महाप्रसादी आयोजन : नागरवास में क्षेत्रवासियों ने मनाई भैरव अष्टमी, महापौर प्रहलाद पटेल ने उतारी मंशापूर्ण भैरव की आरती

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। भैरव अष्टमी पर शहर के विभिन्न देवस्थानों पर कई आयोजन हुए। इसी क्रम में नागरवास स्थित मंशापूर्ण भैरव मंदिर पर महाप्रसादी भोजन भंडारे का आयोजन किया गया। क्षेत्रवासियों ने भैरव मंदिर पर आकर्षक विद्युत सज्जा करते हुए धूमधाम से भैरव अष्टमी मनाई। महाप्रसादी शुरू होने से पहले भगवान भैरवनाथ का विधि विधान से पूजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से महापौर प्रहलाद पटेल व क्षेत्रीय पार्षद व एमआईसी सदस्य धर्मेद्र व्यास मौजूद रहे। मुख्य अतिथि पटेल व व्यास ने भगवान भैरवनाथ की आरती करते हुए शहर की खुशहाली की कामना की। मंशापूर्ण भैरवनाथ को विभिन्न प्रकार के 56 से अधिक पकवानों का भोग लगाया गया। महाप्रसादी के पूर्व दोपहर में सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ। जिसके बाद शाम 6 बजे पंडित गोपाल मेहता द्वारा सहस्त्र दीपों से आकर्षक आरती की गई। देर रात तक चले आयोजन में सैकड़ों भक्तों ने महाप्रसादी भंडारे का धर्म लाभ लिया। इस दौरान प्रमुख रूप से क्षेत्र के पंडित देवेश मेहता, हिंदू जागरण मंच के कुलदीप माहेश्वरी, वैभव व्यास, राजू सुरोलिया, देवेश व्यास आदि उपस्थित रहे।

मेरे घर राम आए है : अयोध्या से आए निमंत्रण के पिले चावल और चित्र पहुंचेगे 5 लाख से अधिक गांवों में, 22 जनवरी को होंगे रामलला विराजमान

उज्जैन में हुई आरएसएस व विहिप की बैठक, रतलाम आये कलश का हुआ पूजन पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी को विराजित होने वाले रामलला को लेकर 28 जिलों में जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रम को लेकर शनिवार को उज्जैन में बैठक हुई। इसमें रतलाम के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। यहां पर जिले के कार्यकर्ताओं को पूजित अक्षत कलश का वितरण किया गया। कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद् प्रान्त संगठन मंत्री नंददास दंड़ोतिया ने कहा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या से पूजित अक्षत (पीले चावल) देशभर में भेजे गए हैं। एक-एक कलश में 2 किलो पूजित अक्षत तो दूसरी में चित्र और पत्रक है। जिन्हें मालवा प्रांत के प्रमुख कार्यकर्ता जिले में प्रत्येक हिंदू परिवार को निमंत्रण के लिए देंगे। प्रत्येक जिला केंद्रो पर श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट के बैनर तले बैठक होगी। जिले के प्रमुख कार्यकर्ताओं व सभी हिंदू संगठनों को 20 दिसंबर से पूर्व यह बैठक करनी है। यह सामग्री वितरण के लिए शहर व गांव-गांव जाएगी। यह अभियान 1 जनवरी से शुरू होगा जो कि 15 जनवरी यानी मकर संक्रांति तक चलेगा। 5 लाख से अधिक गांव में अक्षत भेजकर उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस अवसर पर महंत श्री विनीतगिरी, संत श्री 1008 महामंडलेश्वर शांतिस्वरूपानन्द गिरी का भी मार्गदर्शन उपस्थित कार्यकर्ताओं को प्राप्त हुआ। बैठक में संघ के प्रांत सहकार्यवाह रघुवीरसिंह सिसोदिया, प्रांत मंत्री विनोद शर्मा सहित प्रांत के कार्यकर्ता मौजूद थे। रतलाम जिले से विहीप बजरंगदल के जिला उपाध्यक्ष पवन बंजारा व जिला मंत्री गौरव शर्मा उज्जैन बैठक में पहुंचे। जहां से वे कलश लेकर रतलाम के लिए रवाना हुए। रतलाम पहुंचने के बाद उसे बड़बड़ हनुमान मंदिर, कालिका माता मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर पर रखकर पूजन किया गया। इस दौरान संगठन मंत्री सुखदेव पांचाल, विभाग संयोजक राघव त्रिवेदी, विभाग मंत्री दीपक व्यास, अक्षय गोमे, मुकेश व्यास, आशु टाक मनोज पंवार, अनिल रौतेला, मोंटी जायसवाल, दीपक प्रजापत, सुनील राठौड़, आशु बन्ना सहित प्रखण्ड पदाधिकारी उपस्थित थे।

