Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण, इन राशियों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Chandra Grahan 2026: धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा, जिसका प्रभाव कई राशियों पर सकारात्मक तो कुछ पर सावधानी बरतने वाला रहेगा। भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक काल करीब 9 घंटे पहले, यानी सुबह 6:20 बजे से प्रभावी माना जाएगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी माना जा रहा है। इन राशियों के लिए रहेगा शुभ वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के लिए यह ग्रहण लाभकारी संकेत दे रहा है। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और अटका हुआ पैसा मिलने के योग बन रहे हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और व्यापार में पुराने सौदे फाइनल हो सकते हैं। परिवार का माहौल भी बेहतर रहेगा। मिथुन राशि मिथुन राशि वालों को इस ग्रहण से नए संपर्क और नए अवसर मिल सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुलेंगे और आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिवार में खुशखबरी मिलने की संभावना भी बन रही है। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए यह समय सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत दे रहा है। बिजनेस में नई डील या प्रोजेक्ट मिल सकता है और नौकरी में पहचान बढ़ेगी। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। इन राशियों को रहना होगा सावधान सिंह राशि ग्रहण आपकी ही राशि में लग रहा है, इसलिए विशेष सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य संबंधी छोटी परेशानियां, तनाव और काम में जल्दबाजी नुकसान दे सकती है। निर्णय सोच-समझकर लें। कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए खर्च बढ़ने के योग हैं। निवेश और उधार देने में सावधानी रखें। परिवार में किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है। कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए काम में बाधाएं और देरी हो सकती है। गलतफहमी से बचें और शांत रहकर काम करें। मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय मानसिक दबाव बढ़ाने वाला हो सकता है। घर में बुजुर्गों की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचें। ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य और नई शुरुआत नहीं की जाती। ग्रहण के समय मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर सफेद वस्त्र, चावल या चीनी का दान करना अच्छा माना जाता है। डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं की जाती है। अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Holi Date 2026: 2026 में होली की वास्तविक तारीख क्या है?: जानिए सही समय और खास बातें

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Holi Date 2026: हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार होली हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। यह पर्व रंग, उमंग और भाईचारे का प्रतीक है। साल 2026 में होली की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन बनी हुई है, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार रंगों की होली 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को किया जाएगा। कब है होलिका दहन 2026? फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 शाम 5:55 बजे से होगी और यह 3 मार्च 2026 शाम 4:40 बजे तक रहेगी। इस दौरान भद्रा का साया भी रहेगा, जो 2 मार्च शाम 5:55 बजे से 3 मार्च सुबह 5:32 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्य नहीं किए जाते, इसलिए होलिका दहन भद्रा समाप्त होने के बाद ही किया जाएगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त:3 मार्च 2026, शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक इसी समय पूजा और दहन करना शुभ माना गया है। चंद्रग्रहण का भी रहेगा प्रभाव 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है, जोदोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। इसका सूतक काल सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा। ग्रहण के कारण 3 मार्च को रंग खेलने की परंपरा नहीं निभाई जाएगी और अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी। होलाष्टक और रंगभरी एकादशी ऐसे करें होलिका दहन की पूजा होलिका दहन के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शाम को पूजा की थाली तैयार कर दहन स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। पूजन सामग्री में शामिल करें: इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर होलिका दहन करें। होली का महत्व होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने का संदेश देता है। Disclaimer: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में तिथियों और परंपराओं में हल्का अंतर संभव है।

Golu Devta Temple: चितई गोलू देवता मंदिर: चिट्ठी लिखते ही मिलता न्याय, घंटियों से गूंजती आस्था की अद्भुत परंपरा

