मेरी बस्ती – मेरी अयोध्या : गली – मोहल्लों में हो रहे धार्मिक आयोजन, अपने आराध्य श्रीराम की झलक बना अक्षत कलश

पब्लिक वार्ता – रतलाम, जयदीप गुर्जर। अयोध्या में भगवान श्रीराम के विराजमान होने की तारीख तय हो चुकी है। आगामी 22 जनवरी 2024 को मुख्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। जिसके चलते अक्षत कलश के माध्यम से घर – घर निमंत्रण दिया जा रहा है। अयोध्या से आए अक्षत कलश का हिंदू समाज विधि विधान से पूजन अर्चन कर रहा है। गली – मोहल्लों में अयोध्या से आए अक्षत कलश की शोभायात्रा निकाली जा रही है। कई क्षेत्रों के मंदिरों में महाआरती कर प्रसादी का आयोजन हो रहा है। कलश को सिर पर धारण कर महिला व पुरुष स्वयं को भाग्यशाली मान रहे है। रविवार को अक्षत कलश नगर के मोहन टाकीज, भंडारी गली, शास्त्री नगर, मालिकुआ, दीनदयाल नगर आदि विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचा। यहां क्षेत्रवासियों ने ढोल ढमाकों के साथ पूजन अर्चन किया। क्षेत्र की महिलाओं व बच्चों ने बढ़ चढ़कर कलश पूजन व शोभायात्रा में हिस्सा लिया। जयदीप गुर्जर ने बताया की नगर के विभिन्न क्षेत्रों में  अक्षत कलश का सामुहिक पूजन किया जा रहा है। समाज में 22 जनवरी को रामलला के विराजमान होने की खुशी है। 22 जनवरी को घर – घर में दिवाली मनाई जाएगी। घरों में माताएं व बहने रंगोली बनाकर व दिप लगाकर प्रभु श्रीराम का स्वागत करेगी। हम सभी का अयोध्या जाना हमारे लिए संभव नहीं है इसलिए हमने “मेरी बस्ती – मेरी अयोध्या” का नारा दिया है। इस दिन हम घरों में साज – सज्जा, मंदिरों में भजन कीर्तन, भंडारे आदि करते हुए इस दिन को विशेष बना सकते है। इस अवसर पर क्षेत्र के दीपक परमार, प्रद्युम्न शर्मा, मनीष रावल, गौरव शर्मा, अनिल रौतेला, रामचंद्र डोई, रवि सेन, मनोज पंवार, उमेश माली, लक्की कसेरा, आशु टांक, कैलाशबाई धभाई, टममुबाई माली, लक्ष्मी माहेश्वरी, अंजू सोलंकी आदि मौजूद रहे।

राम मंदिर अयोध्या : नगर में घर – घर पिले चावल देकर दे रहे निमंत्रण, लोग अपने आराध्य के लिए बिछा रहे पलके

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की रूपरेखा तय हो गई है। 22 जनवरी 2024 को मुख्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा। लेकिन उससे पहले अक्षत कलश के माध्यम से घर – घर निमंत्रण दिया जा रहा है। अयोध्या से आए अक्षत कलश को रामभक्त विधि विधान से पूजन अर्चन कर रहे है। मोहल्लों में पहुंच रहे अक्षत कलश को रैली के रूप में भृमण करवाकर मंदिर में पूजन के लिए रखा जा रहा है। भ्रमण के दौरान कई लोग कलश को अपने घर में प्रवेश देकर उसका पूजन कर रहे है। थावरिया बाजार बस्ती के धभाई जी का वास में बुधवार को अक्षत कलश पहुंचा। यहां क्षेत्रवासियों ने ढोल ढमाकों के साथ उसका स्वागत किया। जिसके बाद रैली के रूप में कलश को भ्रमण करवाते हुए घर – घर पिले चावल देते हुए अयोध्या में बनने जा रहे भव्य राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण दिया। लोगों ने घर के बाहर आए कलश के दर्शन वंदन कर उसका पूजन किया। बस्ती के संयोजक मुरलीधर गुर्जर ने बताया की क्षेत्र में महिलाओं ने कलश का स्वागत वंदन किया। भजन कीर्तन करते हुए पूरे मोहल्ले में शोभायात्रा निकाली गई। बाद में कलश देवनारायण मंदिर पर सार्वजनिक पूजन के लिए रखा गया। हम लोगों का अयोध्या जाना मुमकिन नहीं है, लेकिन हम उस दिन अपने मोहल्ले व नगर में एक दिन की दीवाली जरूर मना सकते है। इस दिन हम घरों में साज – सज्जा, मंदिरों में भजन कीर्तन, भंडारे आदि करते हुए इस दिन को विशेष बना सकते है। इस दौरान क्षेत्र के राधेश्याम गुर्जर, नरेंद्रसिंह सोनगरा, हिम्मतसिंह चौहान, भीमसिंह गोहिल, सीताबाई गुर्जर, मंजू सक्सेना आदि भक्तगण उपस्थित थे।

समाज जागरण : सेवावीरों ने किया 121वां सामुहिक हनुमान चालीसा पाठ, मांगल्य मंदिर पर हुआ तुलसी पूजन

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। नगर की सेवावीर सामाजिक कल्याण समिति द्वारा संचालित श्रीमंगलनाथ महाकाल रक्तदान मण्डल द्वारा सामुहिक हनुमान चालीसा पाठ का क्रम लगातार जारी है। मंडल के सदस्य प्रत्येक मंगलवार को निश्चित मंदिर का चुनाव कर वहां के क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर सुबह 8 बजे चालीसा पाठ करते है। इस मंगलवार हनुमान चालीसा का 121वां सामुहिक पाठ किया गया। यह पाठ इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्र स्थित मांगल्य मंदिर (जेवीएल मंदिर) पर रखा गया। साथ ही मंदिर में उपस्थित लोगों ने तुलसी पूजन भी किया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मंडल प्रचार प्रमुख अतुल जैन ने बताया की प्रति मंगलवार किये जाने वाले इस आयोजन का उद्देश्य समस्त सदस्यों को एकत्रित कर समाज हित के कार्य करने हेतु समाज को जाग्रत करना है। तुलसी पूजन करने के पहले सभी को तुलसी के औषधिय गुणों व धार्मिक मान्यता व वैज्ञानिक रूप से उसका महत्व बताया गया।  अयोध्या नहीं जा सकते, तो यही मनाए उत्सवमण्डल द्वारा समस्त समाज से आग्रह किया गया कि 22 जनवरी के दिन सभी लोगो का अयोध्या जाना संभव नही है इसलिए अपने-अपने क्षेत्र के धार्मिक स्थलों, जैन मंदिर, गुरुद्वारा आदि स्थानों पर अपनी परंपरा एवं मान्यता के अनुसार पूजन अर्चन करे। प्रभात फेरिया निकाले, दीपावली मना कर प्रभु श्रीराम की आराधना करे।


भीलांचल के गांधी : मामा बालेश्वर दयाल स्मारिका का लोकार्पण, पुण्यतिथि पर हुआ भव्य आयोजन