दशहरा मिलन समारोह : रतलाम के नेपाली समाज ने मनाया बड़ा दसैं का त्यौहार, तिलक लगाकर निभाई परंपरा

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। जिले में नेपाली संस्कृति परिषद द्वारा दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया। बड़बड़ हनुमान मंदिर परिसर स्थित राम भवन में रखे गए इस आयोजन में रतलाम के नेपाली परिवारों ने हिस्सा लिया। आपको बता दे कि नेपाल देश में नेपाली समाज दशहरा को बड़ा दसैं के रूप में मनाते है। गोरखाओं के बीच भी ये त्यौहार मनाया जाता है। यह नेपाल सम्वत् वार्षिक कैलेंडर में सबसे लंबा और सबसे शुभ त्यौहार माना जाता है, जिसे नेपाली लोगों द्वारा दुनिया भर में अपने प्रवासी लोगों के साथ मनाया जाता है। समाज द्वारा रतलाम के इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सामाजिक समरसता संयोजक एडवोकेट देवराज सिंह ने अपना उद्बोधन दिया। देवराजसिंह ने कहा की नेपाली समाज एक बहादुर कौम है। हमारे प्रथम फील्ड मार्शल मानिक शाह द्वारा एक शब्द गोरखाओं के बारे में कहा गया था कि मौत से जो नहीं डरता वो या तो झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है। नेपाली कौम बहादुर कौम है। देवराजसिंह ने साथ ही कहा की सभी भारतीय हिंदू सनातन बहुसंख्यक समाज के अभिन्न अंग है। आप लोगों को यहां पर किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो समूर्ण हिंदू समाज आपके साथ खड़ा है। परंपरागत त्यौहार मनाता है समाज :नेपाल में इसे देश के सबसे बड़े त्यौहार के रूप में भी जाना जाता है और इस समय 5 दिनों का सबसे लंबा राष्ट्रीय/सार्वजनिक अवकाश रहता है। यह नेपाल में सबसे प्रतीक्षित त्यौहार है। इस समय नेपाल के लोग दुनिया के सभी हिस्सों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से एक साथ जश्न मनाने के लिए एकत्रित होते हैं। त्यौहार की अवधि के दौरान सभी सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और अन्य कार्यालय बंद रहते हैं।समाज के नरेंद्र श्रेष्ठ ने बताया की दशहरे पर बुजुर्गों व बड़ो का आशीर्वाद लेने के लिए सभी एकत्रित होते हैं  तथा आनेवाली पीढ़ी को भी उसी परंपरा का पालन करने की प्रेरणा देते है। इस दिन सामूहिक तौर पर पूरा परिवार बुजुर्गों से माता दुर्गा का लाल टीका व 9 दिन तक लगाए हरे जमरे को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है। रतलाम में नेपाली समजा करीब 400 की संख्या में निवासरत है।समाज के लोगों ने पशुपति श्रेष्ठ एवं रुक्मणी श्रेष्ठ के हाथों दशहरे का टीका एवं जमरा ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में सुमन थापा ,ललित जंगशाही, दिनेश विश्वकर्मा, ज्योति गुरुंग गायत्री सिंह एवं सैकड़ो समाजजन शामिल रहे।

भैरव मंदिर ऐसा भी! : यहां गलती होने पर तुरंत मिलती है सजा, निःसंतान दंपत्तियों के लिए वरदान है ये मंदिर

कई किस्से कहानियों के साथ आज भी जिंदा है परंपरा, पढ़िए विशेष खबर रतलाम के इस अनूठे भैरव मंदिर की…. पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। भारत धार्मिक मान्यता प्रधान देश है। यहांहर त्यौहार अपना विशेष महत्व रखता है। देश के हर राज्य व शहर में चमत्कारिक देवस्थल मौजूद हैं जहां चमत्कारिक घटनाओं की साक्षात अनुभूति होती है। आज हम बात करेंगे मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में स्थित ऐसे ही एक प्राचीन स्थल की। यहां के धभाई जी का वास में स्थित भैरव मंदिर अपनी अनोखी गाथाओं व किस्से कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है की यहां भूत बाधाओं से छुटकारा मिलने के साथ – साथ निःसंतान दंपत्ति को संतान का सुख भी मिलता है। इसके अलावा यहां अगर पूजन – पाठ में गलती या खराब मन से कोई पहुंचता है तो उसे तुरंत भैरव महाराज सजा देते है। संबंधित व्यक्ति को उसी समय गलती का एहसास हो जाता है। इस मंदिर को पछाड़मल भैरव के नाम से जाना जाता है। इस नाम के पीछे मान्यता है कि जो कोई भी गलती करता है, तो उसे भैरवनाथ पछाड़ कर सजा देते है। भैरवनाथ को मां दुर्गा के बाद पूजने का विशेष महत्व है कहा जाता है कि जिस प्रकार नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार भगवान भैरवनाथ की आराधना भी महत्व रखती है। दर्शन के लिए इस मंदिर तक आप शहर के थावरिया बाजार या हरमाला रोड होते हुए आसानी पहुंच सकते है। दो प्रतिमाएं विराजमान, मदिरा व दूध का लगता भोग :पिछले कई वर्षों से मंदिर में सेवा कर रहे रविंद्रसिंह सोनगरा बताते हैं कि यहां भैरवनाथ की काला व गौरा दो प्रतिमाएं विराजमान है। इनमें से एक को मदिरा तो दूसरे को दूध का भोग लगता है। इन प्रतिमाओं की स्थापना की सही जानकारी किसी को नहीं मालूम है। बताया जाता है कि रतलाम रियासतकाल से यह मंदिर स्थापित है। यहां नौ दिन अखंड ज्योत व जवारों की स्थापना होती है। दशहरे पर विधि विधान से जवारों का विसर्जन किया जाता है। देश भर से यहां श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते है। यहां रियासतकाल के दौर से जवारों का विसर्जन किया जा रहा है जिसे स्थानीय लोग बाड़ी के नाम से भी जानते है। फिलहाल मंदिर के जीर्णोद्धार का काम शुरू होगा जो कि जनसहयोग से पूरा किया जाएगा। मनोकामना पूरी करते है पछाड़मल भैरव :इस मंदिर के बारे में कई किस्से कहानियां आज भी जिंदा है। भक्त यहां आज भी मनोकामना लेकर आते है। जिनकी मनोकामनाएं यहां से पूरी हुई है और शहर के बाहर है वे लोग नवरात्रि में विशेष रूप से यहां आते है। मान्यता है की यहां जवार विसर्जन के दौरान शामिल होने पर दुख दर्द भी विसर्जित हो जाते है। विसर्जन के बाद लोग जवार को अपने साथ लेकर घर आते है और लाल कपड़े में बांध कर भी रखते है। लोगों द्वारा दावा किया जाता है कि यहां भूत बाधाओं व शारीरिक कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। निःसंतान दंपत्ति यहां संतान की मनोकामना लेकर जाते है तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। भैरव को यहां मदिरा व दूध के अलावा लोग सिंदूर का चोला चढ़ाते है। कई लोग यहां बकरे की बलि या दाल, बाटी व चूरमे की मन्नत भी रखते है। इस क्षेत्र के लोगों की मान्यता है कि यहां मन्नत लेने से सबकुछ मिलता है। सबसे खास बात है कि यहां मन्नत के समय कुछ खास चढ़ावा नहीं चढ़ाना होता है। मदिरा, दूध या नारियल से ही भैरव बाबा खुश हो जाते है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। पब्लिक वार्ता इस बारे में किसी प्रकार की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

सामाजिक समरसता : गुर्जर समाज के पटेलों के साथ वाल्मिकी समाज के पटेल का किया सम्मान, मृत्यु भोज में रखा गया आयोजन

