PM Kisan Yojna: आज आएगी पीएम किसान योजना 18वीं किस्त: लाइव अपडेट

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। PM Kisan Yojna: किसान भाइयों का इंतजार खत्म होने वाला है। पीएम किसान योजना की 18वीं किस्त 5 अक्टूबर 2024 को रिलीज की जाएगी, जिसमें प्रत्येक लाभार्थी के खाते में 2000 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे। पीएम किसान योजना का उद्देश्य यह योजना गरीब किसानों के कल्याण के लिए शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक किसान को साल में कुल 6000 रुपये मिलते हैं, जो तीन किस्तों में बांटे जाते हैं। 18वीं किस्त का वितरण इस बार पीएम मोदी महाराष्ट्र के वाशिम से इस किस्त का वितरण करेंगे। पिछले किस्त का ट्रांसफर 18 जून 2024 को किया गया था, जो पीएम मोदी ने वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में जारी की थी। लाभ पाने की शर्तें किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:– आधार कार्ड का बैंक खाते से लिंक होना।– सक्रिय बैंक खाता।– eKYC का पूरा होना।– भू-सत्यापन की प्रक्रिया का पालन। e-KYC प्रक्रिया 1. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।2. ‘Farmers Corner’ का चयन करें।3. e-KYC विकल्प पर क्लिक करें।4. आधार नंबर दर्ज करें और OTP प्राप्त करें।5. रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करें और सबमिट करें। किस्त की स्थिति चेक करने का तरीका 1. आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाएं।2. ‘Know Your Status’ विकल्प पर क्लिक करें।3. रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें।4. Get OTP पर क्लिक करें और स्टेटस चेक करें। पीएम किसान हेल्पलाइन अगर आपके खाते में पिछले किस्त का पैसा नहीं आया है, तो आप हेल्पलाइन नंबर 155261 या टोल फ्री नंबर 1800115526 पर संपर्क कर सकते हैं।

Shailaja Paik: कौन है शैलजा पाइक:पुणे की झुग्गी से मैकआर्थर ‘जीनियस’ फेलोशिप तक की कहानी!

“यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” – Shailaja Paik पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Shailaja Paik: पुणे के येरवडा की एक छोटी झुग्गी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था, लेकिन शैलजा पाइक की यह असाधारण कहानी हमें बताती है कि सच्ची लगन और दृढ़ निश्चय के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। आज शैलजा पाइक दुनिया भर में दलित अध्ययन की प्रमुख विद्वान के रूप में जानी जाती हैं और हाल ही में उन्हें प्रतिष्ठित मैकआर्थर ‘जीनियस’ अनुदान (MacArthur ‘Genius’ Grant) से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने अपनी असाधारण रचनात्मकता और सामाजिक योगदान के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की क्षमता दिखाई हो। इस फेलोशिप के साथ 8 लाख डॉलर का अनुदान भी दिया जाता है। भारतीय रुपये के हिसाब से ये करीब 6.64 करोड़ है। शैलजा पाइक का सफर बेहद प्रेरणादायक है। येरवडा (Yerawada) की झुग्गियों में पली-बढ़ी शैलजा ने बचपन में ही गरीबी, जातिगत और लैंगिक भेदभाव का सामना किया। उनका परिवार एक छोटे से एक कमरा घर में रहता था, जिसकी छत लकड़ी के खंभों से सहारा पाती थी। उनके पिता देवराम पाइक राज्य कृषि विभाग में काम करते थे, जबकि उनकी मां सरिता पाइक एक गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कठिन थी, लेकिन उनके माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी। शैलजा और उनकी तीन बहनों को पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। शैलजा को पहली बार जातिगत भेदभाव का सामना अपने पैतृक गांव ब्रह्मगांव तकली में करना पड़ा, जहां दलित परिवारों को ऊंची जातियों से अलग रहना पड़ता था और उन्हें सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं थी। यह अनुभव उनके जीवन में एक गहरी छाप छोड़ गया और आगे चलकर उनके शोध का आधार बना। शैलजा ने स्थानीय रोशनी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने हमेशा कक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया। जब उन्होंने 10वीं कक्षा में 98% अंक हासिल किए, तो उनका नाम अखबार में आया और यह उनके स्कूल के लिए भी गर्व का क्षण था। इसके बाद, उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। हालांकि उनका सपना यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का था, लेकिन पिता की मृत्यु के बाद उन्हें अपने परिवार की मदद करने के लिए वह सपना छोड़ना पड़ा। अपने शुरुआती संघर्षों के बावजूद, शैलजा ने अपनी ऊर्जा दलित महिलाओं के अधिकारों और उनके सामाजिक संघर्षों पर केंद्रित की। उन्होंने 2007 में ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वह अमेरिका के येल विश्वविद्यालय और यूनियन कॉलेज में पढ़ाने के बाद सिनसिनाटी विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर बनीं। आज वह दक्षिण एशियाई अध्ययन, महिला अध्ययन, और समाजशास्त्र के साथ ही चार्ल्स फेल्प्स टैफ्ट प्रतिष्ठित शोध प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। शैलजा की पहली पुस्तक, Dalit Women’s Education in Modern India: Double Discrimination (2014), दलित महिलाओं के संघर्ष और शिक्षा की जटिलताओं पर केंद्रित थी। उनकी दूसरी पुस्तक, The Vulgarity of Caste: Dalits, Sexuality, and Humanity in Modern India (2022), जाति, लैंगिकता और मानवीयता के आपसी संबंधों पर आधारित है। इन किताबों के माध्यम से शैलजा ने दिखाया कि कैसे जाति और लैंगिकता भारतीय समाज में अन्याय को बढ़ावा देती हैं। शैलजा की यात्रा का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनका येरवडा से अमेरिका तक का सफर है। एक दलित महिला के रूप में उन्होंने जातिगत और लैंगिक भेदभाव के साथ-साथ रंगभेद का भी सामना किया, लेकिन इन सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। जब उन्हें मैकआर्थर फेलोशिप के लिए चुने जाने की खबर मिली, तो वह अमेरिका में थीं। उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा, “यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। एक दलित महिला और एक रंग की महिला के रूप में मुझे यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व का क्षण है।” शैलजा का मानना है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में केवल दलितों को ही संघर्ष करने की जिम्मेदारी नहीं उठानी चाहिए, बल्कि ऊंची जातियों को भी इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। वह कहती हैं, “जाति के दमन के खिलाफ सिर्फ पीड़ितों को ही नहीं, बल्कि सभी को साथ आकर लड़ना होगा।” शैलजा पाइक की यह यात्रा उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो सामाजिक भेदभाव, गरीबी और अन्याय का सामना कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि शिक्षा, संघर्ष, और समर्पण किसी भी बाधा को पार कर सकता है। शैलजा की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि अगर आप में संघर्ष करने की हिम्मत और सपनों को पाने का जुनून हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

new zealand women vs india women: भारत को न्यूजीलैंड से मिली 58 रनों की करारी शिकस्त, सोफी डिवाइन का दमदार प्रदर्शन