पब्लिक वार्ता – झाबुआ,जयदीप गुर्जर। वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व राज्यसभा सदस्य समाजवादी चिंतक मामा बालेश्वर दयाल की 25वीं पुण्यतिथि भील आश्रम, बामनिया में मनाई गई। इस अवसर पर मामा बालेश्वर दयाल के लाखों अनुयायियों ने 25 दिसंबर की सुबह से 26 दिसंबर की शाम तक समाधि स्थल पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बामनिया स्थित आश्रम पर 25 दिसंबर को रात भर सभा के साथ भजन व कीर्तन होता रहा। समाधि स्थल पर इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार रामस्वरूप मंत्री द्वारा संपादित स्मारिका “भीलांचल के गांधी : मामा बालेश्वर दयाल” का लोकार्पण पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम, वरिष्ठ पत्रकार क्रांति कुमार वैद्य, पर्यावरणविद् डॉ खुशालसिंह पुरोहित, गोविंद यादव, जयस संरक्षक डॉ अभय ओहरी, समाजवादी नेता राजू अग्रवाल, मास्टर रामलाल निनामा, पत्रकार सत्यनारायण शर्मा, दिनेश सिंह कुशवाह, लीलाधर चौधरी, डॉ सोमेश्वर सिंह एवं इंद्रसेन निमोनकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर समाजवादी विचारक व पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा कि मामा जी की पुण्यतिथि पर बड़ी संख्या में अनुयायी बामनिया पहुंचते हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अनुयायियों के लिए किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नही की जाती है बल्कि परेशानियां पैदा की जाती है। सरकार मामाजी को भारत रत्न देने की बजाए उन्हें तिरस्कृत कर रही है। डॉ सुनीलम ने कहा कि गुजरात मॉडल की नहीं मामाजी के सामाजिक आर्थिक मॉडल की देश को जरूरत है।     जयस संरक्षक डॉ अभय ओहरी ने कहा कि समाधि स्थल का  विकास एक शिक्षण केंद्र के तौर पर किया जाना चाहिए तथा मामाजी का संग्रहालय स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा जयस मामाजी के सपनों को साकार करेगा।   डॉ खुशाल सिंह पुरोहित ने कहा कि समाज परिवर्तन हेतु मामा जी ने अपना पूरा जीवन लगाया था। इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को मामा बालेश्वर दयाल शोध पीठ की स्थापना करनी चाहिए। जिससे नई पीढ़ी मामा जी के विचारों से जुड़ सके।    वरिष्ठ पत्रकार रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि मामा बालेश्वर दयाल के विचारों के प्रचार प्रसार को लेकर हमने क्रांति कुमार वैद्य एवं डॉ सुनीलम के साथ मिलकर अब तक 20 पुस्तिकाएं एवं स्मारिकाएं प्रकाशित की है, प्रकाशन का कार्य आगे भी जारी रहेगा।    वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजवादी चिंतक कांति कुमार वैद्य ने कहा कि मामा बालेश्वर दयाल का मूल्यांकन होना अभी बाकी है। ज्यों ज्यों समय बीतता जा रहा है त्यों त्यों मामा जी के विचारों की प्रासंगिकता लगातार बढ़ती जा रही है। युवा पीढ़ी भी मामाजी के प्रति आकर्षित हो रही है।     सुशीला बहन ने कहा कि मेरे लिए यह गर्व की बात है कि मामाजी के जीवनकाल में  उनकी सेवा करने का मौका मिला तथा अब मेरा जीवन मामा जी के विचारों के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित है।    मास्टर रामलाल निनामा ने बताया कि हर वर्ष की तरह  इस वर्ष भी राजस्थान के हजारों अनुयायियों ने 21 दिसंबर को पदयात्रा शुरू की थी। उन्होंने बताया कि मेरी आठ पीढ़ियां मामा जी के विचारों से प्रभावित रही है। हम मामाजी को देवताओं का देवता मानते हैं। उन्होंने कहा की नई पीढ़ी को जोड़ने के लिए साहित्य प्रकाशन और उसका वितरण जरूरी है।     समाजवादी नेता गोविंद यादव ने कहा कि वर्तमान समय में पूंजीवाद का मुकाबला मामा जी द्वारा प्रतिपादित प्रकृतिवाद एवं समाजवाद से चल रहा है।उन्होंने कहा मामा जी के विचारों पर चलकर ही मानवता के अस्तित्व को बचाया जा सकता है।बामनिया कार्यक्रम राजस्थान की वयोवृद्ध समाजवादी नेत्री मालती बहन की उपस्थिति एवं संरक्षण में संपन्न हुआ। 

