EPFO की ऑनलाइन सर्विस 4 दिनों के लिए बंद! UPI और ATM से PF निकासी की तैयारी, जानें क्या होगा असर

EPFO की ऑनलाइन सेवाएं 26 से 29 जून 2026 तक बंद रहेंगी। जानिए सिस्टम अपग्रेड का कारण, किन सेवाओं पर पड़ेगा असर और कब शुरू होगी UPI व ATM से PF निकासी की सुविधा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। अगर आप EPF का क्लेम करने या बैलेंस चेक करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने बड़े सिस्टम अपग्रेड के चलते 26 जून से 29 जून 2026 तक अपनी ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला किया है। इस दौरान क्लेम, ट्रांसफर और कई डिजिटल सेवाएं प्रभावित रहेंगी। EPFO की ऑनलाइन सर्विस 4 दिनों तक क्यों रहेगी बंद? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्य पोर्टल पर जारी सूचना में बताया है कि 26 जून 2026 की रात 12 बजे से 29 जून 2026 की रात 11:59 बजे तक क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम को अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। यह फैसला नियोजित डेटाबेस समेकन (Database Consolidation) और सॉफ्टवेयर अपग्रेड के कारण लिया गया है। EPFO के अनुसार, इस अपग्रेड का उद्देश्य क्लेम प्रोसेसिंग को अधिक तेज, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। इन सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर चार दिनों की इस अवधि में सदस्य नए ऑनलाइन क्लेम दाखिल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा— अस्थायी रूप से प्रभावित रह सकती हैं। जो आवेदन पहले से जमा हो चुके हैं, उन पर भी अपग्रेड पूरा होने के बाद ही कार्रवाई शुरू होगी। 30 जून से फिर शुरू होंगी सभी सेवाएं EPFO ने स्पष्ट किया है कि सभी ऑनलाइन सेवाएं 30 जून 2026 को रात 12 बजे से दोबारा शुरू कर दी जाएंगी। संगठन ने सदस्यों से अपील की है कि यदि किसी को तत्काल PF निकासी या ट्रांसफर की आवश्यकता है, तो वह अपने कार्य की योजना इस अवधि को ध्यान में रखकर बनाए। किसी भी सहायता के लिए सदस्य EPFO के हेल्पलाइन नंबर 14470 पर संपर्क कर सकते हैं। EPFO 3.0 से क्या बदलेगा? यह सिस्टम अपग्रेड ऐसे समय में हो रहा है जब EPFO अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 को लागू करने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि UPI आधारित PF निकासी प्रणाली का परीक्षण पूरा हो चुका है और इसे जल्द शुरू किया जा सकता है। नए सिस्टम के तहत सदस्य—

Passport Fee Hike: पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा! 1 जुलाई से बढ़ जाएगी फीस, जानिए अब कितने रुपये देने होंगे

Passport Fee Hike: 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाना महंगा हो जाएगा। सामान्य और तत्काल पासपोर्ट की फीस में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। जानिए नई फीस, छूट और पूरी जानकारी। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Passport Fee Hike: अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने पासपोर्ट आवेदन शुल्क में बड़ा बदलाव करते हुए फीस बढ़ाने का फैसला किया है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सामान्य और तत्काल दोनों श्रेणियों के पासपोर्ट की फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। पासपोर्ट फीस में कितना हुआ इजाफा? सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब पासपोर्ट बनवाने के लिए पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। सबसे ज्यादा असर सामान्य आवेदकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब 1,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। नई पासपोर्ट फीस 2026 सरकार ने क्यों बढ़ाई फीस? विदेश मंत्रालय के अनुसार यह संशोधन पासपोर्ट नियम, 1980 में बदलाव के तहत किया गया है। सरकार का कहना है कि शुल्क संरचना को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ पासपोर्ट सेवाओं की गुणवत्ता और सुविधाओं में सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है। यह बदलाव पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 24 के तहत लागू किया गया है। मंत्रालय का मानना है कि नई शुल्क व्यवस्था से पासपोर्ट सेवा प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। नाबालिगों और वरिष्ठ नागरिकों को राहत सरकार ने कुछ वर्गों को राहत भी दी है। नए नियमों के अनुसार: हालांकि, यह छूट केवल नए पासपोर्ट आवेदन पर लागू होगी। पासपोर्ट के री-इश्यू (नवीनीकरण) के मामलों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। किस पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? विदेश यात्रा, पढ़ाई, नौकरी और बिजनेस के लिए पासपोर्ट बनवाने वाले लाखों लोगों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा। खासकर वे लोग जो आने वाले महीनों में नया पासपोर्ट बनवाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें 1 जुलाई के बाद नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।