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। new zealand women vs india women: भारतीय महिला टीम ने महिला टी-20 वर्ल्ड कप की बेहद निराशाजनक शुरुआत की। पहले गेंदबाजी और फील्डिंग, फिर बल्लेबाजी में फ्लॉप शो के कारण भारतीय गेंदबाजों ने 160 रन दिए। वहीं न्यूजीलैंड की कप्तान सोफी डिवाइन (Sophie Devine) ने जबरदस्त अर्धशतक लगाते हुए अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और इसके बाद उनकी टीम के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन कर भारत को 58 रनों से हरा दिया। यह मुकाबला शुक्रवार को महिला टी20 विश्व कप (Women T20 World Cup) में खेला गया। दोनों टीमें 14वीं बार टी20 इंटरनेशनल मैच में आमने सामने थीं। पहले बल्लेबाजी का फैसला करते हुए न्यूजीलैंड ने निर्धारित 20 ओवरों में 4 विकेट के नुकसान पर 160 रन बनाए। कप्तान सोफी डिवाइन ने 36 गेंदों में नाबाद 57 रन बनाकर अपनी टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। इसके अलावा, ओपनर्स सूजी बेट्स (27) और जॉर्जिया प्लिमर (34) ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। भारत की ओर से अरुंधति रेड्डी ने 67 रन की साझेदारी को तोड़ते हुए भारत को पहली सफलता दिलाई। हालाँकि, भारतीय गेंदबाजों ने कुछ समय बाद वापसी की, लेकिन डिवाइन की लाजवाब पारी ने न्यूज़ीलैंड को फिनिशिंग टच दिया। 160 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम पूरी तरह से लड़खड़ा गई और 19 ओवरों में मात्र 102 रनों पर ढेर हो गई। कप्तान हरमनप्रीत कौर (15) (Harmanpreet Kaur) भारत की ओर से शीर्ष स्कोरर रहीं। न्यूजीलैंड के गेंदबाजों में रोज़मेरी मैयर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 19 रन देकर 4 विकेट लिए, जबकि ली ताहूहू ने भी 15 रन देकर 3 विकेट झटके। भारतीय बल्लेबाजों ने निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए आसानी से अपने विकेट गंवाए और कोई भी बड़ी साझेदारी नहीं कर पाए, जिससे टीम को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 58 रनों से मिली इस हार के बाद अब भारतीय टीम के सामने सोमवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की चुनौती होगी, जिन्होंने अपना पहले मुकाबले में श्रीलंका को हराया था। (india vs pakistan) स्कोर बोर्डन्यूजीलैंड: 160/4 (20 ओवर) – सोफी डिवाइन 57* (36), जॉर्जिया प्लिमर 34 (22); रेणुका सिंह 2/27 भारत: 102 ऑल आउट (19 ओवर) – हरमनप्रीत कौर 15; रोज़मेरी मैयर 4/19, ली ताहूहू 3/15

Railway Bonus: लाखों रेलवे कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा, 78 दिनों के बोनस की हुई घोषणा

नई दिल्ली – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Railway Bonus: दिवाली से पहले ही भारतीय रेलवे (Indian Railways) के कर्मचारियों की दिवाली मन गई है।  केंद्र सरकार ने रेल कर्मचारियों के उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन को सम्मानित करते हुए 2023-24 के लिए 11,72,240 रेल कर्मचारियों को 2028.57 करोड़ रुपये के उत्पादकता संबद्ध बोनस (पीएलबी) के भुगतान की घोषणा की है। प्रत्येक कर्मचारी को 78 दिनों के बोनस के रूप में यह राशि दी जाएगी, जिससे लाखों रेलकर्मियों को बड़ा फायदा होगा। बेहतर प्रदर्शन के लिए पुरस्कारवित्तीय वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। रेलवे ने 1588 मिलियन टन का रिकॉर्ड कार्गो लदान किया, और लगभग 6.7 बिलियन यात्रियों ने रेलवे के माध्यम से यात्रा की। यह प्रदर्शन सरकार द्वारा रेलवे में किए गए रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे में सुधार, परिचालन दक्षता और बेहतर तकनीकी नवाचारों का परिणाम है। इन श्रेणियों के कर्मचारियों को मिलेगा लाभइस बोनस का भुगतान रेल पथ अनुरक्षक, लोको पायलट, रेलगाड़ी प्रबंधक (गार्ड), स्टेशन मास्टर, पर्यवेक्षक, तकनीशियन, तकनीशियन सहायक, पॉइंट्समैन, मिनिस्ट्रियल स्टाफ और अन्य ग्रुप ‘C’ कर्मचारियों को किया जाएगा। इससे कर्मचारियों में कार्यक्षमता और प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रेरणा बढ़ेगी। प्रोत्साहन से होगा कार्य में सुधाररेल कर्मचारियों को यह बोनस न केवल उनके शानदार कार्य के लिए मान्यता है, बल्कि यह उन्हें भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। पीएलबी का यह भुगतान रेलवे के विकास और उसकी उत्कृष्ट सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस बोनस घोषणा से 11 लाख से अधिक रेल कर्मचारियों को आर्थिक रूप से लाभ होगा और यह उनके परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत साबित होगी।

