और जीवन समृद्धि से भर जाता है।

Festival Special Train: पश्चिम रेलवे ने त्‍योहारों में यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया

रतलाम- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Festival Special Trains: त्‍योहारी सीजन के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्‍या को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने उधना-कटिहार-उज्‍जैन स्‍पेशल, उधना-दानापुर-वडोदरा अनारक्षित स्‍पेशल, और उधना-प्रयागराज-उधना अनारक्षित स्‍पेशल ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया है। ये ट्रेनें यात्रियों की सुविधा के लिए एक-एक फेरे में चलेंगी। 1. उधना-कटिहार-उज्‍जैन स्‍पेशल (गाड़ी संख्‍या 09047/09048):गाड़ी संख्‍या 09047 उधना-कटिहार स्‍पेशल 01 नवंबर को उधना से रात 00:20 बजे रवाना होगी और 02 नवंबर को दोपहर 14:00 बजे कटिहार पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्‍या 09048 कटिहार से 02 नवंबर को शाम 17:00 बजे चलकर 03 नवंबर को रात 23:30 बजे उज्‍जैन पहुंचेगी। यह ट्रेन भरुच, वडोदरा, रतलाम, नागदा और उज्‍जैन सहित कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन में सेकंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच होंगे। 2. उधना-दानापुर-वडोदरा अनारक्षित स्‍पेशल (गाड़ी संख्‍या 09053/09054):गाड़ी संख्‍या 09053 उधना-दानापुर स्‍पेशल 31 अक्टूबर को सुबह 10:00 बजे उधना से रवाना होगी और अगले दिन 01 नवंबर को रात 23:30 बजे दानापुर पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्‍या 09054, 02 नवंबर को सुबह 04:00 बजे दानापुर से चलकर 03 नवंबर को दोपहर 12:00 बजे वडोदरा पहुंचेगी। इस ट्रेन का रतलाम, उज्‍जैन, बीना और कई अन्य स्टेशनों पर ठहराव रहेगा। इसमें 16 स्लीपर कोच होंगे जो पूरी तरह अनारक्षित होंगे। 3. उधना-प्रयागराज-उधना अनारक्षित स्‍पेशल (गाड़ी संख्‍या 09011/09012):गाड़ी संख्‍या 09011 उधना-प्रयागराज स्‍पेशल 31 अक्टूबर को सुबह 07:00 बजे उधना से रवाना होगी और अगले दिन 01 नवंबर को सुबह 09:15 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्‍या 09012, 01 नवंबर को दोपहर 12:30 बजे प्रयागराज से चलकर 02 नवंबर को शाम 16:05 बजे उधना पहुंचेगी। इस ट्रेन में 20 सामान्य श्रेणी के कोच होंगे जो पूरी तरह अनारक्षित होंगे। यात्रियों से अनुरोध है कि वे इन ट्रेनों के ठहराव और समय की अधिक जानकारी के लिए [www.enquiry.indianrail.gov.in](http://www.enquiry.indianrail.gov.in) पर विजिट करें।

Diwali 2024: जानें दिवाली की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजाविधि

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Diwali 2024 Date, Time, Muhurat and Poojavidhi: दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक माह की अमावस्या को धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल पंचांग भेद के कारण दिवाली दो दिनों तक मनाई जाएगी—31 अक्टूबर और 1 नवंबर को। दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा का खास महत्व होता है। जानिए दिवाली की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, और पूजाविधि। कब है दिवाली?पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 29 अक्टूबर को धनतेरस से हो चुकी है। इसके बाद 31 अक्टूबर को छोटी दिवाली और फिर दिवाली का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। कुछ स्थानों पर दिवाली 31 अक्टूबर को, तो कुछ जगहों पर 1 नवंबर को मनाई जाएगी। दिवाली के अगले दिन, 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 3 नवंबर को भाई दूज के साथ यह उत्सव समाप्त होगा। दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त– अमावस्या तिथि प्रारंभ: 31 अक्टूबर, दोपहर 3:52 बजे– अमावस्या तिथि समाप्त: 1 नवंबर, शाम 6:16 बजे– लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त:  – 31 अक्टूबर, शाम 5:36 बजे से शाम 6:16 बजे तक    – शाम 6:27 बजे से रात 8:32 बजे तक– निशिता काल पूजा:  – 31 अक्टूबर, रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक दिवाली पूजाविधि1. साफ-सफाई: दिवाली की पूजा से पहले घर की सफाई करें, विशेषकर ईशान कोण का ध्यान रखें, जिसे देवी-देवताओं का स्थान माना गया है।2. पूजा की तैयारी: लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें। साथ ही कुबेर देवता की तस्वीर भी लगाएं।3. कलश की स्थापना: चौकी पर जल से भरे कलश में कौड़ियां, सिक्के, सुपारी, और गंगाजल डालें। कलश पर स्वास्तिक का निशान बनाकर मोली लपेटें और आम के पत्ते लगाएं।4. लक्ष्मी पूजन: मां लक्ष्मी के सामने लाल कपड़े की थैली में 5 कौड़ी, 5 गोमती चक्र, हल्दी की गांठ रखें। पूजन के बाद इसे तिजोरी में रखें।5. दीप जलाना: गणेशजी, लक्ष्मी जी, और कुबेर देवता के सामने घी का 5 या 11 दीपक जलाएं। घर के कोनों में सरसों के तेल के दीपक लगाएं।6. मंत्र जाप और पाठ: गणेश अथर्वशीर्ष और श्री सूक्तम का पाठ करें और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा समाप्त करें। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारी परंपरागत मान्यताओं पर आधारित है। इसे अपनाने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Local For Vocal: MP का ये IPS अधिकारी ठेले पर मिट्टी के दीपक लेने पहुंचा, अब हो रही वाह वाही!

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Local For Vocal:  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के “वोकल फॉर लोकल” अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रतलाम एसपी अमित कुमार ने दीपावली (Diwali) के अवसर पर स्थानीय विक्रेताओं से खरीदारी की मिसाल पेश की। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए शहर का दौरा करते हुए एसपी अमित कुमार (IPS Amit Kumar) महालक्ष्मी मंदिर क्षेत्र माणक चौक पहुंचे, जहां उन्होंने सड़क किनारे दीपक बेच रही महिला से खरीदारी की। एसपी अमित कुमार के साथ माणकचौक थाना प्रभारी सुरेन्द्र गड़रिया और अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। ठेले पर दीपक बेच रही महिला की दुकान पर रुककर उन्होंने स्वयं दीपक खरीदे और उसका भुगतान भी किया। उनकी इस पहल को देखकर आस-पास मौजूद लोग भी रुक गए और इस सकारात्मक उदाहरण की सराहना की। एसपी अमित कुमार ने कहा कि दीपावली के इस पर्व पर लोगों को “वोकल फॉर लोकल” का समर्थन करते हुए स्थानीय दुकानदारों से खरीदारी करनी चाहिए, जिससे छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक सहयोग मिल सके।

Ratlam News: नेहरू युवा केंद्र द्वारा आयोजित ‘यह दिवाली माय भारत के साथ’ कार्यक्रम में बाजार एवं अस्पताल स्वच्छता अभियान संपन्न

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: नेहरू युवा केंद्र, रतलाम ने व्यापारी संघ और जिला अस्पताल के सहयोग से “यह दिवाली माय भारत के साथ” कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें स्वच्छता अभियान को लेकर विशेष जागरूकता फैलाई गई। इस आयोजन का उद्देश्य स्वच्छता और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना था। बाजार में स्वच्छता अभियानबाजार क्षेत्र में स्वच्छता अभियान का आयोजन जिला युवा अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव के निर्देशन में किया गया। इसमें व्यापारी संघ के समन्वय से सफाई के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अरुण जैन, कुशल राजपूत, युवराज देवड़ा, मुकेश जैन, सुफियान, आकाश अग्रवाल, हार्दिक अग्रवाल, मुकेश जी जैन और आदित्य तिवारी सहित कई युवा कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अस्पताल में स्वच्छता अभियानदूसरी ओर, जिला अस्पताल के समन्वय में आयोजित अभियान में युवाओं ने अस्पताल परिसर की स्वच्छता को लेकर जागरूकता फैलाई। इसमें नितिन बैरागी, हिमांशु चौहान, आदित्य चौहान, तोहिद खान, धर्मेंद्र नेक, और विकास जाट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें अस्पताल के आरएमओ अभिषेक सर का विशेष सहयोग भी प्राप्त हुआ। केंद्र के सौरभ श्रीवास्तव ने बताया आगे भी इसी तरह के समन्वय और प्रयासों के माध्यम से समाज में स्वच्छता और एकता की भावना को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं दी और इस पर्व को स्वच्छता और समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ मनाने का संकल्प लिया।

Ratlam News: अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा के रतलाम जिलाध्यक्ष पद पर भारतसिंह गुर्जर की नियुक्ति