पब्लिक वार्ता – रतलाम,कुलदीप माहेश्वरी। नगर के गुर्जर परिवार ने दिवंगत आत्मा के उत्तरकार्य के दौरान रखे गए मृत्यु भोज में एक अनूठा आयोजन किया। यहां परिवार ने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए समाज के गांव से आये पटेल यानी प्रमुखों के अलावा विशेष रूप से वाल्मीकि समाज के पटेल का भी सम्मान किया।दरअसल हरमाला रोड स्थित श्री लोकेंद्र नाथ भवन पर आयोजित पूर्व पार्षद व समाज अध्यक्ष मोहनलाल धभाई के मृत्यु (पगड़ी) भोज पर यह आयोजन किया गया। गुर्जर समाज में एक प्राचीन प्रथा से अवगत कराते हुए गुर्जर समाज युवा इकाई के द्वारा गुर्जर समाज के गांव के पटेलो का सम्मान समारोह आयोजित किया। जिसमें गुर्जर बाहुल्य गांव के गुर्जर पटेलों (प्रमुख) का स्मृति चिंह व शॉल देकर सम्मान किया। युवा इकाई अध्यक्ष व धभाई के पुत्र मुरलीधर गुर्जर ने बताया कि पुराने समय में पगड़ी भोज के समय अलग-अलग गांव से प्रतिनिधित्व करते हुए पटेल शामिल होते थे। तब उनका पगड़ी बांध करके सम्मान किया जाता था। उनकी उपस्थिति गांव की उपस्थिति को दर्ज करवाती थी। दिवंगत आत्मा की अंतिम इच्छा स्वरूप पटेल सम्मान समारोह आयोजित किया। इसके अलावा सामाजिक समरसता के भाव के उद्देश्य से वाल्मीकि समाज के प्रमुख विजय पटेल का भी सम्मान किया गया।कार्यक्रम में कनेरी, डाबड़ी, मठमठ, नौगांवा, ऊणी, उंडवा, कलमोडा, तीतरी, कालीगांव,  बगवास, बखतगढ़, बड़नगर, पेटलावद, सागोद आदि गांव के पटेलों का सम्मान किया। इस दौरान धभाई – गुर्जर परिवार के रमेशचंद्र गुर्जर, बाबूलाल गुर्जर, भरत गुर्जर व समाज के वरिष्ठ जन उपस्थित थे।

शारदीय नवरात्रि 2023 : चुनावी माहौल के बीच 130 से अधिक स्थानों पर होगी मां की आराधना, पुलिस व प्रशासन की तैयारियां पूरी

जानिए किस शुभ मुहूर्त में व कैसे होगी घट स्थापना, केवल 48 मिनट का है अभिजीत मुहूर्त! पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। साल में 4 बार नवरात्रि आते है, जिसमें शारदीय, चैत्र नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि होते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर रविवार से आरंभ हो रही हैं। नवरात्रि में पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही हर साल नवरात्रि में मां दुर्गा अलग- अलग वाहनों पर सवार होकर आती हैं। जिसका विशेष महत्व होता है। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। हाथी की सवारी पूरे साल अच्छी बारिश का प्रतीक मानी जाती है। वहीं रतलाम में चुनावी आचार संहिता के बीच इस वर्ष नवरात्रि का त्यौहार मनाया जाएगा। पुलिस व प्रशासन ने आयोजन समितियों से इस संबंध में आवश्यक बैठक कर जरूरी दिशा निर्देश भी दिए है। बैठक पुराने पुलिस कंट्रोल रूम पर आयोजित की गई। सीएसपी अभिनव बारंगे ने बताया कि शहर में शांति व सौहाद्र से नवरात्रि का त्यौहार मनाया जाएगा। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस फोर्स की तैनाती रहेगी। आचार संहिता में विशेष ध्यान रखा जाएगा। गरबा रात्रि में 10 बजे तक ही होंगे। संदिग्ध लोगों की चेकिंग इस दौरान लगातार की जाएगी। शहर में 130 से अधिक स्थानों पर माता की प्रतिमा स्थापित होने के साथ 80 से अधिक स्थानों पर गरबा का आयोजन होगा। इसके अलावा मेला स्थल का भी निरीक्षण कर वहां की सुरक्षा व्यवस्था की भी तैयारियां पूरी है। माहौल बिगाड़ने व सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार व शांति भंग करने वाले आसामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा और कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान आयोजन समिति सदस्यों के साथ ही शहर एसडीएम संजीवकुमार पांडे, आइए थाना प्रभारी राजेंद्र वर्मा, माणक चौक थाना प्रभारी प्रीति कटारे, दीनदयाल नगर थाना प्रभारी सुरेंद्र गडरिया, एसआई आशीष पाल आदि मौजूद थे। घटस्थापना या कलश स्थापना का मुहूर्त  (Kalash Sthapana Shubh Muhurat) : ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को यानी पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर को इस प्रकार है – घटस्थापना के दौरान करें इस मंत्र का जपतदुक्तं तत्रैव कात्यायनेन प्रतिपद्याश्विने मासि भवो वैधृति चित्रयोः । आद्य पादौ परित्यज्य प्रारम्भेन्नवरान्नकमिति।। कलश या घट स्थापना (Kalash Sthapana) :ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है। घट स्थापना शक्ति की देवी का आह्वान है। मान्यता है कि गलत समय में घट स्थापना करने से देवी मां क्रोधित हो सकती है। रात के समय और अमावस्या के दिन घट स्थापित करने की मनाही है।घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है। अगर किसी कारण वश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते है। प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है। हालांकि इस बार घट स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। कलश स्थापना की सामग्री (Kalash Sthapana Samigri) :ज्योतिषाचार्य ने बताया कि मां दुर्गा को लाल रंग खास पसंद है इसलिए लाल रंग का ही आसन खरीदे। इसके अलावा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, जल से भरा हुआ कलश, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल, सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, फूलों की माला और श्रृंगार पिटारी भी चाहिए। कैसे करें कलश स्थापना (Kaise Karen Kalash Sthapana) :ज्योतिषाचार्य ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन यानी कि प्रतिपदा को सुबह स्नान कर ले।मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम से अखंड ज्योत जलाएं। कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं। अब एक तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं. लोटे के ऊपरी हिस्से में मौली बांधे।अब इस लोटे में पानी भरकर उसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं। फिर उसमें सवा रुपया, दूब, सुपारी, इत्र और अक्षत डालें. इसके बाद कलश में अशोक या आम के पांच पत्ते लगाएं। अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटकर उसे मौली से बांध दें। फिर नारियल को कलश के ऊपर रख दे।  अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीचों बीच रख दे जिसमें आपने जौ बोएं है। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्प लिया जाता है। आप चाहें तो कलश स्थापना के साथ ही माता के नाम की अखंड ज्योति भी जला सकते है।