हिंदू जागरण मंच का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग संपन्न, जिला, नगर व खंड में हुई नई घोषणाएं

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। हिंदू जागरण मंच का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग अमृत सागर कॉलोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पर सम्पन्न  हुआ। वर्ग में प्रांत कार्यकारिणी सदस्य तरुण पगारे, राजेश  कटारिया व धर्मेंद्र सिंह ने कार्यकर्ताओं को अपना मार्गदर्शन दिया। वर्ग के दौरान आयोजित बैठक में जिला संयोजक जगदीश पाटीदार द्वारा जिला, नगर व खंड की नई घोषणा की गई। जिसमें विजय राय यादव को जिला सह संयोजक, प्रवीण नायक को जिला कार्यकारिणी सदस्य, पृथ्वी रंगशाही को जिला युवा समूह प्रमुख, आयुष शर्मा को जिला विधि समूह प्रमुख, योगेश चौहान को नगर सहसंयोजक, नामली खंड से यतेंद्र उपाध्याय को खण्ड संयोजक, सुनील अटोलिया को सहसंयोजक, अर्जुन बैरागी को सहसंयोजक, मनीष डांगी को कार्यकारिणी सदस्य, दीपक  पडियार को कार्यकारिणी सदस्य, सचिन पाटीदार को कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया। इसके अलावा रतलाम नगर के विक्रम भाग से संजू मालवीय को भाग संयोजक एवं गोलू  रोतेलिया को भाग सह संयोजक मनोनीत किया गया।

शौर्य संचलन : कतारबद्ध होकर निकले बजरंग दल कार्यकर्ता, 150 से अधिक बजरंगी हुए शामिल

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल द्वारा जिले के अंचल में शौर्य संचलन निकाला। जिले के रावटी में शिवगढ़ खंड में निकाले गए बजरंग दल के शौर्य संचलन में 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान सभी कार्यकर्ता गणवेश पहनकर संचलन में शामिल हुए। संचलन में विहीप बजरंग दल के विभाग मंत्री दीपक व्यास ने अपना बौद्धिक रखा। व्यास ने कहा की 31वर्ष पूर्व संगठित हिन्दू शक्ति ने शौर्य प्रकट करते हुए 464 वर्षों पूर्व लगे कलंक बाबरी मस्जिद के टिके को मिटाया था। स्वाभिमान जागरण और रक्षा के लिये, हिन्दू पुनरूत्थान के लिये जिन सभी हिन्दुओं ने प्रयास, पराक्रम तथा बलिदान किया है उन सभी को प्रणाम। इस दौरान मंच पर जिला संयोजक मुकेश व्यास, प्रखंड उपाध्यक्ष रोहित राठौड मौजूद रहे। मंच का संचालन बजरंग दल जिला सहसंयोजक राहुल हाडा द्वारा किया गया। शौर्य संचलन में रावटी प्रखंड पालक शंकरसिंह सोलंकी, जिला सहसंयोजक राजाराम ओहरी, जिला सहसंयोजक आशु टाक, लखन बरमुंडा, जिला अखाड़ा प्रमुख कृष्णा भामा आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।

महाप्रसादी आयोजन : नागरवास में क्षेत्रवासियों ने मनाई भैरव अष्टमी, महापौर प्रहलाद पटेल ने उतारी मंशापूर्ण भैरव की आरती

