मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट
नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया। ओपनिंग के दौरान सेंसेक्स में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 500 अंकों से अधिक टूट गया। इस भारी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को तगड़ा झटका लगा है और करीब 17.50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा बाजार कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 3.30 फीसदी यानी 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर खुला, जो करीब 11 महीने का निचला स्तर है। सुबह के सत्र में हल्की रिकवरी के बाद भी सेंसेक्स 80,500 के आसपास ही कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी 533 अंकों की गिरावट के साथ 24,645 के स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर भी पिछले कई महीनों का लोअर लेवल माना जा रहा है। इन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर पर दिखा। खासकर रियल्टी, ऑटो, आईटी, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी रही। टॉप लूजर शेयरों में शामिल रहे: वहीं बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच डिफेंस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे वेस्ट एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल में उछाल, भारत के लिए बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 6% बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5.5% की तेजी के साथ 70 डॉलर के करीब पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल गुजरता है और इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। 17.50 लाख करोड़ का निवेशकों को झटका शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 4.63 लाख करोड़ रुपए था, जो सोमवार को गिरकर 4.45 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी महज कुछ घंटों में निवेशकों के 17.50 लाख करोड़ रुपए डूब गए। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि: फिलहाल बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहने की संभावना है और निवेशकों की नजर अब पूरी तरह मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है।