“Ashtami 2024: व्रत, कन्या पूजन के महत्व और शुभ मुहूर्त जानें”

पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| ashtami 2024: हर वर्ष नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमें माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व है, जब कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। (Ashtami)अष्टमी तिथि:इस वर्ष, शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू हो रही है और 12 अक्टूबर को समाप्त होगी। अष्टमी का व्रत 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी। कन्या पूजन का उत्तम समय:कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस बार अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच रहेगा। व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त:– अष्टमी तिथि: 10 अक्टूबर दोपहर 12:23 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी।– नवमी तिथि: 11 अक्टूबर सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर 12 अक्टूबर भोर 5:12 बजे तक रहेगी।– अष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 11अक्टूबर  का दिन पूजा और हवन के लिए शुभ है। कन्याओं को विदाई:कन्या पूजन के बाद, सभी कन्याओं को विदा करते समय पान, फल, दक्षिणा और लाल चुनरी अर्पित करना न भूलें। यह माता दुर्गा की कृपा का मार्ग प्रशस्त करता है।इस नवरात्रि, श्रद्धालुओं को माता दुर्गा की आराधना में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होने का निमंत्रण है। नवमी तिथि के कारण महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन हो जा रहा उन्होंने कहा कि क्षयवती नवमी तिथि के कारण महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन हो जा रहा है। माता दुर्गा का प्राण- प्रतिष्ठा तिथि सप्तमी और मूल नक्षत्र के योग 9 अक्टूबर बुधवार को मध्याह्न मे किया जाएगा। सामान्यतः माता – बहन गोदी भरने का कार्य प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही आरम्भ कर देती है जो नवमी तक चलता है। इस हिसाब से यह कार्य 9 अक्टूबर बुधवार मध्याह्न बेला से 11 अक्टूबर शुक्रवार तक कर सकते है।