चितई (अल्मोड़ा/उत्तराखंड)- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Golu Devta Temple: देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड अपने अनोखे धार्मिक स्थलों और मान्यताओं के लिए जानी जाती है। इन्हीं में से एक है चितई गोलू देवता मंदिर, जहां श्रद्धालु न्याय की उम्मीद लेकर चिट्ठियां लिखते हैं और मान्यता है कि यहां की अर्जी खाली नहीं लौटती। न्याय के देवता के रूप में प्रसिद्ध अल्मोड़ा जिले में स्थित यह मंदिर भगवान गोलू देवता को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय लोग “न्याय के देवता” के रूप में पूजते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने और अर्जी लगाने से व्यक्ति को न्याय मिलता है और उसकी मनोकामना पूरी होती है। कहा जाता है कि गोलू देवता भगवान भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं और कुमाऊं क्षेत्र में उन्हें राजा का दर्जा भी प्राप्त है। चिट्ठियों और घंटियों की अनोखी परंपरा इस मंदिर की सबसे खास परंपरा है—चिट्ठी लिखना। श्रद्धालु अपनी समस्या, प्रार्थना या न्याय की मांग को कागज पर लिखकर मंदिर में अर्जी के रूप में चढ़ाते हैं। कई लोग स्टांप पेपर पर भी अपनी अर्जी लिखते हैं। जब मनोकामना पूरी हो जाती है, तो भक्त मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं। यही कारण है कि मंदिर परिसर में हजारों-लाखों घंटियां टंगी दिखाई देती हैं, जो आस्था और विश्वास की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। ऐसी है गोलू देवता की मूर्ति मंदिर में स्थापित गोलू देवता की प्रतिमा सफेद रंग की है और वे घोड़े पर सवार हैं। प्रतिमा में देवता पगड़ी धारण किए हुए हैं और उनके हाथ में धनुष-बाण है, जो न्याय और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु चितई गोलू देवता मंदिर की ख्याति देशभर में फैली हुई है। उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं के साथ न्याय की गुहार लगाते हैं। Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित है। इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक का उपयोग करें।

Toll Plaza: टोल प्लाजा के गंदे टॉयलेट की फोटो भेजें, FASTag में पाएं 1000 रुपये का इनाम

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Toll Plaza: लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टोल प्लाजा पर रुकना आम बात है, लेकिन वहां के गंदे और अस्वच्छ टॉयलेट यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए National Highways Authority of India (NHAI) ने एक नई पहल शुरू की है, जिसका नाम है ‘क्लीन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज’। इस पहल का उद्देश्य हाईवे पर साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर बनाना और यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। क्या है ‘क्लीन टॉयलेट पिक्चर चैलेंज’? इस योजना के तहत यदि कोई यात्री किसी टोल प्लाजा पर गंदा टॉयलेट देखता है, तो वह उसकी फोटो खींचकर शिकायत दर्ज करा सकता है।यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो शिकायतकर्ता को 1,000 रुपये का रिचार्ज सीधे उसके FASTag खाते में दिया जाएगा। कैसे करें शिकायत? शिकायत दर्ज करने के लिए आपको NHAI का आधिकारिक ऐप राजमार्ग यात्रा (Rajmarg Yatra App) डाउनलोड करना होगा। स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस: यह जानकारी शिकायत की जांच और ट्रैकिंग के लिए जरूरी है। शिकायत के बाद क्या होगा? योजना का उद्देश्य इस पहल का मकसद सिर्फ इनाम देना नहीं, बल्कि: कब तक मिलेगी यह सुविधा? यह योजना 30 जून 2026 तक लागू रहेगी।यानी इस तारीख तक आप गंदे टॉयलेट की फोटो भेजकर इनाम पाने का मौका ले सकते हैं। यात्रियों के लिए खास सलाह अगर आप हाईवे पर यात्रा कर रहे हैं और किसी टोल प्लाजा पर गंदगी देखते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें।एक फोटो लेकर शिकायत दर्ज करें और स्वच्छता अभियान में अपना योगदान दें – साथ ही 1000 रुपये का फायदा भी पाएं।

Railway News: 1 मार्च से UTS Ticket Booking App बंद, RailOne बनेगा नया प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Railway News: भारतीय रेलवे ने जनरल टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले UTS Ticket Booking App को 1 मार्च 2026 से बंद करने का फैसला लिया है। अब यात्रियों को जनरल टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट और रिजर्वेशन से जुड़ी सभी सेवाओं के लिए नए सुपर एप RailOne का उपयोग करना होगा। रेलवे के मुताबिक, RailOne एक वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें टिकट बुकिंग के साथ-साथ कई इंटीग्रेटेड सेवाएं एक ही जगह पर मिलेंगी। RailOne ऐप में मिलेंगी ये सभी सुविधाएं नई RailOne एप में यात्रियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सुविधाएं मिलेंगी, जिनमें शामिल हैं— इसके अलावा यात्री IRCTC Rail Connect, NTES, Rail Madad और Food on Track जैसी सेवाओं को भी RailOne के भीतर ही एक्सेस कर सकेंगे। R-Wallet बैलेंस का क्या होगा? रेलवे ने स्पष्ट किया है कि UTS ऐप में मौजूद R-Wallet बैलेंस खत्म नहीं होगा। यात्री उसी लॉगइन आईडी और पासवर्ड से RailOne में लॉगइन करके अपने R-Wallet का बैलेंस उपयोग कर सकेंगे। जनरल टिकट पर मिलेगा 3% डिस्काउंट RailOne ऐप के जरिए जनरल टिकट बुक करने पर यात्रियों को 3% तक का डिस्काउंट दिया जा रहा है। यह ऑफर 14 जुलाई 2026 तक वैध रहेगा। डिस्काउंट पाने के लिए यात्रियों को डिजिटल पेमेंट करना होगा, जैसे— रेलवे का उद्देश्य: एक ही ऐप में सभी सेवाएं भारतीय रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को एक आसान, सुरक्षित और एकीकृत डिजिटल अनुभव देना है, जिससे अलग-अलग ऐप्स की जरूरत खत्म हो और सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकें।

EPFO Rules: तीन साल बाद बंद नहीं होता PF का ब्याज, 58 साल की उम्र तक मिलती रहेगी कमाई – EPFO ने दूर किया भ्रम

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। EPFO Rules: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर लंबे समय से चल रही एक बड़ी गलतफहमी पर EPFO ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। कई लोगों को अब तक यह भ्रम था कि नौकरी छोड़ने के तीन साल बाद PF खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। EPFO के मौजूदा नियमों के अनुसार, नौकरी छोड़ने या बदलने के बाद भी EPF खाते में जमा राशि पर 58 वर्ष की आयु तक ब्याज मिलता रहता है, चाहे खाते में नया योगदान हो या न हो। यानी अगर किसी कर्मचारी ने नौकरी छोड़ दी है और PF की राशि नहीं निकाली है, तो वह पैसा खाली नहीं पड़ा रहता, बल्कि उस पर हर साल घोषित दर से ब्याज जुड़ता रहता है। उदाहरण से समझें नियम अगर कोई कर्मचारी 40 वर्ष की उम्र में नौकरी छोड़ देता है और अपना PF नहीं निकालता, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। उसका EPF खाता अगले 18 वर्षों तक यानी 58 साल की उम्र तक ब्याज कमाता रहेगा। यह नियम सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होता है। 58 साल के बाद क्या होता है? EPFO के नियमों के मुताबिक, जैसे ही PF धारक की उम्र 58 वर्ष पूरी होती है, उसका EPF खाता ‘इनऑपरेटिव अकाउंट’ की श्रेणी में चला जाता है। इसके बाद उस खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। इसलिए EPFO सलाह देता है कि 58 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद PF की राशि निकाल लेना ही बेहतर होता है। 58 साल तक नौकरी करने वालों के लिए अलग नियम जो कर्मचारी 58 वर्ष की आयु तक लगातार नौकरी में बने रहते हैं और रिटायर होते हैं, उनके लिए नियम थोड़ा अलग है। ऐसे कर्मचारियों के EPF खाते पर रिटायरमेंट के बाद अगले 3 साल यानी 61 वर्ष की आयु तक ब्याज मिलता रहता है। हालांकि 61 साल पूरे होते ही यह खाता भी इनऑपरेटिव हो जाता है। तीन साल वाला नियम क्यों बना भ्रम? पहले यह नियम था कि अगर EPF खाते में लगातार तीन साल तक कोई योगदान नहीं होता, तो उसे इनऑपरेटिव मान लिया जाता था। इसी वजह से यह गलतफहमी फैल गई कि तीन साल बाद ब्याज मिलना बंद हो जाता है। लेकिन EPFO ने इस नियम में बदलाव कर दिया है और अब इनऑपरेटिव खातों पर भी 58 साल की उम्र तक ब्याज दिया जाता है। क्या करना समझदारी है? अगर कोई कर्मचारी लंबे समय तक नौकरी में नहीं है और आगे योगदान की संभावना नहीं है, तो वह PF राशि को नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर कर सकता है या नियमों के अनुसार निकाल सकता है। हालांकि, हड़बड़ी में PF निकालने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 58 साल तक उस पर ब्याज मिलता रहेगा।