Rule Change: आधार से LPG तक… 1 जुलाई से बदल जाएंगे ये 5 बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Rule Change From July 2026: 1 जुलाई से आधार अपडेट, LPG कीमत, CNG-PNG दरें, HDFC क्रेडिट कार्ड नियम और बैंक छुट्टियों समेत 5 बड़े बदलाव लागू होंगे। जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Rule Change: जून 2026 खत्म होने वाला है और नए महीने की शुरुआत के साथ कई महत्वपूर्ण वित्तीय बदलाव लागू होने जा रहे हैं। 1 जुलाई 2026 से आधार कार्ड अपडेट, LPG गैस सिलेंडर की कीमतों, CNG-PNG दरों, क्रेडिट कार्ड सुविधाओं और बैंक छुट्टियों से जुड़े नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इन बदलावों का असर सीधे आम लोगों की जेब और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ने वाला है। ऐसे में हर नागरिक के लिए इन नियमों की जानकारी रखना जरूरी है। आधार कार्ड अपडेट होगा मुफ्त भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार धारकों को बड़ी राहत दी है। नए निर्देशों के अनुसार, जिन लोगों की ईमेल आईडी आधार कार्ड में अपडेट नहीं है, वे 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक इसे मुफ्त में अपडेट करा सकेंगे। पहले इस सेवा के लिए 75 रुपये शुल्क देना पड़ता था। UIDAI का उद्देश्य अधिक से अधिक आधार धारकों की जानकारी को अपडेट और सुरक्षित बनाना है। किसे मिलेगा फायदा? LPG सिलेंडर की कीमतों में हो सकता है बदलाव हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां LPG सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। जून में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 53.50 रुपये तक बढ़ाए गए थे, जबकि 5 किलो वाले सिलेंडर में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में 1 जुलाई को घरेलू और कमर्शियल LPG की कीमतों में बदलाव की संभावना बनी हुई है। CNG, PNG और ATF की दरें भी बदल सकती हैं सरकार स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी वजह से CNG और PNG की कीमतों की भी नियमित समीक्षा की जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई में एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF), CNG और PNG की कीमतों में संशोधन हो सकता है। यदि कीमतें बढ़ती हैं तो परिवहन और हवाई यात्रा महंगी हो सकती है, जबकि कमी आने पर उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। HDFC Bank Credit Card Rules में बड़ा बदलाव 1 जुलाई 2026 से HDFC Bank के Regalia Gold Credit Card धारकों के लिए एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नियम बदल जाएंगे। नई नीति के अनुसार, ग्राहकों को अगली तिमाही में मुफ्त घरेलू एयरपोर्ट लाउंज सुविधा का लाभ लेने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60,000 रुपये खर्च करना अनिवार्य होगा। नए नियम का असर जुलाई में 12 दिन बंद रह सकते हैं बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अवकाश कैलेंडर के अनुसार जुलाई महीने में विभिन्न राज्यों में बैंक लगभग 12 दिनों तक बंद रह सकते हैं। इनमें रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार सहित कुल 6 साप्ताहिक अवकाश शामिल हैं। वहीं कई राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण अतिरिक्त छुट्टियां रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को बैंकिंग कार्य पहले से निपटाने की सलाह दी जा रही है।

डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए? जानिए कब करें शिकायत और कैसे वापस मिल सकता है आपका पैसा

डिजिटल धोखाधड़ी होने पर कितने समय में शिकायत करनी चाहिए? बैंक, साइबर क्राइम पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने का तरीका जानें। RBI के नियमों के अनुसार पैसा वापस मिलने की पूरी प्रक्रिया समझें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेक। देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ रहे हैं। यूपीआई, नेट बैंकिंग और कार्ड पेमेंट ने लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि आपकी एक छोटी सी देरी लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है। डिजिटल धोखाधड़ी होने के बाद सबसे पहले क्या करें? यदि आपके खाते से बिना अनुमति के पैसा कट जाता है या किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक को इसकी जानकारी दें। बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें और अपने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, यूपीआई या नेट बैंकिंग सेवाओं को तुरंत ब्लॉक करवाएं। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते शिकायत करने पर संबंधित एजेंसियां संदिग्ध ट्रांजैक्शन को फ्रीज करने का प्रयास कर सकती हैं। कितने समय में करनी चाहिए शिकायत? विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल फ्रॉड की शिकायत 24 से 48 घंटे के भीतर करना सबसे प्रभावी माना जाता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत यदि ग्राहक पांच दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर देता है तो उसे “Zero Liability” यानी शून्य जिम्मेदारी का लाभ मिल सकता है। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, पैसे की रिकवरी की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी। देर होने पर धोखेबाज राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिससे जांच और रिकवरी मुश्किल हो जाती है। RBI के नियम: कितना पैसा वापस मिलेगा? शून्य जिम्मेदारी अगर धोखाधड़ी बैंक की तकनीकी गड़बड़ी, सिस्टम फेलियर या किसी तीसरे पक्ष की गलती से हुई है और ग्राहक ने पांच दिनों के भीतर शिकायत कर दी है, तो पूरी राशि वापस मिलने की संभावना रहती है। सीमित जिम्मेदारी यदि शिकायत कुछ देरी से, आमतौर पर 4 से 7 दिनों के भीतर दर्ज की जाती है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित हो सकती है। ऐसे मामलों में बैंक नियमों के अनुसार आंशिक या सीमित राहत दे सकता है। पूरी जिम्मेदारी यदि ग्राहक ने खुद OTP, PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा की हो, फर्जी लिंक पर क्लिक किया हो या शिकायत दर्ज करने में अत्यधिक देरी की हो, तो नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक पर आ सकती है और पैसा वापस मिलने की संभावना काफी कम हो जाती है। अपने अकाउंट को ऐसे रखें सुरक्षित शिकायत के बाद भी समाधान न मिले तो क्या करें? यदि बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो आप बैंक के शिकायत निवारण सेल या RBI के बैंकिंग लोकपाल के पास अपील कर सकते हैं। बड़ी रकम की धोखाधड़ी होने पर पुलिस में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है, ताकि कानूनी कार्रवाई के साथ आपकी रिकवरी की संभावना मजबूत हो सके।

MP News: उज्जैन में 168 एकड़ जमीन खरीद पर बवाल, कांग्रेस बोली- ‘मध्य प्रदेश के नए जमींदार’

मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर सियासत गरमा गई है। उज्जैन में मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर 168 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप लगे हैं। कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि बीजेपी और सीएम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भोपाल- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। एक राष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में 168 एकड़ से अधिक जमीन खरीदी है। इन जमीनों का संबंध उन इलाकों से बताया जा रहा है जहां सरकार की बड़ी विकास परियोजनाएं और सड़क निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “मध्य प्रदेश का नया जमींदार” तक कह दिया है। क्या हैं जमीन खरीद के आरोप? रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे। इन प्लॉट्स का कुल क्षेत्रफल करीब 168 एकड़ बताया गया है। बताया जा रहा है कि इनमें से कई जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहां उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि को रिहायशी और व्यावसायिक उपयोग के लिए परिवर्तित करने की योजना है। साथ ही कई प्लॉट प्रस्तावित हाईवे और सड़क परियोजनाओं के आसपास मौजूद हैं। किसके नाम पर खरीदी गई जमीनें? सरकारी रिकॉर्ड के हवाले से दावा किया गया है कि जमीनें मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव, नारायण यादव, रेखा यादव, अभय यादव और चचेरे भाइयों गोविंद एवं नीलेश यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदी गई हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि परिवार और रिश्तेदारों के पास कुल 245 प्लॉट हैं, जिनका क्षेत्रफल लगभग 335 एकड़ है। कांग्रेस का हमला तेज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मध्य प्रदेश में “डबल इंजन सरकार” के दौरान जमीनों का बड़ा खेल चल रहा है। कांग्रेस नेता श्रीनिवास बी ने भी सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा कथित रूप से खरीदी गई जमीनों को लेकर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की जांच की मांग की है। परिवार ने क्या कहा? मुख्यमंत्री के चचेरे भाई अनंत यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका परिवार वर्ष 2010 से रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय है। उन्होंने कहा, “हमें निजी व्यक्ति के रूप में जमीन खरीदने और बेचने का पूरा अधिकार है। क्या सिर्फ इसलिए अपना व्यवसाय बंद कर दें क्योंकि मुख्यमंत्री हमारे परिवार से हैं?” उज्जैन मास्टर प्लान और विकास परियोजनाएं बनीं चर्चा का केंद्र उज्जैन मास्टर प्लान 2035 मई 2023 में जारी हुआ था। इसके बाद सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए कई सड़क, एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की घोषणा हुई। इन योजनाओं के चलते आसपास की जमीनों के दाम तेजी से बढ़े हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने ऐसे क्षेत्रों में जमीन खरीद बढ़ाई जहां भविष्य में विकास परियोजनाओं की संभावना थी। अब तक मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि, कांग्रेस इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में और अधिक गरमाने की संभावना है। फिलहाल जमीन खरीद से जुड़े आरोपों और रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, इसलिए सभी पक्षों के दावों और जवाबों पर नजर बनी हुई है।

PhonePe New Rule: 1 साल तक Wallet इस्तेमाल नहीं किया तो कटेंगे ₹100! जानिए नया नियम और किन यूजर्स पर पड़ेगा असर

