Ratlam News: UCO बैंक FD फ्रॉड: आउटसोर्स कर्मचारी पर 5 एफडी तोड़कर लाखों की धोखाधड़ी का आरोप, पीड़िता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग
रतलाम में UCO बैंक के आउटसोर्स कर्मचारी पर महिला ग्राहक की 5 एफडी तोड़कर राशि निकालने का आरोप लगा है। पीड़िता ने पुलिस और बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। रतलाम- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Ratlam News: रतलाम में UCO बैंक FD फ्रॉड का मामला सामने आया है। एक महिला ग्राहक ने बैंक के आउटसोर्स (बीसी) कर्मचारी पर उसकी पांच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़कर राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि शिकायत और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो आरोपी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है और न ही उसकी जमा राशि वापस मिली है। मामले में महिला ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। क्या है पूरा मामला? प्राप्त जानकारी के अनुसार, आभा लोढ़ा, पति संजय लोढ़ा, निवासी टाटा नगर, रतलाम का यूको बैंक में खाता है। उन्होंने बैंक में पांच एफडी करवाई थीं, जिनके नंबर 712638, 712639, 712481, 712482 और 712483 बताए गए हैं। महिला का आरोप है कि बैंक में बीसी (आउटसोर्स) कर्मचारी के रूप में कार्यरत राहुल राठौड़ ने धोखाधड़ी करते हुए उनकी सभी एफडी समय से पहले तोड़ दीं और पूरी राशि निकाल ली। इस कथित गड़बड़ी की जानकारी उन्हें 30 मई 2026 को मिली। एफआईआर के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप पीड़िता के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने माणकचौक थाना में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद एफआईआर भी दर्ज हुई। हालांकि उनका आरोप है कि अब तक आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एफडी की राशि अभी तक वापस नहीं मिली है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अन्य ग्राहकों के साथ भी धोखाधड़ी का दावा आवेदन में पीड़िता ने दावा किया है कि आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी ने बैंक के अन्य ग्राहकों के साथ भी इसी तरह की कथित धोखाधड़ी की है। ऐसे में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि सभी प्रभावित ग्राहकों को न्याय मिल सके। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में बैंक को नोटिस दिए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता ने क्या की मांग? आभा लोढ़ा ने प्रशासन से मांग की है कि— नोट: यह खबर पीड़िता द्वारा दिए गए लिखित आवेदन और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा जांच एजेंसियों के अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं।