Chandra Grahan 2026: 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण: समय, सूतक काल और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Chandra Grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे आम तौर पर ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है। यह फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जिस दिन होलिका दहन का पर्व भी मनाया जाएगा। ऐसे में इस ग्रहण का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। वहीं सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले, यानी सुबह 6:20 बजे से प्रभावी माना जाएगा। इस दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते। चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें? (Do’s) ग्रहण काल को आध्यात्मिक दृष्टि से खास माना जाता है। इस समय कुछ सकारात्मक कार्य करना शुभ माना गया है— चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें? (Don’ts) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में कुछ कार्यों से बचना जरूरी बताया गया है— वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 3 मार्च 2026 का यह चंद्र ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। जहां वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक घटना मानते हैं, वहीं धार्मिक मान्यताओं में इसे आध्यात्मिक शुद्धि और सावधानी का समय माना जाता है। इस दिन सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए सकारात्मक कार्यों पर ध्यान देना, मन को शांत रखना और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है। Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक आस्थाओं और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

मिडिल ईस्ट तनाव का बाजार पर बड़ा असर, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा और बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया। ओपनिंग के दौरान सेंसेक्स में 2700 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 500 अंकों से अधिक टूट गया। इस भारी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को तगड़ा झटका लगा है और करीब 17.50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया। 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा बाजार कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स 3.30 फीसदी यानी 2,743.46 अंक गिरकर 78,543.73 पर खुला, जो करीब 11 महीने का निचला स्तर है। सुबह के सत्र में हल्की रिकवरी के बाद भी सेंसेक्स 80,500 के आसपास ही कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी 533 अंकों की गिरावट के साथ 24,645 के स्तर तक लुढ़क गया। यह स्तर भी पिछले कई महीनों का लोअर लेवल माना जा रहा है। इन सेक्टर्स और शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर पर दिखा। खासकर रियल्टी, ऑटो, आईटी, बैंकिंग और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में बिकवाली हावी रही। टॉप लूजर शेयरों में शामिल रहे: वहीं बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच डिफेंस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष से बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है, जिससे पूरे वेस्ट एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर लंबे समय तक वैश्विक बाजारों पर देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल में उछाल, भारत के लिए बढ़ी चिंता मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 6% बढ़कर 77 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 5.5% की तेजी के साथ 70 डॉलर के करीब पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल गुजरता है और इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। 17.50 लाख करोड़ का निवेशकों को झटका शुक्रवार को बीएसई का कुल मार्केट कैप 4.63 लाख करोड़ रुपए था, जो सोमवार को गिरकर 4.45 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। यानी महज कुछ घंटों में निवेशकों के 17.50 लाख करोड़ रुपए डूब गए। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि: फिलहाल बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहने की संभावना है और निवेशकों की नजर अब पूरी तरह मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है।