PhonePe New Rule: PhonePe ने Wallet से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 365 दिनों तक PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करने पर यूजर्स से ₹100 तक की Inactivity Maintenance Fee वसूली जाएगी। जानिए पूरा नया नियम। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PhonePe New Rule: अगर आप PhonePe का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म PhonePe ने अपने Wallet से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार, जो यूजर 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करेंगे, उनसे ₹100 तक की Inactivity Maintenance Fee वसूली जा सकती है। कंपनी के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस भी शुरू हो गई है और कई यूजर्स ने इस पर नाराजगी जताई है। क्या है PhonePe का नया नियम? PhonePe द्वारा जारी नई Wallet Guidelines के मुताबिक, यदि कोई यूजर लगातार 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet से कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं करता है, तो उसका Wallet Inactive माना जाएगा। ऐसी स्थिति में कंपनी Maintenance Fee के रूप में ₹100 तक का शुल्क वसूल सकती है। हालांकि, यह नियम केवल PhonePe Wallet पर लागू होगा। UPI के जरिए भुगतान करना या सिर्फ ऐप खोलना Wallet Activity नहीं माना जाएगा। किन यूजर्स पर लगेगा ₹100 का चार्ज? यह शुल्क केवल उन यूजर्स पर लागू होगा जिन्होंने: अगर यूजर Wallet के जरिए कम से कम एक ट्रांजैक्शन कर देता है, तो Wallet फिर से Active माना जाएगा और शुल्क नहीं लगेगा। फीस काटने से पहले मिलेगा अलर्ट PhonePe ने स्पष्ट किया है कि शुल्क लगाने से पहले यूजर्स को 15 दिन पहले नोटिफिकेशन या मैसेज भेजा जाएगा। इसके जरिए यूजर को Wallet एक्टिव करने का मौका मिलेगा। यदि Wallet में ₹100 या उससे अधिक राशि मौजूद है तो कंपनी ₹100 काट सकती है। वहीं, यदि Wallet में ₹100 से कम बैलेंस है, तो उपलब्ध पूरी राशि काटी जा सकती है। हालांकि Wallet बैलेंस को नेगेटिव नहीं किया जाएगा। क्यों लिया गया यह फैसला? डिजिटल वॉलेट कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय खातों के रखरखाव पर खर्च होने वाले संसाधनों को लेकर चिंतित रही हैं। ऐसे में कई फिनटेक कंपनियां Inactive Wallets के लिए Maintenance Charge लागू करती हैं। PhonePe का कहना है कि यह शुल्क केवल निष्क्रिय Wallets के प्रबंधन के लिए लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रिया PhonePe के इस नए नियम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कुछ लोगों का कहना है कि लंबे समय तक Wallet का उपयोग न करने पर चार्ज लगाना ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है, जबकि कुछ यूजर्स इसे सामान्य मेंटेनेंस प्रक्रिया बता रहे हैं।

EPFO Good News: अब ATM और UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा! 7 करोड़ कर्मचारियों को जून में मिल सकती है बड़ी सुविधा

PF EPFO Good News: Withdrawal via UPI और ATM की सुविधा शुरू कर सकता है। श्रम मंत्रालय के अनुसार जून 2026 के अंत तक 7 करोड़ से अधिक EPFO सदस्यों को यह बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। EPFO Good News: देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जल्द ही ऐसी सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिससे पीएफ खाते में जमा राशि को ATM और UPI के जरिए निकाला जा सकेगा। श्रम मंत्रालय के मुताबिक यह सुविधा जून महीने के अंत तक शुरू हो सकती है, जिससे करीब 7 करोड़ EPFO सदस्यों को सीधा लाभ मिलेगा। PF Withdrawal Via UPI-ATM: क्या है नई सुविधा? श्रम मंत्रालय द्वारा जारी अपडेट के अनुसार, EPFO की नई डिजिटल व्यवस्था अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। 2.01 सर्वर पूरी तरह सक्रिय होते ही सदस्य अपने PF खाते से राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे और फिर ATM के माध्यम से नकदी निकाल सकेंगे। इसके अलावा UPI के जरिए भी PF निकासी की प्रक्रिया आसान बनाई जाएगी। इससे कर्मचारियों को बार-बार EPFO कार्यालय जाने या लंबी कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री ने पहले ही दिए थे संकेत केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने मई में ही इस सुविधा के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार EPFO को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि कर्मचारियों को अपना पैसा निकालने के लिए किसी तरह की परेशानी न हो। मंत्री के अनुसार, डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद PF निकासी पहले की तुलना में अधिक तेज, सरल और पारदर्शी हो जाएगी। कितनी होगी UPI से PF निकालने की लिमिट? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, UPI या ATM के जरिए निकासी की सीमा सदस्य के कुल PF बैलेंस के लगभग 50 प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि अंतिम नियम और सीमा EPFO द्वारा आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी। PF खाते को UPI से जोड़ने के लिए क्या जरूरी होगा? नई सुविधा का लाभ लेने के लिए EPFO सदस्यों को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी: जरूरी दस्तावेज और शर्तें जानकारी के अनुसार, EPFO पोर्टल और UMANG ऐप पर जल्द ही “Link PF with UPI” या “PF Withdrawal via UPI” जैसा नया विकल्प दिखाई दे सकता है। इसके जरिए Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM जैसी UPI सेवाओं को PF खाते से जोड़ा जा सकेगा। कब निकाल सकते हैं पूरा PF पैसा? EPFO नियमों के अनुसार कर्मचारी 55 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट के बाद पूरा PF फंड निकाल सकते हैं। इसके अलावा विकलांगता, नौकरी छूटने, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, विदेश में स्थायी रूप से बसने या अन्य विशेष परिस्थितियों में भी पूरा PF अमाउंट निकालने की अनुमति मिलती है।