Budget 2026 Sasta-Mehnga: कपड़े, जूते से दवाओं तक सस्ताई, जानिए क्या होगा महंगा

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। Budget 2026 Sasta-Mehnga: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में आम बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश किया। यह उनके कार्यकाल का लगातार 9वां बजट रहा। बजट भाषण में उन्होंने कई बड़े ऐलान किए, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। सरकार ने कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी घटाने की घोषणा की है, जिससे रोजमर्रा की कई चीजें सस्ती होंगी, वहीं कुछ सेक्टर्स में महंगाई भी बढ़ सकती है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार उन वस्तुओं पर ड्यूटी कम कर रही है, जो भारत में निर्मित होती हैं या जिनका देश में उत्पादन बढ़ाया जाना है। खासतौर पर लेदर, टेक्सटाइल, डिफेंस और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। Budget 2026 में ये सामान होंगे सस्ते बजट के ऐलान के बाद निम्नलिखित वस्तुओं की कीमतों में राहत मिलने की संभावना है— सरकार ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात होने वाली वस्तुओं पर टैरिफ दर 20% से घटाकर 10% कर दी है, जिससे कई आयातित सामान सस्ते होंगे। मोबाइल, जूते और पढ़ाई पर मिलेगी राहत कच्चे चमड़े और इससे जुड़े उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी घटने से जूते, बेल्ट और बैग सस्ते हो सकते हैं। वहीं मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स जैसे बैटरियों के सस्ते होने से मोबाइल फोन की कीमतों में भी गिरावट आ सकती है। बजट में विदेश में पढ़ाई करने वालों को भी बड़ी राहत दी गई है। टीसीएस (TCS) की दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है, जिससे विदेश में पढ़ाई करना सस्ता होगा। इसके अलावा स्पोर्ट्स से जुड़े उपकरणों पर भी कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। इन सेक्टर्स में बढ़ सकती है महंगाई जहां एक ओर कई चीजें सस्ती होंगी, वहीं कुछ वस्तुएं महंगी भी हो सकती हैं। कस्टम ड्यूटी बढ़ने से इन सेक्टर्स में असर दिखेगा— इन उत्पादों की कीमतों में आने वाले समय में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर क्या कहता है बजट 2026? बजट 2026 में सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थ, ग्रीन एनर्जी और एजुकेशन को प्राथमिकता दी है। आम लोगों के लिए कई जरूरी चीजों को सस्ता करने का प्रयास किया गया है, जबकि कुछ सेक्टर्स में टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है।

UGC के नए नियमों पर बवाल: जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बने कानून का क्यों हो रहा विरोध, जानें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। UGC New Rules: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा 2026 में लागू किए गए नए नियम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विरोध शुरू हो गया है। जहां एक ओर इन नियमों को जातिगत भेदभाव रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जनरल कैटेगरी के छात्र और संगठन इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दे रहे हैं। क्या हैं UGC के नए नियम? UGC के नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कमेटी SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी जातिगत भेदभाव की शिकायतों को सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी।कमेटी में SC-ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य कैंपस में समानता का माहौल बनाना और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है। UGC को ये नियम क्यों लाने पड़े? ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लाए गए हैं। वर्ष 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UGC को 2012 के पुराने नियमों को अपडेट कर सख्त और प्रभावी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे।कोर्ट ने कहा था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत उत्पीड़न रोकने के लिए केवल दिशानिर्देश नहीं, बल्कि ठोस निगरानी तंत्र जरूरी है। किस रिपोर्ट के आधार पर बने नए नियम? UGC ने सुप्रीम कोर्ट और संसदीय समिति के सामने जो रिपोर्ट पेश की, उसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।रिपोर्ट के अनुसार— हालांकि 90% से अधिक मामलों का निपटारा किया गया, लेकिन पेंडिंग मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी। वर्ष 2019-20 में जहां 18 मामले लंबित थे, वहीं 2023-24 में यह संख्या 108 तक पहुंच गई। नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा क्या है? UGC के नए नियमों में जातिगत भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या अपमानजनक व्यवहार, जो उनकी गरिमा या शिक्षा में समानता को प्रभावित करे, उसे भेदभाव माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। विरोध और हंगामे की वजह क्या है? नए नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी (सवर्ण) छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि नियमों में केवल SC, ST और OBC छात्रों के भेदभाव की बात की गई है, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों को संरक्षण से बाहर रखा गया है।विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतें की जा सकती हैं, जिससे कैंपस में तनाव बढ़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है, जिसमें इसे UGC एक्ट और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया है। कुल मिलाकर क्या है पूरा मामला? UGC ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अपने आंकड़ों के आधार पर नए नियम लागू किए हैं, जिनका मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है।लेकिन दूसरी ओर, जनरल कैटेगरी के छात्रों को आशंका है कि ये नियम एकतरफा हैं और उनके खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं।यही वजह है कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इसे लेकर विरोध, प्रदर्शन और बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है।

