Ratlam News: लक्ष्मी नगर में रंगारंग भव्य गरबा आयोजन, आज अंतिम दिन फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसे आकर्षक उपहार

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Ratlam News: शहर के लक्ष्मी नगर स्थित मां अंबे माता मंदिर में इस वर्ष का नवरात्रि महोत्सव बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। माँ अम्बे नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित नौ दिवसीय गरबा महोत्सव आज अंतिम दिन पर पहुंचेगा। मां के दरबार में हर दिन भव्य महाआरती का आयोजन रात 8:30 बजे से शुरू हुआ, जिसके बाद रात 9 बजे से गरबा उत्सव की शुरुआत की गई। नवरात्र के अंतिम दिन यानी नवमीं पर पूरी रात मां की आराधना की जाएगी। प्रतिदिन 8 से 10 लकी ड्रा का खोले जा रहे है। जिसमें फ्रिज, टीवी, चांदी की पायल जैसे आकर्षक उपहार दिए जा रहे है। समिति के जलज सांखला ने बताया महोत्सव में गरबा खेलने वाली सभी बालिकाओं के लिए प्रोत्साहन पुरुस्कार रखे गए है। पंचमी, छठ, सप्तमी व अष्टमी पर विशेष लकी ड्रॉ का आयोजन हुआ, जिसमें मिक्सर, माइक्रो ओवन, 32 इंच स्मार्ट टीवी, वाशिंग मशीन और फ्रिज जैसे आकर्षक इनाम दिए गए। सर्वश्रेष्ठ गरबा करने वाली 10 बालिकाओं का चयन कर उन्हें चांदी के सिक्के भी वितरित किए जा रहे है। शस्त्र के साथ गरबा करते हुए भी मां की आराधना की गई। नवरात्रि के समापन के बाद कन्या भोज व विशाल महाप्रसादी भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

CM Kisan Kalyan Yojana: अक्टूबर में मध्य प्रदेश के किसानों को मिलेंगे ₹2000, जानें योजना के फायदे और पात्रता

मध्यप्रदेश-पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| CM Kisan Kalyan Yojana: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए CM Kisan Kalyan Yojana के तहत आर्थिक मदद की योजना चलाई है। इस योजना के तहत प्रदेश के किसानों को सालाना 6,000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलती है, जिससे उन्हें खेती-बाड़ी के खर्चों में राहत मिलती है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पहले से मिलने वाले 6,000 रुपये के साथ, किसानों को कुल 12,000 रुपये की वार्षिक सहायता प्रदान की जाती है। अक्टूबर में किसानों को मिलेंगे ₹2000सरकार ने अक्टूबर 2024 में इस योजना के तहत किसानों को ₹2000 की अगली किस्त देने की घोषणा की है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिससे उन्हें कृषि से जुड़े खर्चों में मदद मिलेगी। CM Kisan Kalyan Yojana के फायदे:1. सालाना ₹12,000 की सहायता: पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि के अतिरिक्त 6,000 रुपये की मदद राज्य सरकार देती है।2. आर्थिक स्थिरता: यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और खेती के निवेश को बढ़ाने में सहायक है।3. आय में सुधार: इस योजना से किसानों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है। पात्रता:1. मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है।2. आवेदक की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए।3. आवेदक पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभार्थी होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेज:1. आधार कार्ड2. बैंक पासबुक3. पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, वोटर आईडी)4. निवास प्रमाण पत्र5. भूमि से जुड़े दस्तावेज़6. मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो) आवेदन प्रक्रिया:1. सबसे पहले, मध्य प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।2. योजना से संबंधित लिंक पर क्लिक कर आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें।3. फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें और सभी जरूरी दस्तावेजों की फोटोकॉपी संलग्न करें।4. फॉर्म को नजदीकी कृषि विभाग या ग्राम पंचायत कार्यालय में जमा करें।