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। भैरव अष्टमी पर शहर के विभिन्न देवस्थानों पर कई आयोजन हुए। इसी क्रम में नागरवास स्थित मंशापूर्ण भैरव मंदिर पर महाप्रसादी भोजन भंडारे का आयोजन किया गया। क्षेत्रवासियों ने भैरव मंदिर पर आकर्षक विद्युत सज्जा करते हुए धूमधाम से भैरव अष्टमी मनाई। महाप्रसादी शुरू होने से पहले भगवान भैरवनाथ का विधि विधान से पूजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से महापौर प्रहलाद पटेल व क्षेत्रीय पार्षद व एमआईसी सदस्य धर्मेद्र व्यास मौजूद रहे। मुख्य अतिथि पटेल व व्यास ने भगवान भैरवनाथ की आरती करते हुए शहर की खुशहाली की कामना की। मंशापूर्ण भैरवनाथ को विभिन्न प्रकार के 56 से अधिक पकवानों का भोग लगाया गया। महाप्रसादी के पूर्व दोपहर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ। जिसके बाद शाम 6 बजे पंडित गोपाल मेहता द्वारा सहस्त्र दीपों से आकर्षक आरती की गई। देर रात तक चले आयोजन में सैकड़ों भक्तों ने महाप्रसादी भंडारे का धर्म लाभ लिया। इस दौरान प्रमुख रूप से क्षेत्र के पंडित देवेश मेहता, हिंदू जागरण मंच के कुलदीप माहेश्वरी, वैभव व्यास, राजू सुरोलिया, देवेश व्यास आदि उपस्थित रहे।

मेरे घर राम आए है : अयोध्या से आए निमंत्रण के पिले चावल और चित्र पहुंचेगे 5 लाख से अधिक गांवों में, 22 जनवरी को होंगे रामलला विराजमान

उज्जैन में हुई आरएसएस व विहिप की बैठक, रतलाम आये कलश का हुआ पूजन पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी को विराजित होने वाले रामलला को लेकर 28 जिलों में जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रम को लेकर शनिवार को उज्जैन में बैठक हुई। इसमें रतलाम के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यहां पर जिले के कार्यकर्ताओं को पूजित अक्षत कलश का वितरण किया गया। कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद् प्रान्त संगठन मंत्री नंददास दंड़ोतिया ने कहा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या से पूजित अक्षत (पीले चावल) देशभर में भेजे गए हैं। एक-एक कलश में 2 किलो पूजित अक्षत तो दूसरी में चित्र और पत्रक है। जिन्हें मालवा प्रांत के प्रमुख कार्यकर्ता जिले में प्रत्येक हिंदू परिवार को निमंत्रण के लिए देंगे। प्रत्येक जिला केंद्रो पर श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट के बैनर तले बैठक होगी। जिले के प्रमुख कार्यकर्ताओं व सभी हिंदू संगठनों को 20 दिसंबर से पूर्व यह बैठक करनी है। यह सामग्री वितरण के लिए शहर व गांव-गांव जाएगी। यह अभियान 1 जनवरी से शुरू होगा जो कि 15 जनवरी यानी मकर संक्रांति तक चलेगा। 5 लाख से अधिक गांव में अक्षत भेजकर उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस अवसर पर महंत श्री विनीतगिरी, संत श्री 1008 महामंडलेश्वर शांतिस्वरूपानन्द गिरी का भी मार्गदर्शन उपस्थित कार्यकर्ताओं को प्राप्त हुआ। बैठक में संघ के प्रांत सहकार्यवाह रघुवीरसिंह सिसोदिया, प्रांत मंत्री विनोद शर्मा सहित प्रांत के कार्यकर्ता मौजूद थे। रतलाम जिले से विहीप बजरंगदल के जिला उपाध्यक्ष पवन बंजारा व जिला मंत्री गौरव शर्मा उज्जैन बैठक में पहुंचे। जहां से वे कलश लेकर रतलाम के लिए रवाना हुए। रतलाम पहुंचने के बाद उसे बड़बड़ हनुमान मंदिर, कालिका माता मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर पर रखकर पूजन किया गया। इस दौरान संगठन मंत्री सुखदेव पांचाल, विभाग संयोजक राघव त्रिवेदी, विभाग मंत्री दीपक व्यास, अक्षय गोमे, मुकेश व्यास, आशु टाक मनोज पंवार, अनिल रौतेला, मोंटी जायसवाल, दीपक प्रजापत, सुनील राठौड़, आशु बन्ना सहित प्रखण्ड पदाधिकारी उपस्थित थे।

