Ratlam News: जनजाति गौरव दिवस पर जनजाति विकास मंच ने पटेल सम्मेलन आयोजित किया

सैलाना- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: जनजाति विकास मंच, सैलाना विकास खंड द्वारा गांव के पटेलों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें 15 नवंबर को जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को भव्यता से मनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मांगीलाल खराड़ी ने भगवान बिरसा मुंडा और जनजातीय परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए उनकी महानता का विस्तार से वर्णन किया। इस अवसर पर सैलाना के अनुविभागीय अधिकारी मनीष जैन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने भारत माता, भगवान बिरसा मुंडा और टंट्या मामा के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने पटेलों के अधिकारों पर चर्चा करते हुए गांवों में शांति और एकता बनाए रखने की अपील की। L जिला सह कार्यवाहक मोहन राणा ने समाज में व्याप्त दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने पर जोर दिया। इसके अलावा, जिला संयोजक मांगीलाल खराड़ी ने जनजाति गौरव दिवस के महत्व को रेखांकित किया। तहसील संयोजक कैलाश भगत ने अपने वक्तव्य में ग्रामीणों को नशामुक्ति और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए जागरूक किया। पेसा जिला समन्वयक दिनेश वसुनिया ने पेसा कानून की विशेषताओं, रुढ़िवादी परंपराओं और पारंपरिक ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने गांवों में कानून की जागरूकता बढ़ाने के लिए पटेलों से आग्रह किया। कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के सैलाना ब्लॉक समन्वयक रतनलाल चरपोटा ने किया, जबकि ग्राम पंचायत कागसी के सरपंच समरथ भाभर ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस सम्मेलन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए पटेलों ने हिस्सा लिया।

Guru Pushya Nakshatra 2024: दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र में अमृत सिद्धि का योग, शुभ मुहूर्त में इन चीजों की खरीदारी से होगा लाभ

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Guru Pushya Nakshatra 2024: इस वर्ष 24 अक्टूबर 2024, गुरुवार को दिवाली से पहले गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है, जो हर प्रकार की खरीदारी और निवेश के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस दिन अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग भी विद्यमान रहेगा, जो इसे और भी शुभ बनाता है। इस नक्षत्र को खास तौर पर सोना, चांदी और वाहन खरीदने के लिए उत्तम माना जाता है।  ज्योतिषाचार्य पं. अभिषेक जोशी के अनुसार 2024 में गुरु पुष्य नक्षत्र 24 अक्टूबर कार्तिक कृष्ण अष्टमी गुरुवार प्रातः सूर्योदय पूर्व 6:15 से प्रारम्भ होकर दिनांक 25 अक्टूबर शुक्रवार को प्रातः 7:40 तक रहेगा। गुरुवार को प्रातः 06:42 से 08:07 तक, प्रातः 09:32 से दोपहर 03:12, (चल, लाभ, अमृत) सायं 16:37 से 07:37 के मध्य बही खाता लाने का व चांदी – सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त रहेगा। क्या खरीदें गुरु पुष्य नक्षत्र में?ज्योतिष के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में सोना, चांदी, वाहन, लोहा, वस्त्र, और बहीखाते खरीदने का विशेष महत्व है। इसका संबंध गुरु (बृहस्पति) और शनि ग्रह से होता है, इसलिए इस नक्षत्र में की गई खरीदारी लंबे समय तक लाभकारी सिद्ध होती है। साथ ही, इस दिन नए व्यापार की शुरुआत या बड़े निवेश भी सफलता और समृद्धि लेकर आते हैं। अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्वगुरु पुष्य नक्षत्र के साथ अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का बनना इस दिन को और भी खास बनाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस प्रकार के योगों में किया गया कार्य विशेष रूप से सफल और शुभ होता है। अगर आप नया व्यापार शुरू करना चाह रहे हैं, तो यह दिन इसके लिए बेहद अनुकूल है। साथ ही, वाहन, संपत्ति या घर खरीदना भी लाभकारी होगा। दीपावली महापर्व के अवसर पर गुरु पुष्य नक्षत्र 24 अक्टूबर 2024 को होने वाले शुभ मुहूर्त के बारे में है। चौघड़िया मुहूर्त, स्थिरलम मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त और राहु काल का विवरण निम्न है-चौघड़िया मुहूर्त:शुभ: प्रातः 06:24 से 07:50चर: सुबह 10:41 से 12:07लाभ: दोपहर 12:07 से 01:33अमृत: दोपहर 01:33 से 02:59शुभ: शाम 04:24 से 05:50अमृत: शाम 05:50 से 07:24चर: शाम 07:24 से 08:59स्थिरलम मुहूर्त:वृश्चिक: प्रातः 08:11 से 10:27कुम्भ: दोपहर 02:19 से 03:52वृषभ: रात 07:03 से 09:01अभिजीत मुहूर्त:सुबह 11:44 से 12:30 तकराहु काल:दोपहर 01:33 से 02:59 तकयह मुहूर्त विशेष रूप से नए वस्त्र क्रय करने हेतु सबसे श्रेष्ठ माना गया है। कौन सी राशियों के लिए है खास दिन?इस विशेष संयोग का कुछ राशियों पर विशेष प्रभाव रहेगा। तुला, मकर, और वृषभ राशियों के जातकों को भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा, जिससे उन्हें सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होगी। इनके लिए यह समय किसी भी बड़े निवेश या नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम है। गुरु पुष्य नक्षत्र में क्यों करे खरीदारीअगर आप दिवाली (Diwali) से पहले अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं, तो गुरु पुष्य नक्षत्र 2024 का दिन सबसे अनुकूल समय है। चाहे आप सोना-चांदी खरीदें, या फिर किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करें, यह समय आपके लिए शुभ और फलदायी सिद्ध होगा। (Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। पब्लिक वार्ता न्यूज नेटवर्क इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करे।)

