Amit Shah Reaction On Vandematram: 7 साल की बच्ची ने गाया ‘वंदे मातरम्’, अमित शाह हुए भावुक, उपहार में दिया गिटार

आइजोल (मिजोरम)- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Amit Shah Reaction On Vandematram: मिजोरम की 7 वर्षीय बच्ची एस्तेर लालदुहावमी हनामते ने अपनी मधुर आवाज में ‘वंदे मातरम्’ गाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत समारोह में मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। देशभक्ति से भरे इस प्रदर्शन ने अमित शाह को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने बच्ची को गिटार उपहार में दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।   अमित शाह मिजोरम की राजधानी आइजोल से 15 किलोमीटर दूर जोखावसांग में असम राइफल्स के प्रतिष्ठानों के स्थानांतरण के मौके पर आयोजित समारोह में शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम में एस्तेर ने जब ‘वंदे मातरम्’ गाया, तो उसकी मासूम और भावनात्मक प्रस्तुति से हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया।   अमित शाह ने इस खास पल का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा, “भारत के प्रति प्रेम हम सभी को जोड़ता है। आज आइजोल में मिजोरम की अद्भुत बच्ची एस्तेर लालदुहावमी हनामते को ‘वंदे मातरम्’ गाते हुए सुनकर भावुक हो गया। सात वर्षीय बच्ची का भारत माता के प्रति प्रेम उसके गीत में झलक रहा था। उसे एक गिटार उपहार में दिया और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।”   मिजोरम के विकास को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता   कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने असम राइफल्स के शिविर को जोखावसांग स्थानांतरित करने के फैसले को मिजोरम के विकास में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि आइजोल की भौगोलिक स्थिति और बढ़ती भीड़भाड़ के कारण पिछले 35 वर्षों से इस स्थानांतरण की मांग उठ रही थी, जिसे अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पूरा किया है।   गृह मंत्री ने कहा, “यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि मिजो लोगों के प्रति केंद्र की जिम्मेदारी और उनकी आकांक्षाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”   मिजोरम में केंद्र सरकार के विकास कार्य   अमित शाह ने मिजोरम में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर राज्यों में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार मिजोरम की संस्कृति, पहचान और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य करती रहेगी।  

Indian Railway: गुजरात में रेलवे परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेने पहुंचे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

अहमदाबाद- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Indian Railway: रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुजरात के अहमदाबाद, आणंद और दाहोद रेलवे स्टेशनों का दौरा कर विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चरल परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्टेशन पुनर्विकास, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और दाहोद में नए 9000 HP लोकोमोटिव निर्माण की प्रगति का निरीक्षण किया।   अहमदाबाद स्टेशन पुनर्विकास कार्य तेज़ी से जारी   रेल मंत्री अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां चल रहे पुनर्विकास कार्य का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद स्टेशन को स्थानीय विरासत और आधुनिक संरचना के संयोजन से विकसित किया जा रहा है। रेलवे ट्रैक के ऊपर कॉनकोर्स रूफ प्लाजा बनाया जाएगा, जिसमें यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं होंगी।   स्टेशन को मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, जिसमें बुलेट ट्रेन टर्मिनल, मेट्रो और बस रैपिड ट्रांसपोर्ट (BRT) का एकीकरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कालूपुर आरओबी और सारंगपुर आरओबी को जोड़ने के लिए एक एलिवेटेड रोड नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है, जिससे मौजूदा सड़क नेटवर्क का सतही क्षेत्र दोगुना हो जाएगा।   वैष्णव ने कहा कि गुजरात में रेलवे के लिए इस वर्ष 17,155 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो 2009-14 की तुलना में 29 गुना अधिक है।    आणंद में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और रेलवे विकास कार्यों का निरीक्षण   रेल मंत्री आणंद रेलवे स्टेशन भी पहुंचे, जहां उन्होंने वन स्टेशन वन प्रोडक्ट (OSOP) स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि गुजरात में 2014 के बाद से 1000 से अधिक रेल ओवर ब्रिज और रेल अंडर ब्रिज बनाए गए हैं, जबकि 3,144 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण किया गया है।   उन्होंने बुलेट ट्रेन परियोजना के ट्रैक निर्माण बेस का भी दौरा किया और श्रमिकों से मुलाकात कर उनके योगदान की सराहना की। वैष्णव ने कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कार्य पूरा हो चुका है, जिससे पोर्ट कनेक्टिविटी में वृद्धि हुई है।    दाहोद में देश के सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव का निरीक्षण   रेल मंत्री दाहोद स्थित लोकोमोटिव रोलिंग स्टॉक वर्कशॉप पहुंचे, जहां उन्होंने 9000 HP डब्ल्यूएजी लोकोमोटिव के नवविकसित प्रोटोटाइप का निरीक्षण किया। यह लोकोमोटिव मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित किया गया है और इसमें कवच तकनीक सहित कई उन्नत सुविधाएं मौजूद हैं।   उन्होंने कहा कि जल्द ही 9000 HP लोकोमोटिव का निर्यात शुरू होगा, जिससे दाहोद एक वैश्विक पहचान बनाएगा। वर्कशॉप ने स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर दिए हैं, और इसका उद्घाटन जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।    गुजरात में रेलवे के ऐतिहासिक विकास कार्य जारी   रेल मंत्री ने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत गुजरात के 87 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे विकास कार्यों की गति बढ़ाई जा रही है, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलें और परिवहन प्रणाली अधिक कुशल बने।   इस दौरे में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा स्थानीय सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।  