भारत में जल्द एंट्री करेगा Apple Pay, बड़े बैंकों से तेज बातचीत

Apple Pay India launch update: Apple ICICI, HDFC और Axis Bank से बातचीत में, 2026 के मध्य तक भारत में Apple Pay लॉन्च होने की उम्मीद, UPI और कार्ड पेमेंट दोनों को मिलेगा सपोर्ट। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Apple Pay: क्यूपर्टिनो बेस्ड टेक दिग्गज Apple अब भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस Apple Pay लॉन्च करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी देश के प्रमुख बैंकों के साथ बातचीत कर रही है और 2026 के मध्य तक इसे लॉन्च करने की योजना बना रही है। ICICI, HDFC और Axis बैंक से बातचीत ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Apple भारत में अपनी कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सर्विस लॉन्च करने के लिए ICICI Bank, HDFC Bank और Axis Bank जैसे बड़े वित्तीय संस्थानों से बातचीत कर रही है। इसके अलावा कंपनी कार्ड नेटवर्क कंपनियों के साथ भी चर्चा में है। 2026 के मध्य तक लॉन्च का प्लान इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, Apple भारत के बड़े डिजिटल पेमेंट बाजार और युवा यूजर बेस को ध्यान में रखते हुए 2026 के मध्य तक Apple Pay लॉन्च कर सकती है। पहले इसके इस साल के आखिर तक लॉन्च होने की उम्मीद थी, लेकिन अब टाइमलाइन को पहले खिसकाने की तैयारी है। कार्ड पेमेंट से शुरुआत, बाद में UPI इंटीग्रेशन रिपोर्ट में कहा गया है कि Apple Pay शुरुआत में कॉन्टैक्टलेस कार्ड-बेस्ड पेमेंट को सपोर्ट करेगा। इसके बाद कंपनी धीरे-धीरे National Payments Corporation of India (NPCI) के Unified Payments Interface (UPI) को भी अपने प्लेटफॉर्म में शामिल करेगी। इसका मतलब है कि यूजर्स भविष्य में iPhone के जरिए UPI पेमेंट भी कर सकेंगे, जैसा कि अभी Google Pay और PhonePe में होता है। Visa और Mastercard से भी चल रही बातचीत Apple Pay को भारत में लाने के लिए Apple Visa और Mastercard जैसे ग्लोबल पेमेंट नेटवर्क के साथ भी फीस स्ट्रक्चर और पार्टनरशिप पर चर्चा कर रही है। RBI और रेगुलेटरी मंजूरी का इंतजार भारत में Apple Pay लॉन्च में देरी की सबसे बड़ी वजह रेगुलेटरी अप्रूवल है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को Reserve Bank of India (RBI)और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी का इंतजार है। Google Pay, PhonePe और Amazon Pay से होगा मुकाबला भारत में लॉन्च के बाद Apple Pay का मुकाबला देश के प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म जैसे PhonePe, BHIM UPI, Google Pay और Amazon Pay से होगा। हालांकि Apple अपनी सिक्योरिटी और प्रीमियम यूजर एक्सपीरियंस के दम पर बाजार में अलग पहचान बनाने की कोशिश करेगा। क्या बदलेगा यूजर्स के लिए?

ईरान-इजरायल युद्ध से तेल संकट! क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

डिजिटल डेस्क- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क।  मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल सप्लाई लाइन होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है। कच्चा तेल 110 डॉलर पार जाने का खतरा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। पिछले कुछ हफ्तों में ही तेल कीमतों में तेजी देखी जा चुकी है, जो आने वाले दिनों में बड़े आर्थिक संकट का संकेत है। क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर बदलाव का असर देश पर पड़ता है। हालांकि फिलहाल राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियां छोटे उतार-चढ़ाव का सीधा बोझ आम जनता पर नहीं डालतीं। लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो: यानी सीधे तौर पर आपकी जेब पर असर पड़ने की आशंका बनी रहेगी। भारत का मास्टर प्लान: सप्लाई नहीं होगी बंद इस संभावित संकट से निपटने के लिए भारत ने पहले से ही बैकअप प्लान तैयार कर लिया है: 1. वैकल्पिक समुद्री रास्ते:भारतीय तेल कंपनियां अब सऊदी अरब और यूएई के उन बंदरगाहों का उपयोग करेंगी जो युद्ध प्रभावित क्षेत्र से दूर हैं। 2. नए देशों से तेल खरीद:भारत अब खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी कच्चा तेल खरीदने की रणनीति पर काम कर रहा है। 3. रिफाइनरी की कंटिंजेंसी योजना:देश की रिफाइनरी कंपनियों ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष इमरजेंसी प्लान तैयार किया है, ताकि किसी भी हालत में पेट्रोल-डीजल की कमी न हो। भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो: हालांकि सरकार और तेल कंपनियों की तैयारियों को देखते हुए फिलहाल तत्काल संकट की संभावना कम मानी जा रही है।

