Navratri 2024 : कब है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, इस सरल पूजा विधि से करे माता को प्रसन्न!

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि (Navratri 2024) का विशेष महत्व है। यह पर्व 9 दिनों तक चलता है, जिसमें मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर 11 अक्टूबर 2024 को समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। घट स्थापना का महत्व और शुभ मुहूर्त:नवरात्रि के पहले दिन घट या कलश स्थापना की जाती है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मातृगण का निवास होता है, इसलिए इसकी स्थापना से शुभ परिणाम मिलते हैं। पंडित धीरज शर्मा के अनुसार, इस वर्ष कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 3 अक्टूबर को सुबह 6:15 बजे से 7:22 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 6 मिनट है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। पूजन विधि:1. नवरात्रि के लिए एक दिन पहले जौ को पानी में भिगोकर रख दें ताकि वे अंकुरित हो सकें।2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।3. बालू में पानी डालकर उसमें जौ रखें।4. घट स्थापना के लिए घट में जल, गंगाजल, सिक्का, रोली, हल्दी, दूर्वा और सुपारी डालें।5. घट के ऊपर कलावा बांधकर नारियल रखें और आम के पत्ते घट के मुंह पर लगाएं।6. एक पात्र में स्वच्छ मिट्टी डालकर 7 तरह के अनाज बोएं और उसे चौकी पर रखें।7. धूप और दीप जलाएं, बाएं तरफ धूप और दाहिने तरफ दीपक रखें।8. गणपति, नवग्रहों और माता दुर्गा का आवाहन करें और विधिपूर्वक पूजा करें।9. नवरात्रि के पूरे 9 दिन तक माता का पाठ और आराधना अवश्य करें। घट स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए इसे किसी जानकार पंडित से मंत्रोच्चारण के साथ करवाना चाहिए।

सर्व पितृ अमावस्या : श्राद्ध कर्म में किन नियमों का करना होगा पालन और पितरों को प्रसन्न करने के क्या है उपाय?, जानिए…

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। सनातन धर्म में सर्व पितृ अमावस्या (Sarv Pitra Amavasya) का विशेष महत्व है। यह दिन उन पितरों के श्राद्ध के लिए होता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती। साल 2024 में सर्व पितृ अमावस्या 2 अक्टूबर, बुधवार को पड़ेगी। इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन किए गए श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य से पितृ दोष भी समाप्त होता है और पितरों को शांति मिलती है। लेकिन श्राद्ध कर्म के कुछ महत्वपूर्ण नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं। सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करें? 1. काले तिल का प्रयोग: श्राद्ध कर्म में काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। तर्पण करते समय और पिंड बनाते समय काले तिल का उपयोग अवश्य करें। मान्यता है कि काले तिल में तीर्थों का जल होता है, जिससे पितर तृप्त होते हैं।  2. ब्राह्मण भोज: इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है। ब्राह्मण भोज पितरों की संतुष्टि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 3. कुश का उपयोग: श्राद्ध करते समय या तर्पण देते समय कुश का उपयोग करें। गरुड़ पुराण के अनुसार, कुश का तर्पण आत्मा को शांति प्रदान करता है। 4. भूखे को भोजन कराएं: इस दिन कोई भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आ जाए, तो उसे भोजन जरूर कराएं। पितृ पक्ष में पितर किसी भी रूप में आ सकते हैं। 5. पंचबलि निकालें: ब्राह्मण भोज से पहले पंचबलि निकालने की परंपरा का पालन करें। पंचबलि का अर्थ है 5 प्राणियों—गाय, कुत्ता, कौवा, देवता और चींटियों के लिए भोजन निकालना। 6. गीत का पाठ करें: सर्व पितृ अमावस्या के दिन गीत का पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है। 7. दान-पुण्य करें: इस दिन धन, वस्त्र, अनाज और काले तिल का दान करने से पितर खुश होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर क्या न करें? 1. रात्रि में भोजन न कराएं: श्राद्ध का भोजन कभी भी रात में न कराएं। यह अशुभ माना जाता है। 2. तामसिक भोजन न करें: इस दिन घर के सदस्यों को तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। 3. मौन व्रत रखें: ब्राह्मण भोज के दौरान मौन रहना चाहिए और बिना अपशब्दों का प्रयोग किए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना चाहिए। 4. स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें: श्राद्ध का भोजन केले के पत्तों या स्टील के बर्तनों में नहीं परोसना चाहिए। चांदी, तांबे, कांसे के बर्तनों में भोजन परोसें। 5. कर्ज लेकर श्राद्ध न करें: यह ध्यान रखें कि श्राद्ध का आयोजन कर्ज लेकर नहीं करना चाहिए। 6. किसी का अपमान न करें: इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और अपशब्दों से बचना चाहिए।

श्राद्ध कर्म ऐसा भी: 400 लावारिस अस्थियां एक साथ चढ़ी ट्रेन में, हरिद्वार पहुंची, लेकिन किसने दिलाया मोक्ष!

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। श्राद्ध कर्म ऐसा भी: रतलाम जंक्शन पर सामान्य तौर पर लोग ट्रेन में चढ़ते उतरते देखे है। लेकिन क्या आपने कभी अस्थियों को ट्रेन में सफर करते देखा है? यहां एक अस्थि नहीं बल्कि 408 अस्थियां ट्रेन में सफर कर हरिद्वार पहुंची। ट्रेन में किसी शख्स के पास इतनी अधिक संख्या में अस्थियों को देखकर हर यात्री हैरान हो गया। हम बात कर रह है रतलाम के जनसेवी सुरेशसिंह तंवर की। सुरेशसिंह अपने साथी रवि तंवर के साथ ट्रेन में 408 लावारिस मृतकों की अस्थियां लेकर सवार हुए। इतनी अस्थियां देखकर ट्रेन के यात्री भी हिचकिचा गए। लेकिन जब उन्होंने इसकी कहानी सुनी तो सभी ने सराहना की। सुरेशसिंह ने 408 लावारिस और असहाय व्यक्तियों की अस्थियों को हरिद्वार पहुंचकर पवित्र गंगा नदी में विधि-विधान से विसर्जित किया। यह कार्यक्रम क्षत्रिय खंगार उत्थान समिति रतलाम के बैनर तले आयोजित किया गया। श्राद्ध पक्ष के दौरान सुरेश तंवर पिछले 28 वर्षों से लगातार यह पुण्य कार्य कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने अब तक 2800 से अधिक लावारिस और असहाय लोगों की अस्थियों को मां गंगा की गोद में समर्पित किया है। रतलाम से 400 अस्थि कलश लेकर हरिद्वार पहुंचेइस वर्ष, सुरेश सिंह तंवर ने रतलाम के जवाहर नगर मुक्तिधाम से 408 अस्थि कलश लेकर ट्रेन के माध्यम से हरिद्वार की यात्रा की। हरकी पैड़ी पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद इन अस्थियों का गंगा नदी में तर्पण और विसर्जन किया गया। सुरेश तंवर का यह प्रयास उन लोगों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रदान करता है, जिनके परिवार या परिजन उनकी अस्थियों का विसर्जन करने के लिए नहीं आ सके। बड़े भाई के लापता होने के बाद से जारी है सेवासुरेश तंवर ने इस पुनीत कार्य की शुरुआत 28 साल पहले की थी, जब उनके बड़े भाई सोहन सिंह अचानक लापता हो गए थे। भाई की अनुपस्थिति और उनके बारे में अज्ञात स्थिति ने सुरेश को मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया। इस