रतलाम- पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा मध्यप्रदेश द्वारा रतलाम जिले में भारतसिंह गुर्जर को जिला अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। जावरा के दाहखेड़ा निवासी भारतसिंह गुर्जर परवलिया पंचायत से सरपंच है। यह नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष सोनू गुर्जर (पहलगांव) के आदेश पर की गई है। जिनका कार्यकाल आगामी चुनाव सम्मपन तक प्रभावी रहेगा। यह नियुक्ति समाज सेवा में उनके योगदान और गुर्जर समाज के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए की गई है। इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र सौंपा गया। जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष विधायक रामकिशोर दोगने, प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्रसिंह पटेल सहित युवा महासभा के पदाधिकारी व गुर्जर समाज के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम में रतलाम जिले के साथ ही प्रदेश के 39 जिलों की कार्यकारिणी का गठन किया गया। नियुक्ति के अवसर पर समाज के वरिष्ठ जनों और स्थानीय नेताओं ने उनका स्वागत किया। स्वागत करने वालों में अरुण गुर्जर, सोहन गुर्जर, ईश्वरसिंह गुर्जर, राहुल गुर्जर, नागदा से कांग्रेस नेता विशाल गुर्जर, किसान यूनियन मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक गुर्जर और लखन मकवाना आदि शामिल थे। सभी ने भारत सिंह के उज्जवल भविष्य और समाज के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दी। अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा के इस निर्णय का स्वागत करते हुए उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने विश्वास जताया कि श्री भारत सिंह समाज की प्रगति और युवाओं के हित में अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएंगे।

Dhanteras2024: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता लक्ष्मी के लिए भोग रेसिपी

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Dhanteras2024:  धनतेरस का पर्व हर साल दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है, जिससे दीपावली की शुरुआत होती है। इस वर्ष धनतेरस का पर्व मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन को लेकर लोगों के मन में शुभ मुहूर्त और तिथि को लेकर कई सवाल रहते हैं। यहां जानिए धनतेरस की पूजा तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और माता लक्ष्मी के भोग के बारे में। धनतेरस 2024 की तिथि और शुभ मुहूर्तज्योतिषाचार्य के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत मंगलवार, 29 अक्टूबर को सुबह 10:31 बजे से होगी और यह बुधवार, 30 अक्टूबर दोपहर 1:15 बजे तक रहेगी। चूंकि धनतेरस की पूजा शाम को होती है, इसलिए धनतेरस 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।  धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:31 बजे से 8:13 बजे तक रहेगा। धनतेरस पूजा विधिधनतेरस के दिन शाम के समय कुबेर देवता के साथ माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर को पूजास्थल पर स्थापित करें। दीप जलाकर उन्हें फल और फूल अर्पित करें और उनका प्रिय भोग लगाएं। पूजा के दौरान “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। धनतेरस के लिए विशेष भोग रेसिपीमाता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए धनतेरस के दिन मखाने और दूध की खीर का भोग लगाया जा सकता है। इसे बनाने के लिए मखाने, दूध, चीनी, ड्राई फ्रूट्स और इलायची पाउडर का उपयोग करें।

Diwali 2024 Date: 31 अक्टूबर या 1 नवंबर? जानें महालक्ष्मी पूजा की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Diwali 2024 Date: इस साल दिवाली के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति है क्योंकि अमावस्या तिथि दो दिन, 31 अक्टूबर और 1 नवंबर, को पड़ रही है। ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि लक्ष्मी पूजा कब करनी चाहिए।  दिवाली की सही तारीखज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक जोशी के अनुसार हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार, इस साल अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर 2024 को दोपहर 3:52 बजे शुरू होगी और 1 नवंबर 2024 को शाम 5:14 बजे समाप्त होगी।  वेदिक पंचांग के अनुसार, व्रत और त्योहारों को उदया तिथि के आधार पर मनाया जाता है। हालांकि, दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद से लेकर रात के समय तक रहता है। इस साल, ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 31 अक्टूबर को प्रदोष काल और निशिता काल (मध्यरात्रि) में लक्ष्मी पूजा करना सबसे शुभ रहेगा।  लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्तज्योतिषियों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2024 को लक्ष्मी पूजा के लिए यह शुभ मुहूर्त होंगे:  – प्रदोष काल: शाम 5:36 से रात 8:11 तक  – वृषभ लग्न: शाम 6:25 से रात 8:20 तक  – लक्ष्मी पूजा का निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से 12:31 तक  इस दिन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6:25 से 7:13 के बीच माना गया है। इस 48 मिनट के दौरान लक्ष्मी पूजन करना सबसे अधिक शुभ होगा।  क्यों 31 अक्टूबर है सही तिथि?ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर से शुरू हो रही है और लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल और निशिता काल में ही आता है। इसलिए 31 अक्टूबर को दिवाली मनाना और लक्ष्मी पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। 1 नवंबर को निशिता काल उपलब्ध नहीं है, जिससे इस दिन पूजा करना शुभ नहीं माना जाएगा।  (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के आधार पर है। इसे किसी भी प्रकार से उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करे।)

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