Best Farmer Award : आप किसान है? तो आपके पास है 25 हजार जीतने का मौका, यह खबर जरूर जान ले

रतलाम – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Best Farmer Award : कृषि विस्तार योजना ( ATMA/आत्मा योजना) के अंतर्गत जिले के सर्वोत्तम कृषक (Best Farmer) और कृषक समूहों (Best Farmer Groups) को पुरस्कृत करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2024 है।  परियोजना संचालक निर्भयसिंह नर्गेश के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में कार्यरत जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक को 25 हजार रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, विकासखंड स्तरीय सर्वोत्तम कृषक को 10 हजार रुपए और जिला स्तरीय सर्वोत्तम कृषक समूह को 20 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। यह राशि डीबीटी ( DBT Account/डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधा उनके खातों में जमा होगी। कौन होंगे पात्रपुरस्कार के लिए उन्हीं उन्नतिशील कृषकों को पात्र माना जाएगा, जिन्होंने वैज्ञानिक तरीकों से नई कृषि तकनीकों को अपनाकर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि अभियांत्रिकी में उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त किया हो। कार्यालय से ले फॉर्मआवेदन पत्र का प्रारूप विकासखंड स्तर के संबंधित कार्यालयों से प्राप्त किया जा सकता है। वे कृषक या कृषक समूह जो पूर्व में पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं, उन्हें इस बार पुरस्कार के लिए शामिल नहीं किया जाएगा। पुरस्कार का चयन कलेक्टर की अध्यक्षता में आत्मा गर्वनिंग बोर्ड द्वारा किया जाएगा और उनका निर्णय अंतिम होगा। 10 अक्टूबर अंतिम तिथीकृषक अपने आवेदन पत्र को निर्धारित प्रारूप में पूरी जानकारी और आवश्यक दस्तावेजों के साथ 10 अक्टूबर 2024 तक विकासखंड स्तर के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी या आत्मा परियोजना के बीटीएम और एटीएम कार्यालय में जमा कर सकते हैं।

Ratlam News: स्व. सूरजमल जैन की स्मृति में 6 अक्टूबर को निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन, रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: स्वर्गीय सूरजमल जैन, पूर्व भाजपा ग्रामीण विधायक की स्मृति में आगामी 6 अक्टूबर को निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। यह शिविर काटजू नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित होगा, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और निर्धन व्यक्तियों के नेत्र परीक्षण के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर निशुल्क ऑपरेशन की सुविधा भी दी जाएगी। अशोक कुमार जैन ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस शिविर का लाभ उठाएं और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए इस नेक कार्य में शामिल हों। मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में शुभारंभश्री सूरजमल जैन स्मृति न्यास के संयोजक अशोक कुमार जैन ने बताया कि नेत्र परीक्षण शिविर का शुभारंभ प्रातः 10 बजे एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप के मुख्य आतिथ्य में किया जाएगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में जावरा विधायक डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर, आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय और भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय मौजूद रहेंगे। समारोह की अध्यक्षता पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी करेंगे। लायंस नेत्रालय के विशेषज्ञ देंगे सेवाएंलायंस नेत्रालय, जावरा के अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इस शिविर में नेत्र परीक्षण और आवश्यकतानुसार निशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर शिविर का लाभ उठाएं। शिविर के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्यशिविर का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जो 5 अक्टूबर तक निम्नलिखित संपर्क सूत्रों पर किया जा सकता है:– प्रकाश ऑप्टिकल, डालूमोदी बाजार, रतलाम (मो. 7804877635)– मेडिकेयर डायग्नोस्टिक सेंटर, सरकारी अस्पताल के पास, जैल रोड, रतलाम (मो. 9827236030)– गौरव फूड, सब्जी मंडी, माणक चौक, रतलाम (मो. 9131325163)– सिद्धार्थ मूणत, अरिहंत ज्वैलर्स, चौमुखीपुल रोड, चांदनी चौक, रतलाम (मो. 8103529225)

Ratlam News: मध निषेध सप्ताह के तहत निकाली नशामुक्ति जागरूकता रैली, 100 बालिकाओं को शैक्षणिक सामग्री वितरित