चिंता और तनाव ने सुरेश को अनजान लोगों की अस्थियों का तर्पण करने की प्रेरणा दी, ताकि उनके भाई की खैरियत और मानसिक शांति सुनिश्चित हो सके। इस सेवा के माध्यम से सुरेश ने उन लावारिस व्यक्तियों की अस्थियों का विसर्जन करना शुरू किया, जिनके परिवार का कोई अता-पता नहीं था या जिनके परिजन उनकी अस्थियों को नहीं लेने आए। भाई के लौटने के बाद भी जारी रहा पुण्य कार्यइस अद्वितीय सेवा का परिणाम भी सुरेश को मिला, जब 24 साल बाद उनके भाई सोहनसिंह सकुशल वापस घर लौट आए। हालांकि, कोरोना काल के दौरान उनके भाई का निधन हो गया, लेकिन सुरेश ने अपने इस पुनीत कार्य को जारी रखा। आज, यह प्रयास न केवल सुरेश का व्यक्तिगत अभियान है, बल्कि समाज के कई लोगों का सहयोग भी उन्हें मिल रहा है। कोरोना काल में भी जारी रहा कार्यकोरोना महामारी के दौरान जब कई परिवार अपने मृतकों की अस्थियां लेने नहीं आ सके, तब सुरेश सिंह तंवर और उनकी टीम ने आगे बढ़कर उन अस्थियों का भी तर्पण किया। यह कार्य समाज सेवा और मानवता की मिसाल के रूप में उभर कर आया है। सुरेश सिंह के साथियों का कहना है कि वे इस अभियान को अनवरत जारी रखेंगे ताकि कोई भी लावारिस व्यक्ति मोक्ष से वंचित न रहे। आम जनता का सहयोग बढ़ता जा रहा है इस पवित्र सेवा के लिए अब सुरेश तंवर को आमजन से भी व्यापक सहयोग मिल रहा है। सुरेश के इस प्रयास से कई समाजसेवी और संगठनों ने भी जुड़ना शुरू कर दिया है। लोग आर्थिक मदद और अन्य संसाधनों के जरिए इस नेक कार्य में भागीदारी निभा रहे हैं। हरिद्वार में अस्थियों के विसर्जन के दौरान भी स्थानीय लोग और पुजारी इस पहल की सराहना करते हुए सुरेश सिंह की सेवाओं का आदर करते हैं। समाजसेवा की मिसालरतलाम के सुरेश सिंह तंवर ने समाज सेवा के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह निस्संदेह अनूठा है। असहाय और लावारिस लोगों के अंतिम संस्कार और उनकी अस्थियों का विसर्जन, उनके द्वारा की जा रही एक अनोखी पहल है, जिसे हर किसी ने सराहा है। आज, जब 408 लावारिस अस्थियां हरिद्वार पहुंचीं और गंगा में विसर्जित की गईं, तब सुरेश सिंह की 28 वर्षों की समाजसेवा की इस यात्रा ने फिर एक नया अध्याय लिख दिया।