ट्रेन में सीट नहीं मिली तो युवक ने फैलाई बम की अफवाह, रेलवे स्टेशन पर मचा हड़कंप; जांच के बाद गिरफ्तार

लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर सीट नहीं मिलने से नाराज युवक ने ट्रेन में बम होने की झूठी सूचना फैला दी। सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तलाशी ली, जांच में मामला फर्जी निकला। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लखनऊ- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर एक युवक की हरकत से रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। ट्रेन में सीट नहीं मिलने से नाराज युवक ने ट्रेन में बम होने की झूठी सूचना दे दी। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और स्थानीय पुलिस सक्रिय हो गई और ट्रेन की सघन जांच शुरू कर दी गई। सीट नहीं मिलने पर फैलाई बम की अफवाह पुलिस के मुताबिक, तेलंगाना निवासी 26 वर्षीय युवक ट्रेन से सफर करने के लिए ऐशबाग रेलवे स्टेशन पहुंचा था। ट्रेन में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उसे सीट नहीं मिल सकी। इसी बात से नाराज होकर उसने ट्रेन में बम रखे होने की झूठी सूचना फैला दी। सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन अलर्ट हो गया। सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल ट्रेन को रोककर सभी डिब्बों की बारीकी से जांच शुरू कर दी। यात्रियों में मची अफरा-तफरी बम की सूचना फैलते ही यात्रियों में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्रियों को एहतियात के तौर पर ट्रेन से नीचे उतारा गया। स्टेशन परिसर और ट्रेन के प्रत्येक कोच की गहन तलाशी ली गई। घंटों चली जांच के बाद भी किसी प्रकार का विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रेन को सुरक्षित घोषित कर आगे के लिए रवाना कर दिया। पूछताछ में सामने आई सच्चाई जांच के दौरान पुलिस ने सूचना देने वाले युवक की पहचान कर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि सीट नहीं मिलने के कारण उसने गुस्से में आकर बम की झूठी सूचना दी थी। जीआरपी ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने दी चेतावनी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बम जैसी झूठी सूचनाएं सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करती हैं और आपातकालीन संसाधनों का अनावश्यक उपयोग करवाती हैं। इससे यात्रियों में भय का माहौल बनता है और प्रशासन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी केवल सत्यापित आधार पर ही संबंधित एजेंसियों को दें।

E20 Petrol Insurance Claim: E20 पेट्रोल डलवाने पर रिजेक्ट हो जाएगा इंश्योरेंस क्लेम? बढ़े विवाद के बाद कंपनी ने दी बड़ी सफाई