Godess Worship In India : भारतीय संस्कृति में मातृपूजा का गहरा इतिहास, पांच हजार वर्ष पुरानी है परंपरा

हड़प्पा सभ्यता के एक पुरास्थल से प्राप्त एक पट्टिका पर महिषासुर का मर्दन करती हुई देवी का अंकन मिलता है, जिसे महिषासुरमर्दिनी की कहानी का प्रथम चित्रण माना जाता है – प्रोफेसर शुभम केवलिया पब्लिक वार्ता,प्रोफेसर शुभम केवलिया। Godess Worship In India: मातृपूजा भारतीय संस्कृति की एक अत्यंत प्राचीन परंपरा है, जिसकी जड़ें लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व की सरस्वती और सिंधु नदी की घाटियों में मिलती हैं। यहां से शुरू हुई मातृदेवी की आराधना भारतीय समाज में गहराई तक व्याप्त है, जो आज भी विभिन्न पर्वों में जीवंत दिखाई देती है। पुरातात्विक उत्खननों से प्राप्त सामग्री इस बात का प्रमाण देती है कि भारतीय सभ्यता का आरंभिक स्वरूप मातृदेवियों के पूजन पर आधारित था। विशेषकर हड़प्पा (Hadappa) और मोहनजोदड़ो (Mohanajodado) से मिली मातृदेवियों की मूर्तियां इस तथ्य को और भी स्पष्ट करती हैं कि भारतीय समाज ने देवी-पूजन को अपने जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बना रखा था। प्राचीन सभ्यताओं में मातृदेवी की आराधनापुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार, सिंधु-सरस्वती सभ्यता से पकी मिट्टी से बनी मातृदेवी की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। इन मूर्तियों में देवी के सौम्य और रौद्र दोनों रूपों को दर्शाया गया है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित कुल्ली पुरास्थल से मातृदेवी के चंडी स्वरूप की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं, जो देवी के शक्तिशाली और उग्र रूप की ओर इंगित करती हैं। बलूचिस्तान में स्थित हिंगलाज शक्तिपीठ, जो 52 शक्तिपीठों में से एक है, भी मातृदेवी की आराधना की प्राचीनता को दर्शाता है। हड़प्पा सभ्यता के एक पुरास्थल से प्राप्त एक पट्टिका पर महिषासुर का मर्दन करती हुई देवी का अंकन मिलता है, जिसे महिषासुरमर्दिनी की कहानी का प्रथम चित्रण माना जाता है। बलूचिस्तान के नौशारो क्षेत्र से मातृदेवी की मूर्तियां मिली हैं, जिनके मस्तक पर सिंदूर के प्रमाण मिले हैं। यह भारतीय संस्कृति में विवाहित स्त्रियों द्वारा सिंदूर लगाने की परंपरा को पांच हजार वर्षों पूर्व तक ले जाता है। मातृदेवियों के प्रतीक और अर्थभारतीय संस्कृति में मातृदेवियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुरातात्विक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय समाज ने धरती को सृजनकर्ता के रूप में देखा और धरती को मां का स्वरूप दिया। हड़प्पा से प्राप्त एक पट्टिका पर एक स्त्री के गर्भ से एक पौधे के अंकुरण का चित्रण हुआ है, जो मातृदेवी के सृजनात्मक स्वरूप को दर्शाता है। इसी सभ्यता में सप्तमातृकाओं का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुद्रिका पर खड़ी सात मानव आकृतियों को कुछ विद्वान सप्तमातृकाओं का चित्रण मानते हैं, जो भारतीय देवी-पूजा के एक और पहलू को उजागर करती है। मथुरा और वैदिक काल की देवी-पूजामातृदेवी की मूर्तिकला में आगे का विकास लगभग दो हजार वर्ष पूर्व मथुरा में देखा गया। मथुरा के उत्खननों से दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी और सप्तमातृकाओं जैसे देवी स्वरूपों की मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। मथुरा से प्राप्त देवी की मूर्तियों ने बाद में बनने वाली मातृदेवियों की मूर्तिकला की दिशा निर्धारित की। इन मूर्तियों के माध्यम से देवी-पूजा की परंपरा पुनः प्रारंभ हुई और यह भारतीय समाज का एक स्थायी हिस्सा बनी रही। मातृपूजा: भारतीय संस्कृति की स्थायी परंपरामातृपूजा की परंपरा भारतीय जनमानस में गहराई से रची-बसी है। यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की आदिकाल से चली आ रही सामाजिक संरचना का भी प्रतीक है। भारतीय समाज में मातृदेवी को धरती, शक्ति और सृजन का प्रतीक माना गया है। यह भारतीय संस्कृति की सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक है, जिसे आज भी नवरात्रि और अन्य धार्मिक पर्वों में पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति की यह अनूठी परंपरा हमें यह समझने का अवसर देती है कि देवी-पूजा की जड़ें कितनी गहरी हैं और यह कैसे हजारों वर्षों तक अपने अस्तित्व को बनाए रखी हैं। भारतीय समाज के लिए मातृदेवी की पूजा न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखती है। यह परंपरा आज भी नवरात्रि, दुर्गापूजा और अन्य उत्सवों के माध्यम से जीवित और प्रासंगिक बनी हुई है। (Disclaimer: यह लेख पुरातत्वविद व इतिहासकार प्रो. शुभम केवलिया द्वारा अद्यतन किया गया है। इस लेख में लेखक के अपने विचार और शोध है।)

MP News: फटाकेदार साइलेंसर वाले वाहनों पर चला बुलडोजर, बुलेट का वायरल हुआ था वीडियो

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। MP News: रतलाम में यातायात को सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त बनाने के लिए पुलिस ने 09 अक्टूबर 2024 को अमानक साइलेंसर वाले वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार (IPS Amit Kumar) के निर्देशन में 97 दोपहिया वाहनों की चेकिंग की गई, जिनमें से 20 वाहनों पर अवैध साइलेंसर पाए गए। इन साइलेंसरों को जप्त कर महाराजा सज्जनसिंह चौराहा स्थित चौपाटी पर बुलडोजर से नष्ट कर दिया गया। इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश खाखा, उप पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार रॉय और थाना प्रभारी अनोखीलाल परमार के साथ यातायात पुलिस की टीम शामिल थी। बुलेट वाले युवक को किया ट्रेकगौरतलब है की गरबा पंडाल से लौटते समय एक युवक तेज आवाज वाली बुलेट चला रहा था, जिससे लोग परेशान हो रहे थे। इस घटना का वीडियो पुलिस तक पहुंचा, जिसके बाद एसपी अमित कुमार के निर्देश पर युवक को ट्रैक कर बुलेट को थाने लाया गया। पुलिस ने उसका 1,000 रुपये का चालान काटा और मौके पर मैकेनिक बुलाकर साइलेंसर निकलवाया। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने शहर भर में ऐसे अवैध साइलेंसर के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया, जिसमें कई वाहनों पर जुर्माना लगाया गया और साइलेंसर जप्त कर नष्ट किए गए। कार्रवाई एक नजर में97 वाहनों की चेकिंग: विशेष अभियान के तहत, रतलाम शहर में 97 दोपहिया वाहनों की जांच की गई।20 अवैध साइलेंसर जब्त: जिन वाहनों में फटाकेदार और प्रदूषणकारी साइलेंसर लगे थे, उनके चालकों पर ध्वनि प्रदूषण के आरोप में चालान किया गया।साइलेंसर का नष्टीकरण: चालान के बाद जप्त साइलेंसरों को शहर के प्रमुख स्थल महाराजा सज्जनसिंह चौराहे पर बुलडोजर के माध्यम से नष्ट कर दिया गया। पुलिस की यह कार्रवाई शहर के यातायात को सुगम और ध्वनि प्रदूषण से मुक्त करने के उद्देश्य से की गई थी। अवैध साइलेंसर से निकलने वाली तेज आवाज न केवल ध्वनि प्रदूषण फैलाती है, बल्कि शहर की शांति और लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनती है। पुलिस ने जनता को आगाह किया कि इस तरह के अवैध साइलेंसर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। पुलिस का सख्त रुखपुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि इस तरह के वाहन जो कानून का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि रतलाम के नागरिकों को सुरक्षित और शांतिपूर्ण यातायात मिले।” इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल कानून का पालन कराना नहीं था, बल्कि शहरवासियों को जागरूक करना भी था कि अवैध साइलेंसर ध्वनि प्रदूषण का बड़ा कारण बनते हैं और यह दूसरों की शांति और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। रतलाम पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले साइलेंसर का उपयोग न करें। पुलिस ने यह भी कहा कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और शहर के विभिन्न हिस्सों में नियमित चेकिंग की जाएगी, ताकि यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।