Solar Eclipse: सर्वपितृ अमावस्या पर साल का आखरी सूर्य ग्रहण, जानिए किन राशियों को करेगा प्रभावित

नई दिल्ली, पब्लिक वार्तान्यूज डेस्क| Solar Eclipse: साल 2024 का आखरी सूर्य ग्रहण सर्वपितृ अमावस्या के दिन यानी 02 अक्टूबर को होगा। इस दिन पितृ पक्ष का समापन भी होता है, जिसे तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य और पूजा-पाठ करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं इस ग्रहण का असर कब और कहां दिखाई देगा? साथ ही किन राशियों को यह प्रभावित करेगा। कब और कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण?हिंदू पंचांग के अनुसार, 02 अक्टूबर 2024 को सूर्य ग्रहण की शुरुआत होगी। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में ग्रहण 2 अक्टूबर रात 9 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा जो मध्यरात्रि में 3 बजकर 17 मिनट पर खत्म होगा। इस वजह से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2024 Shadow) पेरू, फिजी, प्रशांत महासागर, आर्कटिक और दक्षिणी अमेरिका समिति आदि देशों में देखने को मिलेगा। मन्त्रों का करे जापसूर्य ग्रहण के समय पूजा-पाठ करना वर्जित है, लेकिन आप मन ही मन में किसी भी प्रभु के नाम का जप कर सकते हैं। इस दौरान गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जप करना फलदायी साबित होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचाव होता है। ग्रहण में भोजन, दूध, लस्सी, पनीर समेत अदि चीजों में तुलसी का पत्ता या कुश डाल देना चाहिए। ऐसा करने से यह चीजें सूर्य ग्रहण के प्रभाव से मुक्त हो जाती हैं। इसके बाद श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में अन्न, धन और वस्त्र का दान करना चाहिए। यह राशियां होगी प्रभावितज्योतिष पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण वृष, मिथुन, कर्क, सिंह कन्या वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को शुभ साबित हो सकता है। इस अवधि में आपको काम कारोबार में खास सफलता मिल सकती है। वहीं इस दौरान नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं। साथ ही परिवार के सदस्यों से आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वहीं बिजनस में आपने जो वेिश किया था उसका आपको अचानक से अभी जाकर लाभ मिल सकता है। साथ ही इस दौरान आप कोई वाहन प्रापर्टी खरीद सकते हैं। वहीं सूर्य ग्रहण मेष, तुला और मकर राशि के जातकों को नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। वहीं इस अवधि में इन लोगों का किसी व्यक्ति के साथ मनमुटाव हो सकता है। साथ ही धन की हानि के योग बन रहे हैं। वहीं इस समय किसी बात को लेकर मानसिक अशांति हो सकती है। साथ ही इस समय आपको वाहन सावधानी से चलाना चाहिए। क्योंकि दुर्घटना के योग बन रहे हैं। (Disclaimer: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। पब्लिक वार्ता न्यूज नेटवर्क इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करे।)

Ratlam News: माधवराव सिंधिया की 23वीं पुण्यतिथि पर रतलाम मंडी प्रांगण में श्रद्धांजलि अर्पित

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Ratlam News: स्व. माधवराव सिंधिया की 23वीं पुण्यतिथि पर रतलाम कृषि उपज मंडी में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सिंधिया फैंस क्लब, रतलाम जिला और शहर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. माधवराव सिंधिया को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मंडी प्रांगण में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, मध्यप्रदेश भाजपा कार्यसमिति  सदस्य निमिष व्यास, प्रवीण सोनी, श्रीमती मंगला देवड़ा, जीवन सिंह देवड़ा, एमआईसी सदस्य धर्मेंद्र व्यास, पार्षद हितेश कामरेड, गौरव त्रिपाठी, मधु शिरोड़कर, प्रभु नेका, महेश व्यास सहित कई प्रमुख नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सिंधिया फैंस क्लब के जिला अध्यक्ष कीर्ति कुमार जायसवाल, शहर अध्यक्ष विक्रम लोहिया, विवेक लोहिया, राजेश कर्णधार, महेश पांचाल, चेतन शर्मा, नीरज बरमेचा, पूर्व पार्षद सत्यजीत भट्ट, सुधांशु व्यास, नरेंद्र राठौड़, पंकज चतुर्वेदी, कांतिलाल प्रजापत, राजेश दिनेश गुर्जर और अन्य पदाधिकारी भी शामिल रहे। मंडी प्रांगण में आए सभी गणमान्य व्यक्तियों ने स्व. माधवराव सिंधिया की स्मृतियों को याद किया।

MP News: गौशाला में सजाए फ़ूड स्टॉल, मेन्यू में गुलाब जामुन, रबड़ी घेवर जैसे 56 पकवान, पितरों के श्राद्ध का अनूठा कार्यक्रम

गायों के लिए शादियों के रिसेप्शन की तरह सजावट, गाय को भोजन देने से देवी-देवता होते हैं तृप्त, आयोजन में करीब 1 क्विंटल सामग्री का उपयोग. रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। MP News: मध्यप्रदेश के रतलाम में श्राद्ध पक्ष के दौरान एक अनूठा कार्यक्रम देखने में आया है। यहां एक गौशाला में मैरिज गार्डन की तर्ज पर फ़ूड स्टॉल लगाए गए। फ़ूड स्टॉल्स के साथ खाने की हर एक वैरायटी के स्टिकर्स भी लगाए। खास बात यह है की ये फ़ूड स्टॉल्स किसी इंसान के लिए नहीं बल्कि गौशाला की गायों के लिए थे। गायों के लिए मेन्यू में 56 पकवानों को बनाया गया। दरअसल रतलाम के गौसेवक परिवार द्वारा खेतलपुर स्थित गौशाला में एक अनूठा और प्रेरणादायक श्राद्ध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में करीब 400 गायों को 56 प्रकार के विशेष व्यंजनों का भोग लगाया गया। इस अभिनव प्रयास का उद्देश्य पितृ शांति के लिए गायों की सेवा करना था। कार्यक्रम में गायों के लिए शादियों के रिसेप्शन की तरह सजावट की गई, और विभिन्न प्रकार के पकवानों के स्टॉल लगाए गए थे। मेन्यू में 56 प्रकार के व्यंजन शामिल किए गए, जो गायों के लिए एक विशेष भोग के रूप में प्रस्तुत किए गए। मेन्यू में गुलाब जामुन, जलेबी और भी बहुत कुछगायों के लिए परोसे गए भोजन में 12 प्रकार की मिठाइयों की खास व्यवस्था थी। इनमें गुलाब जामुन, जलेबी, बर्फी, काजू कतली, रबड़ी घेवर, मावा बाटी, पेड़ा, और बालूशाही जैसी मिठाइयाँ प्रमुख थीं। इसके अलावा, सेब, अनार, केला, पपीता, और पाइनएप्पल सहित 15 प्रकार के ताजे फलों का भी भोग लगाया गया। ड्राईफ्रूट्स और पशु आहार गायों के पोषण को ध्यान में रखते हुए दाख, तिल, परमल, मखाने, और गुड़ जैसे 20 – 25 प्रकार के ड्राईफ्रूट्स शामिल किए गए। इसके साथ ही, खली, कपास्या, ज्वार, बाजरा, जौ जैसे 6 प्रकार के पशु आहार और कई प्रकार की सब्जियाँ भी गायों के लिए भोग में रखी गईं। इस आयोजन में करीब 1 क्विंटल सामग्री का उपयोग किया गया। आयोजकों ने बताया कि पितरों की शांति और गौ सेवा को समर्पित यह आयोजन भविष्य में भी जारी रहेगा, ताकि समाज में इस प्रकार की सेवा का महत्व और बढ़े। पितृपक्ष में गाय का महत्वपितृपक्ष में गाय का विशेष महत्व है। इसी के कारण श्राद्ध के भोजन का एक अंश गाय माता को भी खिलाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, गाय को वैतरणी से पार लगाने वाले कहा गया है। इसके साथ ही गाय में देवी-देवताओं का वास होता है। ऐसे में गाय को भोजन देने से देवी-देवता तृप्त हो जाते है। इसके साथ बी पितर प्रसन्न हो जाते हैं। 

Ratlam News: सेवा भारती ने मानव श्रंखला बनाकर दिया “सुपोषण भारत – समर्थ भारत” का संदेश