Mahashivratri 2025: पति-पत्नी एक साथ करें शिव-पार्वती की पूजा, सुहाग सामग्री का करें दान  

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि 2025 का पर्व 26 फरवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पति-पत्नी को एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। इससे आपसी प्रेम और तालमेल बढ़ता है।   महाशिवरात्रि 2025 का महत्व   महाशिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का पावन पर्व है। इस दिन शिवलिंग का पूजन, अभिषेक और मंत्र जप करने से विशेष फल प्राप्त होता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, महाशिवरात्रि पर घर में सुख-समृद्धि और शांति के लिए शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। पूजा में ऊँ उमा महेश्वराय नमः मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।   महाशिवरात्रि पर पति-पत्नी को क्यों करनी चाहिए एक साथ पूजा   धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पति-पत्नी को एक साथ पूजा-पाठ, तीर्थ यात्रा और अन्य धार्मिक कार्य करने चाहिए। इससे दांपत्य जीवन में सामंजस्य बढ़ता है और रिश्ते में मधुरता बनी रहती है। आपसी विवाद और मतभेद की संभावनाएं कम हो जाती हैं। पूजा के दौरान समर्पण भाव जाग्रत होता है, जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं।   महाशिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंत्र का जप करें   महाशिवरात्रि के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे भय, चिंता और नकारात्मकता दूर होती है।   महामृत्युंजय मंत्र:   ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।   उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।   शिव जी की सरल पूजा विधि   सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।   किसी शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग पर जल अर्पित करें।   जल चढ़ाते समय ऊँ नमः शिवाय, ऊँ महेश्वराय नमः, ऊँ रुद्राय नमः मंत्रों का जाप करें।   चंदन, फूल, धतूरा, बेलपत्र, चावल और प्रसाद अर्पित करें।   घी का दीपक जलाएं और शिवजी की आरती करें।   आधी परिक्रमा करें और भक्तों में प्रसाद बांटें।   घर पर भी विधि-विधान से शिव पूजा कर सकते हैं।   महाशिवरात्रि पर दान-पुण्य का महत्व   इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग सामग्री जैसे लाल साड़ी, लाल चुनरी, कुमकुम, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, आभूषण आदि दान करना शुभ माना जाता है।   गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।   ग्रहों का विशेष संयोग: महाशिवरात्रि 2025   इस वर्ष महाशिवरात्रि के दिन सूर्य, बुध और शनि कुंभ राशि में एक साथ स्थित रहेंगे। यह दुर्लभ योग 1965 के बाद पहली बार बन रहा है। ऐसे संयोग में शिव पूजा करने से विशेष फल मिलता है और कुंडली दोष शांत होते हैं।   महाशिवरात्रि पर 12 ज्योतिर्लिंग दर्शन का महत्व   जो लोग किसी ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर सकते, वे घर पर ही भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। शिवपुराण में वर्णित 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम स्मरण करने से भी पुण्य लाभ मिलता है।   (ध्यान दें: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, जिसका उद्देश्य जानकारी देना है। किसी भी पूजा-पद्धति को अपनाने से पहले अपने गुरु या विशेषज्ञ से सलाह लें।)  