Ratan Tata Died: उद्योग जगत के “रतन” ने कहा अलविदा, मशहूर उद्योगपति रतन टाटा ने86 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

मुंबई – पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| Ratan Tata Died: मशहूर उद्योगपत‍ि रतन टाटा का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बुधवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। कुछ दिनों पहले ही उन्हें तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे आईसीयू में थे। इससे तीन दिन पहले उनके निधन की अफवाहें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं, जिन्हें खुद रतन टाटा ने खारिज करते हुए कहा था कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। रतन टाटा, जो टाटा संस के चेयरमैन थे, का पूरा नाम रतन नवल टाटा था। उनका जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। वे नवल टाटा और सूनी कमिसारीट के पुत्र थे। बचपन में माता-पिता के अलग होने के बाद, उनकी देखभाल उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने की और उन्हें औपचारिक रूप से गोद ले लिया। रतन टाटा की परवरिश उनके सौतेले भाई नोएल टाटा के साथ हुई। रतन टाटा न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि अपने परोपकारी कार्यों के लिए भी विख्यात थे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने अद्भुत ऊंचाइयों को छुआ और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। चाय से लेकर जैगुआर लैंड रोवर तक, नमक बनाने से लेकर हवाई जहाज उड़ाने और होटलों के ग्रुप तक, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में टाटा समूह की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित रतन टाटा का जीवन प्रेरणादायक था। उनकी सोच और उनके निर्णय लेने की क्षमता उन्हें सबसे अलग बनाती थी। उन्होंने एक बार कहा था, “मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता, मैं निर्णय लेता हूं और फिर उन्हें सही साबित करता हूं।” उनका कहना था कि शक्ति और धन उनके लिए प्राथमिकता नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य समाज की भलाई करना था। रतन टाटा का जाना उद्योग जगत और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका योगदान और उनकी विरासत सदैव याद की जाएगी।

Haryana Election: बीजेपी की हरियाणा में जीत के बाद राहुल गांधी के घर भेजी गई जलेबी – राजनीतिक तंज या जीत का जश्न?