Ratlam News: महालक्ष्मी मंदिर में पुजारी को लेकर विवाद, आरोप; सूतक के दौरान मंदिर में पहुंचा, शुध्दिकरण कर खोला मंदिर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: रतलाम के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पंडित संजय पुजारी द्वारा सूतक के दौरान पूजा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने इस कृत्य का विरोध जताया। विवाद बढ़ने के बाद रविवार रात को प्रशासन ने मंदिर का ताला लगा दिया और सोमवार सुबह 11 घंटे बाद मंदिर का ताला खोला गया। प्रशासन ने संजय पुजारी को हटाकर सत्यनारायण व्यास को अस्थायी पुजारी नियुक्त कर दिया। शहर के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर को हर साल दिवाली पर करोड़ों रुपए के नोटों और जेवरों से सजाया जाता है। इस वर्ष भी सजावट का काम शुरू हो चुका है, लेकिन पंडित संजय पुजारी के बड़े भाई के निधन से सूतक के चलते उन्हें पूजा से दूर रहने का कहा गया था। फिर भी उन्होंने पूजा की, जिससे श्रीमाली समाज में नाराजगी फैल गई। गौरतलब है की श्रीमाली ब्राह्मण समाज लक्ष्मी जी को कुलदेवी के रूप में पूजता है। पुजारी को समझाईश देने आए बाद भी उसने मंदिर में प्रवेश करना नहीं बंद किया। जिसके बाद समाज के लोग आक्रोशित होकर मंदिर पहुंचे और उन्होंने प्रशासन की मौजूदगी में ताला लगवा दिया। समाज का विरोध और शुद्धिकरणश्री माली ब्राह्मण समाज ने मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और गंगाजल व गोमूत्र से शुद्धिकरण किया। समाज के अनुसार, सूतक के दौरान पूजा नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन पुजारी संजय ने नियमों का पालन नहीं किया। नायब तहसीलदार आशीष उपाध्याय की मौजूदगी में विवाद के समाधान के लिए पुजारी को बदला गया और सजावट का काम जारी रखने का निर्णय लिया गया। सजावट की जिम्मेदारी और सुरक्षामंदिर में दिवाली के दौरान सजावट के लिए भक्त बड़ी मात्रा में रुपए और आभूषण दान कर रहे हैं। विवाद के बाद लोगों ने चिंता जताई कि अब सजावट की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सजावट का कार्य रुकेगा नहीं और पुराने पुजारी के सहयोगी इसे पूरा करेंगे। साथ ही, मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने के लिए पुलिस और पटवारियों की तैनाती की गई है, ताकि दान की गई धनराशि और आभूषणों का सही रिकॉर्ड रखा जा सके। अस्थायी रूप से नया पुजारी नियुक्ततहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि फिलहाल मंदिर में पटवारियों को तैनात किया गया है, जो अलग-अलग समय पर मंदिर में मौजूद रहेंगे। मंदिर के पुजारी परिवार में सूतक समाप्त होने के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार संजय पुजारी के मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर में दीपावली पर होने वाली सजावट को लेकर प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों को शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