गूगल सर्च में दिख रही पर्सनल जानकारी अब मिनटों में हटाएं

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। अगर Google सर्च में आपकी कोई संवेदनशील जानकारी, फोटो या आपत्तिजनक कंटेंट दिख रहा है, तो अब इसे हटाना पहले से कहीं आसान हो गया है। कंपनी ने एक नया टूल जारी किया है, जो यूजर्स को अपनी प्राइवेसी पर ज्यादा कंट्रोल देता है और आपत्तिजनक कंटेंट को रिपोर्ट करने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाता है। कैसे हटाएं गूगल सर्च से अपनी सेंसेटिव जानकारी अब यूजर्स सीधे सर्च रिजल्ट से ही अपनी जानकारी हटाने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए इन आसान स्टेप्स को फॉलो करें: रिक्वेस्ट सबमिट करने के बाद आप इसे “Results About You” सेक्शन में जाकर ट्रैक भी कर सकते हैं। एक साथ कई इमेज हटाने की सुविधा इस नए अपडेट की खास बात यह है कि अब यूजर एक ही रिक्वेस्ट में कई इमेज या लिंक रिपोर्ट कर सकता है। पहले हर लिंक के लिए अलग-अलग आवेदन करना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया तेज और आसान हो गई है। रिक्वेस्ट मंजूर होने के बाद क्या होगा अगर आपकी रिक्वेस्ट मंजूर हो जाती है, तो एक खास फीचर इनेबल किया जा सकता है, जिससे भविष्य में आपके नाम से जुड़ी अन्य संवेदनशील जानकारी भी सर्च रिजल्ट में अपने आप फिल्टर हो जाएगी। यह फीचर खासतौर पर एआई और डीपफेक कंटेंट के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए लाया गया है। भारत सरकार ने भी कड़े किए नियम बढ़ते एआई जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को देखते हुए भारत सरकार ने भी सख्त कदम उठाए हैं। नए नियमों के तहत: ये नियम 20 फरवरी से लागू हो चुके हैं। यूजर्स के लिए क्यों जरूरी है यह अपडेट यह नया फीचर उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जिनकी निजी जानकारी या फोटो बिना अनुमति के इंटरनेट पर मौजूद हैं। अब यूजर्स आसानी से अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रख सकते हैं और ऑनलाइन प्राइवेसी पर ज्यादा नियंत्रण पा सकते हैं।

New Rules: 1 मार्च से बदलेंगे नियम: LPG, ट्रेन टिकट, UPI और सिम बाइंडिंग से आपकी जेब पर असर

1 मार्च 2026 से LPG सिलेंडर, रेलवे टिकट बुकिंग, UPI पेमेंट, सिम बाइंडिंग और बैंक मिनिमम बैलेंस से जुड़े कई नियम बदलने जा रहे हैं, जानिए आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा। नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। New Rules: हर महीने की तरह मार्च 2026 की शुरुआत भी आम लोगों की जेब से जुड़ी कई अहम बदलाव लेकर आ रही है। 1 मार्च से एलपीजी गैस, रेलवे टिकट, डिजिटल पेमेंट, सिम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है, जिसका सीधा असर आपकी मंथली बजट पर पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि 1 मार्च से कौन-कौन से नियम बदलने जा रहे हैं और आपको क्या सावधानी रखनी चाहिए। 1. LPG सिलेंडर के दाम में बदलाव की संभावना हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा होती है। पिछले कुछ महीनों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ही बदलाव देखने को मिला है। 2. रेलवे टिकट बुकिंग का नियम बदलेगा 1 मार्च से ट्रेन टिकट बुकिंग से जुड़ा बड़ा बदलाव लागू हो सकता है। 3. सिम बाइंडिंग का नया नियम लागू डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए सरकार नया सिम बाइंडिंग सिस्टम लागू कर रही है। इस नियम का मकसद फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाना है। 4. UPI पेमेंट में बढ़ेगी सुरक्षा 1 मार्च से बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन और सुरक्षित किए जा रहे हैं। 5. बैंक मिनिमम बैलेंस नियम में बदलाव सरकारी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस के नियमों में राहत दी है। 6. CNG, PNG और ATF की कीमतें भी बदल सकती हैं हर महीने की तरह 1 मार्च को पेट्रोलियम कंपनियां CNG, PNG और ATF के दाम रिवाइज करती हैं।