हरियाणा पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| Haryana Election: हरियाणा विधानसभा चुनाव (Harayana vidhan sabha election) में तीसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, बीजेपी ने एक दिलचस्प कदम उठाया। पार्टी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित बीकानेरवाला स्वीट्स से कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड पर राहुल गांधी के लिए एक किलो जलेबी भिजवाई। यह कदम न सिर्फ राजनीतिक तंज था, बल्कि पूरे चुनावी प्रचार के दौरान चले जलेबी विवाद का अंतिम जवाब भी था। जलेबी का चुनावी विवादयह सारा मामला तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गोहाना की एक रैली में स्थानीय जलेबी की तारीफ करते हुए उसे ‘सबसे अच्छी’ जलेबी बताया। उन्होंने कहा कि यह जलेबी भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में जानी चाहिए और इस दुकान को फैक्ट्री में बदल देना चाहिए, ताकि हजारों को रोजगार मिल सके। राहुल की इस टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी, और चुनाव के दौरान जलेबी एक हॉट टॉपिक बन गई। (BJP) बीजेपी की राजनीतिक चालचुनाव में कांग्रेस की हार और बीजेपी की जीत के बाद, बीजेपी ने राहुल गांधी की जलेबी टिप्पणी को लेकर तंज कसते हुए उनके घर जलेबी भेजने का फैसला किया। बीजेपी ने अपने ट्विटर हैंडल से इस घटना का जिक्र करते हुए ऑर्डर का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें बीकानेरवाला से ऑर्डर की गई जलेबी की कीमत 609 रुपये बताई गई थी। ट्वीट में पार्टी ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी हरियाणा के समस्त कार्यकर्ताओं की तरफ से राहुल गांधी जी के लिए उनके घर पर जलेबी भिजवा दी है।” जलेबी के जरिए तंजबीजेपी नेताओं ने इस जलेबी विवाद का इस्तेमाल कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधने के लिए किया। यूपी के एक बीजेपी नेता ने चुटकी लेते हुए कहा, “राहुल गांधी को अब जलेबी कड़वी लग रही होगी।” इस तरह, चुनावी रुझानों के बाद भी जलेबी विवाद सुर्खियों में रहा और भाजपा ने इसका उपयोग अपने विपक्षी दल पर कटाक्ष करने के लिए किया। नतीजाबीजेपी की जीत के बाद इस प्रतीकात्मक कदम से यह साफ है कि भारतीय राजनीति में तंज और प्रतीकों का कितना महत्व है। जलेबी, जो आमतौर पर मिठास और खुशी का प्रतीक है, यहां राजनीतिक कटाक्ष का साधन बन गई।

“Ashtami 2024: व्रत, कन्या पूजन के महत्व और शुभ मुहूर्त जानें”

पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| ashtami 2024: हर वर्ष नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जिसमें माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व है, जब कन्या पूजन का आयोजन किया जाता है। (Ashtami)अष्टमी तिथि:इस वर्ष, शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू हो रही है और 12 अक्टूबर को समाप्त होगी। अष्टमी का व्रत 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन अष्टमी तिथि सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी। कन्या पूजन का उत्तम समय:कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस बार अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच रहेगा। व्रत और पूजा का शुभ मुहूर्त:– अष्टमी तिथि: 10 अक्टूबर दोपहर 12:23 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी।– नवमी तिथि: 11 अक्टूबर सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर 12 अक्टूबर भोर 5:12 बजे तक रहेगी।– अष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 11अक्टूबर  का दिन पूजा और हवन के लिए शुभ है। कन्याओं को विदाई:कन्या पूजन के बाद, सभी कन्याओं को विदा करते समय पान, फल, दक्षिणा और लाल चुनरी अर्पित करना न भूलें। यह माता दुर्गा की कृपा का मार्ग प्रशस्त करता है।इस नवरात्रि, श्रद्धालुओं को माता दुर्गा की आराधना में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होने का निमंत्रण है। नवमी तिथि के कारण महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन हो जा रहा उन्होंने कहा कि क्षयवती नवमी तिथि के कारण महाष्टमी और महानवमी एक ही दिन हो जा रहा है। माता दुर्गा का प्राण- प्रतिष्ठा तिथि सप्तमी और मूल नक्षत्र के योग 9 अक्टूबर बुधवार को मध्याह्न मे किया जाएगा। सामान्यतः माता – बहन गोदी भरने का कार्य प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही आरम्भ कर देती है जो नवमी तक चलता है। इस हिसाब से यह कार्य 9 अक्टूबर बुधवार मध्याह्न बेला से 11 अक्टूबर शुक्रवार तक कर सकते है।

