रतलाम में भगवान देवनारायणजी जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा, नौवें वर्ष उमड़ा आस्था का सैलाब

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। भगवान देवनारायणजी के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर रविवार को रतलाम नगर में भव्य और ऐतिहासिक शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा प्रातः 10 बजे त्रिपोलिया गेट से प्रारंभ हुई, जिसमें गुजर समाज के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा में भगवान देवनारायणजी की आकर्षक सजीव झांकी, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियों ने पूरे नगर को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया। WATCH VIDEO शोभायात्रा त्रिपोलिया गेट से निकलकर चांदनी चौक, चोमुखीपुल, धानमंडी, नाहरपुरा चौराहा, कॉलेज रोड, नगर निगम चौराहा, महलवाड़ा, धावरिया बाजार, चार चक्की चौराहा एवं रत्नेश्वर रोड होते हुए गुजर मोहल्ला स्थित श्री देवनारायण मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। दोपहर में श्री देवनारायण मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात प्रसादी वितरण किया गया। आयोजन के दौरान शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए समाज के स्वयंसेवक एवं पुलिस बल तैनात रहा। उल्लेखनीय है कि भगवान देवनारायणजी जन्मोत्सव एवं भव्य शोभायात्रा का आयोजन लगातार नौवें वर्ष किया गया। पूरे कार्यक्रम का सफल आयोजन समस्त गुजर समाज, जिला रतलाम द्वारा किया गया, जिसमें समाजजनों का सराहनीय सहयोग रहा।

Ratlam News: भगवान देवनारायण जन्मोत्सव पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा

रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: गुर्जर समाज द्वारा भगवान देवनारायण के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में 9 फरवरी 2025 को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह निर्णय शुक्रवार को धभाई जी का वास स्थित श्री देवनारायण मंदिर में आयोजित बैठक में लिया गया।   मीडिया प्रभारी जयदीप गुर्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान श्री देवनारायण का जन्मोत्सव प्रतिवर्ष माघ शुक्ल पक्ष की छठ तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष शोभायात्रा त्रिपोलिया गेट से सुबह 10 बजे प्रारंभ होकर दोपहर 3 बजे श्री देवनारायण मंदिर, धभाई जी का वास पर संपन्न होगी।   शोभायात्रा के समापन के पश्चात भगवान श्री देवनारायण की महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद महाप्रसाद के रूप में भोजन वितरण होगा।   बैठक में गुर्जर समाज के सभी प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया और आयोजन को भव्य बनाने के लिए आवश्यक तैयारियों पर चर्चा की। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु शामिल होंगे।  

Devmali “Best Tourist Village”: कच्चे घरों के पीछे पक्के विश्वासों की अनूठी कहानी, मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन

राजस्थान/मध्यप्रदेश – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Devmali “Best Tourist Village” : राजस्थान यूं तो कई अनोखे और ऐतिहासिक गांवों से भरा पड़ा है, लेकिन अजमेर जिले का देवमाली गांव एक ऐसा स्थल है, जहां आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपने पूर्वजों की मान्यताओं और परंपराओं का पालन करते हुए रहते हैं। देवमाली गांव की विशेषता यह है कि यहां के सभी घर कच्चे हैं, चाहे फिर परिवार कितना ही समृद्ध क्यों न हो। इस अनोखे गांव की अनगिनत विशेषताएं इसे अन्य गांवों से अलग करती हैं। राजस्थान के इस गांव का मध्यप्रदेश से भी कनेक्शन है। मध्यप्रदेश में निवासरत गुर्जर समाज के लोग देवमाली भगवान देवनारायण के दर्शन को जाते है। उनके लिए यह एक विशेष तीर्थ है। भगवान देवनारायण गुर्जर समाज के आराध्य देव है। मध्यप्रदेश के रतलाम से गुर्जर समाज युवा इकाई अध्यक्ष मुरलीधर गुर्जर के अनुसार लंबे समय से देवमाली के मंदिर के दर्शन के लिए संदेश यात्राओं का आयोजन करते आ रहे है। जिसमें प्रदेश के कई हिस्सों से देवमाली के लिए यात्री एकत्रित होते है। संदेश यात्रा का उद्देश्य धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक होता है। जिसमें देवमाली की विशेषताओं को आत्मसात करना है, जिसके कारण आज वह श्रेष्ठ पर्यटक गांव बना है। कच्ची छतें, पक्के विश्वासदेवमाली गांव की सबसे अनूठी पहचान है यहां के घरों की कच्ची छतें। गांव में मान्यता है कि भगवान देवनारायण ने गांववासियों को आशीर्वाद देते समय कहा था कि यदि वे शांति से जीवन जीना चाहते हैं, तो उन्हें अपने घरों की छत कभी पक्की नहीं बनानी चाहिए। इस चेतावनी को देवमाली के लोगों ने पूरी श्रद्धा से स्वीकार किया और आज भी इसे निभाते आ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों ने इस मान्यता को नज़रअंदाज़ करते हुए घरों की छतें पक्की बनाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद सभी ने इस परंपरा को पुनः स्वीकार कर लिया। आज चाहे गांव में कोई करोड़पति हो या सामान्य व्यक्ति, सभी के घरों की छतें कच्ची ही हैं। अपराध मुक्त और शाकाहारी गांवदेवमाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह गांव पूरी तरह से शाकाहारी है। यहां मांसाहार की कोई परंपरा नहीं है और यह गांव अपराध मुक्त भी है। देवमाली में आज तक कभी चोरी की घटना नहीं हुई है, जिससे यहां का शांतिपूर्ण जीवन और भी स्पष्ट होता है। यहां के लोग प्रकृति और भगवान देवनारायण की पूजा करते हैं और पूरी सादगी व ईमानदारी से अपना जीवन व्यतीत करते हैं। भगवान देवनारायण का मंदिरगुर्जर कच्चे घरों के पीछे पक्के विश्वासों की अनूठी कहानी समाज के आराध्य देव, भगवान देवनारायण का मंदिर देवमाली की पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर पूरे गांव की आस्था का केन्द्र है। गांववाले मानते हैं कि जब भगवान देवनारायण इस गांव में आए थे, तो वे ग्रामीणों की सेवा और भक्ति से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने गांव को आशीर्वाद दिया। ग्रामीण हर सुबह नंगे पैर पहाड़ी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, जो उनकी गहरी आस्था और परंपराओं को दर्शाता है। इसके साथ ही, पहाड़ी के पत्थरों को भी पवित्र माना जाता है और कोई भी ग्रामीण या पर्यटक इन पत्थरों को उठाकर नहीं ले जाता। नीम के पेड़ों का विशेष सम्मानदेवमाली गांव में पर्यावरण और पेड़ों का विशेष सम्मान किया जाता है। विशेष रूप से, नीम के पेड़ों को गांव में पवित्र माना जाता है और उनकी पूजा की जाती है। नीम के पेड़ के प्रति गांववासियों का आदरभाव उनके प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना को दर्शाता है। गुर्जर समाज और देवमालीदेवमाली गांव में केवल गुर्जर जाति के लोग निवास करते हैं, जिनमें लावड़ा गोत्र के लोग प्रमुख हैं। यहां की आबादी लगभग 1500 है, और सभी लोग पशुपालन के माध्यम से अपना जीवनयापन करते हैं। इस गांव की एक और अद्वितीय विशेषता यह है कि गांव की कोई भी भूमि किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं है। पूरे गांव की जमीन भगवान देवनारायण के नाम मानी जाती है और ग्रामीण इसे उनकी धरोहर के रूप में देखते हैं। देवमाली की प्राचीन परंपराएंदेवमाली की परंपराएं इतनी प्राचीन और गहरी हैं कि कलियुग में भी सतयुग की अनुभूति होती है। यहां आज भी लोग अपने पूर्वजों की चेतावनियों और निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हैं। केरोसिन के उपयोग पर यहां पूरी तरह से प्रतिबंध है, और गांव में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता हर व्यक्ति में दिखाई देती है। देवमाली गांव की यह खासियतें इसे एक अद्वितीय पर्यटन स्थल के रूप में उभरने में मदद कर रही हैं। लोग यहां के शांतिपूर्ण और परंपरागत जीवन से जुड़ने के लिए आते हैं और इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनाते हैं। देवमाली में न सिर्फ गुर्जर समाज की परंपराएं जीवित हैं, बल्कि यह गांव पूरे विश्व को यह संदेश देता है कि आधुनिकता और समृद्धि के बावजूद परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखा जा सकता है। देवमाली एक उदाहरण है कि पक्के विश्वास और आस्था के साथ कैसे एक संपूर्ण समाज शांतिपूर्ण और खुशहाल जीवन जी सकता है, चाहे उसके घर कच्चे ही क्यों न हों।