MP News: गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ रतलाम का अनोखा लड़का; बालों से ढ़के चेहरे से कभी मचती थी चिढ़, आज दुनियाभर में छाया नाम

रतलाम – पब्लिक वार्ता, जयदीप गुर्जर। MP News: मध्य प्रदेश के छोटे से गांव का एक लड़का एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। देशभर की मीडिया में छाने के बाद अब इसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने का कारण इस लड़के के चेहरे और शरीर पर लंबे-लंबे बालों का होना है। कभी बालों से ढके चेहरे के कारण लोग डरते थे, चिढ़ाते थे। लेकिन आज पूरे गांव की पहचान बनाने के बाद सभी प्यार से पेश आते है।  दरअसल, इस लड़के को ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से उसके चेहरे के बाल 5 सेंटीमीटर तक बढ़ जाते हैं। मध्य प्रदेश में रतलाम जिला मुख्यालय से 35 किमी दूर नंदलेटा गांव में रहने वाले 19 वर्षीय ललित पाटीदार वरवोल्फ सिंड्रोम (werewolf syndrome) नाम की बीमारी है। इस दुर्लभ बीमारी के कारण उसके चेहरे पर असामान्य बाल उग आए हैं। पूरा चेहरा सुनहरे बालों से ढ़का रहता है, मानों कोई फिल्मी किरदार हो। इस कारण ललित वोल्फ मेन (Wolf Man) के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है। अब इन बालों ने ललित को वर्ल्ड फेमस बना दिया और उसने वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करवा लिया है। इटली में मिला सम्मान ललित पाटीदार ने पब्लिक वार्ता को बताया की 2 साल पहले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम ने उनसे संपर्क किया था।  8 फरवरी को ललित ने अपने परिचित जितेंद्र कुमार पाटीदार के साथ इटली के लिए उड़ान भरी। ललित इटली के मिलान शहर में 6 दिनों तक रहा। इसी दौरान वहां के विशेषज्ञों ने उसकी जांच की। जिसके बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के एक खास कार्यक्रम में उसे सर्टिफिकेट और मेडल प्रदान किया गया। गिनीज की टीम के अनुसार किसी व्यक्ति (पुरुष) के चेहरे पर सबसे अधिक बाल 201.72/सेमी² हैं। और इसे भारत के ललित पाटीदार ने हासिल किया। 13 फरवरी को मिलान, इटली में लो शो देई रिकॉर्ड के सेट पर सत्यापित किया गया। ऐसी रही ललित की कहानी जन्मजात बीमारी की वजह से ललित के पूरे शरीर पर भूरे बाल उग आए है। ललित के जन्म से ही ऐसे बाल है। नतीजतन, उनका पूरा शरीर बालों से ढका रहता है। आलम यह है कि वे बाकी बच्चों से बिलकुल अलग दिखते हैं। ललित की यह बीमारी दुनिया के सामने सबसे पहले 2019 में आई थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि ललित पर अब कई ब्लॉग्स बन चुके हैं। भारत के कई राज्यों व शहरों के अलावा विदेशों से भी लोग ललित से मिलने उनके गांव नंदलेटा पहुंच रहे हैं। ललित को शुरुआत में समस्या आई लेकिन अब वे सामान्य जीवन जीते है। ललित को कभी अपने इस रूप से चिढ़ आती थी और इसी इलाज के लिए प्रयास करते थे। लेकिन अब ललित का कहना है की वे इसी तरह रहना चाहते है।  डर जाते थे लोग, लेकिन अब बना पहचान ललित बताते हैं कि, “मेरे मम्मी-पापा कहते हैं कि मेरा जब जन्म हुआ था तो डॉक्टर ने मेरी शेविंग की थी, क्योंकि मेरे पूरे शरीर पर लंबे-लंबे बाल थे, लेकिन जब तक मैं लगभग 6 या 7 साल का नहीं हुआ, तब तक मुझे कुछ भी अलग नहीं लगा. हालांकि जब मैं बड़ा होने लगा तो मैंने पहली बार नोटिस किया कि मेरे पूरे शरीर पर ऐसे बाल हैं, जैसे किसी को नहीं होते और वे लगातार बढ़ रहे थे. थोड़े समय बाद जब मैं घर से बाहर निकलता तो लोग मुझ पर पत्थर फेंकते, बच्चे डर जाते कि कहीं मैं उन्हें बंदर या भालू की तरह काटने के लिए ना चला आऊं. इसके बाद मम्मी-पापा मुझे डॉक्टर के पास ले कर गए, जहां डॉक्टरों ने देखा कि 6 साल की उम्र में मेरे शरीर के लगभग हर हिस्से पर असामान्य बाल बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों ने इसे हाइपरट्रिचोसिस बताया, डॉक्टरों का कहना था कि दुनिया में केवल 50 लोग ही होते हैं, जो इस बीमारी से पीड़ित होते हैं, क्योंकि यह बहुत ही असामान्य बीमारी है.”