PM Kisan Samman Nidhi: PM किसान 22वीं किस्त: Farmer ID जरूरी या नहीं? जानिए पूरी जानकारी

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। PM Kisan Samman Nidhi: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को जल्द ही 22वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला है। इस बीच किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस किस्त के लिए Farmer ID बनवाना जरूरी है या नहीं। ताजा जानकारी के मुताबिक, पहले से योजना में रजिस्टर्ड किसानों के लिए Farmer ID अनिवार्य नहीं है। यानी अगर आप पहले से इस योजना का लाभ ले रहे हैं और आपका e-KYC अपडेट है, तो आपकी 22वीं किस्त सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। हालांकि, नई रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों के लिए Farmer ID अनिवार्य कर दी गई है, खासकर उन 14 राज्यों में जहां हाल ही में फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन राज्यों में Farmer ID जरूरी नई रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों को निम्न राज्यों में Farmer ID बनवाना अनिवार्य है: आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश। e-KYC अपडेट अनिवार्य, नहीं तो अटक सकती है किस्त सरकार ने साफ किया है कि सभी लाभार्थियों के लिए e-KYC अपडेट अनिवार्य है। अगर e-KYC पूरा नहीं है, तो 22वीं किस्त मिलने में देरी हो सकती है या भुगतान रुक सकता है। e-KYC अपडेट करने के 3 आसान तरीके 1. ऑनलाइन (Self e-KYC) 2. CSC सेंटर के जरिए 3. बैंक शाखा के जरिए

Flight Ticket Refund: फ्लाइट यात्रियों के लिए बड़ी राहत: अब 48 घंटे में फ्री कैंसिलेशन

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Flight Ticket Refund: हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। देश की नागरिक उड्डयन नियामक संस्था DGCA ने फ्लाइट टिकट रिफंड और संशोधन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब यात्री टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर बिना किसी पेनाल्टी के उसे कैंसिल या मॉडिफाई कर सकेंगे। इन बदलावों का मकसद यात्रियों की शिकायतों को कम करना और एयरलाइन सेवाओं को अधिक “पैसेंजर फ्रेंडली” बनाना है।  48 घंटे का “लुक-इन ऑप्शन” क्या है? नए नियमों के अनुसार: हालांकि यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ लागू होगी: नाम में गलती सुधारना अब फ्री यात्रियों के लिए एक और राहत: रिफंड कितने दिन में मिलेगा? DGCA के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक: मेडिकल इमरजेंसी में भी राहत नए नियमों में मेडिकल इमरजेंसी को भी शामिल किया गया है: क्यों बदले गए नियम? हाल के समय में एयरलाइंस के खिलाफ रिफंड में देरी की शिकायतें तेजी से बढ़ी थीं। इससे पहले IndiGo से जुड़े रिफंड विवादों के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाए थे। भारत बना दुनिया का तेजी से बढ़ता एविएशन मार्केट साल 2025 में भारतीय एयरलाइनों ने 16.69 करोड़ यात्रियों को यात्रा करवाई, जिससे भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल हो गया है। यात्रियों के लिए क्या मतलब? नए नियमों से यात्रियों को ये फायदे मिलेंगे:

1 अप्रैल से SGB नियम बदले, सोने के निवेशकों को बड़ा झटका अब SGB मैच्योरिटी पर लगेगा LTCG टैक्स