SSC CGL Answer Key 2024 जारी: आंसर की लिंक ssc.gov.in पर एक्टिव, 6 अक्टूबर तक दर्ज करें आपत्ति

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। SSC CGL Tier-1 Answer Key 2024: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा 2024 की टियर-1 आंसर की जारी कर दी है। जिन उम्मीदवारों ने यह परीक्षा दी थी, वे अब आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाकर उत्तर कुंजी डाउनलोड कर सकते हैं। यह उत्तर कुंजी अभ्यर्थियों को उनके उत्तरों का मिलान करने और संभावित परिणामों का अनुमान लगाने में मदद करेगी। अगर किसी उत्तर से आप सहमत नहीं हैं, तो 6 अक्टूबर 2024 तक आपत्ति दर्ज की जा सकती है। परीक्षा का आयोजन: SSC CGL टियर-1 परीक्षा 9 से 26 सितंबर 2024 तक देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। अब उम्मीदवार SSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उत्तर कुंजी की जांच कर सकते हैं। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि: अगर उम्मीदवारों को उत्तर कुंजी में किसी भी प्रश्न के उत्तर पर संदेह है, तो वे 6 अक्टूबर तक अपनी आपत्ति ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। सही पाई गई आपत्तियों पर पुनर्विचार कर अंक प्रदान किए जाएंगे। अंकों की गणना कैसे करें: परीक्षा में कुल 100 प्रश्न पूछे गए थे, जिनका कुल स्कोर 200 अंकों का है। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 2 अंक दिए जाएंगे और हर गलत उत्तर पर 0.50 अंक की कटौती की जाएगी। सही और गलत उत्तरों की गणना के बाद अभ्यर्थी अपने संभावित अंक जान सकते हैं। SSC CGL आंसर की कैसे डाउनलोड करें1. SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं।2. होमपेज पर उपलब्ध Answer Key लिंक पर क्लिक करें।3. अपनी लॉगिन डिटेल्स (रोल नंबर और पासवर्ड) दर्ज करें।4. उत्तर कुंजी डाउनलोड करें और प्रश्नों के उत्तरों का मिलान करें।

Terrorist Threat : महाकाल मंदिर समेत MP-राजस्थान के स्टेशनों को उड़ाने की धमकी भरा पत्र, लिखा- जिहादियों की मौत का बदला लेंगे!