UGC के नए नियमों पर बवाल: जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बने कानून का क्यों हो रहा विरोध, जानें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। UGC New Rules: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) द्वारा 2026 में लागू किए गए नए नियम Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को लेकर देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विरोध शुरू हो गया है। जहां एक ओर इन नियमों को जातिगत भेदभाव रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जनरल कैटेगरी के छात्र और संगठन इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दे रहे हैं। क्या हैं UGC के नए नियम? UGC के नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कमेटी SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी जातिगत भेदभाव की शिकायतों को सुनेगी और तय समय में उनका निपटारा करेगी।कमेटी में SC-ST, OBC, महिलाएं और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य कैंपस में समानता का माहौल बनाना और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है। UGC को ये नियम क्यों लाने पड़े? ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लाए गए हैं। वर्ष 2025 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने UGC को 2012 के पुराने नियमों को अपडेट कर सख्त और प्रभावी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे।कोर्ट ने कहा था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत उत्पीड़न रोकने के लिए केवल दिशानिर्देश नहीं, बल्कि ठोस निगरानी तंत्र जरूरी है। किस रिपोर्ट के आधार पर बने नए नियम? UGC ने सुप्रीम कोर्ट और संसदीय समिति के सामने जो रिपोर्ट पेश की, उसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।रिपोर्ट के अनुसार— हालांकि 90% से अधिक मामलों का निपटारा किया गया, लेकिन पेंडिंग मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी। वर्ष 2019-20 में जहां 18 मामले लंबित थे, वहीं 2023-24 में यह संख्या 108 तक पहुंच गई। नए नियमों में भेदभाव की परिभाषा क्या है? UGC के नए नियमों में जातिगत भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या अपमानजनक व्यवहार, जो उनकी गरिमा या शिक्षा में समानता को प्रभावित करे, उसे भेदभाव माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। विरोध और हंगामे की वजह क्या है? नए नियमों के खिलाफ जनरल कैटेगरी (सवर्ण) छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि नियमों में केवल SC, ST और OBC छात्रों के भेदभाव की बात की गई है, जबकि जनरल कैटेगरी के छात्रों को संरक्षण से बाहर रखा गया है।विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायतें की जा सकती हैं, जिससे कैंपस में तनाव बढ़ेगा। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है, जिसमें इसे UGC एक्ट और समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया है। कुल मिलाकर क्या है पूरा मामला? UGC ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और अपने आंकड़ों के आधार पर नए नियम लागू किए हैं, जिनका मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है।लेकिन दूसरी ओर, जनरल कैटेगरी के छात्रों को आशंका है कि ये नियम एकतरफा हैं और उनके खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं।यही वजह है कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इसे लेकर विरोध, प्रदर्शन और बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है।

CBSE Board Exam 2026: 10वीं-12वीं की परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव, देखें नई संशोधित डेटशीट

नई दिल्ली- पब्लिक वार्ता, न्यूज़ डेस्क। CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बोर्ड परीक्षा 2026 को लेकर छात्रों के लिए एक अहम अपडेट जारी किया है। सीबीएसई ने कक्षा 10वीं और 12वीं की कुछ परीक्षाओं की तिथियों में बदलाव किया है। इस संबंध में बोर्ड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर नोटिफिकेशन जारी किया है। सीबीएसई के अनुसार, जो परीक्षाएं पहले 3 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली थीं, उनकी तारीखों में प्रशासनिक कारणों से संशोधन किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के तहत कक्षा 10वीं की परीक्षा अब 11 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षा 10 अप्रैल 2026 को कराई जाएगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन विषयों के अलावा बाकी सभी परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगी। बोर्ड ने सभी स्कूलों से अपील की है कि इस सूचना को समय रहते छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाएं, ताकि किसी भी तरह की असमंजस की स्थिति न बने। सीबीएसई ने यह भी बताया कि संशोधित डेटशीट जल्द ही जारी की जाएगी, और नई परीक्षा तिथियां छात्रों के एडमिट कार्ड में भी दर्ज होंगी। एक ही पाली में होंगी परीक्षाएं सीबीएसई की ओर से जारी अंतिम डेटशीट के अनुसार, कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं एक ही पाली में आयोजित की जाएंगी। अधिकांश विषयों की परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक होंगी। वहीं, कुछ विशेष विषयों की परीक्षा अवधि में आंशिक बदलाव किया गया है, जिनकी परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक संपन्न होंगी। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने संबंधित विषय की परीक्षा तिथि, समय और अवधि की जानकारी आधिकारिक डेटशीट और एडमिट कार्ड से अवश्य जांच लें। सीबीएसई से जुड़े सभी ताजा अपडेट के लिए छात्र नियमित रूप से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।