Navratri Special: इस मंदिर में जिंदा और मुर्दा दोनों जाते है एक रास्ते से, श्मशान में बनते है दाल – बाटी और लड्डू जैसे व्यंजन, मां काली का अनोखा मंदिर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Navratri Special: नवरात्रि की धूम पूरे देशभर में है। भक्त मां दुर्गा के नो स्वरूपों की आराधना में जुट गए है। वहीं मध्यप्रदेश के रतलाम में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां जिंदा इंसान के साथ – साथ मुर्दा इंसान भी जाता है। इस मंदिर में जाने से पहले आपको जलती चिताओं के पास से गुजरना होगा। जिसके बाद आप मंदिर में पहुंचकर मां कालिका के दर्शन करेंगे। यह मंदिर रतलाम के महू रोड बस स्टैंड स्थित भक्तन की बावड़ी पर स्थित श्मशान में है। यहां मां काली के रुद्र स्वरूप की प्रतिमा स्थापित है। इसका निर्माण काले पाषाण से किया गया है। मां कालिका की मूर्ति में तेज और प्रताप ऐसा है की आप मंत्रमुग्ध हो जाए। मानो साक्षात देवी आपके सामने प्रकट है। श्मशान में स्थापित इस मंदिर की विशेषता है की यहां आने वाले मुर्दो और जिंदा इंसान दोनों का रास्ता एक है। मुर्दे यानी मृत शरीर की तो यात्रा इस मंदिर में आने के बाद समाप्त हो जाती है, मगर जीवित इंसान यहां दर्शन कर बाहर निकलकर अपनी जीवन यात्रा जारी रखता है। जीवन और मृत्यु चक्र दिखाता मंदिरधर्मशास्त्र के जानकार बताते है की श्मशान में मां कालिका का मंदिर होना जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक है। यह स्थान एक धार्मिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है, जहां जीवन के अंतिम संस्कार के साथ-साथ देवी की पूजा-अर्चना होती है। यह दर्शाता है कि मृत्यु केवल एक अंत नहीं है, बल्कि पुनर्जन्म और आत्मा की यात्रा का हिस्सा है। भक्तों के लिए, यह स्थान आशा और शांति का केंद्र है, जो उन्हें कठिन समय में संजीवनी प्रदान करता है। नवरात्रि में होती है विशेष आराधनारतलाम की मुक्तिधाम धर्मार्थ सेवा समिति के रामसिंह  भाटी, राजेंद्र पुरोहित, संदीप पांचाल, मनोज प्रजापति, संतोष ओगड़, आयुष माली, चेतन गुर्जर आदि भक्तगण सेवा देते है। इस मंदिर में हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान एकम को नहीं बल्कि अमावस्या के दिन अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जो यहां की विशेषता है। दोनों नवरात्रि में यहां विशेष आयोजन होते है। भक्त दूर – दराज से यहां मनोकामना लेकर आते है। दशहरे पर भव्य भंडारे की प्रसादी का आयोजन होता है। प्रसादी में दाल – बाटी व लड्डु जैसे विशेष व्यंजन बनाए जाते है। श्मशान में ही लोग इस भोजन प्रसादी को ग्रहण करते है। नवरात्रि पर यहां विशेष दर्शन व मां के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाया जाता है। संत सोनीनाथ महाराज जी द्वारा की स्थापनामंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े भक्त राजेंद्र पुरोहित बताते है की यह मंदिर लगभग 50 साल पुराना है, जिसकी स्थापना गुरु संतश्री 1008 सोनीनाथ जी महाराज ने की थी। सोनीनाथ जी, जो स्व ब्राह्मण थे, ने अपने गुरु के आदेश पर जूते सुधारने का कार्य किया। शहर के रेलवे ग्राउंड के पास वे मोची का कार्य करते थे। वहीं उनकी दिव्यता के कारण भक्तों का जमावड़ा रहता था और दुकानदारी छोड़ सत्संग करते रहते थे। कई बार भक्तों ने उनसे कार्य छोड़कर स्थान पर विराजमान होने की अपील की लेकिन उन्होंने इंकार किया और सही समय व गुरु आज्ञा आने का कहा। जिसके बाद एक दिन उनसे जब निवेदन किया तो उन्होंने अपना काम छोड़कर संत सेवा में आने का आग्रह स्वीकार किया। उन्होंने श्मशान में रुकने की इच्छा जाहिर की तब उजाला ग्रुप के विजेंद्र जायसवाल द्वारा भक्तन बावड़ी में रुकने के लिए प्रबंध किए। महाराज ने सन 2005 में अपना मानव शरीर त्यागा और ब्रह्मलीन हुए। करीब 40 वर्षो से मंदिर समिति द्वारा महाशिवरात्रि पर छड़ी यात्रा का आयोजन किया जाता है। मां कालिका से सीधे करते थे बातसंत सोनीनाथ जी के बारे में कहा जाता है की वे भक्तों की समस्याएँ सुनकर दूर करने की क्षमता रखते थे। उन्होंने कभी चमत्कार जैसा कुछ नहीं आभास कराया लेकिन चमत्कार होता था। उनके पास ऐसी सिध्दि थी जिसके माध्यम से वे भक्तों की पीड़ा को मां कालिका से बताते और समाधान करने का विनय करते। जिसके बाद उनकी समस्याएं दूर हो जाती। भक्तों के अनुसार वे मां कालिका से सीधे जीवंत संपर्क में रहते थे और उनसे बात करते थे। यहां विराजित प्रतिमा में प्राण होने की अनुभूति भी कई भक्तों को होती है। (DISCLAIMER: इस लेख में वर्णित चमत्कारी मंदिर और संबंधित घटनाओं का विवरण भक्तों के अनुभवों और विश्वासों पर आधारित है। इसे किसी धार्मिक या वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव और विश्वास अलग हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी व्यक्तिगत धारणा और निर्णय के आधार पर मंदिरों और उनकी शक्ति के बारे में सोचें। किसी भी धार्मिक स्थान पर जाने से पहले उचित सावधानी बरतें और आवश्यक शोध करें।)

Ratlam News: रानी दुर्गावती एवं राणा पूंजा भील जयंती पर विश्व हिंदू परिषद द्वारा पुष्पांजलि समारोह आयोजित