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। सोने में निवेश करने वालों के लिए 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बार के बजट में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के टैक्स नियमों में अहम संशोधन किया है। अब सेकेंड्री मार्केट से खरीदे गए SGB पर मैच्योरिटी के बाद मिलने वाला लाभ टैक्स फ्री नहीं रहेगा। अब तक SGB में निवेश करने वालों को मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलती थी, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह छूट केवल चुनिंदा निवेशकों तक सीमित कर दी गई है। किसे मिलेगा टैक्स छूट का फायदा? सीए नितिन कौशिक के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से टैक्स फ्री लाभ केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगा जिन्होंने: ऐसे निवेशकों को 2.5% सालाना ब्याज के साथ मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री मिलेगा। सेकेंड्री मार्केट निवेशकों के लिए झटका जो निवेशक SGB को स्टॉक एक्सचेंज या किसी अन्य व्यक्ति से खरीदते हैं, उन्हें अब: यानी अब सेकेंड्री मार्केट से SGB खरीदना पहले जितना फायदेमंद नहीं रहेगा। उदाहरण से समझें नया नियम मान लीजिए आपने एक्सचेंज से ₹7,000 में एक SGB खरीदा और मैच्योरिटी पर इसकी कीमत ₹11,000 हो गई। पहले यही लाभ पूरी तरह टैक्स फ्री होता था। गिफ्ट या ट्रांसफर करने पर भी खत्म होगा फायदा सीए के अनुसार, अगर SGB एक बार भी स्टॉक एक्सचेंज के जरिए या गिफ्ट के रूप में ट्रांसफर होता है, तो उस पर मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त हो जाएगी। निवेश रणनीति पर क्या पड़ेगा असर? यह बदलाव उन निवेशकों की रणनीति को बड़ा झटका देगा जो: अब यह रणनीति प्रभावी नहीं रहेगी क्योंकि मैच्योरिटी पर टैक्स देना होगा। निवेशकों के लिए सलाह

New Rules: 1 मार्च से WhatsApp पर SIM-बाइंडिंग नियम लागू, बिना SIM नहीं चलेगा ऐप

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। New Rules: देश में 1 मार्च 2026 से मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के तरीके में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के नए नियम के तहत अब WhatsApp, Telegram और Signal जैसे OTT मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को SIM-बाइंडिंग सिस्टम लागू करना अनिवार्य होगा। यानी अब ये ऐप्स केवल उसी मोबाइल फोन में काम करेंगे जिसमें वही असली SIM मौजूद होगा, जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है। क्या है SIM-बाइंडिंग नियम? सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सभी मैसेजिंग ऐप्स को यूज़र के मोबाइल नंबर और SIM के बीच सीधा लिंक स्थापित करना होगा। इससे फर्जी नंबरों, नकली अकाउंट और साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। WhatsApp Web और Telegram Web यूजर्स के लिए नया नियम नए नियम के तहत Web वर्ज़न इस्तेमाल करने वालों को भी बदलाव झेलना पड़ेगा: कंपनियों को करना होगा पालन Meta Platforms (WhatsApp की पेरेंट कंपनी) पहले से इस फीचर पर काम कर रही है। कुछ बीटा वर्ज़न में SIM वेरिफिकेशन की टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है। इसी तरह Telegram और Signal को भी अपने सिस्टम में SIM-चेकिंग फीचर जोड़ना होगा। यूज़र्स को क्यों हो रही परेशानी? नए नियम से कई यूज़र्स की रोजमर्रा की आदतें बदल सकती हैं: सुरक्षा बनाम प्राइवेसी पर बहस सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल फ्रॉड, फेक अकाउंट और साइबर अपराध को रोकने के लिए जरूरी है। इससे अपराधियों की पहचान करना आसान होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी। हालांकि कुछ प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे यूज़र की निजी जानकारी और डिजिटल स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। यूज़र्स क्या करें? 1 मार्च से पहले ये जरूरी तैयारी कर लें: अंतिम बात 1 मार्च 2026 से यह नियम लागू होने के बाद यदि कंपनियाँ इसका पालन नहीं करती हैं तो उन पर जुर्माना या तकनीकी कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार इसे डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन इसका असर सीधे करोड़ों यूज़र्स की रोजमर्रा की डिजिटल जिंदगी पर पड़ेगा।