Gold Theif: सोने के लिए मशहूर MP के इस शहर में दिवाली से पहले करोड़ों का सोना गायब, फरार हुआ ज्वेलर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Gold Theif: मध्य प्रदेश के रतलाम में दिवाली से पहले सोना कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। रतलाम अपने सोने (Gold) की शुद्धता के लिए देशभर में जाना जाता है। सोना कारोबारियों को करोड़ों रुपए का चूना लगा है। शहर में एक सर्राफा व्यवसायी (Ratlam Bullion Trader) अन्य सर्राफा व्यवसायियों का करीब 4 किलो सोना लेकर फरार हो गया है। पीड़ित सर्राफा व्यवसायियों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सर्राफा व्यवसायियों ने बोहरा बाखल के पास स्थित भाविक ज्वेलर्स के संचालक जीवन पिता राधेश्याम सोनी पर उनका सोना लेकर फरार होने का आरोप लगाया है। व्यवसायियों की शिकायत पर सीएसपी अभिनव वारंगे, माणक चौक थाना प्रभारी सहित पुलिस मौके पर पहुंचे। जहां सर्राफा व्यवसायियों ने पुलिस को बताया कि आरोपी जीवन सोनी (Ratlam Bullion Trader Huge Loss) ने अन्य सर्राफा व्यवसायियों से करीब 4 किलो सोने के आभूषण लिए थे। उसने ये आभूषण बेचने के लिए ले रखे थे, लेकिन वह मंगलवार दोपहर बाद से ही लापता है। करीब 4 किलो सोना लेकर  व्यवसायी फरार पीड़ित व्यवसायियों  का कहना है, “जीवन सोनी दोपहर मंगलवार, 8 अक्टूबर को दोपहर 2 से ढाई बजे के करीब शहर में देखा गया था। उसके बाद से उसका कोई अता-पता नहीं है। व्यवसायियों को शंका तब हुई, जब शाम 6:30 बजे के करीब एक सर्राफा व्यवसायी (Bullion Trader in Ratlam) ने जीवन से संपर्क करने का प्रयास किया। लगातार मोबाइल बंद मिलने पर उसकी तलाशी शुरू की तो कहीं नहीं मिला, जिसके बाद पुलिस से शिकायत की गई है।” दोपहिया वाहन और मोबाइल फोन छोड़कर व्यापारी गायबरतलाम सीएसपी अभिनव वारंगे ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा है, “पुलिस आरोपी व्यापारी जीवन सोनी की तलाश रही है। अभी तक की जांच में उसकी एक्टिवा महू-नीमच फोरलेन पर सागर चौपाल के पास खड़ी मिली है, जबकि उसके मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन घर पर मिली है। घर पर प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि लापता व्यापारी अपना एक्टिवा स्कूटर चौपाल सागर पर खडी करके गायब हुआ है। जीवन सोनी का स्कूटर बरामद कर लिया गया है, जबकि उसके मोबाइल की लोकेशन उसके घर की मिली है। आरोपी के घर पर ताला लगा है। जीवन के बारे में उसकी दुकान में काम करने वाले मुनीम को भी जानकारी नहीं है।”

Navratri Special: इस मंदिर में जिंदा और मुर्दा दोनों जाते है एक रास्ते से, श्मशान में बनते है दाल – बाटी और लड्डू जैसे व्यंजन, मां काली का अनोखा मंदिर