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: मध निषेध सप्ताह के तहत 2 से 8 अक्टूबर तक रतलाम के नवीन कन्या विद्यालय, आनंद कॉलोनी में नशामुक्ति के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान स्कूली छात्राओं ने बाजार क्षेत्र में जागरूकता रैली निकालकर नशामुक्ति की शपथ ली। कार्यक्रम के अंतर्गत 100 बालिकाओं को शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई, और 7 निर्धन छात्राओं की फीस के लिए आर्थिक मदद प्रदान की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत विकास परिषद के प्रदेश प्रचार मंत्री सीए शांतिलाल चपलोद ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। म.प्र. जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय ने नशामुक्त भारत अभियान के बारे में विस्तार से बताते हुए नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर 14446 की जानकारी दी। तंबाकू नियंत्रण समिति के सदस्य अशोक अग्रवाल ने नशे से होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान की चर्चा की। उन्होंने कैंसर जागरूकता पर भी जानकारी दी। वहीं, भारत विकास परिषद के जिला अध्यक्ष स्नेह सजदेव ने शिक्षा को नशे के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बताते हुए विद्यार्थियों को शिक्षित होने की प्रेरणा दी। स्वास्थ्य विभाग रतलाम की अतिरिक्त मीडिया प्रभारी सरला कुरिल ने शिक्षा को सफलता की कुंजी बताया और कहा कि शिक्षा ही नशे की बुराइयों को दूर कर सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय प्राचार्य ममता अग्रवाल ने की, जिन्होंने नैतिक शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। इस आयोजन में विद्यालय के विद्यार्थी और शिक्षकगण उपस्थित थे, जिनका नशामुक्ति और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा।

Ratlam News: रतलाम में नवरात्रि पर्व पर यातायात डायवर्शन, कालिका माता मेले की शुरुआत के साथ होंगे संस्कृति कार्यक्रम

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: शहर में नवरात्रि पर्व के दौरान यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए रतलाम पुलिस ने यातायात डायवर्शन प्लान जारी किया है। 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर 2024 तक होने वाले गरबा कार्यक्रमों और भारी भीड़ के मद्देनजर यह प्लान तैयार किया गया है, ताकि शहर में यातायात सुचारू रूप से चल सके। वहीं शहर के प्रसिद्ध कालिक माता मंदिर में लगने वाले 10 दिवसीय मेले की भी तैयारियां कर ली गई है। मेले की शुरुआत होने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नगर निगम करेगा। यातायात डायवर्शन प्लान:– राम मंदिर की ओर आने वाले भारी वाहन: बंजली से राम मंदिर की ओर शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक प्रतिबंधित रहेंगे।– बाजना बस स्टैंड की ओर : वन विभाग सागोद पुलिया से बाजना बस स्टैंड की ओर आने वाले भारी वाहन इसी अवधि में प्रतिबंधित रहेंगे।– फव्वारा चौक की ओर: प्रतापनगर पुलिया से फव्वारा चौक की ओर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।– संत रविदास चौराहा: करमदी से संत रविदास चौराहा की ओर शाम 6 से रात 12 बजे तक भारी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।– शैरानीपुरा की ओर: प्रतापनगर पुलिया से शैरानीपुरा की ओर आने वाले भारी वाहन इसी अवधि में प्रतिबंधित रहेंगे। मेले की पार्किंग व्यवस्था:– कालका माता की ओर आने वाले श्रद्धालु: उनकी पार्किंग गुलाब चक्कर के पास रहेगी।– फव्वारा चौक और दो बत्ती: इस क्षेत्र में श्रद्धालुओं के वाहनों की पार्किंग कॉन्वेंट स्कूल से मित्र निवास तक होगी।– आनंद कॉलोनी और पुलिस कॉलोनी: यहां पार्किंग की व्यवस्था लॉ कॉलेज के सामने की गई है। यातायात पुलिस ने अपील की है कि लोग भारी वाहनों को बाजार क्षेत्र में न लाएं और निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करें। अन्यथा यातायात बाधित होने पर वाहनों को क्रेन से टो किया जा सकता है। श्री कालिका माता नवरात्रि मेले का शुभारंभशहर के प्रसिद्ध श्री कालिका माता मंदिर परिसर में 3 से 12 अक्टूबर तक 10 दिवसीय श्री कालिका माता नवरात्रि मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मेला 3 अक्टूबर को शाम 7 बजे मेला परिसर स्थित निगम रंगमंच पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप और सांसद अनिता नागरसिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में शुभारंभ होगा। महापौर प्रहलाद पटेल की अध्यक्षता में यह समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला:– 5 अक्टूबर: सैक्सोफोन क्वीन लिपिका समंता की इन्स्ट्रूमेंटल कलेक्टिव नाइट।– 6 अक्टूबर: प्रसिद्ध भजन गायिका सुरभी चतुर्वेदी की भजन संध्या।– 7 अक्टूबर: इंडियन आइडल फेम सवाई भाट की प्रस्तुति।– 8 अक्टूबर: फीमेल ऑर्केस्ट्रा का आयोजन।– 9 अक्टूबर: लोक गीत – लोक नृत्य।-10 अक्टूबर: लाफ्टर कलाकार धारषि बरडिया का शॉ और आर्केस्ट्रा। – 11 अक्टूबर: अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, जिसमें प्रसिद्ध कवि धीरज शर्मा, मुकेश शांडिल्य, निशा पंडित सहित अन्य कवि भाग लेंगे।–  12 अक्टूबर: दशहरे पर नेहरू स्टेडियम में आकर्षक आतिशबाजी और रावण दहन का आयोजन किया जाएगा।