Mahalaxmi Temple Ratlam: विदेशों से आ रहे फोन, हमारा “धन भी चढ़ाना है!”, हीरे – जवाहरातों की सजावट हुई शुरू

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Mahalaxmi Temple Ratlam: विश्व प्रसिद्ध श्री महालक्ष्मी मंदिर दीपोत्सव के अवसर पर भक्तों द्वारा लाई जा रही स्वर्ण आभूषणों और नोटों की श्रृंगार सामग्री से सजने के लिए तैयार है। मंदिर में कार्यकर्ता नोटों की लड़ियां बनाते नजर आएंगे। जहां 10, 20, 50 से लेकर 2000 के नोट की लड़ियां बनाई जा रही है, जो मंदिर में सजने के लिए तैयार है। भक्तजन बड़ी संख्या में माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में पहुंच रहे हैं, जहां हर साल की तरह इस बार भी महालक्ष्मी का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसमें मंदिर परिसर में 29 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही पुलिस बल और पटवारियों की भी तैनाती की गई है, ताकि मंदिर में लाई जाने वाली सामग्री और दान-दक्षिणा का सही हिसाब रखा जा सके। इस बार मंदिर में चढ़ावे के लिए दुबई और अमेरिका में रह रहे भारतीय भी उत्सुक है। वहां से भक्त रतलाम में अपने रिश्तेदारों से फोन पर संपर्क कर रहे है। उन्हें जानना है की वे किस माध्यम से अपनी धनराशि मां लक्ष्मी के चरणों में साज सज्जा के लिए दे सकते है। हालांकी मंदिर में फिलहाल बैंक एकाउंट व अन्य डायरेक्ट माध्यम से राशि व आभूषण लेने की कोई सुविधा नहीं है। जिससे विदेश में रहने वाले भक्त अपनी धन सामग्री चढ़ा नहीं सकते है। गौरतलब है की मध्यप्रदेश के रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर दिवाली पर नोट, सोना – चांदी, हीरे – जवाहरातों की अपनी सजावट के लिए विश्व प्रसिद्ध है। लोग दूर – दूर से यहां दर्शन के लिए आते है। मान्यता है की यहां धन चढ़ाने से उसे वापस प्रसाद के रूप में ले जाने से घर व व्यापार – व्यवसाय में धन की वृद्धि होती है। भक्तों ने स्वर्ण आभूषण और नोट किए दानमंदिर में भक्त अपनी ओर से स्वर्ण आभूषणों और नोटों की गड्डियां मां के श्रृंगार के लिए भेंट कर रहे हैं। रतलाम के अलावा इंदौर, नागपुर, मुंबई, झाबुआ आदि अन्य राज्यों व शहरों से आए भक्तों ने आभूषणों और नोटों की गड्डियां दान की है। अब तक करीब 400 भक्तों ने महालक्ष्मी के श्रृंगार के लिए नोटों की गड्डियां सौंपी, जिसके बदले उन्हें मंदिर प्रशासन की ओर से टोकन प्रदान किया गया। यह टोकन दिवाली के बाद दिखाने पर ही श्रृंगार सामग्री भक्तों को वापस सौंपी जाएगी। सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने की विशेष व्यवस्थामंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है। मंदिर प्रशासन ने हर आने-जाने वाले भक्तों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 29 सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की है। इसके साथ ही, प्रशासन की ओर से पटवारियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है ताकि मंदिर में आई सामग्री और दान-दक्षिणा का पूरा रिकॉर्ड रखा जा सके। तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 6 लाख रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया है। बाहर से रंगरोगन का काम जल्द करवा लिया जाएगा। जीर्णोद्धार का कार्य दीपोत्सव के बाद शुरू किया जाएगा, ताकि भक्तों को किसी तरह की असुविधा न हो। नोट कैसे जमा कराएंमहालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव का आयोजन हर साल की तरह इस बार भी धूमधाम से मनाया जाएगा। धनतेरस से शुरू होने वाले इस उत्सव में मंदिर को सजाने का काम भक्तों द्वारा लाई गई नोटों की गड्डियों से किया जाएगा। मंदिर के पुजारी ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा 28 अक्टूबर तक श्रृंगार सामग्री स्वीकार की जाएगी। भक्तों को अपने साथ श्रृंगार सामग्री के अलावा नाम, पता, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य होगा ताकि रजिस्टर में उनकी एंट्री की जा सके।