पत्र मिलने के बाद खुफिया एजेंसिया अलर्ट हो गई हैं। राजस्थान के कई शहरों में सघन चेकिंग भी की जा रही है, राजस्थान, मध्य प्रदेश को खून से रंग देने की साजिश? उज्जैन – पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Terrorist Threat: महाकाल मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी देने वाले ने खुद को जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर बताया है। अज्ञात व्यक्ति ने एक पत्र के माध्यम से राजस्थान के हुनमानगढ़ के रेलवे स्टेशन अधीक्षक को दी है। इसमें उज्जैन (Ujjain) रेलवे स्टेशन, हनुमानगढ़ जंक्शन सहित राज्य के श्रीगंगानगर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, बूंदी, उदयपुर, जयपुर रेलवे स्टेशन सहित राजस्थान के कुछ धार्मिक स्थल को आगामी 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को बम से उड़ाने की धमकी दी है। पत्र मिलने के बाद खुफिया एजेंसिया अलर्ट हो गई हैं। राजस्थान के कई शहरों में सघन चेकिंग भी की जा रही है। हनुमानगढ़ के स्टेशन प्रबंधक ने बताया कि पात्र हमारे यहां मिला था, जिसमें राजस्थान और मध्यप्रदेश को खून से रंगने की बात लिखी थी। साथ ही राजस्थान के कई रेलवे स्टेशन और उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Mandir Ujjain) को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। पत्र जीआरपी को सौंप दिया है। पत्र में जम्मू कश्मीर में जेहादियों की हत्या का बदला लेने के लिए स्टेशनों और मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी लिखी है। रेलवे स्टेशन के अधीक्षक को मिला है पत्रराजस्थान के हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन के अधीक्षक नागेंद्र सिंह को एक पत्र मिला है, जिसमें राजस्थान के कई शहर और रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। मंगलवार को मिले पत्र में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के जम्मू कश्मीर के एरिया कमांडर सलीम अंसारी के नाम से पत्र भेजा गया है। जेहादी की मौत का बदला लेंगेपत्र में लिखा है कि हे खुदा मुझे माफ करना जम्मू कश्मीर में मारे जा रहे हमारे जेहादी की मौत का बदला लेंगे। हम ठीक 30 अक्टूबर को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, अलवर, गंगानगर और हनुमानगढ़, बूंदी उदयपुर सिटी जयपुर मंडल राजस्थान और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ा देंगे। हम ठीक 2 नवंबर को महाकाल उज्जैन शिव मंदिर और जयपुर के कई धार्मिक स्थान, हवाई अड्डा, मिलिट्री कैंप को बम से उड़ा देंगे। एमपी राजस्थान को खून से रंग देंगेपत्र लिखने वाला ने लिखा है कि हम राजस्थान, मध्य प्रदेश को खून से रंग देंगे। इसके बाद लिखा कि खुदा आफिज, (Jaish E Mohmmad) आतंकवादी संगठन, जैश ए मोहम्मद एरिया कमांडर मो. सलीम अंसारी जम्मू कश्मीर, पाकिस्तान जिंदाबाद। हालांकि उज्जैन पुलिस को इस बात की सूचना साझा नहीं की गई है। उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि मीडिया से सूचना हमको मिली है। जानकारी लगने के बाद हम सतर्कता बरत रहे है। राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) से संपर्क कर कार्रवाई करेंगे। 10 साल तक की सजा का प्रावधानतहत सजा हो सकती है। किसी भी तरह की बम की धमकी को, भले ही वह मजाक के रूप में दी गई हो, कानून गंभीर अपराध की श्रेणी में रखता है। ऐसी धमकी से अफरातफरी का माहौल बन सकता है। ऐसे में बम की धमकी देने वाले को 10 साल तक की अलग-अलग धाराओं के कई मायनों में ऐसा लगता है कि आतंकवादी गतिविधियों  से प्रेरित होकर या कोई आतंकी साहित्य पढ़कर ऐसा किया गया है तो पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियां अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेशन एक्ट (UAPA) के तहत भी कार्रवाई कर सकती हैं।