Shailaja Paik: कौन है शैलजा पाइक:पुणे की झुग्गी से मैकआर्थर ‘जीनियस’ फेलोशिप तक की कहानी!

“यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” – Shailaja Paik पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Shailaja Paik: पुणे के येरवडा की एक छोटी झुग्गी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था, लेकिन शैलजा पाइक की यह असाधारण कहानी हमें बताती है कि सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। आज शैलजा पाइक दुनिया भर में दलित अध्ययन की प्रमुख विद्वान के रूप में जानी जाती हैं और हाल ही में उन्हें प्रतिष्ठित मैकआर्थर ‘जीनियस’ अनुदान (MacArthur ‘Genius’ Grant) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने अपनी असाधारण रचनात्मकता और सामाजिक योगदान के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता दिखाई हो। इस फेलोशिप के साथ 8 लाख डॉलर का अनुदान भी दिया जाता है। भारतीय रुपये के हिसाब से ये करीब 6.64 करोड़ है। शैलजा पाइक का सफर बेहद प्रेरणादायक है। येरवडा (Yerawada) की झुग्गियों में पली-बढ़ी शैलजा ने बचपन में ही गरीबी, जातिगत और लैंगिक भेदभाव का सामना किया। उनका परिवार एक छोटे से एक कमरा घर में रहता था, जिसकी छत लकड़ी के खंभों से सहारा पाती थी। उनके पिता देवराम पाइक राज्य कृषि विभाग में काम करते थे, जबकि उनकी मां सरिता पाइक एक गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी, लेकिन उनके माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी। शैलजा और उनकी तीन बहनों को पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। शैलजा को पहली बार जातिगत भेदभाव का सामना अपने पैतृक गांव ब्रह्मगांव तकली में करना पड़ा, जहां दलित परिवारों को ऊंची जातियों से अलग रहना पड़ता था और उन्हें सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं थी। यह अनुभव उनके जीवन में एक गहरी छाप छोड़ गया और आगे चलकर उनके शोध का आधार बना। शैलजा ने स्थानीय रोशनी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने हमेशा कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया। जब उन्होंने 10वीं कक्षा में 98% अंक हासिल किए, तो उनका नाम अखबार में आया और यह उनके स्कूल के लिए भी गर्व का क्षण था। इसके बाद, उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। हालांकि उनका सपना यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अपने परिवार की मदद करने के लिए वह सपना छोड़ना पड़ा। अपने शुरुआती संघर्षों के बावजूद, शैलजा ने अपनी ऊर्जा दलित महिलाओं के अधिकारों और उनके सामाजिक संघर्षों पर केंद्रित की। उन्होंने 2007 में ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह अमेरिका के येल विश्वविद्यालय और यूनियन कॉलेज में पढ़ाने के बाद सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर बनीं। आज वह दक्षिण एशियाई अध्ययन, महिला अध्ययन, और समाजशास्त्र के साथ ही चार्ल्स फेल्प्स टैफ्ट प्रतिष्ठित शोध प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। शैलजा की पहली पुस्तक, Dalit Women’s Education in Modern India: Double Discrimination (2014), दलित महिलाओं के संघर्ष और शिक्षा की जटिलताओं पर केंद्रित थी। उनकी दूसरी पुस्तक, The Vulgarity of Caste: Dalits, Sexuality, and Humanity in Modern India (2022), जाति, लैंगिकता और मानवीयता के आपसी संबंधों पर आधारित है। इन किताबों के माध्यम से शैलजा ने दिखाया कि कैसे जाति और लैंगिकता भारतीय समाज में अन्याय को बढ़ावा देती हैं। शैलजा की यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनका येरवडा से अमेरिका तक का सफर है। एक दलित महिला के रूप में उन्होंने जातिगत और लैंगिक भेदभाव के साथ-साथ रंगभेद का भी सामना किया, लेकिन इन सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। जब उन्हें मैकआर्थर फेलोशिप के लिए चुने जाने की खबर मिली, तो वह अमेरिका में थीं। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, “यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” शैलजा का मानना है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में केवल दलितों को ही संघर्ष करने की जिम्मेदारी नहीं उठानी चाहिए, बल्कि ऊंची जातियों को भी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। वह कहती हैं, “जाति के दमन के खिलाफ सिर्फ पीड़ितों को ही नहीं, बल्कि सभी को साथ आकर लड़ना होगा।” शैलजा पाइक की यह यात्रा उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सामाजिक भेदभाव, गरीबी और अन्याय का सामना कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि शिक्षा, संघर्ष, और समर्पण किसी भी बाधा को पार कर सकता है। शैलजा की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि अगर आप में संघर्ष करने की हिम्मत और सपनों को पाने का जुनून हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