Karwa Chauth 2024: कल है करवा चौथ, जानें कब निकलेगा चंद्रमा और पूजन का शुभ मुहूर्त

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Karwa Chauth 2024 Date and Significance:कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला करवा चौथ का व्रत इस साल 20 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। यह व्रत सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को और भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया था। व्रत के दिन भगवान गणेश, माता गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। करवा चौथ 2024 शुभ मुहूर्त (Karwa Chauth 2024 Shubh Muhurat): हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को सुबह 6:46 बजे होगी और इसका समापन 21 अक्टूबर को सुबह 4:16 बजे होगा। पूजा के लिए मुख्य रूप से दो शुभ मुहूर्त मिलेंगे:– अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 तक।– विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 तक।  चंद्रोदय का समय (Karwa Chauth Moonrise Time):  इस साल करवा चौथ पर चंद्रमा का उदय शाम 7:54 बजे होगा। करवा चौथ की पूजन विधि (Karwa Chauth Pujan Vidhi)– सूर्योदय से पहले स्नान करके पूजा घर की सफाई करें।  – सास द्वारा दिए गए भोजन का सेवन करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।  – शाम को एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें और करवे रखकर पूजा प्रारंभ करें।  – चंद्रोदय से एक घंटा पहले पूजा शुरू करें और करवा चौथ की कथा सुनें।  – चंद्रमा के दर्शन के बाद छलनी से चंद्र दर्शन करके अर्घ्य दें। फिर सास को थाली में मिष्ठान, फल और उपहार देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। करवा चौथ पर विशेष सावधानियां (Karwa Chauth Precautions):– पूजा के बाद विवाहित महिलाओं में करवा बांटें।  – दिन भर निराहार रहकर गणेश मंत्र का जाप करें।  – चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करने के साथ गणेश जी और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य दें।  – नमक युक्त भोजन से दूर रहें।  – व्रत को कम से कम 12 या 16 साल तक रखें और इसके बाद उद्यापन करें।  करवा चौथ व्रत से जुड़ी इन परंपराओं और नियमों का पालन करके महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ व्रत की कथा, क्या है इसके पीछे का रहस्य?

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क। Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ का पर्व सनातन धर्म में खास महत्व रखता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस साल करवा चौथ 20 अक्टूबर 2024, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिनें माता करवा और चंद्रमा की पूजा करती हैं और करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं। कहा जाता है कि इस कथा के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। यहां जानिए करवा चौथ व्रत की पूरी कथा। करवा चौथ व्रत की कथा :प्राचीन समय में एक ब्राह्मण के सात पुत्र और एक पुत्री थी, जिसका नाम करवा था। करवा का विवाह एक योग्य ब्राह्मण के साथ हुआ था। एक दिन कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि को करवा अपने ससुराल में थी। उस दिन उसने पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रखा। शाम के समय, जब चंद्रमा निकलने से पहले करवा चांद का इंतजार कर रही थी, तभी उसके भाइयों ने उसकी भूख देखकर उसे भोजन करने का आग्रह किया। करवा ने अपने भाइयों से कहा कि वह चंद्रमा के दर्शन के बाद ही भोजन करेगी, लेकिन उसके भाइयों से उसकी भूख बर्दाश्त नहीं हुई। इसलिए उन्होंने एक चाल चली। भाइयों ने पीपल के पेड़ के पीछे एक दीपक जलाकर छलपूर्वक करवा से कहा, “देखो, चांद निकल आया है, अब तुम अपना व्रत तोड़ सकती हो।” करवा ने बिना ध्यान दिए, उनके कहे अनुसार चंद्रमा के दर्शन कर व्रत तोड़ दिया और भोजन कर लिया। व्रत तोड़ते ही करवा का पति बीमार हो गया और उसका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। करवा को एहसास हुआ कि उसने चंद्रमा के उदय से पहले व्रत तोड़ा था, जो व्रत के नियमों का उल्लंघन था। उसने अपने गलती के लिए पश्चाताप किया और अगले वर्ष फिर से पूरे विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत रखा। इस बार उसने सच्चे मन और श्रद्धा से व्रत किया और चंद्रमा के दर्शन कर विधिपूर्वक अपना व्रत तोड़ा। इस व्रत के प्रभाव से उसका पति स्वस्थ हो गया और उन्हें सुख-समृद्धि प्राप्त हुई। तब से यह मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं।करवा चौथ की यह कथा स्त्रियों को पति की दीर्घायु, प्रेम और विश्वास का प्रतीक बनाती है, और इसे पूर्ण निष्ठा से मनाने की परंपरा आज भी चलती आ रही है। करवा चौथ व्रत का महत्वकरवा चौथ व्रत न केवल पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को भी बढ़ाता है। इस व्रत को करने से रिश्तों में मजबूती आती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विवाहित महिलाएं इस व्रत को अपने सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि के लिए रखती हैं। यह व्रत महिलाओं को संपूर्ण जीवन में सौभाग्यशाली बनाता है और उनके जीवन में खुशहाली लाता है।