E20 Petrol Insurance Claim को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कार इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो सकता है? ICICI Lombard ने जारी की नई सफाई, जानिए पूरी सच्चाई। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। E20 Petrol Insurance Claim: देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 Fuel) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसी बीच वाहन मालिकों के बीच एक नया डर पैदा हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंजन या अन्य पार्ट्स को नुकसान होता है तो क्या इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है? इस मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बाद ICICI Lombard ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। क्या था पूरा विवाद? हाल ही में ICICI Lombard द्वारा जारी किए गए एक FAQ (Frequently Asked Questions) में कहा गया था कि यदि कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी में ऐसा ईंधन इस्तेमाल करता है जिसके लिए वाहन डिजाइन नहीं किया गया है, तो इसे गलत उपयोग या लापरवाही माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस क्लेम की समीक्षा अलग तरीके से की जा सकती है। इसके अलावा FAQ में यह भी बताया गया था कि मोटर इंश्योरेंस पॉलिसियां आमतौर पर ऐसे नुकसान को कवर नहीं करतीं जो धीरे-धीरे समय के साथ विकसित होते हैं, जैसे ईंधन से होने वाला रासायनिक क्षरण या इंजन के अंदरूनी हिस्सों की खराबी। पुरानी गाड़ियों के मालिकों में बढ़ी चिंता इस जानकारी के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। खासकर उन वाहन मालिकों में चिंता बढ़ गई जिनकी गाड़ियां E20 फ्यूल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। लोगों को डर था कि कहीं E20 पेट्रोल भरवाने के कारण भविष्य में उनका इंश्योरेंस क्लेम खारिज न कर दिया जाए। ICICI Lombard ने दी नई सफाई विवाद बढ़ने के बाद ICICI Lombard ने नया स्पष्टीकरण जारी करते हुए ग्राहकों को आश्वस्त किया। कंपनी ने स्पष्ट कहा कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी अमान्य नहीं होगी। कंपनी के अनुसार, E20 पेट्रोल का उपयोग करना किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं माना जाएगा। यह सरकार की पर्यावरण-अनुकूल पहल का हिस्सा है और कंपनी केवल ईंधन के प्रकार के आधार पर किसी क्लेम को रिजेक्ट नहीं करती। क्लेम मंजूर होने का आधार क्या है? कंपनी ने कहा कि किसी भी मोटर इंश्योरेंस क्लेम का फैसला मुख्य रूप से दुर्घटना, चोरी या अन्य अप्रत्याशित घटनाओं के आधार पर किया जाता है। यदि कोई क्लेम सामान्य पेट्रोल या डीजल के इस्तेमाल के दौरान मान्य होता है, तो वही क्लेम E20 पेट्रोल के उपयोग की स्थिति में भी वैध रहेगा। हालांकि, सामान्य इंश्योरेंस नियमों के अनुसार धीरे-धीरे होने वाली मैकेनिकल खराबी या सामान्य घिसावट अब भी पॉलिसी कवरेज से बाहर रह सकती है। E20 Fuel क्या है? E20 फ्यूल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। कई नए वाहन पहले से ही E20-रेडी तकनीक के साथ बाजार में उपलब्ध हैं।

PF withdrawal new rule 2026: EPFO 3.0 लागू: अब UPI से मिनटों में निकालें PF पैसा, जानें पूरा आसान प्रोसेस

PF withdrawal new rule 2026: EPFO 3.0 लागू होने के बाद अब PF निकालना हुआ आसान। जानें कैसे UPI के जरिए मिनटों में अपने PF का पैसा सीधे बैंक खाते में प्राप्त करें, पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस और जरूरी शर्तें। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क।PF withdrawal new rule 2026: Employee Provident Fund Organisation (EPFO) ने 1 अप्रैल से बड़ा बदलाव लागू करते हुए PF निकालने की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया है। अब EPFO 3.0 के तहत यूजर्स अपने Provident Fund (PF) का पैसा सीधे UPI के जरिए मिनटों में अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकते हैं। इस नए सिस्टम का उद्देश्य क्लेम प्रोसेस को तेज करना, ऑटो अप्रूवल बढ़ाना और पेमेंट को तुरंत ट्रांसफर करना है। इससे करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलेगा, खासकर उन लोगों को जिन्हें इमरजेंसी में तुरंत पैसों की जरूरत होती है। UPI से PF निकालने का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस पहले और अब में क्या बदलाव? पहले: अब: जरूरी शर्तें (Important Requirements) UPI से PF निकालने के लिए ये चीजें जरूरी हैं: क्यों है ये बदलाव खास? EPFO का यह नया अपडेट डिजिटल इंडिया को मजबूत करता है और PF निकालने की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज बनाता है। अब यूजर्स को लंबे इंतजार और जटिल प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा।

0%