Ratlam News:  लक्ष्मी नगर में होगा भव्य गरबा आयोजन, लकी ड्रा में होंगे आकर्षक उपहार

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: शहर ने लक्ष्मी नगर स्थित मां अंबे माता मंदिर में इस वर्ष का नवरात्रि महोत्सव बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। माँ अम्बे नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित यह नौ दिवसीय गरबा महोत्सव 3 अक्टूबर, गुरुवार से प्रारंभ होकर 11 अक्टूबर तक चलेगा। हर दिन भव्य महाआरती का आयोजन रात 8:30 बजे होगा, जिसके बाद रात 9 बजे से गरबा उत्सव की शुरुआत की जाएगी। इस महोत्सव में गरबा खेलने वाली सभी बालिकाओं के लिए कार्ड लगाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, पंचमी, छठ, सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिनों में लकी ड्रॉ का आयोजन होगा, जिसमें मिक्सर, माइक्रो ओवन, 32 इंच स्मार्ट टीवी, वाशिंग मशीन और फ्रिज जैसे आकर्षक इनाम दिए जाएंगे। प्रतिदिन की आरती और महाप्रसादी के बाद भक्तों और गरबा प्रेमियों को इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

Devmali “Best Tourist Village”: कच्चे घरों के पीछे पक्के विश्वासों की अनूठी कहानी, मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन

राजस्थान/मध्यप्रदेश – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Devmali “Best Tourist Village” : राजस्थान यूं तो कई अनोखे और ऐतिहासिक गांवों से भरा पड़ा है, लेकिन अजमेर जिले का देवमाली गांव एक ऐसा स्थल है, जहां आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपने पूर्वजों की मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते हुए रहते हैं। देवमाली गांव की विशेषता यह है कि यहां के सभी घर कच्चे हैं, चाहे फिर परिवार कितना ही समृद्ध क्यों न हो। इस अनोखे गांव की अनगिनत विशेषताएं इसे अन्य गांवों से अलग करती हैं। राजस्थान के इस गांव का मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन है। मध्यप्रदेश में निवासरत गुर्जर समाज के लोग देवमाली भगवान देवनारायण के दर्शन को जाते है। उनके लिए यह एक विशेष तीर्थ है। भगवान देवनारायण गुर्जर समाज के आराध्य देव है। मध्यप्रदेश के रतलाम से गुर्जर समाज युवा इकाई अध्यक्ष मुरलीधर गुर्जर के अनुसार लंबे समय से देवमाली के मंदिर के दर्शन के लिए संदेश यात्राओं का आयोजन करते आ रहे है। जिसमें प्रदेश के कई हिस्सों से देवमाली के लिए यात्री एकत्रित होते है। संदेश यात्रा का उद्देश्य धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक होता है। जिसमें देवमाली की विशेषताओं को आत्मसात करना है, जिसके कारण आज वह श्रेष्ठ पर्यटक गांव बना है। कच्ची छतें, पक्के विश्वासदेवमाली गांव की सबसे अनूठी पहचान है यहां के घरों की कच्ची छतें। गांव में मान्यता है कि भगवान देवनारायण ने गांववासियों को आशीर्वाद देते समय कहा था कि यदि वे शांति से जीवन जीना चाहते हैं, तो उन्हें अपने घरों की छत कभी पक्की नहीं बनानी चाहिए। इस चेतावनी को देवमाली के लोगों ने पूरी श्रद्धा से स्वीकार किया और आज भी इसे निभाते आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों ने इस मान्यता को नज़रअंदाज़ करते हुए घरों की छतें पक्की बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सभी ने इस परंपरा को पुनः स्वीकार कर लिया। आज चाहे गांव में कोई करोड़पति हो या सामान्य व्यक्ति, सभी के घरों की छतें कच्ची ही हैं। अपराध मुक्त और शाकाहारी गांवदेवमाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह गांव पूरी तरह से शाकाहारी है। यहां मांसाहार की कोई परंपरा नहीं है और यह गांव अपराध मुक्त भी है। देवमाली में आज तक कभी चोरी की घटना नहीं हुई है, जिससे यहां का शांतिपूर्ण जीवन और भी स्पष्ट होता है। यहां के लोग प्रकृति और भगवान देवनारायण की पूजा करते हैं और पूरी सादगी व ईमानदारी से अपना जीवन व्यतीत करते हैं। भगवान देवनारायण का मंदिरगुर्जर कच्चे घरों के पीछे पक्के विश्वासों की अनूठी कहानी समाज के आराध्य देव, भगवान देवनारायण का मंदिर देवमाली की पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर पूरे गांव की आस्था का केन्द्र है। गांववाले मानते हैं कि जब भगवान देवनारायण इस गांव में आए थे, तो वे ग्रामीणों की सेवा और भक्ति से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने गांव को आशीर्वाद दिया। ग्रामीण हर सुबह नंगे पैर पहाड़ी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, जो उनकी गहरी आस्था और परंपराओं को दर्शाता है। इसके साथ ही, पहाड़ी के पत्थरों को भी पवित्र माना जाता है और कोई भी ग्रामीण या पर्यटक इन पत्थरों को उठाकर नहीं ले जाता। नीम के पेड़ों का विशेष सम्मानदेवमाली गांव में पर्यावरण और पेड़ों का विशेष सम्मान किया जाता है। विशेष रूप से, नीम के पेड़ों को गांव में पवित्र माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। नीम के पेड़ के प्रति गांववासियों का आदरभाव उनके प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना को दर्शाता है। गुर्जर समाज और देवमालीदेवमाली गांव में केवल गुर्जर जाति के लोग निवास करते हैं, जिनमें लावड़ा गोत्र के लोग प्रमुख हैं। यहां की आबादी लगभग 1500 है, और सभी लोग पशुपालन के माध्यम से अपना जीवनयापन करते हैं। इस गांव की एक और अद्वितीय विशेषता यह है कि गांव की कोई भी भूमि किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं है। पूरे गांव की जमीन भगवान देवनारायण के नाम मानी जाती है और ग्रामीण इसे उनकी धरोहर के रूप में देखते हैं। देवमाली की प्राचीन परंपराएंदेवमाली की परंपराएं इतनी प्राचीन और गहरी हैं कि कलियुग में भी सतयुग की अनुभूति होती है। यहां आज भी लोग अपने पूर्वजों की चेतावनियों और निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं। केरोसिन के उपयोग पर यहां पूरी तरह से प्रतिबंध है, और गांव में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता हर व्यक्ति में दिखाई देती है। देवमाली गांव की यह खासियतें इसे एक अद्वितीय पर्यटन स्थल के रूप में उभरने में मदद कर रही हैं। लोग यहां के शांतिपूर्ण और परंपरागत जीवन से जुड़ने के लिए आते हैं और इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनाते हैं। देवमाली में न सिर्फ गुर्जर समाज की परंपराएं जीवित हैं, बल्कि यह गांव पूरे विश्व को यह संदेश देता है कि आधुनिकता और समृद्धि के बावजूद परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखा जा सकता है। देवमाली एक उदाहरण है कि पक्के विश्वास और आस्था के साथ कैसे एक संपूर्ण समाज शांतिपूर्ण और खुशहाल जीवन जी सकता है, चाहे उसके घर कच्चे ही क्यों न हों।

Navratri 2024 : कब है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, इस सरल पूजा विधि से करे माता को प्रसन्न!