When to celebrate Diwali?: देशभर में इस दिन मनेगी 2024 की दिवाली, जयपुर की धर्मसभा में हुआ निर्णय

धर्मसभा में 100 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य उपस्थित हुए, गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दीपावली (Diwali 2024) का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को मनाने का निर्णय जयपुर – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। कब मनाएं दिवाली?: दीपावली पर्व की तिथि को लेकर देशभर में जारी असमंजस के बीच, 15 अक्टूबर 2024 को जयपुर स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के नवीन सभागार में अखिल भारतीय विद्वत परिषद द्वारा एक महत्वपूर्ण धर्मसभा का आयोजन किया गया। धर्मसभा में 100 से अधिक विद्वान, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्य उपस्थित हुए। प्रमुख ज्योतिषाचार्य प्रो. रामपाल शास्त्री की अध्यक्षता में हुई इस धर्मसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष दीपावली (When to celebrate Diwali?) का महापर्व 31 अक्टूबर 2024, गुरुवार को ही मनाया जाएगा। धर्मसभा के अनुसार, यह तिथि शास्त्रसम्मत है और इसी दिन लक्ष्मी पूजन (Lakshmi Pujan) का सही समय है। धर्मसभा का निर्णय: 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी दीपावलीधर्मसभा में विद्वानों ने विभिन्न पंचांगों, ज्योतिषीय गणनाओं और शास्त्रीय प्रमाणों का सूक्ष्म अध्ययन किया। गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर 2024 को ही मनाना शास्त्रों के अनुसार उचित और शुभ है। इस दिन प्रदोषकाल में व्यापिनी कार्तिकी अमावस्या का समय रहेगा, जो लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। धर्मसभा के संयोजक प्रो. मोहनलाल शर्मा ने बताया कि विद्वानों ने पंचांगों की गणनाओं और सूर्य सिद्धांत के आधार पर इस निर्णय को अंतिम रूप दिया। उन्होंने कहा, “31 अक्टूबर की रात को पूरी अमावस्या व्यापिनी रहेगी, और शास्त्रों के अनुसार कर्मकाल में तिथि की प्राप्ति आवश्यक होती है। इस कारण 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जानी चाहिए।” शास्त्रों का समर्थन: प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन का महत्वधर्मशास्त्रों के अनुसार, प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन को अत्यधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। धर्मसभा में इस बात पर जोर दिया गया कि 31 अक्टूबर को प्रदोषकाल के समय व्यापिनी अमावस्या रहेगी, और उसी समय लक्ष्मी पूजन करना शास्त्रों के अनुसार सबसे उचित होगा। धर्मसभा के अध्यक्ष प्रो. रामपाल शास्त्री ने कहा, “दीपावली का पर्व तब तक सही नहीं माना जा सकता जब तक कि वह प्रदोषकाल में व्यापिनी अमावस्या के समय न हो।” विरोध के स्वर: 1 नवंबर को भी दिवाली के पक्ष में विद्वानों की रायहालांकि धर्मसभा में 31 अक्टूबर की तिथि को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, कुछ विद्वानों ने इसका विरोध भी जताया। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रवक्ता शास्त्री कोसलेंद्रदास सहित अन्य विद्वानों ने तर्क दिया कि 1 नवंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त के बाद अमावस्या रहेगी, जो लक्ष्मी पूजन के लिए अधिक शुभ मानी जाती है। शास्त्री कोसलेंद्रदास ने कहा, “शास्त्रों में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जब दो दिन अमावस्या का योग हो, तो दूसरे दिन अमावस्या को पर्व मनाना चाहिए। इस वर्ष 1 नवंबर को भी अमावस्या सूर्योदय के बाद तक बनी रहेगी, इसलिए 1 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाना शास्त्रसम्मत होगा।” ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश शर्मा ने भी इसी प्रकार का तर्क देते हुए कहा, “दो दिन अमावस्या होने पर शास्त्रों के अनुसार उत्तर वाली अमावस्या (दूसरे दिन) को लक्ष्मी पूजन करना सही होता है। 1 नवंबर को स्वाति नक्षत्र का भी संयोग रहेगा, जिससे लक्ष्मी पूजन का महत्व और बढ़ जाएगा।” देशभर में विविधता: अलग-अलग राज्यों में अलग तिथियों पर दीपावलीदीपावली पर्व को लेकर देशभर में अलग-अलग पंचांगों के आधार पर विभिन्न तिथियों का निर्धारण किया गया है। अयोध्या के राममंदिर में 1 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी, जबकि काशी में सौर पंचांग सिद्धांत के अनुसार 31 अक्टूबर को ही पर्व मनाने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली के कुछ पंचांगकर्ता 1 नवंबर को दीपावली मानने के पक्ष में हैं, वहीं राजस्थान के जयविनोदी पंचांग और सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाई जाएगी। जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देव जी मंदिर में भी 31 अक्टूबर को ही लक्ष्मी पूजन होगा। धर्मसभा का उद्देश्य: एकरूपता और धार्मिक अनुशासन की स्थापनाधर्मसभा के निर्णय का उद्देश्य पूरे देश में दीपावली की तिथि को लेकर चल रहे भ्रम को समाप्त करना और सनातन धर्म के अनुयायियों के बीच धार्मिक अनुशासन और एकरूपता को बढ़ावा देना है। धर्मसभा के विद्वानों ने कहा कि शास्त्रों के आधार पर 31 अक्टूबर को दीपावली मनाना सर्वश्रेष्ठ और शुभ है। धर्मसभा का निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि सनातन धर्म के अनुयायी सही समय पर दीपावली का महापर्व मना सकें।