दशहरा मिलन समारोह : रतलाम के नेपाली समाज ने मनाया बड़ा दसैं का त्यौहार, तिलक लगाकर निभाई परंपरा

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। जिले में नेपाली संस्कृति परिषद द्वारा दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया। बड़बड़ हनुमान मंदिर परिसर स्थित राम भवन में रखे गए इस आयोजन में रतलाम के नेपाली परिवारों ने हिस्सा लिया। आपको बता दे कि नेपाल देश में नेपाली समाज दशहरा को बड़ा दसैं के रूप में मनाते है। गोरखाओं के बीच भी ये त्यौहार मनाया जाता है। यह नेपाल सम्वत् वार्षिक कैलेंडर में सबसे लंबा और सबसे शुभ त्यौहार माना जाता है, जिसे नेपाली लोगों द्वारा दुनिया भर में अपने प्रवासी लोगों के साथ मनाया जाता है। समाज द्वारा रतलाम के इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सामाजिक समरसता संयोजक एडवोकेट देवराज सिंह ने अपना उद्बोधन दिया। देवराजसिंह ने कहा की नेपाली समाज एक बहादुर कौम है। हमारे प्रथम फील्ड मार्शल मानिक शाह द्वारा एक शब्द गोरखाओं के बारे में कहा गया था कि मौत से जो नहीं डरता वो या तो झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है। नेपाली कौम बहादुर कौम है। देवराजसिंह ने साथ ही कहा की सभी भारतीय हिंदू सनातन बहुसंख्यक समाज के अभिन्न अंग है। आप लोगों को यहां पर किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो समूर्ण हिंदू समाज आपके साथ खड़ा है। परंपरागत त्यौहार मनाता है समाज :नेपाल में इसे देश के सबसे बड़े त्यौहार के रूप में भी जाना जाता है और इस समय 5 दिनों का सबसे लंबा राष्ट्रीय/सार्वजनिक अवकाश रहता है। यह नेपाल में सबसे प्रतीक्षित त्यौहार है। इस समय नेपाल के लोग दुनिया के सभी हिस्सों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से एक साथ जश्न मनाने के लिए एकत्रित होते हैं। त्यौहार की अवधि के दौरान सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और अन्य कार्यालय बंद रहते हैं।समाज के नरेंद्र श्रेष्ठ ने बताया की दशहरे पर बुजुर्गों व बड़ो का आशीर्वाद लेने के लिए सभी एकत्रित होते हैं  तथा आनेवाली पीढ़ी को भी उसी परंपरा का पालन करने की प्रेरणा देते है। इस दिन सामूहिक तौर पर पूरा परिवार बुजुर्गों से माता दुर्गा का लाल टीका व 9 दिन तक लगाए हरे जमरे को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है। रतलाम में नेपाली समजा करीब 400 की संख्या में निवासरत है।समाज के लोगों ने पशुपति श्रेष्ठ एवं रुक्मणी श्रेष्ठ के हाथों दशहरे का टीका एवं जमरा ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में सुमन थापा ,ललित जंगशाही, दिनेश विश्वकर्मा, ज्योति गुरुंग गायत्री सिंह एवं सैकड़ो समाजजन शामिल रहे।

भैरव मंदिर ऐसा भी! : यहां गलती होने पर तुरंत मिलती है सजा, निःसंतान दंपत्तियों के लिए वरदान है ये मंदिर