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि (Navratri 2024) का विशेष महत्व है। यह पर्व 9 दिनों तक चलता है, जिसमें मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर 11 अक्टूबर 2024 को समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। घट स्थापना का महत्व और शुभ मुहूर्त:नवरात्रि के पहले दिन घट या कलश स्थापना की जाती है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मातृगण का निवास होता है, इसलिए इसकी स्थापना से शुभ परिणाम मिलते हैं। पंडित धीरज शर्मा के अनुसार, इस वर्ष कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 3 अक्टूबर को सुबह 6:15 बजे से 7:22 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 6 मिनट है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। पूजन विधि:1. नवरात्रि के लिए एक दिन पहले जौ को पानी में भिगोकर रख दें ताकि वे अंकुरित हो सकें।2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।3. बालू में पानी डालकर उसमें जौ रखें।4. घट स्थापना के लिए घट में जल, गंगाजल, सिक्का, रोली, हल्दी, दूर्वा और सुपारी डालें।5. घट के ऊपर कलावा बांधकर नारियल रखें और आम के पत्ते घट के मुंह पर लगाएं।6. एक पात्र में स्वच्छ मिट्टी डालकर 7 तरह के अनाज बोएं और उसे चौकी पर रखें।7. धूप और दीप जलाएं, बाएं तरफ धूप और दाहिने तरफ दीपक रखें।8. गणपति, नवग्रहों और माता दुर्गा का आवाहन करें और विधिपूर्वक पूजा करें।9. नवरात्रि के पूरे 9 दिन तक माता का पाठ और आराधना अवश्य करें। घट स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए इसे किसी जानकार पंडित से मंत्रोच्चारण के साथ करवाना चाहिए।

सर्व पितृ अमावस्या : श्राद्ध कर्म में किन नियमों का करना होगा पालन और पितरों को प्रसन्न करने के क्या है उपाय?, जानिए…

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। सनातन धर्म में सर्व पितृ अमावस्या (Sarv Pitra Amavasya) का विशेष महत्व है। यह दिन उन पितरों के श्राद्ध के लिए होता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती। साल 2024 में सर्व पितृ अमावस्या 2 अक्टूबर, बुधवार को पड़ेगी। इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन किए गए श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य से पितृ दोष भी समाप्त होता है और पितरों को शांति मिलती है। लेकिन श्राद्ध कर्म के कुछ महत्वपूर्ण नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं। सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करें? 1. काले तिल का प्रयोग: श्राद्ध कर्म में काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। तर्पण करते समय और पिंड बनाते समय काले तिल का उपयोग अवश्य करें। मान्यता है कि काले तिल में तीर्थों का जल होता है, जिससे पितर तृप्त होते हैं।  2. ब्राह्मण भोज: इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है। ब्राह्मण भोज पितरों की संतुष्टि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 3. कुश का उपयोग: श्राद्ध करते समय या तर्पण देते समय कुश का उपयोग करें। गरुड़ पुराण के अनुसार, कुश का तर्पण आत्मा को शांति प्रदान करता है। 4. भूखे को भोजन कराएं: इस दिन कोई भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आ जाए, तो उसे भोजन जरूर कराएं। पितृ पक्ष में पितर किसी भी रूप में आ सकते हैं। 5. पंचबलि निकालें: ब्राह्मण भोज से पहले पंचबलि निकालने की परंपरा का पालन करें। पंचबलि का अर्थ है 5 प्राणियों—गाय, कुत्ता, कौवा, देवता और चींटियों के लिए भोजन निकालना। 6. गीत का पाठ करें: सर्व पितृ अमावस्या के दिन गीत का पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है। 7. दान-पुण्य करें: इस दिन धन, वस्त्र, अनाज और काले तिल का दान करने से पितर खुश होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर क्या न करें? 1. रात्रि में भोजन न कराएं: श्राद्ध का भोजन कभी भी रात में न कराएं। यह अशुभ माना जाता है। 2. तामसिक भोजन न करें: इस दिन घर के सदस्यों को तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। 3. मौन व्रत रखें: ब्राह्मण भोज के दौरान मौन रहना चाहिए और बिना अपशब्दों का प्रयोग किए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना चाहिए। 4. स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें: श्राद्ध का भोजन केले के पत्तों या स्टील के बर्तनों में नहीं परोसना चाहिए। चांदी, तांबे, कांसे के बर्तनों में भोजन परोसें। 5. कर्ज लेकर श्राद्ध न करें: यह ध्यान रखें कि श्राद्ध का आयोजन कर्ज लेकर नहीं करना चाहिए। 6. किसी का अपमान न करें: इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और अपशब्दों से बचना चाहिए।

श्राद्ध कर्म ऐसा भी: 400 लावारिस अस्थियां एक साथ चढ़ी ट्रेन में, हरिद्वार पहुंची, लेकिन किसने दिलाया मोक्ष!

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। श्राद्ध कर्म ऐसा भी: रतलाम जंक्शन पर सामान्य तौर पर लोग ट्रेन में चढ़ते उतरते देखे है। लेकिन क्या आपने कभी अस्थियों को ट्रेन में सफर करते देखा है? यहां एक अस्थि नहीं बल्कि 408 अस्थियां ट्रेन में सफर कर हरिद्वार पहुंची। ट्रेन में किसी शख्स के पास इतनी अधिक संख्या में अस्थियों को देखकर हर यात्री हैरान हो गया। हम बात कर रह है रतलाम के जनसेवी सुरेशसिंह तंवर की। सुरेशसिंह अपने साथी रवि तंवर के साथ ट्रेन में 408 लावारिस मृतकों की अस्थियां लेकर सवार हुए। इतनी अस्थियां देखकर ट्रेन के यात्री भी हिचकिचा गए। लेकिन जब उन्होंने इसकी कहानी सुनी तो सभी ने सराहना की। सुरेशसिंह ने 408 लावारिस और असहाय व्यक्तियों की अस्थियों को हरिद्वार पहुंचकर पवित्र गंगा नदी में विधि-विधान से विसर्जित किया। यह कार्यक्रम क्षत्रिय खंगार उत्थान समिति रतलाम के बैनर तले आयोजित किया गया। श्राद्ध पक्ष के दौरान सुरेश तंवर पिछले 28 वर्षों से लगातार यह पुण्य कार्य कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने अब तक 2800 से अधिक लावारिस और असहाय लोगों की अस्थियों को मां गंगा की गोद में समर्पित किया है। रतलाम से 400 अस्थि कलश लेकर हरिद्वार पहुंचेइस वर्ष, सुरेश सिंह तंवर ने रतलाम के जवाहर नगर मुक्तिधाम से 408 अस्थि कलश लेकर ट्रेन के माध्यम से हरिद्वार की यात्रा की। हरकी पैड़ी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद इन अस्थियों का गंगा नदी में तर्पण और विसर्जन किया गया। सुरेश तंवर का यह प्रयास उन लोगों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रदान करता है, जिनके परिवार या परिजन उनकी अस्थियों का विसर्जन करने के लिए नहीं आ सके। बड़े भाई के लापता होने के बाद से जारी है सेवासुरेश तंवर ने इस पुनीत कार्य की शुरुआत 28 साल पहले की थी, जब उनके बड़े भाई सोहन सिंह अचानक लापता हो गए थे। भाई की अनुपस्थिति और उनके बारे में अज्ञात स्थिति ने सुरेश को मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया। इस चिंता और तनाव ने सुरेश को अनजान लोगों की अस्थियों का तर्पण करने की प्रेरणा दी, ताकि उनके भाई की खैरियत और मानसिक शांति सुनिश्चित हो सके। इस सेवा के माध्यम से सुरेश ने उन लावारिस व्यक्तियों की अस्थियों का विसर्जन करना शुरू किया, जिनके परिवार का कोई अता-पता नहीं था या जिनके परिजन उनकी अस्थियों को नहीं लेने आए। भाई के लौटने के बाद भी जारी रहा पुण्य कार्यइस अद्वितीय सेवा का परिणाम भी सुरेश को मिला, जब 24 साल बाद उनके भाई सोहनसिंह सकुशल वापस घर लौट आए। हालांकि, कोरोना काल के दौरान उनके भाई का निधन हो गया, लेकिन सुरेश ने अपने इस पुनीत कार्य को जारी रखा। आज, यह प्रयास न केवल सुरेश का व्यक्तिगत अभियान है, बल्कि समाज के कई लोगों का सहयोग भी उन्हें मिल रहा है। कोरोना काल में भी जारी रहा कार्यकोरोना महामारी के दौरान जब कई परिवार अपने मृतकों की अस्थियां लेने नहीं आ सके, तब सुरेश सिंह तंवर और उनकी टीम ने आगे बढ़कर उन अस्थियों का भी तर्पण किया। यह कार्य समाज सेवा और मानवता की मिसाल के रूप में उभर कर आया है। सुरेश सिंह के साथियों का कहना है कि वे इस अभियान को अनवरत जारी रखेंगे ताकि कोई भी लावारिस व्यक्ति मोक्ष से वंचित न रहे। आम जनता का सहयोग बढ़ता जा रहा है इस पवित्र सेवा के लिए अब सुरेश तंवर को आमजन से भी व्यापक सहयोग मिल रहा है। सुरेश के इस प्रयास से कई समाजसेवी और संगठनों ने भी जुड़ना शुरू कर दिया है। लोग आर्थिक मदद और अन्य संसाधनों के जरिए इस नेक कार्य में भागीदारी निभा रहे हैं। हरिद्वार में अस्थियों के विसर्जन के दौरान भी स्थानीय लोग और पुजारी इस पहल की सराहना करते हुए सुरेश सिंह की सेवाओं का आदर करते हैं। समाजसेवा की मिसालरतलाम के सुरेश सिंह तंवर ने समाज सेवा के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह निस्संदेह अनूठा है। असहाय और लावारिस लोगों के अंतिम संस्कार और उनकी अस्थियों का विसर्जन, उनके द्वारा की जा रही एक अनोखी पहल है, जिसे हर किसी ने सराहा है। आज, जब 408 लावारिस अस्थियां हरिद्वार पहुंचीं और गंगा में विसर्जित की गईं, तब सुरेश सिंह की 28 वर्षों की समाजसेवा की इस यात्रा ने फिर एक नया अध्याय लिख दिया।