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: विश्व हिंदू परिषद सामाजिक समरसता द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती और मेवाड़ के जनजातीय शिरोमणि, हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप के सहयोगी महान योद्धा राणा पूंजा भील की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के सामाजिक समरसता प्रमुख मनोज और जिला मंत्री गौरव ने उनके जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती ने अपने शासनकाल में मुगलों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। गोंडवाना की इस वीरांगना ने 1564 में अकबर के सेनापति आसफ खान से युद्ध किया और अंतिम क्षण तक अपने राज्य की रक्षा की। उनकी शौर्य और बलिदान की गाथा आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देती है। राणा पूंजा भील ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ दिया और मुगल सेना के खिलाफ संघर्ष में अपनी भील सेना के साथ वीरता का प्रदर्शन किया। जनजातीय समाज से आने वाले राणा पूंजा ने मुगलों के खिलाफ जन-जन को संगठित किया और हल्दीघाटी की धरती पर अपने साहस की अमिट छाप छोड़ी। उनका योगदान जनजातीय समाज और राजस्थान के इतिहास में अमूल्य है। समारोह में कई प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें विभाग सह मंत्री पवन बंजारा, जिला सह संयोजक आशु, मंदिर अर्चक संपर्क प्रमुख दीपक शर्मा, जिला प्रचार प्रसार प्रमुख मोंटी जयसवाल, जिला प्रचार प्रसार सह प्रमुख रिक्की सेन, जिला साप्ताहिक मिलन प्रमुख सुनील, जिला सेवा प्रमुख अनिल, जिला विद्यार्थी प्रमुख कृष्णा, जिला सह साप्ताहिक मिलन प्रमुख शुभम शर्मा, दीपांशु, विजय, रोमित, लखन और महेश डोडियार शामिल थे।

Ratlam News: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा 7 दिवसीय “मिशन साहसी” अभियान का शुभारंभ

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) रतलाम नगर ने 7 दिवसीय “मिशन साहसी” अभियान का शुभारंभ किया, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस अभियान का शुभारंभ 3 अक्टूबर को हुआ और यह 8 अक्टूबर तक चलेगा। शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महिला थाना प्रभारी श्रीमती लिलियन मालवीय और विशेष अतिथि के रूप में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुश्री ट्विंकल राठौर उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में श्रीमती लिलियन मालवीय ने कहा, “छात्राओं को न केवल शारीरिक आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षित होना चाहिए, बल्कि साइबर क्राइम से भी सतर्क रहना चाहिए। ऐसे मामलों की तुरंत पुलिस को सूचना देना बेहद जरूरी है।” सुश्री ट्विंकल राठौर ने “मिशन साहसी” अभियान की सराहना करते हुए कहा, “यह अभियान छात्राओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस अभियान के माध्यम से छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने का कार्य लगातार कर रहा है।” एबीवीपी रतलाम नगर अध्यक्ष शुभम तलोदिया ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि यह सात दिवसीय अभियान के अंतर्गत छात्राओं को आत्मरक्षा की निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है। इस कार्यक्रम का आयोजन रतलाम नगर के कलीमी कॉलोनी स्थित कराते एकेडमी में किया जा रहा है, जिसमें शहर की युवतियां भाग लेकर आत्मरक्षा के गुर सिख सकती है। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन रतलाम नगर मंत्री सिद्धार्थ मराठा ने किया।

Best Farmer Award : आप किसान है? तो आपके पास है 25 हजार जीतने का मौका, यह खबर जरूर जान ले