Gandhi Jayanti : विश्व के 20 देशों के नेता एक साथ आकर झुके, PM मोदी हो या राहुल, नहीं कर सकते महात्मा गांधी की आलोचना!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हो या राहुल गांधी, गांधीजी की खुलकर आलोचना करके सत्ता में आने का सपना देखना लगभग असंभव है – प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पब्लिक वार्ता,जयदीप गुर्जर। Gandhi Jayanti Special: महात्मा गांधी, जिनका जीवन सत्य, अहिंसा और शांति के मूल्यों पर आधारित था, आज भी भारतीय राजनीति और समाज में सबसे अधिक प्रिय, प्रशंसित और श्रद्धेय व्यक्ति बने हुए हैं। गांधीजी का आदर्श और उनके सिद्धांत केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आज भी उनका प्रभाव व्यापक रूप से महसूस किया जाता है। प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने हाल ही में अपने सर्वेक्षण के आधार पर गांधीजी के प्रति देश की भावना का सटीक वर्णन किया। उनके अनुसार, चाहे वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या विपक्षी नेता राहुल गांधी, या इस देश का कोई और नेता—गांधीजी की खुलकर आलोचना करके सत्ता में आने का सपना देखना लगभग असंभव है। गांधीजी के प्रति देश का जो सम्मान है, वह किसी भी नेता के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। प्रशांत किशोर के अनुसार हाल ही में संपन्न G20 सम्मेलन (G20 Summit india) में भी हम गांधीजी की अमिट विरासत को महसूस कर सके। विश्व के 20 प्रमुख नेताओं ने राजघाट पर जाकर गांधीजी को नमन किया। यह दृश्य केवल गांधीजी की वैश्विक प्रतिष्ठा और उनके योगदान की गहराई को दर्शाता है। पूरी दुनिया में शायद ही कोई और ऐसा स्थान हो, जहाँ इतने सारे राष्ट्राध्यक्ष एक साथ नमन कर सकें। यह गांधीजी के प्रति वैश्विक आदर और उनकी सार्वभौमिक अपील को प्रमाणित करता है। प्रशांत किशोर ने अपने सर्वेक्षण डेटा के आधार पर यह भी बताया कि गांधीजी आज भी पूरे भारत में सबसे प्रशंसा प्राप्त करने वाले नेता हैं। भारत के हर राज्य में गांधीजी को सबसे अधिक श्रद्धा से देखा जाता है, सिवाय दो राज्यों के—पश्चिम बंगाल, जहाँ सुभाषचंद्र बोस पहले स्थान पर हैं, और पंजाब, जहाँ भगत सिंह सबसे प्रशंसित व्यक्ति हैं। इन दोनों राज्यों में गांधीजी नजदीकी दूसरे स्थान पर हैं, जो इस बात का संकेत है कि भले ही गांधीजी के बाद अन्य महापुरुषों का विशेष स्थान हो, लेकिन गांधीजी की प्रतिष्ठा अपरिवर्तनीय और स्थायी है। गांधीजी के सिद्धांत और उनके जीवन का हर पहलू आज भी भारतीय समाज को प्रेरित करता है। सत्य और अहिंसा के उनके आदर्श न केवल राजनीतिक स्तर पर, बल्कि व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में भी गहराई से निहित हैं। चाहे वह सामाजिक सुधार हो, या पर्यावरण संरक्षण—गांधीजी की शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं। गांधी जयंती हमें याद दिलाती है कि राष्ट्रपिता के आदर्शों और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने से ही हम एक सशक्त और नैतिक समाज का निर्माण कर सकते हैं। गांधीजी की विरासत न केवल भारतीयों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। प्रशांत किशोर कौन है?प्रशांत किशोर एक प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार और चुनाव प्रबंधक हैं, जिन्होंने भारत के कई प्रमुख चुनाव अभियानों को सफलतापूर्वक संचालित किया है। उन्होंने 2014 में नरेंद्र मोदी के लिए सफल अभियान चलाया और इसके बाद बिहार में नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और पंजाब में अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं की चुनावी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज 2 अक्टूबर 2024 को प्रशांत किशोर ने राजनीति में सक्रिय रूप से कदम रखते हुए बिहार में अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी “जन सुराज” (Jan Suraj Party) की घोषणा की। उनकी पार्टी का उद्देश्य राज्य में नई राजनीति की शुरुआत करना है, जिसका फोकस विकास और सुशासन पर होगा। प्रशांत किशोर ने “जन सुराज” नामक एक यात्रा शुरू की थी, जिसके माध्यम से वे जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और राज्य की समस्याओं का समाधान ढूंढने का प्रयास किया। उनकी पार्टी बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक नए विकल्प के रूप में उभर रही है। अब यह “जन सुराज” यात्रा एक नई पार्टी बन गई है। आपको बता दे “जन सुराज” का अर्थ है “जनता का अच्छा शासन” या “जनता के लिए सुशासन”।

Navratri 2024 : कब है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, इस सरल पूजा विधि से करे माता को प्रसन्न!

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि (Navratri 2024) का विशेष महत्व है। यह पर्व 9 दिनों तक चलता है, जिसमें मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर 2024 से शुरू होकर 11 अक्टूबर 2024 को समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। घट स्थापना का महत्व और शुभ मुहूर्त:नवरात्रि के पहले दिन घट या कलश स्थापना की जाती है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। कलश में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मातृगण का निवास होता है, इसलिए इसकी स्थापना से शुभ परिणाम मिलते हैं। पंडित धीरज शर्मा के अनुसार, इस वर्ष कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 3 अक्टूबर को सुबह 6:15 बजे से 7:22 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 6 मिनट है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है, जो सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। पूजन विधि:1. नवरात्रि के लिए एक दिन पहले जौ को पानी में भिगोकर रख दें ताकि वे अंकुरित हो सकें।2. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।3. बालू में पानी डालकर उसमें जौ रखें।4. घट स्थापना के लिए घट में जल, गंगाजल, सिक्का, रोली, हल्दी, दूर्वा और सुपारी डालें।5. घट के ऊपर कलावा बांधकर नारियल रखें और आम के पत्ते घट के मुंह पर लगाएं।6. एक पात्र में स्वच्छ मिट्टी डालकर 7 तरह के अनाज बोएं और उसे चौकी पर रखें।7. धूप और दीप जलाएं, बाएं तरफ धूप और दाहिने तरफ दीपक रखें।8. गणपति, नवग्रहों और माता दुर्गा का आवाहन करें और विधिपूर्वक पूजा करें।9. नवरात्रि के पूरे 9 दिन तक माता का पाठ और आराधना अवश्य करें। घट स्थापना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए इसे किसी जानकार पंडित से मंत्रोच्चारण के साथ करवाना चाहिए।