Solar Eclipse: सर्वपितृ अमावस्या पर साल का आखरी सूर्य ग्रहण, जानिए किन राशियों को करेगा प्रभावित

नई दिल्ली, पब्लिक वार्तान्यूज डेस्क| Solar Eclipse: साल 2024 का आखरी सूर्य ग्रहण सर्वपितृ अमावस्या के दिन यानी 02 अक्टूबर को होगा। इस दिन पितृ पक्ष का समापन भी होता है, जिसे तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य और पूजा-पाठ करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस ग्रहण का असर कब और कहां दिखाई देगा? साथ ही किन राशियों को यह प्रभावित करेगा। कब और कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?हिंदू पंचांग के अनुसार, 02 अक्टूबर 2024 को सूर्य ग्रहण की शुरुआत होगी। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में ग्रहण 2 अक्टूबर रात 9 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा जो मध्यरात्रि में 3 बजकर 17 मिनट पर खत्म होगा। इस वजह से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2024 Shadow) पेरू, फिजी, प्रशांत महासागर, आर्कटिक और दक्षिणी अमेरिका समिति आदि देशों में देखने को मिलेगा। मन्त्रों का करे जापसूर्य ग्रहण के समय पूजा-पाठ करना वर्जित है, लेकिन आप मन ही मन में किसी भी प्रभु के नाम का जप कर सकते हैं। इस दौरान गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जप करना फलदायी साबित होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचाव होता है। ग्रहण में भोजन, दूध, लस्सी, पनीर समेत अदि चीजों में तुलसी का पत्ता या कुश डाल देना चाहिए। ऐसा करने से यह चीजें सूर्य ग्रहण के प्रभाव से मुक्त हो जाती हैं। इसके बाद श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में अन्न, धन और वस्त्र का दान करना चाहिए। यह राशियां होगी प्रभावितज्योतिष पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण वृष, मिथुन, कर्क, सिंह कन्या वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को शुभ साबित हो सकता है। इस अवधि में आपको काम कारोबार में खास सफलता मिल सकती है। वहीं इस दौरान नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। साथ ही परिवार के सदस्यों से आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वहीं बिजनस में आपने जो वेिश किया था उसका आपको अचानक से अभी जाकर लाभ मिल सकता है। साथ ही इस दौरान आप कोई वाहन प्रापर्टी खरीद सकते हैं। वहीं सूर्य ग्रहण मेष, तुला और मकर राशि के जातकों को नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। वहीं इस अवधि में इन लोगों का किसी व्यक्ति के साथ मनमुटाव हो सकता है। साथ ही धन की हानि के योग बन रहे हैं। वहीं इस समय किसी बात को लेकर मानसिक अशांति हो सकती है। साथ ही इस समय आपको वाहन सावधानी से चलाना चाहिए। क्योंकि दुर्घटना के योग बन रहे हैं। (Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। पब्लिक वार्ता न्यूज नेटवर्क इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करे।)

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