थमा भागवत का उल्लास : काश्यप फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

विधायक चेतन्य काश्यप की घोषणा, 33 लाख में विरुपाक्ष महादेव मंदिर का बनेगा भव्य द्वार पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। चेतन्य काश्यप फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का रविवार को सुप्रसिद्ध कथावाचक एवं मोटीवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने सबको राम-राम कहकर भव्य समापन किया। उन्होने कहा कि चेतन्य काश्यप परिवार ने भव्य आयोजन किया। भगवान इन पर सदैव कृपा बनाए रखे और यह धर्म के काम करते रहे। अंतिम दिवस की कथा की शुभारंभ आरती में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल हुए। विधायक चेतन्य काश्यप ने इस मौके पर अपने फाउंडेशन से बिलपांक के प्रसिद्ध श्री विरूपाक्ष मंदिर के प्रवेश मार्ग पर 33 लाख रुपए से भव्य द्वारा बनाने की घोषणा की। भागवत समापन पर यज्ञ हुआ, जिसमें शहर विधायक ने सपरिवार आहुतियां दी। जिसके बाद भागवत पौथी का पूजन कर उन्हें विदा कर विप्रभोज कराया गया। मिनी महाकुंभ के रूप में आयोजित इस विराट आयोजन के समापन में महाप्रसादी भी हुई, जिसका असंख्य श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ लिया। जया किशोरी ने भागवत कथा श्रवण कराते हुए कहा कि भगवान ने सीख दी है कि स्वार्थ वाला प्रेम, भक्ति, मित्रता ज्यादा समय तब नहीं टिकती। सबसे ऊपर कुछ है तो वह सिर्फ निःस्वार्थ प्रेम है। सच्चे भक्त को सिर्फ भगवान पर भरोसा होता है। भगवान अपनी हर लीला में यहीं सीख देते है। उन्होने कहा कि जीवन में आपकी संगत और सलाहकार बहुत मायने रखते है। पांच पांडव भगवान श्री कृष्ण की सलाह से सत्य के मार्ग पर चलकर बचे रहे, जबकि 100 कौरव, मामा शकुनि की सलाह मानकर खत्म हो गए। आप अपनी जिंदगी को शकुनी मामाओं से दूर रखे। दुनिया में सबसे कीमती चीज है समय, यदि आप उसे बर्बाद करेंगे तो एक दिन वह आपको बर्बाद कर देगा। कर्म का हिसाब भगवान भी चुका कर गए है। श्रीमद् भागवत कथा की यह सीख सबको याद रखनी चाहिए। कथा के शुरुआत में फाउंडेशन अध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप, श्रीमती नीता काश्यप, सिद्धार्थ काश्यप, पूर्वी काश्यप एवं श्रवण काश्यप ने पौथी पूजन किया। इसके बाद समिति सदस्यों एवं अतिथियों द्वारा आरती की गई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कथा में लिया हिस्सा :केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भागवत कथा का रसपान कर रहा जनमानस ही भारत की ताकत है। जया किशोरी हमारे अतीत और भविष्य को जोड़ने का काम कर रही है। हमारी माता-बहनों की ताकत से देश आगे बढ़ रहा है। दुनिया की कोई ताकत अब हमे रोक नहीं पाएगी। गोयल ने विधायक चेतन्य काश्यप को इस भव्य आयोजन के लिए साधुवाद दिया। वड़ोदरा विधायक केयूरभाई ने फाउंडेशन एवं विधायक चेतन्य काश्यप का