Maharashtra News: नरभक्षी बेटे ने खाया मां का दिल, दिमाग और लिवर!, हाईकोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक जघन्य अपराध का मामला, आरोपी ने मां के अंगों को काटकर पकाया, खून से सने उसके मुंह देखकर दंग रह गई पुलिस! पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। Maharashtra News: महाराष्ट्र के कोल्हापुर का माकडवाला वसाहत इलाके (Kolhapur) में 35 साल का एक आदमी अपनी 63 वर्षीय मां से शराब पीने के रुपए मांगे। हर मां की तरह वो बुजुर्ग महिला भी उसे शराब पीने से मना कर रही थी। ये बात बेटे को इतनी नागवार गुजरी कि उसने अपनी ही मां की बेरहमी से हत्या कर दी। इस बेरहम नरभक्षी बेटे ने यहीं तक अपनी दरिंदगी नहीं दिखाई। उसका मन नहीं भरा तो उसने धारदार हथियार से अपनी मां के टुकड़े करने शुरू कर दिए। उसके शरीर के अंदरूनी अंग खींच कर बाहर निकाले। यह मामला 2017 का है, जिसमें 7 साल बाद बॉम्बे हाइकोर्ट (Bombay Highcourt) ने आरोपी सुनील कुचकोरवी को मौत की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस’ करार दिया, यह मानते हुए कि आरोपी के सुधारने की कोई संभावना नहीं है। न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा कि यह नरभक्षण का मामला है, क्योंकि आरोपी ने अपनी मां के शरीर के अंगों जैसे दिल, दिमाग, किडनी और लिवर को निकालकर तवे पर पकाकर खाया। इस मामले में 12 लोगों ने गवाही दी, जिसमें रिश्तेदार और पड़ोसी शामिल थे। घटना ने समाज की चेतना को झकझोर दिया है। 28 अगस्त 2017 को, आरोपी सुनील कुचकोरवी ने अपनी 63 वर्षीय मां यल्लामा रामा कुचकोरवी से शराब के लिए पैसे मांगे, लेकिन जब उसने मना किया, तो बेटे ने निर्ममता से उसकी हत्या कर दी और फिर उसके शरीर को नृशंसता से काट डाला। पहले दिमाग, फिर निकाला दिल निकालाआरोपी ने पहले मां का दिमाग निकाला, फिर चाकू से दिल निकाला। इसके बाद एक-एक कर उसका लिवर, किडनी और आंत बाहर कर दी। इसके बाद उसने जो किया, उसे देखकर किसी की भी रूह कांप सकती है।  उसने अपनी मां के दिल, दिमाग, लिवर, किडनी को तवे पर गरम करके नमक-मिर्च के साथ खाना शुरू कर दिया। ये विभत्स दृश्य देख पड़ोसियों का दिल दहल उठा। आनन-फानन में लोगों ने पुलिस को बुलाया। पुलिस पहुंची तो खून से सने उसके मुंह देखकर दंग रह गई। अब तक का सबसे क्रूर कांडजघन्य हत्याकांड की जांच करने वाले पुलिस इंस्पेक्टर एसएस मोरे ने कहा था, “मैंने मुंबई और महाराष्ट्र के नक्सली इलाकों में अपने करियर में कई हत्याएं और शव देखे। लेकिन ये मामला अब तक का सबसे क्रूर था। हमने मृतक महिला के शव और उसके अंगों के सैंपल डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए भेजे थे सभी मृतक से मेल खाते थे। हमारे पास 12 गवाह थे। इसके साथ ही क्राइम सीन और महिला के शरीर की स्थिति आरोपी की क्रूरता को साबित करने के लिए पर्याप्त थी।” मौत की सजा देने की वजहबॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अपराधी सुनील कुचकोरवी के सुधार की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि उसमें नरभक्षण की प्रवृत्ति है। यदी  उसे आजीवन कारावास दिया जाता है, तो वो जेल में भी इस तरह का अपराध कर सकता है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुनील ने 28 अगस्त, 2017 को कोल्हापुर शहर में अपने आवास पर अपनी 63 वर्षीय मां की निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद में उसने अपनी मां के शव को हथियार से काटा और उसके कई अंगों को तवे पर तलकर खा लिया।