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: समाजिक संस्था सेवा भारती ने कुपोषण के खिलाफ अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए आज रतलाम में “सुपोषण जागरूकता अभियान” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुपोषण के खिलाफ जागरूकता फैलाना और समाज में सुपोषण के प्रति सजगता लाना था। नगर के महाराजा सज्जनसिंह चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर संघ के विभाग सेवा प्रमुख गजेंद्र वर्मा, रतलाम जिला संघचालक सुरेन्द्र सुरेका, जिला महिला बाल विकास अधिकारी रजनीश जी सिन्हा, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रोमा शर्मा हाड़ा और सेवा भारती रतलाम के अध्यक्ष अनुज छजेड सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। विभाग सेवा प्रमुख गजेंद्र वर्मा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सेवा भारती हर साल सितंबर महीने में यह अभियान चलाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों में सुपोषण के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा, “यदि भारत का युवा और महिलाएं सही पोषण प्राप्त करें, तो हमारा देश प्रगति के नए सोपान प्राप्त करेगा।” मुख्य वक्ता डा. रोमा शर्मा हाड़ा ने सुपोषण प्राप्त करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि सामान्य जीवन में कुछ छोटे-छोटे परिवर्तन करके हम न केवल खुद को बल्कि समाज को भी सुपोषित कर सकते हैं। महिला बाल विकास अधिकारी रजनीश सिन्हा ने शासन की योजनाओं के बारे में जानकारी दी और कहा कि “सरकार हर नागरिक के सुपोषण के लिए कई योजनाएं चला रही है। हमें इनका लाभ उठाना चाहिए।” मानव श्रृंखला बनाकर दी जागरूकताकार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण था मानव श्रंखला का निर्माण, जिसमें उपस्थित जनशक्ति ने मिलकर “सुपोषित भारत – समर्थ भारत” का संकल्प लिया। इस दौरान सेवा भारती सह सचिव श्रीमती आशा दुबे ने नशा मुक्ति की शपथ दिलाई। जिला सेवा प्रमुख पवन कसेरा ने उपस्थित सभी का आभार व्यक्त किया। सह सेवा प्रमुख मनीष सोनी द्वारा अतिथि परिचय दिया। मंच संचालन सेवा भारती सचिव मोहित कसेरा ने किया। कार्यक्रम में नगर सेवा प्रमुख पंकज भाटी, सकल जैन समाज के महेंद्र बोथरा, लायन पूर्व रिजनल चेयर पर्सन वीणा छाजेड सहित बड़ी संख्या में समाज जन और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सेवा भारती निरंतर समाज में परिवर्तन लाने के लिए कटिबद्ध है, और कुपोषण के खिलाफ उनकी यह मुहिम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Ratlam News: खाटू के कला भवन की तर्ज पर सजेगा बाबा श्याम का दरबार, भजनों के साथ भक्तों को लुभाएंगे कोलकाता के फूल

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: श्रीराधे श्याम सरकार के चतुर्थ वार्षिक उत्सव के उपलक्ष्य में श्री राधेश्याम दरबार सेवा परिवार द्वारा बाबा श्याम का चतुर्थ आनंद उत्सव रतलाम में आयोजित किया जा रहा है। यह भव्य आयोजन पावर हाउस रोड स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप के पीछे लायंस क्लब हॉल में 28 सितंबर शनिवार की रात से शुरू होगा। कार्यक्रम में बाबा श्याम का दरबार खाटू के प्रसिद्ध कला भवन की तर्ज पर सजाया जाएगा, जो इस कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। (Khatu Shyam Ji) दरबार की साज-सज्जा के लिए कोलकाता के विशेष फूलों का उपयोग किया जाएगा, और सालासर बालाजी से श्रीराम पुजारी जी इस आयोजन के लिए विशेष रूप से पधारेंगे। बाबा श्याम के भक्तों के लिए भजन संध्याबाबा श्याम के इस वार्षिक उत्सव में भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें कई प्रसिद्ध भजन गायक बाबा की महिमा का गुणगान करेंगे। भजन गायक कनिका ग्रोवर (मनासा), दीपांशु अग्रवाल (ब्यावर), अनुज पारिक (भीलवाड़ा), प्रसन्न परसाई (रतलाम), जीतू धोरा (रतलाम) अपनी सुरीली आवाज में बाबा श्याम के भजनों की प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा, संगीत की धुनों पर मोहित बारोट म्यूजिकल ग्रुप (नागदा) भी अपनी विशेष प्रस्तुति से भक्तों को भक्ति रस में डुबो देंगे। विशेष छप्पन भोग और मंगला आरतीआगामी 28 तारीख शनिवार को रात 8 बजे से प्रारंभ होने वाला यह कार्यक्रम ब्रह्म मुहूर्त तक जारी रहेगा। बाबा श्याम के कीर्तन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें भक्तजन रातभर बाबा के भजनों का आनंद लेंगे। कीर्तन के बाद बाबा श्याम को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा, जिसमें विशेष रूप से तैयार व्यंजनों का समावेश होगा। इसके बाद मंगला आरती की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। मां जीण भवानी और सालासर बालाजी का भी दरबार सजेगाइस आयोजन के दौरान बाबा श्याम के साथ ही मां जीण भवानी और सालासर बालाजी का भी दरबार विशेष रूप से सजाया जाएगा। श्री राधे श्याम दरबार सेवा परिवार के सेवादारों ने बताया कि इस आयोजन में शहर और आसपास के भक्तों की बड़ी संख्या में भागीदारी की संभावना है। आयोजन का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति का अनुभव कराना है, बल्कि उन्हें बाबा श्याम की कृपा और आशीर्वाद से जोड़ना है।