रतलाम – पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Navratri Special: नवरात्रि की धूम पूरे देशभर में है। भक्त मां दुर्गा के नो स्वरूपों की आराधना में जुट गए है। वहीं मध्यप्रदेश के रतलाम में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां जिंदा इंसान के साथ – साथ मुर्दा इंसान भी जाता है। इस मंदिर में जाने से पहले आपको जलती चिताओं के पास से गुजरना होगा। जिसके बाद आप मंदिर में पहुंचकर मां कालिका के दर्शन करेंगे। यह मंदिर रतलाम के महू रोड बस स्टैंड स्थित भक्तन की बावड़ी पर स्थित श्मशान में है। यहां मां काली के रुद्र स्वरूप की प्रतिमा स्थापित है। इसका निर्माण काले पाषाण से किया गया है। मां कालिका की मूर्ति में तेज और प्रताप ऐसा है की आप मंत्रमुग्ध हो जाए। मानो साक्षात देवी आपके सामने प्रकट है। श्मशान में स्थापित इस मंदिर की विशेषता है की यहां आने वाले मुर्दो और जिंदा इंसान दोनों का रास्ता एक है। मुर्दे यानी मृत शरीर की तो यात्रा इस मंदिर में आने के बाद समाप्त हो जाती है, मगर जीवित इंसान यहां दर्शन कर बाहर निकलकर अपनी जीवन यात्रा जारी रखता है। जीवन और मृत्यु चक्र दिखाता मंदिरधर्मशास्त्र के जानकार बताते है की श्मशान में मां कालिका का मंदिर होना जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक है। यह स्थान एक धार्मिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है, जहां जीवन के अंतिम संस्कार के साथ-साथ देवी की पूजा-अर्चना होती है। यह दर्शाता है कि मृत्यु केवल एक अंत नहीं है, बल्कि पुनर्जन्म और आत्मा की यात्रा का हिस्सा है। भक्तों के लिए, यह स्थान आशा और शांति का केंद्र है, जो उन्हें कठिन समय में संजीवनी प्रदान करता है। नवरात्रि में होती है विशेष आराधनारतलाम की मुक्तिधाम धर्मार्थ सेवा समिति के रामसिंह  भाटी, राजेंद्र पुरोहित, संदीप पांचाल, मनोज प्रजापति, संतोष ओगड़, आयुष माली, चेतन गुर्जर आदि भक्तगण सेवा देते है। इस मंदिर में हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान एकम को नहीं बल्कि अमावस्या के दिन अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जो यहां की विशेषता है। दोनों नवरात्रि में यहां विशेष आयोजन होते है। भक्त दूर – दराज से यहां मनोकामना लेकर आते है। दशहरे पर भव्य भंडारे की प्रसादी का आयोजन होता है। प्रसादी में दाल – बाटी व लड्डु जैसे विशेष व्यंजन बनाए जाते है। श्मशान में ही लोग इस भोजन प्रसादी को ग्रहण करते है। नवरात्रि पर यहां विशेष दर्शन व मां के विभिन्न स्वरूपों को दर्शाया जाता है। संत सोनीनाथ महाराज जी द्वारा की स्थापनामंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े भक्त राजेंद्र पुरोहित बताते है की यह मंदिर लगभग 50 साल पुराना है, जिसकी स्थापना गुरु संतश्री 1008 सोनीनाथ जी महाराज ने की थी। सोनीनाथ जी, जो स्व ब्राह्मण थे, ने अपने गुरु के आदेश पर जूते सुधारने का कार्य किया। शहर के रेलवे ग्राउंड के पास वे मोची का कार्य करते थे। वहीं उनकी दिव्यता के कारण भक्तों का जमावड़ा रहता था और दुकानदारी छोड़ सत्संग करते रहते थे। कई बार भक्तों ने उनसे कार्य छोड़कर स्थान पर विराजमान होने की अपील की लेकिन उन्होंने इंकार किया और सही समय व गुरु आज्ञा आने का कहा। जिसके बाद एक दिन उनसे जब निवेदन किया तो उन्होंने अपना काम छोड़कर संत सेवा में आने का आग्रह स्वीकार किया। उन्होंने श्मशान में रुकने की इच्छा जाहिर की तब उजाला ग्रुप के विजेंद्र जायसवाल द्वारा भक्तन बावड़ी में रुकने के लिए प्रबंध किए। महाराज ने सन 2005 में अपना मानव शरीर त्यागा और ब्रह्मलीन हुए। करीब 40 वर्षो से मंदिर समिति द्वारा महाशिवरात्रि पर छड़ी यात्रा का आयोजन किया जाता है। मां कालिका से सीधे करते थे बातसंत सोनीनाथ जी के बारे में कहा जाता है की वे भक्तों की समस्याएँ सुनकर दूर करने की क्षमता रखते थे। उन्होंने कभी चमत्कार जैसा कुछ नहीं आभास कराया लेकिन चमत्कार होता था। उनके पास ऐसी सिध्दि थी जिसके माध्यम से वे भक्तों की पीड़ा को मां कालिका से बताते और समाधान करने का विनय करते। जिसके बाद उनकी समस्याएं दूर हो जाती। भक्तों के अनुसार वे मां कालिका से सीधे जीवंत संपर्क में रहते थे और उनसे बात करते थे। यहां विराजित प्रतिमा में प्राण होने की अनुभूति भी कई भक्तों को होती है। (DISCLAIMER: इस लेख में वर्णित चमत्कारी मंदिर और संबंधित घटनाओं का विवरण भक्तों के अनुभवों और विश्वासों पर आधारित है। इसे किसी धार्मिक या वैज्ञानिक प्रमाण के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव और विश्वास अलग हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि वे अपनी व्यक्तिगत धारणा और निर्णय के आधार पर मंदिरों और उनकी शक्ति के बारे में सोचें। किसी भी धार्मिक स्थान पर जाने से पहले उचित सावधानी बरतें और आवश्यक शोध करें।)