सर्व पितृ अमावस्या : श्राद्ध कर्म में किन नियमों का करना होगा पालन और पितरों को प्रसन्न करने के क्या है उपाय?, जानिए…

पब्लिक वार्ता,न्यूज डेस्क। सनातन धर्म में सर्व पितृ अमावस्या (Sarv Pitra Amavasya) का विशेष महत्व है। यह दिन उन पितरों के श्राद्ध के लिए होता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती। साल 2024 में सर्व पितृ अमावस्या 2 अक्टूबर, बुधवार को पड़ेगी। इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन किए गए श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य से पितृ दोष भी समाप्त होता है और पितरों को शांति मिलती है। लेकिन श्राद्ध कर्म के कुछ महत्वपूर्ण नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। आइए जानते हैं गरुड़ पुराण के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं। सर्व पितृ अमावस्या पर क्या करें? 1. काले तिल का प्रयोग: श्राद्ध कर्म में काले तिल का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। तर्पण करते समय और पिंड बनाते समय काले तिल का उपयोग अवश्य करें। मान्यता है कि काले तिल में तीर्थों का जल होता है, जिससे पितर तृप्त होते हैं।  2. ब्राह्मण भोज: इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है। ब्राह्मण भोज पितरों की संतुष्टि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 3. कुश का उपयोग: श्राद्ध करते समय या तर्पण देते समय कुश का उपयोग करें। गरुड़ पुराण के अनुसार, कुश का तर्पण आत्मा को शांति प्रदान करता है। 4. भूखे को भोजन कराएं: इस दिन कोई भूखा व्यक्ति दरवाजे पर आ जाए, तो उसे भोजन जरूर कराएं। पितृ पक्ष में पितर किसी भी रूप में आ सकते हैं। 5. पंचबलि निकालें: ब्राह्मण भोज से पहले पंचबलि निकालने की परंपरा का पालन करें। पंचबलि का अर्थ है 5 प्राणियों—गाय, कुत्ता, कौवा, देवता और चींटियों के लिए भोजन निकालना। 6. गीत का पाठ करें: सर्व पितृ अमावस्या के दिन गीत का पाठ करना बहुत लाभकारी माना जाता है। 7. दान-पुण्य करें: इस दिन धन, वस्त्र, अनाज और काले तिल का दान करने से पितर खुश होते हैं और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पर क्या न करें? 1. रात्रि में भोजन न कराएं: श्राद्ध का भोजन कभी भी रात में न कराएं। यह अशुभ माना जाता है। 2. तामसिक भोजन न करें: इस दिन घर के सदस्यों को तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। 3. मौन व्रत रखें: ब्राह्मण भोज के दौरान मौन रहना चाहिए और बिना अपशब्दों का प्रयोग किए शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना चाहिए। 4. स्टील के बर्तनों का प्रयोग न करें: श्राद्ध का भोजन केले के पत्तों या स्टील के बर्तनों में नहीं परोसना चाहिए। चांदी, तांबे, कांसे के बर्तनों में भोजन परोसें। 5. कर्ज लेकर श्राद्ध न करें: यह ध्यान रखें कि श्राद्ध का आयोजन कर्ज लेकर नहीं करना चाहिए। 6. किसी का अपमान न करें: इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और अपशब्दों से बचना चाहिए।