परंपरा निभाता रतलाम: रिमझिम बारिश और सदाबहार गीतों पर खनके चंटिये, पुरुषों का गरबा बना आकर्षण

त्रिनेत्र सांस्कृतिक संगम समिति का 3 दिवसीय आयोजन, डालूमोदी बाजार में जुटे खेल प्रेमी रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। शहर के मध्य में आयोजित त्रिनेत्र सांस्कृतिक संगम समिति के तीन दिवसीय पारंपरिक चंटिया खेल कार्यक्रम ने पुराने जमाने की यादों को ताजा कर दिया। 26 से 28 सितंबर तक आयोजित इस आयोजन में सैकड़ों की संख्या में पुरुष खिलाड़ी बांस की चंटियों के साथ पुराने फिल्मों के सदाबहार नगमों पर थिरकते नजर आए। रिमझिम बारिश और ढोल की थाप के साथ शहनाई की सुमधुर धुनों पर खेल प्रेमियों और दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। परंपरागत तौर पर चंटियों को पुरुषों का गरबा कहा जाता है। इसमें पुरुषों के हाथ में छोटे डांडिया नहीं बल्कि 3 से 4 फिट के डंडे होते है। यह कार्यक्रम डालूमोदी बाजार में आयोजित किया गया, जहां रात 8:30 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। जैसे-जैसे रात ढलती गई, माहौल और भी जीवंत हो उठा। यह आयोजन खासतौर से पुरुषों के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के पुरुष खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। पुरानी पीढ़ी के खिलाड़ी जहां अपने अनुभवों और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाते नजर आए, वहीं युवा पीढ़ी भी अपनी ऊर्जा और उत्साह से कार्यक्रम में रंग भरते दिखे। पुराने दिनों की परंपरा को जीवित रखने का प्रयासइस कार्यक्रम का उद्देश्य पुरानी परंपराओं को जीवित रखना और नई पीढ़ी को इससे जोड़ना है। पुराने खिलाड़ी बताते है की चंटिया खेलने की परंपरा राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही है। महाराजा सज्जनसिंह के समय में यह खेल महलवाड़ा में खेला जाता था, फिर थावरिया बाजार और अब डालूमोदी बाजार में इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। उन्होंने त्रिनेत्र सांस्कृतिक संगम समिति के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह आयोजन पुराने दिनों की यादें ताजा कर देता है। शहर के युवाओं को आगे आकर इसमें सहभागिता करना चाहिए। सदाबहार गीतों की गूंज और खिलाड़ियों का जोशकार्यक्रम की शुरुआत गुरुवार रात दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, जिसमें शहर के अखाड़े और व्यायामशाला के प्रमुखों ने हिस्सा लिया। चंटियों की खनक और खिलाड़ियों के पैरों की लय का तालमेल शहनाई वादक और ढोल की थाप के साथ मिलकर मनोरम दृश्य उत्पन्न कर रहा था। एक से बढ़कर एक पुराने सदाबहार गीतों की धुनों पर सभी खिलाड़ी पूरे जोश के साथ चंटिया खेलते नजर आए। तीन दिन तक रहेगा उत्साहत्रिनेत्र सांस्कृतिक संगम के संस्थापक अध्यक्ष सुरेंद्र वोरा और अध्यक्ष राकेश पीपाड़ा ने बताया कि यह आयोजन 28 सितंबर तक चलेगा। आयोजन स्थल पर चंटियों की विशेष व्यवस्था मंच के समीप की गई थी, ताकि खिलाड़ी बिना किसी बाधा के खेल सकें और दर्शक खेल का आनंद ले सकें। कार्यक्रम में शहरवासियों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और पुराने दिनों की यादों में खो गए। रिमझिम बारिश की फुहारों के बीच रातभर खिलाड़ियों ने चंटियों के खेल का भरपूर आनंद लिया। ढोल-शहनाई की धुनों पर सदाबहार गीतों के साथ खेल की मस्ती ने जैसे माहौल को संगीतमय बना दिया। न केवल पुराने खिलाड़ी बल्कि युवा पीढ़ी भी इस आयोजन में शामिल होकर अपने आप को रोक नहीं पाई और चंटिया खेलने का लुत्फ उठाया। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम ने रतलाम के लोगों को उनकी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ा और एक बार फिर से इस परंपरा को जीवित रखने का संकल्प लिया।