अभिनंदन करते हुए कहा कि जया किशोरी भागवत सप्ताह के माध्यम से धर्म, संस्कृति को संजोने का काम कर रही है। भाजपा जिला प्रभारी प्रदीप पांडे्य ने कहा कि चेतन्य काश्यप फाउंडेशन धर्म की ध्वजा लेकर जब काम करता है तब हमारा मस्तक ऊंचा होता है, हमारी छाती चौड़ी होती है। इसी कड़ी में विरूपाक्ष महादेव मंदिर के द्वार का निर्माण चेतन्य काश्यपजी द्वारा कराया जा रहा है। इस दौरान सांसद गुमानसिंह डामोर, विधायक दिलीप मकवाना, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्रसिंह लुनेरा, महापौर प्रहलाद पटेल आदि मौजूद रहे। देश को मोदी और रतलाम को काश्यप की जरूरत :अखंड ज्ञान आश्रम के स्वामी श्रीदेव स्वरूपानंद जी महाराज ने कहा कि यह भागवत कथा का कुंभ है। रतलाम में चेतन्य काश्यप धर्म प्रेमी है। भगवान यदि किसी को दौलतवान बनाए तो इतना उदारवान भी बनाए कि वह धर्म और समाज के लिए खर्च कर सके। वह सभी धर्म के लिए कार्य करते है, यह रतलाम के लिए गर्व की बात है। रतलाम में बीते दस वर्षों में जो विकास देखा है, वह अद्भुत है। देश के लिए यदि नरेंद्र मोदी की जरूरत है तो रतलाम के लिए चेतन्य काश्यप की जरूरत है। सर्व समाज के आयोजन परिवार का सौभाग्य :फाउंडेशन अध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप ने कहा कि जया किशोरी ने सात दिन तक जो धर्म गंगा यहां बहाई है, उससे निश्चित रूप से रतलाम में एक इतिहास बना है। कथा के आरंभ में निकली कलश यात्रा ने भी इतिहास रच दिया। समावेशी सोच के साथ सर्व समाज के आयोजन करना मेरा व परिवार का सौभाग्य है। काश्यप ने बिलपांक स्थित विरूपाक्ष मंदिर के प्रवेश मार्ग पर अपने फाउंडेशन से भव्य द्वार निर्माण की घोषणा करते हुए मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डाला। विधायक काश्यप ने कहा कि दस वर्ष पूर्व आपने मुझे जनप्रतिनिधि बनाया। उसके बाद रतलाम के विकास की गति को बहुत तेज रखा है और इसे आगे भी जारी रखेंगे। हमे भौतिकता, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता को साथ लेकर चलना है। सनातन संस्कृति हमारी हिंदू संस्कृति को सदैव पल्लवित करती रहेगी। उन्होने कथा आयोजन में सहयोगियों एवं शहरवासियों का आभार जताया। विभिन्न संस्थाओं ने किया स्वागत-अभिनन्दन :कथा के आरंभ में आयोजन समिति सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा कथावाचक जया किशोरी एवं विधायक चेतन्य काश्यप का स्वगत-अभिनंदन किया गया। इस दौरान महाराष्ट्र समाज, माहेश्वरी समाज, अग्रवाल समाज, मारवाड़ी स्वर्णकार समाज, जनशक्ति संस्था, यादव समाज, गुजराती समाज एवं स्कूल ट्रस्ट, रतलाम प्रापर्टी ब्रोकर्स एसोसिएशन, न्यू सुपर क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन, जवाहर व्यायाम शाला परिवार, मैजिक ऐसोसिएशन, सनातन धर्म महासभा, पुजारी संघ, भांभी समाज, कैलाश मानसरोवर समिति एवं रतलाम प्रेस क्लब सदस्यगण उपस्थित रहे।