Iran Vs Israel: मध्य-पूर्व में छिड़ी जंग: क्या ईरान-इजरायल के बीच बढ़ेगा टकराव?

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Iran Vs Israel: मंगलवार रात ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमले ने पूरे मध्य-पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है। ईरान के हमले के बाद इजरायल की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है, जिसमें उसने बदला लेने की बात कही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, और जब तक कोई पक्ष हारता नहीं, तब तक यह युद्ध थमने की संभावना कम है। विश्लेषकों का मानना है कि यह युद्ध सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका भी इजरायल का समर्थन कर रहा है, जबकि ईरान ने अपनी प्रतिष्ठा और प्रभाव बनाए रखने के लिए यह हमला किया है। इजरायल की प्रतिक्रिया कैसे होगी, इस पर दुनिया की नजर टिकी है, क्योंकि यह युद्ध अब क्षेत्रीय सीमा से बाहर निकलने की कगार पर है। ईरान ने अपने प्रॉक्सी संगठनों के समर्थन के साथ इस युद्ध में कूदकर अपने लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जबकि इजरायल कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चिंता जताई है और युद्धविराम की अपील की है, लेकिन वर्तमान हालात में इसका कोई हल जल्दी निकलने की संभावना नहीं दिख रही। क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव राजनीतिक अस्तित्व और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। ईरान-इजरायल के बीच अब हर एक कदम बेहद अहम साबित हो सकता है।

Coldplay Concert India: कोल्डप्ले के मुंबई शो के लिए टिकट की मारामारी, 2 लाख तक में हो रहा ब्लैक! क्या है इस बैंड में ऐसा खास?

प्रदेश के यंग आईपीएस ऑफिसर और रतलाम एसपी अमित कुमार का नवाचार, हर जवान को 5 और 10 हजार का नगद ईनाम, हर 15 दिन में खुद लेंगे समीक्षा बैठक पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। ब्रिटिश रॉक बैंड Coldplay एक बार फिर से भारत में सुर्खियों में है। जनवरी 2025 में मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में होने वाले उनके तीन शो को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह है। कोल्डप्ले के ‘Music of the Spheres’ वर्ल्ड टूर के तहत 18, 19 और 21 जनवरी को ये शो आयोजित होंगे। टिकटों की बुकिंग के साथ ही वेबसाइट क्रैश हो गई, और चंद मिनटों में सारे टिकट बिक गए। इससे फैंस निराश हैं और सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कंसर्ट के टिकट की कालाबाजारी (Coldplay Tickets in black) का भी दावा किया जा रहा है। कालाबाजारी में टिकट को 50 हजार से 2 लाख रुपए तक में बेचने का आरोप है। खुलासे के बाद ऐसी खबर भी है की टिकट बुकिंग वेबसाइट बुक माय शो (Book My Show) ने कोल्डप्ले कॉन्सर्ट की नकली टिकट बेचने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। कौन है ये बैंड?Coldplay एक ब्रिटिश रॉक बैंड है, जिसकी शुरुआत 1996 में लंदन में हुई थी। फ्रंटमैन क्रिस मार्टिन और गिटारिस्ट जॉनी बकलैंड की मुलाकात यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) में हुई थी। बाद में गाइ बेरीमैन और विल चैंपियन के जुड़ने से बैंड ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उनके मशहूर एल्बम जैसे Yellow, A Rush of Blood to the Head और Viva la Vida ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। टिकट विवाद और ब्लैक मार्केटिंगकोल्डप्ले के मुंबई कॉन्सर्ट के टिकट चंद मिनटों में ही बिक गए, लेकिन इसके बाद बुकमायशो पर कई यूजर्स टिकट खरीदने में असमर्थ रहे। इसके चलते ब्लैक मार्केट में टिकट की कीमतें कई गुना बढ़ गईं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है की कुछ थर्ड-पार्टी साइट्स पर टिकटों को 30 से 50 गुना दाम पर बेचा जा रहा है, जिसके चलते मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। वकील अमित व्यास ने बुकमायशो और लाइव नेशन के खिलाफ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। होटलों की आसमान छूती कीमतेंकॉन्सर्ट के दौरान नवी मुंबई के होटलों का किराया 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य दिनों में यह 10,000 से 25,000 रुपये के बीच होता है। आयोजन स्थल के पास सभी होटल पहले से ही बुक हो चुके हैं। Coldplay के इस कॉन्सर्ट को लेकर भारतीय फैंस में जबरदस्त उत्साह है। कॉन्सर्ट में क्या होगा खास?Coldplay के शो में 5 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को प्रवेश की अनुमति होगी। शो में 4 घंटे की नॉन-स्टॉप परफॉर्मेंस होगी, जिसमें LED रिस्टबैंड और लाइव म्यूजिक का शानदार अनुभव शामिल होगा। लाउंज टिकट लेने वाले दर्शकों को प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी।