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Best Farmer Award : कृषि विस्तार योजना ( ATMA/आत्मा योजना) के अंतर्गत जिले के सर्वोत्तम कृषक (Best Farmer) और कृषक समूहों (Best Farmer Groups) को पुरस्कृत करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2024 है।  परियोजना संचालक निर्भयसिंह नर्गेश के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक को 25 हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, विकासखंड स्तरीय सर्वोत्तम कृषक को 10 हजार रुपए और जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक समूह को 20 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। यह राशि डीबीटी ( DBT Account/डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधा उनके खातों में जमा होगी। कौन होंगे पात्रपुरस्कार के लिए उन्हीं उन्नतिशील कृषकों को पात्र माना जाएगा, जिन्होंने वैज्ञानिक तरीकों से नई कृषि तकनीकों को अपनाकर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि अभियांत्रिकी में उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त किया हो। कार्यालय से ले फॉर्मआवेदन पत्र का प्रारूप विकासखंड स्तर के संबंधित कार्यालयों से प्राप्त किया जा सकता है। वे कृषक या कृषक समूह जो पूर्व में पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं, उन्हें इस बार पुरस्कार के लिए शामिल नहीं किया जाएगा। पुरस्कार का चयन कलेक्टर की अध्यक्षता में आत्मा गर्वनिंग बोर्ड द्वारा किया जाएगा और उनका निर्णय अंतिम होगा। 10 अक्टूबर अंतिम तिथीकृषक अपने आवेदन पत्र को निर्धारित प्रारूप में पूरी जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ 10 अक्टूबर 2024 तक विकासखंड स्तर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी या आत्मा परियोजना के बीटीएम और एटीएम कार्यालय में जमा कर सकते हैं।

Ratlam News: स्व. सूरजमल जैन की स्मृति में 6 अक्टूबर को निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन, रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: स्वर्गीय सूरजमल जैन, पूर्व भाजपा ग्रामीण विधायक की स्मृति में आगामी 6 अक्टूबर को निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। यह शिविर काटजू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित होगा, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और निर्धन व्यक्तियों के नेत्र परीक्षण के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर निशुल्क ऑपरेशन की सुविधा भी दी जाएगी। अशोक कुमार जैन ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस शिविर का लाभ उठाएं और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए इस नेक कार्य में शामिल हों। मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में शुभारंभश्री सूरजमल जैन स्मृति न्यास के संयोजक अशोक कुमार जैन ने बताया कि नेत्र परीक्षण शिविर का शुभारंभ प्रातः 10 बजे एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर, आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय मौजूद रहेंगे। समारोह की अध्यक्षता पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी करेंगे। लायंस नेत्रालय के विशेषज्ञ देंगे सेवाएंलायंस नेत्रालय, जावरा के अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इस शिविर में नेत्र परीक्षण और आवश्यकतानुसार निशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर शिविर का लाभ उठाएं। शिविर के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्यशिविर का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जो 5 अक्टूबर तक निम्नलिखित संपर्क सूत्रों पर किया जा सकता है:– प्रकाश ऑप्टिकल, डालूमोदी बाजार, रतलाम (मो. 7804877635)– मेडिकेयर डायग्नोस्टिक सेंटर, सरकारी अस्पताल के पास, जैल रोड, रतलाम (मो. 9827236030)– गौरव फूड, सब्जी मंडी, माणक चौक, रतलाम (मो. 9131325163)– सिद्धार्थ मूणत, अरिहंत ज्वैलर्स, चौमुखीपुल रोड, चांदनी चौक, रतलाम (मो. 8103529225)

Ratlam News: मध निषेध सप्ताह के तहत निकाली नशामुक्ति जागरूकता रैली, 100 बालिकाओं को शैक्षणिक सामग्री वितरित