महालक्ष्मी प्रकटोत्सव : धूमधाम से मनाया धन और वैभव की देवी का जन्मोत्सव, श्रीमाली ब्राह्मण समाज ने निकाला चल समारोह

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। धन की देवी महालक्ष्मी का प्रकटोत्सव शुक्रवार को भक्तिभाव के साथ मनाया गया। शहर के प्राचीन महालक्ष्मी मंदिरों के पर आयोजन किए गए। कालिका माता मंदिर परिसर स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर पर अभिषेक श्रंगार दर्शन हवन-पूजन-वंदन के लिए भक्तों का सुबह से देर शाम तक तांता लगा रहा। शहर की प्राचीन और विश्व विख्यात माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर पर रात में आरती के बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया। महिलाओं ने भजनों की प्रस्तुति पर फूलों की वर्षाकर भक्ति रस में सरोबार होकर जमकर गरबारास किया। मंदिर के बाहर दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतार श्रद्धालुओं की लगती रही। देर रात्रि में धूमधाम से महालक्ष्मी का जन्मोत्सव मनाकर प्रसाद का वितरण किया। श्रीमाली ब्राह्मण समाज की ओर से महालक्ष्मी जन्मोत्सव पर महालक्ष्मी के साथ शिव जलाभिषेक की झिलमिलाती झांकी चल समारोह निकाला, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरुष शामिल हुए। चल समारोह श्रीमालीवास स्थित श्रीमाली ब्राह्मण धर्मशाला से शुरू होकर माणक चौक महालक्ष्मी मंदिर, पैलेस रोड, कॉलेज रोड मठ एवं श्रीमालीवास पुनेश्वर महादेव मंदिर स्थित महालक्ष्मी मंदिर तक पहुंचा। यहां पूजा अर्चना की गई। इसके बाद रात्रि 12 बजे श्रीश्रीमाली ब्राह्मण समाज धर्मशाला में आरती एवं प्रसादी वितरण किया।


श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ : पांचवे दिन हुआ कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन, विधायक चेतन्य काश्यप ने परिवार सहित किया पौथी पूजन

सनातन धर्म कभी अंध विश्वास करना नहीं सिखाता – कथावाचक जया किशोरी

पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। चेतन्य काश्यप फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवे दिन शुक्रवार को सुप्रसिद्ध कथावाचक व मोटीवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुमधुर वर्णन किया। इसके बाद गोवर्धन पूजा का सजीव चित्रण किया और भगवान को छप्पन भोग भी लगाए। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। शनिवार को कंस वध, रासलीला, गोपी-उद्धव संवाद तथा श्रीकृष्ण-रूकमणी विवाह के प्रसंग को सुनाया जाएगा।कथा में जया किशोरी ने कहा कि सनातन धर्म हमे कभी अंध विश्वास करना नहीं सिखाता, बल्कि वह जिज्ञासा सिखाता हैं। अधिकतर शास्त्र प्रश्नों से शुरू हो रहे है। गीता जी में अर्जुन भी भगवान से प्रश्न कर रहे है। प्रश्न इस मंशा से करो की सच जानना है, इस मंशा से नहीं कि सामने वाले को गलत साबित करना है। विडंबना है कि आज प्रश्नकर्ताओं के प्रश्न में अहंकार अधिक झलकता है, सत्य की जिज्ञासा कम रहती है। जया किशोरी ने कहा की भगवत गीता के माध्यम से भगवान ने कई सीख दी है। उनकी सीख है कि साथ सही का देना है, भले ही सामने अपना खड़ा हो। आज यह बात बोलना आसान है, लेकिन जब वहीं परिस्थिति स्वयं पर आती है तो यह सीख नहीं निभा पाते है। कथा के शुरुआत में फाउंडेशन अध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप, श्रीमती नीता काश्यप, सिद्धार्थ काश्यप, पूर्वी काश्यप एवं श्रवण काश्यप ने पौथी पूजन किया। इसके बाद समिति सदस्यों एवं अतिथियों द्वारा आरती की गई। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सैलाना विधायक संगीता चारेल उपस्थित रही। नगर की विभिन्न संस्थाओं श्री सनातन धर्म महारूद्र यज्ञ समिति, जीव मैत्री परिवार, श्री बद्रीनाथ सेवा ट्रस्ट, श्री हरियाणा गौड़ ब्राहम्ण समाज, श्री गढ़ कैलाश सेवा समिति, रतलाम जिला खाद बीज व्यापारी ऐसोसिएशन, खेल चेतना मेला आयोजन समिति एवं क्रीड़ा भारती, श्री परशुराम युवा मंच, गुर्जर गौड़ समाज महिला मंडल, जीतो महिला विंग चैप्टर, ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, श्री ब्राह्मण स्वर्णकार समाज, श्री खरतरगच्छ जैन श्री संघ, जांगिड़ ब्राहम्ण मेवाड़ा समाज, सिंधी समाज, दीनदयाल मंडल आदि संस्थाओं द्वारा  जया किशोरी एवं विधायक चेतन्य काश्यप स्वागत-अभिनंदन किया गया।