Ratlam News: रतलाम में होगा अद्भुत ‘महाशतावधान’ का आयोजन, जैन मुनि देंगे 200 सवालों के क्रमशः उत्तर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: विज्ञान कहता है कि एक साधारण व्यक्ति एक समय में केवल 5 से 10 चीजें ही याद रख सकता है, लेकिन रतलाम में 20 अक्टूबर को जैन मुनि श्री चंद्रप्रभ चंद्र सागर जी महाराज इस धारणा को चुनौती देंगे। चंपा विहार में आयोजित होने वाले इस अद्वितीय कार्यक्रम ‘महाशतावधान’ में मुनिश्री 2000 से अधिक लोगों के सामने 200 सवालों को एक ही बार सुनकर क्रमशः उनके उत्तर देंगे। यह अद्भुत स्मरण शक्ति का प्रदर्शन आधुनिक विज्ञान के लिए एक आश्चर्यजनक घटना साबित होगी। यह सवाल वहां उपस्थित लोगों के बीच से होंगे। भारतवर्ष की प्राचीन और वैदिक परंपरा में ऐसी अद्भुत स्मरणशक्ति की कहानियां मिलती हैं, जहां विद्यार्थी गुरु से एक बार सुनकर ही आगम और वेद ग्रंथ याद कर लेते थे। वर्तमान में जब मनुष्य की स्मरण शक्ति कमजोर होती जा रही है और अल्जाइमर एवं पार्किंसंस जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं, ऐसे समय में यह महाशतावधान कार्यक्रम मानवता के लिए एक नई आशा का संचार करेगा। आचार्य श्री नयचंद्र सागर सुरीश्वर जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में मुनिश्री के 10 से अधिक शिष्य ‘शतावधानी’, ‘महाशतावधानी’, ‘अर्धसहस्त्रावधानी’, और ‘सहस्त्रावधानी’ के रूप में अपनी स्मरण शक्ति का प्रदर्शन कर चुके हैं। इनकी अनूठी सरस्वती साधना के जरिए अब तक 50,000 से अधिक विद्यार्थियों ने लाभ उठाया है। रतलाम में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के प्रति पूरे भारतवर्ष में उत्साह है। न्यायाधीश, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, और व्यवसायी सहित कई गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रतलाम पहुँचेंगे। मध्यप्रदेश की जनता भी इस अद्वितीय स्मरण शक्ति के प्रदर्शन को देखने के लिए उत्सुक है, जिससे रतलाम इतिहास का साक्षी बनेगा। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पूरे शहर में तैयारियां जोरों पर हैं, और इस आयोजन को देखने के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