Hezbollah leader Hassan Nasrallah died: जम्मू-कश्मीर में हिजबुल्ला नेता हसन नसरुल्ला की मौत पर इजराइल विरोधी प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लोग!

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। लेबनान के हिजबुल्ला नेता हसन नसरुल्ला (Hezbollah leader Hassan Nasrallah died) की हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) में शनिवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। श्रीनगर के विभिन्न इलाकों में इजराइल और अमेरिका विरोधी नारे गूंज उठे, जब लोग काले झंडे लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने हिजबुल्ला प्रमुख की हत्या की निंदा करते हुए इजराइल और अमेरिका के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। श्रीनगर के हसनाबाद, रैनावारी, सैदाकदल, मीर बेहरी और आशाबाग जैसे इलाकों में प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ उमड़ी, जिसमें बच्चों समेत कई लोग शामिल थे। विरोध प्रदर्शन के चलते कई स्थानों पर ट्रैफिक बाधित हुआ, वहीं पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। कश्मीरी नेताओं की प्रतिक्रियाहिजबुल्ला प्रमुख हसन नसरुल्ला की मौत पर कश्मीरी नेताओं ने भी गहरा दुख जताया। अंजुमन-ए-शरी के अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा, “हसन नसरुल्ला के खून से हजारों नसरुल्ला पैदा होंगे,” और इस घटना की कड़ी निंदा की। कई अन्य राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने भी इस घटना पर विरोध दर्ज कराया है। यह विरोध प्रदर्शन हिजबुल्ला और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है, जिसने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। जम्मू-कश्मीर में इस घटना ने स्थानीय भावनाओं को प्रभावित किया है, जिससे जनता के बीच गुस्सा और असंतोष देखने को मिला है। शांति बनाए रखने की अपीलअधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और इस तनावपूर्ण माहौल में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

Top School In World: कैसे एक टीचर ने MP के सरकारी स्कूल को झुग्गियों से निकाल इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचाया, आज देशभर में नाम

सेंव, साड़ी और सोने की प्रसिद्धि से ट्रिपल S नगरी कहे जाने वाले रतलाम में एक और S जुड़ा, वो S है STUDY यानी शिक्षा!, विज्ञान के शिक्षक गजेन्द्रसिंह राठौर के प्रयासों ने बनाया अव्वल… मध्यप्रदेश – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Top School In World: मध्यप्रदेश के  रतलाम का सीएम राइज विनोबा स्कूल (CM RISE SCHOOL RATLAM) न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर चुका है। इस सरकारी स्कूल को T4 अंतर्राष्ट्रीय संस्था (T4 Education :World’s Best School Prizes 2024) द्वारा नवाचार श्रेणी में विश्वभर के टॉप 10 स्कूलों में शामिल किया गया और अंततः इसने तीसरा स्थान हासिल किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद से स्कूल के छात्रों, शिक्षकों और परिजनों में गर्व है। इस स्कूल को 1991 में रतलाम की शहरी झुग्गियों में स्थापित किया गया था। इस स्कूल ने अपनी शुरुआती चुनौतियों के बावजूद, नवाचारी प्रक्रियाओं और सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम से आज यह मुकाम हासिल किया है।  सरकारी स्कूल के एडमिशन में अब प्रवेश के लिए होड़ मची हुई है। इसके यहां तक पहुंचने के पीछे की कहानी में एक शिक्षक गजेन्द्रसिंह सिंह राठौर की भूमिका बहुत मायने रखती है। राठौर स्कूल के वाईस प्रिंसीपल भी है। साइंस टीचर गजेन्द्रसिंह राठौर (Science Teacher Gajendra Singh Rathore) के पढाने का तरीका बहुत अलग है। उनका कहना है विज्ञान रट्टा मारने का नहीं बल्कि समझने का विषय है। किताब में छपे विषयों को राठौर प्रेक्टिकल कर बच्चों को समझाते है। रॉकेट उड़ता कैसे है, घर्षण होता क्या है, भूकंप आता क्यो है ऐसे कई रहस्यों को पढ़ाने की बजाय उन्हें प्रेक्टिकल से समझाते है। राठौर ऑनलाइन भी बच्चों को विज्ञान को समझने के लिए प्रेरित करते है। नहीं बदला अंदाज, राठौर से पढ़ने का क्रेजविद्यार्थियों में राठौर से पढ़ने का अलग ही क्रेज है। जहां भी शिक्षक रहे उन्होंने अपने पढ़ाने के अंदाज नहीं बदले। पढ़ाने में इनोवेशन के तरीकों को उन्होंने यहां भी लागू रखा। उनके साथ अन्य स्टाफ ने भी सहभागिता की और गजेन्द्रसिंह के तरीकों को अपनाया। जिसकी बदौलत आज पूरे विश्व में MP का सरकारी स्कूल चमक रहा है। आपको बता दे साल 2016 में राठौर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके है। आज भी राठौर अपने पढ़ाए विद्यार्थियों के साथ जीवंत संपर्क में रहते है। विद्यार्थी भी उनसे जीवन की कठिनाइयों से निकलने के टिप्स लेते है। परेशानियों में उनसे सलाह लेते है।अवार्ड की घोषणा के समय कार्यक्रम के दौरान राठौर भावुक हो उठे थे और उनके आंसू निकल आए थे। राठौर ने बनाई योजना, नवाचार किए लागूदो साल पहले विनोबा स्कूल में उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर ने स्कूल में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति को सुधारने के लिए वरिष्ठ शिक्षकों के साथ मिलकर “साइकिल ऑफ ग्रोथ मेकैनिज्म” योजना बनाई। इस योजना का उद्देश्य शिक्षकों के पेशेवर विकास के साथ-साथ छात्रों की भागीदारी बढ़ाना था। इसमें टीचर्स के लिए टीम हर्डल, कैप्सूल ट्रेनिंग, क्लासरूम मॉनिटरिंग, वन-ऑन-वन फीडबैक, और रीवार्ड एवं रिकग्निशन जैसी गतिविधियाँ शामिल की गईं।इसके अलावा, “विनोबा मॉडल ऑफ पैरेंटल एंगेजमेंट”, “कम्युनिटी एज ए लर्निंग रिसोर्स”, और “ट्रैकिंग डाटा के इनोवेटिव आइडिया” जैसी पहलें भी जुड़ती गईं। इन सब नवाचारों ने स्कूल में एक उत्साही और सकारात्मक वातावरण तैयार किया, जहाँ बच्चे आसानी से सीखने लगे। इस योजना को सफल बनाने में प्राचार्य संध्या वोरा, उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर, प्रधान अध्यापक अनिल मिश्रा, सीमा चौहान, हीना शाह और अन्य शिक्षकों ने नियमित रूप से योगदान दिया। इस प्रकार हुआ चयनटी फॉर एजुकेशन ने दुनिया भर के स्कूलों से फरवरी 2024 तक विभिन्न श्रेणियों में आवेदन मांगे थे। हजारों आवेदनों में से विनोबा स्कूल को “इनोवेशन” श्रेणी में चुना गया, जहाँ उप प्राचार्य और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक गजेंद्र सिंह राठौर को स्कूल लीडर के रूप में नामित किया गया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविदों द्वारा एक घंटे का ऑनलाइन इंटरव्यू लिया गया। इंटरव्यू के बाद दस्तावेजों के आधार पर मूल्यांकन किया गया।शिक्षकों की ऑनलाइन मीटिंग और विभिन्न स्तरों के परीक्षण के बाद, 13 जून को पहले चरण में स्कूल टॉप 10 में आया और गुरुवार को टॉप 3 में जगह बनाई। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता, और संचालक लोक शिक्षण डीएस कुशवाह ने उन्हें इस सफलता पर बधाई दी। इनोवेशन कैटेगरी में ऐतिहासिक उपलब्धिरतलाम का यह शासकीय स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक और प्रयोगात्मक तरीकों का उपयोग कर रहा है, जिससे छात्रों को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ शिक्षा दी जा रही है। गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि विद्यालय में कुल 577 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें से 525 छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस सफलता के पीछे स्कूल के सामूहिक प्रयास और शिक्षकों की कड़ी मेहनत है। मुख्यमंत्री ने दी बधाईमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्कूल की उपलब्धि पर बधाई दी। शहर विधायक व मंत्री चैतन्य काश्यप ने स्कूल का दौरा कर छात्रों और शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने इस अवसर पर स्कूल की प्राचार्य संध्या वोहरा और उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया। काश्यप ने कहा कि यह स्कूल प्रदेश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा और भविष्य में अन्य शासकीय स्कूलों को भी इसी प्रकार से ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम करेगा। सीएम राइज स्कूल: एक ड्रीम प्रोजेक्टगौरतलब है कि सीएम राइज स्कूल योजना मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के शासकीय स्कूलों को उन्नत और आधुनिक सुविधाओं से लैस कर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने का प्रयास किया गया। आज रतलाम के विनोबा स्कूल ने इस पहल की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध कर दिया है। लाइटहाउस स्कूल का दर्जाअब इस स्कूल को “लाइटहाउस” का दर्जा दिया गया है, जिसका मतलब है कि अन्य स्कूल भी इसके नवाचार और सफलता से प्रेरणा लेकर अपने छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा प्रणाली विकसित करेंगे। गजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, स्कूल की यह सफलता अभिभावकों के लिए एक संकेत है कि अब उन्हें महंगे निजी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकारी स्कूल भी उन्हें उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। रतलाम के इस स्कूल ने साबित कर दिया है कि सही दिशा में मेहनत और दृढ़ संकल्प से … Read more