जन्में कृष्ण कन्हैया : श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन जया किशोरी ने कहा – “भगवान सुख में साथ रहे ना रहे दुख में हमेशा साथ रहता है”

पांडाल में गूंजा नंद के आनंद भयों, आज करेंगे भगवान श्रीकृष्ण अपनी बाल लीलाएं पब्लिक वार्ता – रतलाम,जयदीप गुर्जर। शहर में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन द्वारा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। चौथे दिन गुरूवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम रही। सुप्रसिद्ध कथावाचक व मोटीवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का उदघोष किया, वैसे ही नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की गूंज से पूरा पांडाल झूम उठा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के जीवंत मंचन ने सबका मन मोह लिया। इससे पूर्व भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मना। जया किशोरी ने धर्म की कथा, समुद्र मंथन और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा भी सजीव श्रवण कराई। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष विभाष उपाध्याय रहे। शुक्रवार को श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग की कथा श्रवण कराई जाएगी। गुरूवार को जया किशोरी ने कहा कि जीवन में सिर्फ भगवान ही है जो आपका साथ देते है। वह सुख में साथ रहे या न रहे लेकिन दुख में हमेशा साथ रहते है। भले ही दिनभर भगवान का नाम न लें, लेकिन एक नियम बनाए कि जब भी घर से निकले कम से कम तब एक बार तो भगवान का नाम ले। नियम ऐसा हो कि दुनिया इधर की उधर हो जाए, लेकिन नियम न टूटे। भगवान वहीं आते है जो बुलाता है।उन्होने कहा प्रभु कहते कि उपभोग करते रहोगे तो तृप्ति कैसे मिलेगी। यदि तृप्ति चाहिए, तो इनका त्याग करना पडे़गा। यदि आप किसी चीज को ग्रहण कर रहे हो तो उसका त्याग नहीं कर सकते हो। दुनिया इसलिए सुंदर नहीं बनाई कि तुम मुझे भूल जाओ। जो चीजे सुख के लिए दी, आज वहीं दुख का कारण बन गई है। भागवत कथा हमे जीवन का दर्शन सिखाती है। इसे श्रवण करने से मानव मात्र का कल्याण हो जाता है। शुरुआत में मुख्य अतिथि विभाष उपाध्याय ने कहा कि जन्मांतर के सुकृत पुण्यों के फलस्वरूप भागवत कथा सुनने को मिलती है। यह अवसर चेतन्य काश्यप जी के माध्यम से आया है, जिसके लिए उन्हे धन्यवाद देता हूं। कामना करता हूं कि इसी प्रकार से वे सनातन का उद्घोष करते रहे और उसकी गूंज सर्वत्र सुनाई दे।कथा से पूर्व फाउंडेशन अध्यक्ष एवं विधायक चेतन्य काश्यप, श्रीमती नीता काश्यप,, सिद्धार्थ काश्यप एवं श्रवण काश्यप सहित समिति सदस्यों एवं अतिथियों द्वारा आरती की गई। उसके पश्चात संत रविदास समाज, मालवा चेंबर ऑफ कॉमर्स, वाघेला गौसेवा समिति, आदि गौड़ ब्राहम्ण समाज, पंचमुखी हनुमान मंदिर समिति, जगन्नाथ यात्रा समिति, वाल्मीकि समाज, श्री राठौर क्षत्रीय तेली समाज चार भुजानाथ, प्रभु प्रेेमी संघ, समन्वय परिवार एवं काकानी फाउंडेशन, मेहंदीकुई बालाजी न्यास एवं तुलसी परिवार, हरिहर सेवा समिति, प्रजापिता ब्रम्हकुमारी बहने, सिखवाल ब्राम्हण समाज, मुखर्जी मंडल, जैन श्वेताम्बर सोशल ग्रुप आदि ने जया किशोरी एवं विधायक काश्यप का स्वागत अभिनंदन किया।