Ratlam News: सेवा भारती के कन्या पूजन से समाज में समरसता का संदेश

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| Ratlam News: सेवा भारती रतलाम द्वारा एक अनोखा कन्या पूजन आयोजन किया गया, जो समाज के पिछड़े, निर्धन, शोषित, वंचित वर्ग की बच्चियों के लिए विशेष रूप से आयोजित था। यह आयोजन समाज में समरसता और एकता का संदेश देने के उद्देश्य से किया गया। सेवा भारती रतलाम लंबे समय से रतलाम जिले में विभिन्न सेवा कार्यों का संचालन करती आ रही है। इनमें निर्धन बस्तियों में संस्कार केंद्र संचालित किए जाते हैं, जहां बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाते हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्गदर्शन किया जाता है। इसके अलावा नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिसमें बच्चों और उनके परिवारों का स्वास्थ्य परीक्षण और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए महिला विकास केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। इस विशेष कन्या पूजन कार्यक्रम में भाग लेने वाली बच्चियां इन्हीं परिवारों से थीं। इस कार्यक्रम में समाज के प्रतिष्ठित गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने कन्या पूजन की रस्म अदा की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रतलाम विभाग के सहकार्यवाह आकाश चौहान थे। उन्होंने भारतीय परंपरा, शक्ति उपासना, सामाजिक समरसता और हिन्दू एकता पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथियों में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका सीमा अग्निहोत्री, वरिष्ठ चिकित्सक बी. एल. तपड़िया और युवा उद्योगपति मनीष चोपड़ा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवा भारती रतलाम के अध्यक्ष और उद्योगपति अनुज छाजेड़ ने की। उन्होंने बताया कि संघ और सेवा भारती का कार्य समाज में सेवा के माध्यम से परिवर्तन लाना है, और सेवा भारती यह कार्य निरंतर करती आ रही है। उन्होंने कहा कि हमारे स्वयंसेवक समाज के हर सुख-दुःख में सदैव तत्पर रहते हैं, और इस कन्या पूजन के माध्यम से भी समता और सेवा का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के अंत में एसेल्स स्कूल रतलाम की दो छात्राओं ने राजस्थानी लोक नृत्य “तेरह ताली” प्रस्तुत किया, जिसके बाद मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा नौ कन्याओं का पूजन कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम का आभार आयोजन समिति संयोजक शीतल भंसाली ने व्यक्त किया। मंच संचालन सेवा भारती के सचिव मोहित कसेरा ने किया, और कार्यक्रम में भवजागरण हेतु गीत की प्रस्तुति अर्पित ने दी। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिनमें विभाग सेवा प्रमुख गज, जिला सेवा प्रमुख पवन कसेरा, मनीष सोनी, नितिन फलोदिया, अभिनव बर्मेचा, वत्सल पाटनी, आशा दुबे, सुमित्रा अवतानी, निधि अग्रवाल, राकेश मोदी, राजेश बाथम और संगीता जैन सहित बड़ी संख्या में समाज जन और कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस कार्यक्रम के माध्यम से सेवा भारती ने समाज में सेवा और समता का संदेश दिया, और यह आयोजन विशेष रूप से समाज के वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित रहा।

नाम से राशि कैसे पता करे? : आपको अपनी राशि नहीं पता?  नाम के पहले अक्षर से ऐसे करे मालूम?

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। नाम से राशि कैसे पता करे? :नाम के अक्षरों से राशिफल (Horoscope) जानने के लिए वैदिक ज्योतिष में नाम के पहले अक्षर के आधार पर राशि निर्धारित की जाती है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली उपलब्ध नहीं होती, तो नाम के पहले अक्षर से उसकी राशि का अनुमान लगाया जाता है। यह प्रक्रिया जन्म समय और स्थान के अभाव में ज्योतिषीय गणना में मददगार होती है। यहां 12 राशियों और उनके संबंधित अक्षर दिए जा रहे हैं: यदि किसी व्यक्ति के नाम का पहला अक्षर ऊपर दिए गए अक्षरों से मेल खाता है, तो उसी के अनुसार उनकी राशि निर्धारित की जा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी का नाम “राकेश” है, तो उसका नाम “र” से शुरू होता है, और उसकी राशि “तुला” होगी।

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