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024: भाजपा का दबदबा बरकरार, विपक्ष की चुनौतियाँ बढ़ीं

हरियाणा पब्लिक वार्ता,न्यूज़ डेस्क| हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के परिणाम घोषित हो गए हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। वर्तमान में भाजपा 45 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 30 से अधिक सीटें जीतने में सफल रही है। अन्य क्षेत्रीय दलों, जैसे इंडियन नेशनल लोक दल (INLD), ने भी कुछ सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा की सफलता: विकास और सुशासन की जीतभाजपा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में विकास और सुशासन के मुद्दों को प्राथमिकता दी। पार्टी ने ग्रामीण विकास, औद्योगिक प्रगति और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों पर जोर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसे युवाओं का समर्थन मिला। इसके प्रभावी संगठन और जमीनी स्तर पर काम ने भाजपा को व्यापक सफलता दिलाई। कांग्रेस और विपक्ष की चुनौतियाँविपक्षी कांग्रेस ने बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को उठाया, लेकिन भाजपा की विकासात्मक नीतियों के खिलाफ प्रभावी रूप से मुकाबला नहीं कर पाई। किसान आंदोलन के बावजूद, कांग्रेस को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। INLD और जेजेपी जैसे क्षेत्रीय दल भी अपनी पूर्व स्थिति को बनाए रखने में असफल रहे। जातीय समीकरण और चुनावी परिणामहरियाणा की राजनीति में जातीय समीकरण महत्वपूर्ण रहे हैं। भाजपा ने गैर-जाट समुदायों के बीच समर्थन जुटाकर अपनी स्थिति को मजबूत किया। हालांकि, विपक्ष ने जाट मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश की, लेकिन भाजपा की रणनीति ने इस प्रयास को विफल कर दिया। राजनीतिक परिदृश्य: भविष्य की संभावनाएँभाजपा की जीत ने यह साबित किया है कि राज्य में विकास और सुशासन की राजनीति महत्वपूर्ण है। विपक्ष को अपनी रणनीति में सुधार की आवश्यकता है। कांग्रेस को अपने नेतृत्व और एकता पर ध्यान केंद्रित करना होगा, जबकि क्षेत्रीय दलों को अपने आधार को मजबूत करने के लिए नए तरीके तलाशने होंगे। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के परिणाम ने भाजपा की मजबूती को स्पष्ट किया है। पार्टी की विकासात्मक नीतियाँ और संगठनात्मक क्षमताएँ उसे फिर से सत्ता में लाने में सफल रही हैं। भविष्य में, हरियाणा की राजनीति में और भी दिलचस्प बदलाव देखने को मिल सकते हैं, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों की दृष्टि से।

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