Maggie Smith Died: मशहूर एक्ट्रेस मैगी स्मिथ का 89 साल की उम्र में निधन, Harry Potter में निभाया था प्रोफेसर मैकगोनागल का रोल

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। हॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री मैगी स्मिथ (Maggie Smith), जिन्हें ‘हैरी पॉटर’ में प्रोफेसर मैकगोनागल (Minerva McGonagall) के किरदार के लिए भारतीय दर्शक विशेष रूप से पहचानते हैं, का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके बेटों, क्रिस लार्किन और टोबी स्टीफंस ने एक बयान में जानकारी दी कि लंदन के एक अस्पताल में शुक्रवार सुबह मैगी ने अपनी आखिरी सांस ली। वे अपने पीछे दो बेटे और पांच पोते-पोतियां छोड़ गई हैं, जो इस अपूरणीय क्षति से गहरे सदमे में हैं। मैगी स्मिथ को उनके करियर में कई पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें दो ऑस्कर और चार एम्मी अवॉर्ड्स शामिल हैं। उनका करियर लगभग 70 साल तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने ‘डाउनटन एबे’ और ‘हैरी पॉटर’ जैसी हिट फिल्मों और शोज में यादगार भूमिकाएं निभाईं। 1969 में ‘द प्राइम ऑफ मिस जीन ब्रॉडी’ के लिए उन्हें पहला ऑस्कर मिला और 1978 में ‘कैलिफोर्निया सूट’ के लिए दूसरा ऑस्कर अवॉर्ड मिला। उनकी अद्वितीय अभिनय प्रतिभा और फिल्मों में उनकी शानदार भूमिकाएं हमेशा याद रखी जाएंगी। साल 1952 से लेकर 2023 तक डैम मैगी स्मिथ एक्ट्रेस सिनेमा जगत में एक्टिव रहीं। इस दौरान कई शानदार मूवीज के जरिए उन्होंने दर्शकों को भरपूर मनोरंजन किया। लेकिन हैरी पॉटर की वजह से उनको काफी लोकप्रियता हासिल हुई। इसके अलावा वह दो बार ऑस्कर अवॉर्ड को भी अपने नाम कर चुकी थीं।