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: मध निषेध सप्ताह के तहत 2 से 8 अक्टूबर तक रतलाम के नवीन कन्या विद्यालय, आनंद कॉलोनी में नशामुक्ति के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्कूली छात्राओं ने बाजार क्षेत्र में जागरूकता रैली निकालकर नशामुक्ति की शपथ ली। कार्यक्रम के अंतर्गत 100 बालिकाओं को शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई, और 7 निर्धन छात्राओं की फीस के लिए आर्थिक मदद प्रदान की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद के प्रदेश प्रचार मंत्री सीए शांतिलाल चपलोद ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। म.प्र. जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय ने नशामुक्त भारत अभियान के बारे में विस्तार से बताते हुए नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर 14446 की जानकारी दी। तंबाकू नियंत्रण समिति के सदस्य अशोक अग्रवाल ने नशे से होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान की चर्चा की। उन्होंने कैंसर जागरूकता पर भी जानकारी दी। वहीं, भारत विकास परिषद के जिला अध्यक्ष स्नेह सजदेव ने शिक्षा को नशे के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बताते हुए विद्यार्थियों को शिक्षित होने की प्रेरणा दी। स्वास्थ्य विभाग रतलाम की अतिरिक्त मीडिया प्रभारी सरला कुरिल ने शिक्षा को सफलता की कुंजी बताया और कहा कि शिक्षा ही नशे की बुराइयों को दूर कर सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय प्राचार्य ममता अग्रवाल ने की, जिन्होंने नैतिक शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। इस आयोजन में विद्यालय के विद्यार्थी और शिक्षकगण उपस्थित थे, जिनका नशामुक्ति और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Ratlam News: रतलाम में नवरात्रि पर्व पर यातायात डायवर्शन, कालिका माता मेले की शुरुआत के साथ होंगे संस्कृति कार्यक्रम

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: शहर में नवरात्रि पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए रतलाम पुलिस ने यातायात डायवर्शन प्लान जारी किया है। 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2024 तक होने वाले गरबा कार्यक्रमों और भारी भीड़ के मद्देनजर यह प्लान तैयार किया गया है, ताकि शहर में यातायात सुचारू रूप से चल सके। वहीं शहर के प्रसिद्ध कालिक माता मंदिर में लगने वाले 10 दिवसीय मेले की भी तैयारियां कर ली गई है। मेले की शुरुआत होने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नगर निगम करेगा। यातायात डायवर्शन प्लान:– राम मंदिर की ओर आने वाले भारी वाहन: बंजली से राम मंदिर की ओर शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक प्रतिबंधित रहेंगे।– बाजना बस स्टैंड की ओर : वन विभाग सागोद पुलिया से बाजना बस स्टैंड की ओर आने वाले भारी वाहन इसी अवधि में प्रतिबंधित रहेंगे।– फव्वारा चौक की ओर: प्रतापनगर पुलिया से फव्वारा चौक की ओर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।– संत रविदास चौराहा: करमदी से संत रविदास चौराहा की ओर शाम 6 से रात 12 बजे तक भारी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।– शैरानीपुरा की ओर: प्रतापनगर पुलिया से शैरानीपुरा की ओर आने वाले भारी वाहन इसी अवधि में प्रतिबंधित रहेंगे। मेले की पार्किंग व्यवस्था:– कालका माता की ओर आने वाले श्रद्धालु: उनकी पार्किंग गुलाब चक्कर के पास रहेगी।– फव्वारा चौक और दो बत्ती: इस क्षेत्र में श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग कॉन्वेंट स्कूल से मित्र निवास तक होगी।– आनंद कॉलोनी और पुलिस कॉलोनी: यहां पार्किंग की व्यवस्था लॉ कॉलेज के सामने की गई है। यातायात पुलिस ने अपील की है कि लोग भारी वाहनों को बाजार क्षेत्र में न लाएं और निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करें। अन्यथा यातायात बाधित होने पर वाहनों को क्रेन से टो किया जा सकता है। श्री कालिका माता नवरात्रि मेले का शुभारंभशहर के प्रसिद्ध श्री कालिका माता मंदिर परिसर में 3 से 12 अक्टूबर तक 10 दिवसीय श्री कालिका माता नवरात्रि मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मेला 3 अक्टूबर को शाम 7 बजे मेला परिसर स्थित निगम रंगमंच पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप और सांसद अनिता नागरसिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में शुभारंभ होगा। महापौर प्रहलाद पटेल की अध्यक्षता में यह समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला:– 5 अक्टूबर: सैक्सोफोन क्वीन लिपिका समंता की इन्स्ट्रूमेंटल कलेक्टिव नाइट।– 6 अक्टूबर: प्रसिद्ध भजन गायिका सुरभी चतुर्वेदी की भजन संध्या।– 7 अक्टूबर: इंडियन आइडल फेम सवाई भाट की प्रस्तुति।– 8 अक्टूबर: फीमेल ऑर्केस्ट्रा का आयोजन।– 9 अक्टूबर: लोक गीत – लोक नृत्य।-10 अक्टूबर: लाफ्टर कलाकार धारषि बरडिया का शॉ और आर्केस्ट्रा। – 11 अक्टूबर: अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, जिसमें प्रसिद्ध कवि धीरज शर्मा, मुकेश शांडिल्य, निशा पंडित सहित अन्य कवि भाग लेंगे।–  12 अक्टूबर: दशहरे पर नेहरू स्टेडियम में आकर्षक आतिशबाजी और रावण दहन का आयोजन किया जाएगा।