कई किस्से कहानियों के साथ आज भी जिंदा है परंपरा, पढ़िए विशेष खबर रतलाम के इस अनूठे भैरव मंदिर की…. पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। भारत धार्मिक मान्यता प्रधान देश है। यहांहर त्यौहार अपना विशेष महत्व रखता है। देश के हर राज्य व शहर में चमत्कारिक देवस्थल मौजूद हैं जहां चमत्कारिक घटनाओं की साक्षात अनुभूति होती है। आज हम बात करेंगे मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में स्थित ऐसे ही एक प्राचीन स्थल की। यहां के धभाई जी का वास में स्थित भैरव मंदिर अपनी अनोखी गाथाओं व किस्से कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है की यहां भूत बाधाओं से छुटकारा मिलने के साथ – साथ निःसंतान दंपत्ति को संतान का सुख भी मिलता है। इसके अलावा यहां अगर पूजन – पाठ में गलती या खराब मन से कोई पहुंचता है तो उसे तुरंत भैरव महाराज सजा देते है। संबंधित व्यक्ति को उसी समय गलती का एहसास हो जाता है। इस मंदिर को पछाड़मल भैरव के नाम से जाना जाता है। इस नाम के पीछे मान्यता है कि जो कोई भी गलती करता है, तो उसे भैरवनाथ पछाड़ कर सजा देते है। भैरवनाथ को मां दुर्गा के बाद पूजने का विशेष महत्व है कहा जाता है कि जिस प्रकार नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार भगवान भैरवनाथ की आराधना भी महत्व रखती है। दर्शन के लिए इस मंदिर तक आप शहर के थावरिया बाजार या हरमाला रोड होते हुए आसानी पहुंच सकते है। दो प्रतिमाएं विराजमान, मदिरा व दूध का लगता भोग :पिछले कई वर्षों से मंदिर में सेवा कर रहे रविंद्रसिंह सोनगरा बताते हैं कि यहां भैरवनाथ की काला व गौरा दो प्रतिमाएं विराजमान है। इनमें से एक को मदिरा तो दूसरे को दूध का भोग लगता है। इन प्रतिमाओं की स्थापना की सही जानकारी किसी को नहीं मालूम है। बताया जाता है कि रतलाम रियासतकाल से यह मंदिर स्थापित है। यहां नौ दिन अखंड ज्योत व जवारों की स्थापना होती है। दशहरे पर विधि विधान से जवारों का विसर्जन किया जाता है। देश भर से यहां श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते है। यहां रियासतकाल के दौर से जवारों का विसर्जन किया जा रहा है जिसे स्थानीय लोग बाड़ी के नाम से भी जानते है। फिलहाल मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरू होगा जो कि जनसहयोग से पूरा किया जाएगा। मनोकामना पूरी करते है पछाड़मल भैरव :इस मंदिर के बारे में कई किस्से कहानियां आज भी जिंदा है। भक्त यहां आज भी मनोकामना लेकर आते है। जिनकी मनोकामनाएं यहां से पूरी हुई है और शहर के बाहर है वे लोग नवरात्रि में विशेष रूप से यहां आते है। मान्यता है की यहां जवार विसर्जन के दौरान शामिल होने पर दुख दर्द भी विसर्जित हो जाते है। विसर्जन के बाद लोग जवार को अपने साथ लेकर घर आते है और लाल कपड़े में बांध कर भी रखते है। लोगों द्वारा दावा किया जाता है कि यहां भूत बाधाओं व शारीरिक कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। निःसंतान दंपत्ति यहां संतान की मनोकामना लेकर जाते है तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। भैरव को यहां मदिरा व दूध के अलावा लोग सिंदूर का चोला चढ़ाते है। कई लोग यहां बकरे की बलि या दाल, बाटी व चूरमे की मन्नत भी रखते है। इस क्षेत्र के लोगों की मान्यता है कि यहां मन्नत लेने से सबकुछ मिलता है। सबसे खास बात है कि यहां मन्नत के समय कुछ खास चढ़ावा नहीं चढ़ाना होता है। मदिरा, दूध या नारियल से ही भैरव बाबा खुश हो जाते है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। पब्लिक वार्ता इस बारे में किसी प्रकार की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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