Indore News : भूतपूर्व छात्र मिलन समारोह, छात्रों ने दी सामाजिक एकता की मिसाल, आदिवासी परंपरा में झूमे पूर्व छात्र

इंदौर – पब्लिक वार्ता,प्रदीप रावत। राजीव गांधी बालक छात्रावास, भंवरकुआ में भूतपूर्व छात्र मिलन समारोह धूमधाम से आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने सामाजिक एकता का संदेश दिया। इस विशेष आयोजन में अनुसूचित जनजाति हॉस्टल के पूर्व छात्रों ने वर्तमान छात्रों के साथ मिलकर कार्यक्रम का आनंद लिया। समारोह में आदिवासी परंपरा के वाद्य यंत्रों—ढोल, फेफरिये—की धुन पर सभी ने जमकर नृत्य किया। पूर्व छात्रों का पुष्पहार से स्वागत किया गया और ट्रॉफी के रूप में स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। (Indore News) अतीत से वर्तमान तक का सफरराजीव गांधी बालक छात्रावास में सन 1993 से 2024 तक शिक्षा प्राप्त करने वाले पूर्व छात्रों ने इस मिलन समारोह का आयोजन किया, जिसमें कई पूर्व छात्र आज शासकीय पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अनुभवों को वर्तमान छात्रों के साथ साझा किया और उन्हें भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के बारे में मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और एक-दूसरे का पुष्पों की वर्षा से स्वागत किया। समारोह में सम्मानित हुए वरिष्ठ अधिकारीइस अनूठे मिलन समारोह में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए, जिनमें एमपीबी के मुख्य महाप्रबंधक श्री प्रकाश चौहान, सहायक संचालक रविंद्र देवड़ा, आबकारी अधिकारी रमेश सिसोदिया, पीडब्ल्यूडी के देवराम मालवीय, सहायक मानचित्रकार जामसिंह चौहान, और असिस्टेंट प्रोफेसर सज्जन सिंह मौर्य प्रमुख थे। इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस मिलन समारोह का हिस्सा बने। अनुभवों का साझा करनाकार्यक्रम में भूतपूर्व छात्रों ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां सुनाई, जिससे वर्तमान छात्रों को प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि छात्रावास के दिन उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा थे, और अब वे अपने कार्यक्षेत्र में भी उसी लगन और एकता को बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। इस भव्य आयोजन का संचालन  वीरेंद्र पटेल, सुरेश चौहान, सुरेंद्र डोडवे, मनोहर मडलोई, मगन भाबर और महेश गिरवाल द्वारा किया गया। इस भूतपूर्व छात्र मिलन समारोह ने न केवल छात्रों के बीच सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश फैलाया, बल्कि यह भी साबित किया कि शिक्षा के माध्यम से कैसे व्यक्ति समाज में अपने कर्तव्यों को पूरा कर सकता है।