Ratlam News:  लक्ष्मी नगर में होगा भव्य गरबा आयोजन, लकी ड्रा में होंगे आकर्षक उपहार

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: शहर ने लक्ष्मी नगर स्थित मां अंबे माता मंदिर में इस वर्ष का नवरात्रि महोत्सव बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। माँ अम्बे नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित यह नौ दिवसीय गरबा महोत्सव 3 अक्टूबर, गुरुवार से प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर तक चलेगा। हर दिन भव्य महाआरती का आयोजन रात 8:30 बजे होगा, जिसके बाद रात 9 बजे से गरबा उत्सव की शुरुआत की जाएगी। इस महोत्सव में गरबा खेलने वाली सभी बालिकाओं के लिए कार्ड लगाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, पंचमी, छठ, सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिनों में लकी ड्रॉ का आयोजन होगा, जिसमें मिक्सर, माइक्रो ओवन, 32 इंच स्मार्ट टीवी, वाशिंग मशीन और फ्रिज जैसे आकर्षक इनाम दिए जाएंगे। प्रतिदिन की आरती और महाप्रसादी के बाद भक्तों और गरबा प्रेमियों को इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

Devmali “Best Tourist Village”: कच्चे घरों के पीछे पक्के विश्वासों की अनूठी कहानी, मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन

राजस्थान/मध्यप्रदेश – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Devmali “Best Tourist Village” : राजस्थान यूं तो कई अनोखे और ऐतिहासिक गांवों से भरा पड़ा है, लेकिन अजमेर जिले का देवमाली गांव एक ऐसा स्थल है, जहां आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपने पूर्वजों की मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते हुए रहते हैं। देवमाली गांव की विशेषता यह है कि यहां के सभी घर कच्चे हैं, चाहे फिर परिवार कितना ही समृद्ध क्यों न हो। इस अनोखे गांव की अनगिनत विशेषताएं इसे अन्य गांवों से अलग करती हैं। राजस्थान के इस गांव का मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन है। मध्यप्रदेश में निवासरत गुर्जर समाज के लोग देवमाली भगवान देवनारायण के दर्शन को जाते है। उनके लिए यह एक विशेष तीर्थ है। भगवान देवनारायण गुर्जर समाज के आराध्य देव है। मध्यप्रदेश के रतलाम से गुर्जर समाज युवा इकाई अध्यक्ष मुरलीधर गुर्जर के अनुसार लंबे समय से देवमाली के मंदिर के दर्शन के लिए संदेश यात्राओं का आयोजन करते आ रहे है। जिसमें प्रदेश के कई हिस्सों से देवमाली के लिए यात्री एकत्रित होते है। संदेश यात्रा का उद्देश्य धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक होता है। जिसमें देवमाली की विशेषताओं को आत्मसात करना है, जिसके कारण आज वह श्रेष्ठ पर्यटक गांव बना है। कच्ची छतें, पक्के विश्वासदेवमाली गांव की सबसे अनूठी पहचान है यहां के घरों की कच्ची छतें। गांव में मान्यता है कि भगवान देवनारायण ने गांववासियों को आशीर्वाद देते समय कहा था कि यदि वे शांति से जीवन जीना चाहते हैं, तो उन्हें अपने घरों की छत कभी पक्की नहीं बनानी चाहिए। इस चेतावनी को देवमाली के लोगों ने पूरी श्रद्धा से स्वीकार किया और आज भी इसे निभाते आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों ने इस मान्यता को नज़रअंदाज़ करते हुए घरों की छतें पक्की बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सभी ने इस परंपरा को पुनः स्वीकार कर लिया। आज चाहे गांव में कोई करोड़पति हो या सामान्य व्यक्ति, सभी के घरों की छतें कच्ची ही हैं। अपराध मुक्त और शाकाहारी गांवदेवमाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह गांव पूरी तरह से शाकाहारी है। यहां मांसाहार की कोई परंपरा नहीं है और यह गांव अपराध मुक्त भी है। देवमाली में आज तक कभी चोरी की घटना नहीं हुई है, जिससे यहां का शांतिपूर्ण जीवन और भी स्पष्ट होता है। यहां के लोग प्रकृति और भगवान देवनारायण की पूजा करते हैं और पूरी सादगी व ईमानदारी से अपना जीवन व्यतीत करते हैं। भगवान देवनारायण का मंदिरगुर्जर कच्चे घरों के पीछे पक्के विश्वासों की अनूठी कहानी समाज के आराध्य देव, भगवान देवनारायण का मंदिर देवमाली की पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर पूरे गांव की आस्था का केन्द्र है। गांववाले मानते हैं कि जब भगवान देवनारायण इस गांव में आए थे, तो वे ग्रामीणों की सेवा और भक्ति से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने गांव को आशीर्वाद दिया। ग्रामीण हर सुबह नंगे पैर पहाड़ी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, जो उनकी गहरी आस्था और परंपराओं को दर्शाता है। इसके साथ ही, पहाड़ी के पत्थरों को भी पवित्र माना जाता है और कोई भी ग्रामीण या पर्यटक इन पत्थरों को उठाकर नहीं ले जाता। नीम के पेड़ों का विशेष सम्मानदेवमाली गांव में पर्यावरण और पेड़ों का विशेष सम्मान किया जाता है। विशेष रूप से, नीम के पेड़ों को गांव में पवित्र माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। नीम के पेड़ के प्रति गांववासियों का आदरभाव उनके प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना को दर्शाता है। गुर्जर समाज और देवमालीदेवमाली गांव में केवल गुर्जर जाति के लोग निवास करते हैं, जिनमें लावड़ा गोत्र के लोग प्रमुख हैं। यहां की आबादी लगभग 1500 है, और सभी लोग पशुपालन के माध्यम से अपना जीवनयापन करते हैं। इस गांव की एक और अद्वितीय विशेषता यह है कि गांव की कोई भी भूमि किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं है। पूरे गांव की जमीन भगवान देवनारायण के नाम मानी जाती है और ग्रामीण इसे उनकी धरोहर के रूप में देखते हैं। देवमाली की प्राचीन परंपराएंदेवमाली की परंपराएं इतनी प्राचीन और गहरी हैं कि कलियुग में भी सतयुग की अनुभूति होती है। यहां आज भी लोग अपने पूर्वजों की चेतावनियों और निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं। केरोसिन के उपयोग पर यहां पूरी तरह से प्रतिबंध है, और गांव में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता हर व्यक्ति में दिखाई देती है। देवमाली गांव की यह खासियतें इसे एक अद्वितीय पर्यटन स्थल के रूप में उभरने में मदद कर रही हैं। लोग यहां के शांतिपूर्ण और परंपरागत जीवन से जुड़ने के लिए आते हैं और इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनाते हैं। देवमाली में न सिर्फ गुर्जर समाज की परंपराएं जीवित हैं, बल्कि यह गांव पूरे विश्व को यह संदेश देता है कि आधुनिकता और समृद्धि के बावजूद परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखा जा सकता है। देवमाली एक उदाहरण है कि पक्के विश्वास और आस्था के साथ कैसे एक संपूर्ण समाज शांतिपूर्ण और खुशहाल जीवन जी सकता है, चाहे उसके घर कच्चे ही क्यों न हों।